हम्मीर महाकाव्य किसने लिखा | हम्मीर महाकाव्य किसकी रचना है रचनाकार का नाम रचयिता कौन है

By   February 21, 2021

hamir mahakavya in hindi written by whom or who is writer हम्मीर महाकाव्य किसने लिखा | हम्मीर महाकाव्य किसकी रचना है रचनाकार का नाम रचयिता कौन है  ?

प्रश्न: हमीर महाकाव्य
उत्तर: 16वीं सदी के लेखक नयनचन्द्र सूरि द्वारा संस्कृत में लिखा ग्रंथ हमीर महाकाव्य, जिसमें रणथम्भौर के हम्मीरदेव चैहान की शौर्यगाथा एवं अलाउद्दीन का आक्रमण तथा तत्कालीन सामाजिक दशा का सजीव वर्णन किया है।
उत्तर प्रारूप: उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर में अण्डर लाइने यह दर्शाती हैं कि उत्तर में उन तथ्यों का समावेश तो होना ही पाहए जस भाषा, लेखक / कवि / ग्रंथ का नाम, सन्दर्भ, समय या संरक्षक आदि। निम्न सारणी द्वारा उत्तर पाप द्य आसानी से बनाया जा सकता है।

राजस्थानी साहित्य
प्रश्न: राव
उत्तर: केवल राजपूतों के याचक या राज दरबारी हैं और पीढ़ी वंशावलियाँ रखने का काम नहीं करते वे ‘राव‘ नाम से प्रसिद्ध है। इस जाति में डिंगल और पिंगल के कई अच्छे-अच्छे कवि और विद्वान हुए हैं। इनमें चंद बरदाई, किशोरदास, बख्तावरजो, गुलाबजी आदि के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
प्रश्न: मोतीसर
उत्तर: कच्छ-भुज के राजकवि माउलजी नामक किसी कवि ने अपनी एक कन्या का विवाह माणकजी नामक एक राजपूत के साथ कर दिया था जिनकी संतान मोतीसर कहलाती है। मोतीसरों की संख्या अब बहुत थोड़ी रह गई है। मोतीसर बहुत पढ़े-लिखे नहीं होते पर डिंगल भाषा के गीत बनाने में बहुत पटु होते हैं। इनके गीत चारणों के गीतों से भी जोरदार माने गए हैं।
प्रश्न: भाट
उत्तर: इनका मुख्य कार्य अपने यजमानों की वंशावलियाँ लिखना तथा उनका बखान करना है। उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में ये अधिक है। भाट सभी जातियों के होते हैं। भाटों की बहियों पर लोग बहुत विश्वास करते हैं और बहुत से मामलों में सरकार भी इनको प्रमाणिक मानती है।
प्रश्न: वंश भास्कर ख्त्।ै डंपदश्े 1994,
उत्तर: 19वीं सदी के बूंदी के दरबारी कवि सूर्यमल्ल मिश्रण का राजस्थानी भाषा का ग्रंथ वंश भास्कर जिसमें राजपूताने का प्रामाणिक, तथ्यपरक व पद्यबद्ध इतिहास है। आकार व कला सौष्ठव दोनों दृष्टियों से यह राजस्थानी का गौरव ग्रंथ है।
प्रश्न: नैणसी री ख्यात
उत्तर: जसवंतसिंह राठौड़ के दरबारी नैणसी द्वारा मारवाड़ी में लिखित प्राचीनतम ख्यात, जिसमें राजस्थान का समग्र प्रामाणिक इतिहास दिया गया है। यह तत्कालीन राजस्थान का विस्तृत कोष है।
प्रश्न: नैणसी
उत्तर: राजपूताने के अबूल. फजल व जसवंतसिंह राठौड़ के दरबारी नैणसी ने मारवाड़ी में ‘नैणसी री ख्यात‘ व ‘परगना री विगत‘ लिखकर राजस्थान के इतिहास व गद्य साहित्य की बड़ी सेवा की है।
प्रश्न: पृथ्वीराज रासो
उत्तर: पृथ्वीराज चैहान के दरबारी कवि चन्दरबरदाई द्वारा पिंगल में लिखित ग्रंथ, जिसमें राजपूतों की उत्पत्ति व चैहानों का इतिहास तथा पृथ्वीराज की वीरता एवं शौर्य गाथा दी गई है।
प्रश्न: पृथ्वीराज विजय
उत्तर: 12वीं सदी के लेखक जयानक द्वारा संस्कृत में लिखित पृथ्वीराज विजय में सपादलक्ष के चैहानों का इतिहास दिया गया है। इसमें वीर रस, अनुप्रास व कृतित्व का समुचित संयोजन है।
प्रश्न: उद्योतन सूरी 
उत्तर: 8वीं सदी के भीनमाल में प्रसिद्ध जैन कवि उद्योतन सूरी ने प्राकृत में कुवलयमाला की रचना की जिसमें तत्कालीन राजस्थान की सांस्कृतिक दशा का वर्णन किया गया है।
प्रश्न: कान्हड़दे प्रबन्ध 
उत्तर: 15वीं सदी के लेखक पदमनाथ द्वारा राजस्थानी में लिखा ग्रंथ जिसमें जालौर के कान्हड़दे चैहान व अलाउद्दीन का संघर्ष, समकालीन, भूगोल व सामाजिक परम्पराओं की जानकारी मिलती है। इसमें रास, चैपाई व वीरोल्लास युक्त काव्य का सम्मिश्रण है।
प्रश्न: कवि माघ

उत्तर: 8वीं सदी के भीनमाल के प्रसिद्ध कवि माघ ने शिशुपाल वध की रचना की। जिसमें कालिदास की उपमा, भारवी का विचार गांभीर्य एवं दण्डी की लेखन शैली की नियम निष्ठा का सुन्दर संयोजन किया है।
प्रश्न: कन्हैयालाल सेठिया 
उत्तर: 20वीं सदी के राजस्थानी एवं हिन्दी के आधुनिक कवि कन्हैयालाल सेठिया ने राजस्थानी में पातल-पीथल वीर रस की अत्यन्त प्रसिद्ध व लोकप्रिय कविता की रचना की। धरती धोरां री, अधोरी काल आदि अन्य रचनायें हैं।
प्रश्न: बीसलदेव रासो
उत्तर: 16वीं सदी के कवि लेखक नरपति नाल्ह द्वारा राजस्थानी में रचित ग्रंथ बीसलदेव रासो जिसमें अजमेर के बीसलदेव चैहान व भोज की पुत्री राजमती की प्रेम कथा का वर्णन है। जो क्रिया एवं संज्ञा के रूप में अपभ्रंश पर आधारित है।

अतिलघु से लघप्रश्नोत्तर में किसी लेखक, कवि या उसकी कति को परिवर्तित करना जैसे – 18वीं सदी के लेखक शिवदास ग्रहण कृत ‘अचलदास खींची री वचनिका‘।
अचलदास खींची की वचनिका
भाग-1: अचलदास खींची की वचनिका 18वीं सदी के लेखक शिवदास गाडण द्वारा राजस्थानी ब्रज में रचित ग्रंथ है, इसमें माण्डू सुल्तान होशंगशाह गौरी व गागरोन नरेश अचलदास खींची के मध्य युद्ध का वर्णन है।

उत्तर प्रारूप – यदि किसी बोली से प्रश्न पूछा जाता है तो उसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें आनी चाहिए – मुख्य बोली का नाम, क्षेत्र (पूर्वी, पश्चिमी, दक्षिणी या उत्तरी आदि), उप बोली, सम्मिश्रण आदि बातें लिखी जानी चाहिए। नीचे दी सारणी की सहायता से उत्तर संरचना आसानी से बनायी जा सकती है।

जैसे: शेखावाटी – सीकर, चूरू, झुंझुनूं का क्षेत्र शेखावाटी कहलाता है एवं यहाँ प्रयुक्त बोली शेखावाटी है। यह पश्चिमी राजस्थान की प्रधान एवं मारवाड़ी की उपबोली है। इस पर मारवाडी व ढूंढाड़ी का प्रभाव है।
50 शब्दों में परिवर्दि्धत
भाग-2ः इसमें तत्कालीन समय की आर्थिक, धार्मिक व सामाजिक दशा का वर्णन है। यह गद्य-पद्य में लिखित ग्रंथ है जिसमें पुष्ट, संगीतमय तथा परिष्कृत भाषा का प्रयोग किया गया है। इसकी वर्णनात्मक पद्धति रोचक, सरल तथा गद्य काव्य बेजोड़ है।