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heterogeneous mixture and homogeneous mixture in hindi , समांगी मिश्रण किसे कहते हैं  मिश्रण , परिभाषा क्या है , उदाहरण , समांगी और विषमांगी मिश्रण में अंतर बताइए :

विलयन : दो या दो से अधिक घटकों के समांगी मिश्रण को विलयन कहते है।

विलयन बनाते समय जो घटक अधिक मात्रा में काम आता है उसे विलायक (Solvent) तथा जो घटक कम मात्रा में काम में आता है उसे विलेय (solute) कहते है।

दो घटकों के मिलने से बने विलयन को द्विअंगीय विलयन कहते है तथा तीन घटकों के मिलने से बने विलयन को त्रिअंगीय विलयन कहते है।

यदि विलयन में विलेय पदार्थ कम मात्रा में घुला हो तो उसे तनु विलयन कहते है।

विलयन तीन प्रकार के होते है –

  1. गैस विलयन
  2. द्रव विलयन
  3. ठोस विलयन
विलयन का प्रकार विलेय विलायक उदाहरण
गैस विलयन गैस

द्रव

ठोस

गैस

गैस

गैस

N2 में O2 गैस

N2 में CHCl (क्लोरोफोर्म)

N2 में कपूर

द्रव विलयन गैस

द्रव

ठोस

द्रव

द्रव

द्रव

H2O में O2 गैस

H2O में C2H5OH(एल्कोहल)

H2O में चीनी

ठोस विलयन गैस

द्रव

ठोस

ठोस

ठोस

ठोस

Pd में H2 गैस

Na में Hg

Cu में Zn

प्रश्न : विलयन की सांद्रता किसे कहते है ?

उत्तर : विलायक के निश्चित आयतन में किसी विलेय की घुली हुई मात्रा को ही विलायक की सांद्रता कहते है।

सांद्रता को निम्न प्रकार से व्यक्त करते है –

(i) मोलरता (Molarity) : एक लीटर विलयन में किसी विलेय के मोलो की संख्या को मोलरता कहते है।

मोलरता = विलेय के मोलो की संख्या/विलयन का आयतन (लीटर में)

चूँकि विलेय के मोलो की संख्या = विलेय का ग्राम में भार/अणुभार

अत: मोलरता = विलेय का भार (ग्राम में)/(अणुभार x विलयन का आयतन लीटर में )

नोट : मोलरता को M से व्यक्त करते है।

नोट : मोलरता की इकाई मोल/लीटर है।

नोट : ताप में परिवर्तन करने से विलयन का आयतन परिवर्तित हो जाता है जिससे मोलरता भी परिवर्तित हो जाती है अत: मोलरता ताप से प्रभावित रहती है।

नोट : M , M/2 , M/5 , M/10 , M/100 को क्रमशः मोलर , सेमीमोलर , पेंटीमोलर , डेसी मोलर , सेंटीमोलर विलयन कहते है।

(ii) मोललता (molality) : एक किलोग्राम विलायक में किसी विलेय के मोलो की संख्या को मोललता कहते है।

मोललता = विलेय के मोलो की संख्या/विलायक का भार (किलोग्राम में)

चूँकि विलेय के मोलो की संख्या = विलेय का भार (ग्राम में)/अणुभार

अत: मोललता = विलेय का भार (ग्राम में)/ अणुभार x विलायक का भार किलोग्राम में

नोट : मोललता को m से व्यक्त करते है।

नोट : मोललता की इकाई मोल/किलोग्राम होती है।

नोट : m , m/2 , m/5 , m/10 , m/100 को क्रमशः मोलल , सेमी मोलल , पेंटी मोलल , डेसीमोलल , सेंटी मोलल विलयन कहते है .

नोट : विलयन का द्रव्यमान ताप पर निर्भर नहीं करता अत: मोललता ताप से प्रभावित नहीं होती है।

(iii) मोल अंश / मोल भिन्न / मोल प्रभाज : विलयन में किसी घटक के मोलो की संख्या तथा विलयन में उपस्थित कुल मोलो की संख्या के अनुपात को उस घटक के मोल अंश कहते है , मोल अंश को X से प्रदर्शित करते है।

नोट : मोल अंश की कोई इकाई नहीं होती तथा मोल अंश ताप से प्रभावित नहीं होता है।

(iv) द्रव्यमान प्रतिशत w/w% : 100 ग्राम विलयन में किसी विलेय की घुली हुई ग्राम में मात्रा को द्रव्यमान प्रतिशत कहते है।

द्रव्यमान प्रतिशत = विलेय का भार (ग्राम में)/ विलयन का भार (ग्राम में ) x 100

(v) आयतन प्रतिशत (v/v%) : 100 ml विलयन में किसी विलेय की घुली हुई ml में मात्रा को आयतन प्रतिशत कहते है। आयतन प्रतिशत = विलेय का आयतन(ml)/विलयन का आयतन(ml) x 100

(vi) द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत (w/v%) : 100 ml विलयन में विलेय की घुली हुई ग्राम में मात्रा को द्रव्यमान आयतन प्रतिशत कहते है।

द्रव्यमान आयतन प्रतिशत = विलेय का द्रव्यमान/विलयन का आयतन x 100

(vii) पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) : 106 ग्राम विलयन में विलेय की घुली हुई ग्राम में मात्रा को पीपीएम कहते है।

समांगी मिश्रण किसे कहते हैं (homogeneous mixture in hindi)

किन्हीं दो अथवा अधिक यौगिकों के एक समांगी मिश्रण (homogeneous mixture) को विलयन कहते हैं। वह अवयव जो मिश्रण में प्रमुख अवयव के रूप में विद्यमान है, विलायक (solvent) कहलाता है और शेष अवयव विलेय (solutes) कहलाते हैं।
किसी विलयन में विलेय पदार्थ आयनिक अथवा आण्विक किसी भी रूप में विद्यमान हो सकते हैं लेकिन उनका वितरण एकदम समान होना चाहिए जिससे वह विलयन एक समांगी मिश्रण के रूप में रहे। समांगी मिश्रण से हमारा तात्पर्य यह है कि उस मिश्रण के प्रत्येक भाग का संघटन एकदम समान हो। उदाहरणार्थ, जीवनरक्षक घोल बनाने के लिए यदि एक गिलास जल में एक चुटकी नमक डालकर घोल दी जाये तो इस विलयन का ऊपर से लिया गया एक चम्मच व नीचे से लिया गया एक चम्मच रंग, रूप व खारेपन में एकदम समान होगा। अतः नमक व जल का यह मिश्रण एक समांग मिश्रण है। ऐसे विलयन को हम एक सच्चा विलयन (True solution) कहते हैं।
विलयनों के प्रकार (TYPES OF SOLUTIONS)

किसी विलयन में दो अथवा अधिक अवयव हो सकते हैं। किसी विलयन में दो अवयव होने पर उसे द्विअंगी विलयन (binary solution) कहते हैं। इसी प्रकार किसी विलयन में तीन अवयव होने पर उसे त्रिअंगी विलयन (ternary solution) व चार अवयव होने पर उसे चतुर्भागी विलयन (tetranary solution) कहते हैं। एक द्विअंगी विलयन के दोनों अवयवों में से जिस अवयव की मात्रा अधिक हो वह उस विलयन का प्रमुख अवयव होता है और उसे विलायक (solvent) कहते हैं। इसके विपरीत जो अवयव कम मात्रा में विद्यमान होता है उसे विलेय (solute) कहते हैं।
चूंकि विलयन की परिभाषा में अवयवों की अवस्था का कोई उल्लेख नहीं है अतः ये अवयव ठोस, द्रव अथवा गैस हो सकते हैं। अतः ठोस, द्रव व गैस के विभिन्न संयोगों (various combinations) से अन प्रकार के विलयन सम्भव हैं

विलयनों के प्रकार

विलेय विलायक उदाहरण
गैस गैस किन्ही दो गैसों का मिश्रण , वायु |
गैस द्रव अमोनियाकृत जल , सोडावाटर , आदि |
गैस ठोस पैलेडियम में हाइड्रोजन
द्रव गैस द्रवों का वाष्पीकरण
द्रव द्रव जल और एल्कोहल मिश्रण
द्रव ठोस सोने में पारा
ठोस गैस किसी ठोस का उध्र्वपातन
ठोस द्रव नमक अथवा शक्कर का जल में घोल
ठोस ठोस तांबे में जिंक (पीतल)

 

जब किसी विलयन में विलायक के रूप में कोई द्रव पदार्थं हो तो ऐसे विलयनों को हम द्रव विलयन (liquid solutions) कहते हैं | इस अध्याय में हम इन्ही द्रव विलयनों का अध्ययन करेंगे | द्रव विलयन मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं –

  • गैसों का द्रवों में विलयन (solutions of gases in liquid)
  • द्रवों का द्रवों में विलयन (solutions of liquids in liquids)
  • ठोसों का द्रवों में विलयन (solutions of solids in liquids)

इनमें ठोसों के द्रवों में विलयन सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं तथा केवल “विलयन” शब्द इन्ही विलयनों के लिए प्रयुक्त किया जाता है |