समपरासरी विलयन , अल्प परासरी और अति परासरी विलयन (isotonic solution hypertonic solution hypotonic solution)

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(isotonic solution hypertonic solution hypotonic solution) समपरासरी विलयन , अल्प परासरी और अति परासरी विलयन : पहले हम बात करेंगे की विलयन की परिभाषा क्या होती है , और उसके बाद परासरण दाब क्या होता है , इसके बाद परासरण दाब के आधार पर विलयन के प्रकार के बारे में अध्ययन करेंगे जो हमारा यह टॉपिक है।
विलयन : जब दो या दो से अधिक समांगी पदार्थ मिश्रित होते है तो विलयन बनता है अर्थात दो या दो से अधिक पदार्थो के समांगी मिश्रण को विलयन कहा जाता है।
विलयन में एक पदार्थ विलेय कहलाता है और दूसरा विलायक , विलयन में जो पदार्थ कम मात्रा में होता है उस पदार्थ को विलेय पदार्थ कहते है और जो पदार्थ अधिक मात्रा में उपस्थित रहता है उस पदार्थ को विलायक कहते है।
जैसे : जब किसी पानी में नमक घोला जाता है तो , नमक बहुत कम मात्रा में उपस्थित रहता है इसलिए नमक को विलेय कहते है और पानी अधिक मात्रा में है इसलिए पानी को विलायक कहते है ,अर्थात विलेय घुलता है जबकि विलायक घोलता है।
परासरण दाब : जब दो भिन्न सांद्रता वाले विलयनों के मध्य अर्द्ध पारगम्य झिल्ली लगायी जाए तो विलायक के अणु कम सांद्रता वाले विलयन से अधिक सांद्रता वाले विलयन की तरफ गति करते है , विलायक के अणुओं की इस गति को रोकने के लिए आरोपित आवश्यक दाब के मान को परासरण दाब कहते है।
परासरण दाब के आधार पर विलयन के प्रकार –
1. सम परासरी विलयन
2. अल्पपरासरी विलयन
3. अतिपरासरी विलयन

1. सम परासरी विलयन

जब दोनों विलयनों की सांद्रता का मान समान हो तो दोनों विलयन के लिए परासरण दाब का मान भी बराबर होगा अत: वे विलयन जिनके लिए परासरण दाब का मान समान होता है उन्हें समपरासरी विलयन कहते है।
माना दो विलयन है , पहले विलयन की सांद्रता C1 और दूसरे विलयन की सांद्रता C2 है और यदि ये दोनों विलयन समपरासरी विलयन है तो
C1  = C2
साथ ही दोनों विलयन का परासरण दाब का मान भी समान होगा।

2. अल्पपरासरी विलयन

जिस विलयन का परासरण दाब का मान अपेक्षाकृत कम होता है उस विलयन को अल्प परासरी विलयन कहते है।

3. अतिपरासरी विलयन

जिस विलयन का परासरण दाब का मान अपेक्षाकृत अधिक होता है ऐसे विलयन को अति परासरी विलयन कहते है।
अर्थात अल्पपरासरी विलयन का परासरण दाब निम्न होता है जबकि अतिपरासरी विलयन का परासरण दाब उच्च या अधिक होता है।
चूँकि अल्प परासरी तथा अति परासरी विलयन में परासरण दाब में अंतर है तो इनकी सांद्रता में भी अंतर होगा अत: इन दोनों प्रकार के विलयन में परासरण होता है अर्थात इन दोनों प्रकार के विलयन में विलायक के अणु कम सांद्रता वाले विलयन से अधिक सांद्रता वाले विलयन की तरफ गति करेंगे।
लेकिन सम परासरी विलयन में , दोनों विलयनों की सान्द्रता समान होती है इसलिए ऐसे विलयन में परासरण की घटना घटित नहीं होती है।