प्रशांत महासागर की गहराई कितनी है , प्रशान्त महासागर की लंबाई कितनी है कहाँ है how deep is the pacific ocean in hindi

By   June 13, 2021

how deep is the pacific ocean in hindi प्रशांत महासागर की गहराई कितनी है , प्रशान्त महासागर की लंबाई कितनी है कहाँ है ?

महासागरीय उच्चावच
प्रशान्त महासागर (The Pacific Ocean)
ऽ यह सबसे बड़ा महासागर है। यह पृथ्वी की सम्पूर्ण सतह के एक तिहाई भाग पर फैला हुआ है। आकार में यह पृथ्वी के सम्पूर्ण स्थलीय भाग से भी अधिक है।
ऽ इसका आकार लगभग त्रिभुजाकार है जिसका शीर्ष बेरिंग जलसन्धि की ओर उत्तर में अवस्थित माना जा सकता है।
ऽ यह सबसे गहरा महासागर भी है।
ऽ इस सागर का अधिकांश भाग औसतन 7300 मीटर गहरा है।
ऽ 20,000 से अधिक द्वीप इस महासागर में अवस्थित हैं।
ऽ महासागर में अवस्थित ये द्वीप प्रवालभित्ति तथा ज्वालामुखी द्वारा बने हुए हैं।
ऽ उत्तरी प्रशान्त महासागर सबसे गहरा भाग है तथा इस भाग की औसत गहराई 5000-6000 मीटर के बीच है।
ऽ मरियाना गर्त 10,000 मीटर से अधिक गहरी है। यह विश्व की सर्वाधिक गहरी गर्त है जिसे चैलेंजर ट्रेंच भी कहते हैं।

अटलाटिक महासागर (The Atlantic Ocean)
ऽ इसकी तटरेखा सबसे लंबी है।
ऽ यह आकार में लगभग प्रशांत महासागर का आधा है तथा पृथ्वी के कुल सतह का छठा भाग घेरे हुए है।
ऽ यह अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षर श्ैश् के आकार में है।
ऽ इसी महासागर में सर्वाधिक मग्नतट पाये जाते हैं। हडसन की खाड़ी, बाल्टिक सागर और उत्तरी सागर मग्नतट इसमें अवस्थित हैं।
ऽ अटलांटिक महासागर की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसमें पाया जाने वाला मध्य अटलांटिक कटक है।
ऽ यह उत्तर से दक्षिण तक महासागर के समानान्तर ‘S’ आकार में फैला हआ है। अजोर्स द्वीप, केप वर्डे द्वीप, पीको द्वीप आदि इसके उदाहरण हैं।
ऽ कुछ प्रवाल द्वीप भी हैं, जैसे-बरमूडा द्वीप और ज्वालामुखीय द्वीप। इसके अलावे सेंट हेलेना, ट्रिस्टन डा कुन्हा, गफ आदि ज्वालामुखी द्वीप हैं।
नोट: लबोडोर धारा कनाडा के उत्तरी तट से होकर बहती है और गर्म गल्फ धारा से मिलती है। इन दो धाराओं का मिलन, जिनमें एक गर्म व एक ठंडी है, न्यूफाउंडलैण्ड के गिर्द प्रसिद्ध गॉग का निर्माण करती है। इन धाराओं के मिलन से विश्व के सबसे महत्त्वपूर्ण मत्स्य क्षेत्र बनते हैं। इसमें उत्तर-पश्चिम अटलांटिक का ग्रैंड बैंक क्षेत्र शामिल हैं।

हिन्द महासागर (The Indian Ocean)
ऽ भारतीय प्रायद्वीप के दोनों किनारों पर स्थित दो खाड़ियां बंगाल की खाड़ी और अरब सागर हिन्द महासागर से संबंधित हैं।
ऽ हिन्द महासागर में हजारों द्वीप हैं, उदाहरणार्थ मालदीव और कोकोस द्वीप प्रवालभित्ती द्वीप है और मॉरिशस व रीयूनियन ज्वालामुखीय द्वीप हैं।

सबसे गहरी समुद्री खाईयां

नाम महासागर सबसे गहरा बिंदु गहराई (मीटर में)
1. मरियाना खाई पश्चिमी प्रशांत चैलेंजर डीप 11,034
2. टोंगा-करमाडेक खाई दक्षिणी प्रशांत विट्याज 11 (टोंगा) 10,850
3. कुरिल-कमचटका खाई पश्चिमी प्रशांत — 10,542
4. फिलिपाईन खाई उत्तर प्रशांत गैलथिया डीप 10,539
5. प्यूरटो रिको खाई पश्चिमी अटलांटिक मिलवाउकी डीप 8,648

लवणता एवं तापमान
ऽ महासागर एवं समुद्र की एक मुख्य विशेषता उसकी लवणता है।
ऽ 1000 ग्राम समुद्री जल में उपस्थित लवण की मात्रा लवणता को दर्शाती है।
ऽ समान लवणता वाले क्षेत्रों को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा समलवण रेखा (Isohaline) कहलाती है।
ऽ समुद्री लवणता को मापने वाला यंत्र सेलिनोमीटर (Salinometer) कहलाता है।
ऽ सागरों व झीलों की लवणता बहुत अधिक होती है क्योंकि नदियों से लगातार उनमें लवणता का प्रवाह होता है। इनका जल वाष्पीकरण के कारण और अधिक लवणयुक्त हो जाता है।
ऽ लवणता समुद्री जल के तापीय प्रसार, तापमान, सौर विकिरण का अवशोषण, वाष्पीकरण, आर्द्रता आदि को निर्धारित करती है।
सबसे खारे पानी की झीलें
ग्रेट साल्ट झील (अमेरिका) 220ः
मृतसागर (पश्चिम एशिया) 240ः
लेक वैन (तुर्की) 330ः

समुद्री जल का संघटन
लवण प्रतिशत मात्रा
सोडियम क्लोराइड 77.8
मैग्नीशियम क्लोराइड 10.9
मैग्नीशियम सल्फेट 4.7
कैल्शियम सल्फेट 3.6
पोटैशियम सल्फेट 2.5
अन्य 0.5

तापमान
ऽ महासागर की गहराई के बढ़ने के साथ-साथ तापमान घटता है।
ऽ औसतन महासागर की सतह पर स्थित जल का तापमान 26.7° सेंटिग्रेड होता है और तापमान विषुवत रेखा से ध्रूव की ओर लगातार कम होता जाता है।
ऽ उत्तरी गोलार्ध में स्थित महासागर दक्षिणी गोलार्ध के महासागरों से अपेक्षाकृत अधिक औसत तापमान दर्शाते हैं।
ऽ यह भली-भांति ज्ञात तथ्य है कि महासागर का अधिकतम तापमान हमेशा उनकी सतह पर होता है क्योंकि वे सूर्य से सीधे ऊष्मा प्राप्त करते हैं और यह संवहन द्वारा इनके निचले तल को जाता है।

प्रवाल-भित्ति (Coral Reefs)
ऽ प्रवाल-भित्ति का निर्माण सागरीय जीव मूंगे या कोरल पॉलिप्स के अस्थिपंजरों के समेकन तथा संयोजन द्वारा होता है।
ऽ प्रवाल भित्ति का निर्माण 25° उत्तरी अक्षांश से 25° द. अक्षांश के मध्य 200-300 फीट की गहराई तक किसी द्वीप या तट के किनारे या सागरीय चबूतरों पर जहां सूर्य की किरणें पहुंचती है, वहां होता है।
ऽ 20°-25° से. तापमान इनके विकास के लिए आदर्श होता है।
ऽ उच्च लवणता व अति स्वच्छ जल दोनों प्रवाल के विकास के लिए हानिकारक हैं।
ऽ आकृति के आधार पर प्रवाल-भित्ति तीन प्रकार की होती है:
(क) तटीय प्रवाल-भित्ति (Fringing Reef)
(ख) अवरोधक प्रवाल भित्ति (Barrier Reef)
(ग) एटॉल (Coral Ring or Atoll)
ऽ तटीय प्रवाल-भित्ति: महाद्वीपीय किनारे या द्वीप के किनारे निर्मित होने वाली प्रवाल-भित्ति को तटीय प्रवाल भित्ति कहते हैं। उदाहरण-दक्षिणी फ्लोरिडा, मन्नार की खाड़ी आदि ।

ऽ अवरोधक प्रवाल-भित्ति: तटीय धरातल की प्रवालभित्तियों को अवरोधक प्रवाल भित्ति कहते हैं द्य तटीय धरातल व भित्तियों के बीच विस्तृत परंतु छिछला लैगून होता है। ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तटी से लगी ग्रेट बैरियर भित्ति 120 मील लंबी है।
ऽ एटॉल: घोड़े की नाल या मुद्रिका के आकार वाली प्रवाल भित्ति को एटॉल कहा जाता है। यह प्रायः द्वीप के चारों ओर या जलमग्न पठार के ऊपर अण्डाकार रूप में पायी जाती है। इसके बीच में लैगून पाया जाता है। उदाहरण-फुनफुटी एटॉल, फिजी एटॉल आदि।