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Informosomes in hindi , इनफॉरर्मोसोम्स किसे कहते हैं
जानिये Informosomes in hindi , इनफॉरर्मोसोम्स किसे कहते हैं ?
m आरएनए की संरचना (Structure of m RNA )
एक m आरएनए नॉन कोडिंग जीनों इन्ट्रॉन के हटने के बाद बनता है। एक m आरएनए की संरचना में प्रमुख भाग उपस्थित रहते हैं।
- मिथाइलेट G – केप
- लीडर (अग्रग क्षेत्र – नान कोडिंग )
- प्रारम्भन कोडोन
- कोडित क्षेत्र
5 अन्तस्थ कोडोन
- ट्रेलर ( अनुगामी क्षेत्र – नान कोडिंग )
- पॉली A पुच्छ
यह सभी भाग m-आरएनए में 5′ सिरे से 3′ सिरे पर क्रमानुसार उपस्थित रहते हैं।
इसमें एक लम्बा कोडिंग जोन उपस्थित रहता है जिसे 5′ सिरे पर प्रारम्भ कोडोन (AUG अथवा GUG) एवं 3′ सिरे की ओर अन्तस्थ कोडोन (UAA, UAG अथवा UGA) उपस्थित रहते हैं। प्रारम्भ कोडोन से 100 क्षारक लम्बा पूर्व लेडर अग्रग (Leader) 5′ सिरे की ओर व अन्तस्थ स्थल के आगे की ओर ट्रेलर अनुगामी क्षेत्र ( trailer region) स्थित रहता है। लीडर मिथाइलेट G-फे 5′ सिरे की ओर व ट्रेलर 3′ सिरे पर पॉली A पुच्छ द्वारा घिरी रहती है।
लीडर व ट्रेलर क्षेत्र m-आरएनए के नॉन कोडिंग क्षेत्र होते हैं। इस प्रकार m-आरएनए की संरचना मिथाइलेटड केप से लेकर पॉलि A पुच्छ तक होती है।
m-आरएनए पर 5′ सिरे पर उपस्थित कैंप इसके जल अपघटन (hydrolytic enzymes) द्वारा नष्ट होने से बचाती है। यह राइबोजोमस उपइकाई के जुड़ने का भी स्थल चिन्हित करता है । पुच्छ A भी m-आरएनए के विघटन से सुरक्षित रखता है तथा राइबोसोम को जोड़ने में सहायक है। यह m- आरएनए को न्यूक्लियस से बाहर लाने में भी सहायक है।
यूकेरियोटिक में m – आरएनए पर अंकित सूचना द्वारा एकमात्र पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला निर्मित होती है। इसमें अनुलेखन एक सिस्ट्रॉन जीन द्वारा होता है जिसमें एक आरम्भन स्थल व अन्तस्थ स्थल उपस्थित रहते हैं अतः यह मोनो सिस्ट्रोनिक ( एक m-आरएनए एक पॉली पेप्टाइड श्रृंखला → एक अमीनो अम्ल) होता है। इसके विपरीत प्रोकेरियोटिक में यह पॉलीसिस्ट्रोनिक होता है अर्थात् एक अनुलेखन द्वारा अनेक पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला अनेक अमीनो अम्ल संश्लेषित होते हैं। इसमें अनेक जीन भाग लेते हैं जिसके प्रारम्भन व अन्तस्थल भी उपस्थित रहते हैं।
m-आरएनए के अणु विषम प्रकार के होते हैं तथा आगे निम्न प्रकार से वर्गीकृत किए गए हैं।
(i) मोनोसिस्ट्रॉनिक एम-आरएनए (Monocistronic m-RNA)
यह एमआरएनए के केवल एक सिस्ट्रॉन युक्त होते हैं अतः केवल एक प्रकार का प्रोटीन निर्मित करते हैं। यूकेरियोटिक जीवों में मोनोसिस्ट्रानिक m-आरएनए मिलता है।
(ii) पॉलीसिस्ट्रॉनिक एम-आरएनए (Polycistronic m-RNA)
इस प्रकार के एम–आरएनए एक से अधिक प्रोटीन श्रृंखला निर्मित करते हैं। यह अपनी अत्यधिक लम्बाई के कारण एक से अधिक सिस्ट्रॉन युक्त होते हैं। इस प्रकार के एम-आरएनए पॉलीजेनिक एम-आरएनए भी कहलाते है। प्रोकेरियोटिक m – आरएनए पॉलीसिस्ट्रॉनिक होता है।
एम-आरएनए अपेक्षाकृत अस्थायी होते हैं। यह प्रोटीन के साथ एक समूह राइबोन्यूक्लिओप्रोटीन बनाते हैं। 1965 में स्पिरिन (Spirin) ने इनका नाम इन्फार्मोसोम रखा। यह अपेक्षाकृत स्थायी स्वरूप हैं। m-RNA का जैवसंश्लेषण (Biosynthesis of m-RNA)
DNA के दो सूत्रों में से एक के उपयोग से m – आरएनए संश्लेषित की जा सकती है। संश्लेषण 5 सिरे से 3′ सिरे की ओर होता है। सरंचनात्मक जीन या डीएनए सिस्ट्रॉन (DNA cistron) के प्रारम्भ स्थल (initiation site) या वर्धक (promoter) सिरे पर आरएनए पॉलीमरेज (RNA Polymerase) एन्जाइम सलंग्न होकर आरएनए संश्लेषण को उत्प्रेरित ( catalyze) करता है। डीएनए से m – RNA की संश्लेषण प्रक्रिया अनुलेखन (transcription) कहलाती है।
यूकेरिओटिक कोशिकाओं में केन्द्रक के अन्दर m – RNA का संश्लेषण विषमांग केन्द्रकीय आरएनए (heterogeneous nuclear RNA) या Hn- आरएनए की तरह होता है। ये अणु m-RNA के अणुओं से काफी बड़े होते हैं। Hn- आरएनए के 3′ सिरे पर पॉलीएडीलिक अम्ल (Polyadeylic acid of Poly A) के लगभग 200 न्यूक्लियोटाइड जुड़ जाते हैं। तुरन्त ही इस Hn- आरएनए का 5′ सिरा विघटित होकर Poly A(+) m-आरएनए मुक्त करता है। ये Poly A (+) m-आरएनए अणु कोशिकाद्रव्य में विसरित ( diffuse) हो जाते हैं।
m-RNA का जीवनकाल (Life span of m – RNA )
प्रोकेरिओटिक कोशिका में m – RNA का जीवन अन्यन्त छोटा होता है, जीवाणु में इनका काल लगभग 2 मिनट का होता है। यूकेरिओटिक कोशिकाओं में m-RNA का जीवनकाल अपेक्षाकृत बहुत अधिक लम्बा होता है। इनमें m-RNA अधिक स्थाई तथा कई घण्टों या दिनों तक कार्य कर सकते हैं।
इनफॉरर्मोसोम्स (Informosomes)
यूकेरिओटिक जीवों (Eukaryotes) में m-RNA प्रोटीन के साथ संबद्ध होकर राइबोन्यूक्लियो प्रोटीन कॉम्पलेक्स (Ribonucleo protein complex) बनाती है। इनमें से कुछ कॉम्पलेक्स कोशिकाद्रव्य में ‘स्वतन्त्र अवस्था में रहते हैं तथा वह पॉलीराइबोसोम से जुड़े नहीं रहते हैं। स्पिरिन (Sprin) ने इनको इनफॉर्मोसोम्स (Informosomes) नाम दिया। ये अत्यधिक स्थाई (stable) होते हैं तथा कोशिकाद्रव्य में कई दिनों तक रह सकते हैं। संभवतः इस m-RNA का स्थायित्व (stability) इनके चारों ओर मिलने वाले प्रोटीन आवरण के कारण होती है। इनफार्मोसोम्स (informosomes) में प्रोटीन तथा m-RNA का अनुपात 4 : 1 होता है। ये 80 S या इससे कम अवसादन गुणांक के कण होते हैं।
इनर्फोर्मोसोम्स अत्यधिक स्थाई होते हैं इस कारण कोशिका में प्रोटीन संश्लेषण में इनका उपयोग तभी किया जाता है जब अनुवाद (translation) में अधिक समय लगता है। भ्रूण कोशिकाओं (embroyonic cells) में अंग विकास (organogenesis) में भाग लेने वाले जनन उपकरण (genetic apparatus) काफी विलम्ब से कार्य करना शुरू करता है। अतः विदलन (cleavage) की प्रारम्भिक अवस्था में, जब – RNA नहीं होता उस सयम इनफॉर्मोसोम्स (informosomes) प्रोटीन संश्लेषण की क्रिया का नियमन करते हैं।
संदेशवाहक आरएनए का संश्लेषण केन्द्रक में डीएनए के पूरक सूत्र (complementary strand) के रूप में होता है। यह गुणसूत्रीय डीएनए (chromosomal DNA) से प्रोटीन संश्लेषण के लिए आवश्यक संदेश का संचरण कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) में करती है। इस तरह m-RNA आनुवंशिक सूचनाओं (genetic informations) की वाहक ( messenger ) है। अतः जैकब तथा मोनड (Jacob and Monod, 1961) ने इसका नाम संदेशवाहक आरएनए (messenger RNA ) रखा । कोशिका में पाए जाने वाले आरएनए का लगभग 10% भाग m- RNA होता है। इसमें निम्नलिखित विशेषताएँ पाई जाती हैं-
(i) इसका निर्माण द्विसूत्रीय डीएनए के किसी एक सूत्र के पूरक सूत्र (complementary strand) की तरह होता है।
(ii) इसमें क्षारकों का व्यवस्थापन क्रम मूल डीएनए की तरह ही होता है। इसमें डीएनए के थाइमीन (Thymine) के स्थान पर यूरेसिल (Uracil) पाया जाता है। इस तरह संश्लेषित m-RNA में वही सूचना निहित होती है जो कि इसके जनक मूल डीएनए टेम्पलेट में होती है।
(iii) संश्लेषण के तुरन्त बाद m – RNA केन्द्रक से बाहर कोशिका द्रव्य में स्थानान्तरित हो जाती है जहाँ ये कुछ निश्चित राइबोसोम पर एकत्रित हो जाती है व यहाँ – RNA प्रोटीन संश्लेषण के लिए टेम्पलेट का कार्य करती है।
(iv) इसका जीवन काल छोटा होता है तथा ये कुछ अनुवादन (translations) के उपरान्त नष्ट होती है। इसलिए m – RNA संलेषण तीव्र गति से होता है।
(v) कुल क्षारक (base) लगभग समान होते हैं किन्तु इनका व्यवस्थापन क्रम भिन्न होता है। (vi) इनका अणुभार 5,00,000 से 20,00,000 तक होता है।
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