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गैगिंग एक्ट किसके द्वारा प्रस्तुत किया गया था , gagging act was passed in hindi , गैगिंग एक्ट क्या है

By   December 25, 2022

जाने गैगिंग एक्ट किसके द्वारा प्रस्तुत किया गया था , gagging act was passed in hindi , गैगिंग एक्ट क्या है ?

प्रश्न: गैगिंग एक्ट के बारे में बताइए।
उत्तर: 1857 के कुख्यात ष्गैगिंग एक्टष् को गदर के बाद पारित किया गया जिसने प्रेस की स्थापना को विनियमित करने मुद्रित सामग्री के परिसंचरण को नियंत्रित करने तथा सभी प्रेसों को लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया। इसमें अंग्रेजी तथा देशी भाषाओं में कोई भेद नहीं किया गया।
प्रश्न: 1857 के विद्रोह का तात्कालिक कारण बताइए।
उत्तर: चर्बी वाले कारतूस 1857 ई. के विद्रोह का तात्कालिक कारण था। इन कारतूसों को निर्माण बंगाल में होता था। परम्परागत ब्राउन बैस के स्थान पर एनफील्ड रायफल का प्रयोग शुरू किया, जिसमें कारतूस को लगाने से पूर्व दांतों से खींचना पड़ता था। कारतूस में गाय व सूअर की चर्बी लगी होने से हिन्दू व मुसलमान दोनों भड़क गये व 1857 के विद्रोह की शुरुआत हुई।
प्रश्न: 1857 के विद्रोह से पूर्व में हुए विद्रोहों की एक सूची बनाइए।
उत्तर: 1857 से पूर्व सैनिक विद्रोह
1. 1805 में वैल्लोर में सैनिकों ने विद्रोह किया।
2. सैनिको ने सामाजिक तथा धार्मिक रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप करने के कारण विद्रोह किया। मैसूर के राजा का झण्डा फहरा दिया।
3. 1824 में बैरकपुर छावनी में विद्रोह हुआ।
4. 47वीं बटालियन ने पर्याप्त भत्ते के बिना बर्मा युद्ध पर जाने के विरूद्ध में विद्रोह किया।
5. 1825 में असम के तोपखाने के सिपाहियों ने विद्रोह किया।
6. 1838 में शोलापुर स्थित 34वीं रेजीमेंट ने विद्रोह किया।

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7. 1844 में 64वीं रेजीमेंट ने विद्रोह किया।

प्रश्न: 1857 के महासंग्राम के पीछे कोई एक कारण नहीं था, बल्कि कारणों का एक समूह था, जो कम्पनी की नीतियों में अन्तर्निहित था।,
उत्तर: ब्रिटिश साम्राज्यीय व औपनिवेशिक नीतियाँ

आर्थिक नीतियाँ
1. दोषपूर्ण भू-राजस्व नीतियाँ एवं उनका किसानों व आदिवासियों पर शोषणकारी प्रभाव।
2. आदिवासी क्षेत्रों में व्यापारियों एवं महाजनों का बसाव (पहुँच) तथा उनके द्वारा आदिवासियों के श्रम का शोषण ती आदिवासियों की गुलाम मजदूर की स्थिति।
3. लघु एवं कुटीर उद्योगों का ह्यस जिससे मजदूर व श्रमिक बेरोजगार हुए।
राजनीतिक नीतियाँ
1. सहायक संधि, विलय का सिद्धान्त, राज्यों में उत्तराधिकार संबंधी हस्तक्षेप। पूना, सतारा, झाँसी, उदेपुर, सभलपरमैसूर, आदि का विलय। निजाम, अवध, राजपूत आदि शासकों की करद स्थिति।
2. दक्षिण भारत में नवाब की आड़ में पॉलीगारों की शक्तियों को नष्ट करने का प्रयास।
3. राजपूताना, अवध, मध्यभारत, संयुक्त प्रान्त आदि में जमींदारों, तालुकेदारों, सामन्तों आदि की शक्ति को कुचलने का प्रयास प्रशासनिक नीतियाँ
1. प्रशासनिक विभागों में सिर्फ अंग्रेजों की नियुक्ति जिन्हें स्थानीय समस्याओं का आभास नहीं था।
2. स्थानीय सामन्ती तत्वों द्वारा ब्रिटिश सरकार को सहायता व आदिवासी मुखियाओं को सरकारी विशेषाधिकार देकर उनसे शोषण करवाय गया। जैसे – कोल एवं भील विद्रोह इसी परिप्रेक्ष्य में।
3. जटिल न्यायिक व्यवस्था जो जनसाधारण की समझ से बाहर थी।
4. पुलिस एवं न्यायालय उच्च भारतीय वर्गों एवं ब्रिटिश हितों का संरक्षण कर रहे थे। जबकि कृषक, आदिवासी एवं जनता का शोषण कर रहे थे।
सामाजिक नीतियाँ
1. अंग्रेजी के ज्ञान को सामाजिक रुतबे के रूप में लिया गया।
2. सरकारी (काम-काज की) भाषा अंग्रेजी रखी जिससे गैर-अंग्रेजी भाषा वाले बेरोजगार हो गए।
3. अनेक समृद्ध मुसलमान ब्रिटिश सत्ता के परिवर्तनों को स्वीकार नहीं करने के कारण अलग-थलग पड़ गए।
4. सामाजिक सुधारों से परम्परागत वर्गों में भय उत्पन्न होना।
धार्मिक नीतियाँ
1. ईसाई धर्म का प्रचार एवं अत्यधिक धर्मान्तरण।
2. इससे सामाजिक तनाव की स्थिति – क्योंकि शोषक एवं शोषितों के भिन्न धर्म थे।
3. आम लोगों की मान्यताओं – अनुष्ठानों, अंधविश्वासों, स्थानीय देवी-देवताओं, पर्वतों, नदियों, मृतकों की पूजा आदि को नकारा गया।
4. हिन्दुओं एवं मुसलमानों को अपने-अपने धर्म का अस्तित्व संकट में दिखाई देने लगा।
सैनिक नीतियाँ
1. कम्पनी यूरोपीयन सैनिकों को श्सोल्जरश् एवं भारतीय सैनिकों को श्सिपाहीश् से संबोधन करती थी। इन दोनों के मध्य प्रत्येक स्तर पर
भेदभाव बरता गया, जिससे सिपाहियों में कम्पनी के विरुद्ध विद्रोह की भावना भर गई।
प्रश्न: 1857 के विद्रोह के स्वरूपध्प्रकृति की विवेचना कीजिए।
उत्तर: 1857 के विद्रोह के रूवरूप के बारें में इतिहासकारों में सदैव मतभेद की स्थिति रही है। कुछ इतिहासकार इसे सिपाही विद्रोह मानते है।
जबकि कुछ अन्य का मानना है कि यह भारत का प्रथम स्वाधीनता संग्राम था। सावरकर, रामविलास शर्मा तथा अशोक मेहता जैसे विद्धानों ने इसे जनांदोलन कहा है, वहीं डिजरेली ने इसे राष्ट्रीय विद्रोह की संज्ञा दी है, परन्त विद्रोह के क्षेत्र तथा विस्तार के कारण इसे राष्ट्रीय चरित्र का नहीं माना जा सकता।
लारेस व मीले ने इसे पूर्ण सिपाही विद्रोह की संज्ञा दी, परन्तु किसान, दस्तकार व ताल्लकेदारों की भी शिरकत होने के कारण इसे केवल सैनिक विद्रोह कहना उचित नहीं हैं। रीज इसे श्वेतों के विरुद्ध काले लोगों का षडयत्र कहते हैं, परन्तु वे यह तथ्य भूल जाते है कि कई अश्वेत (काले) ब्रिटिश सेना का भी हिस्सा थे। होमस केवल भारतीयों की बर्बरता को दृष्टिगत रखते हैं, परन्तु वे यह भूल जाते है कि अंग्रेजो ने किस अमानवीय तरीके से विद्रोह का दमन किया। आउट्रम व आधुनिक भारत का महत्वपूर्ण घटनाक्रम, व्यक्तित्व और मुद्दे 419 टेलर ने इसे हिन्दू-मुस्लिम षड्यंत्र के रूप में देखा जबकि वास्तविकता यह थी की दमन व शोषण से पीड़ित जनता को अपनी मुक्ति केवल क्रान्ति में ही नजर आई।
पं. नेहरू का मानना था कि यह एक सैनिक विद्रोह से कहीं अधिक था और. तेजी से फैलते हए इसने एक लोकप्रिय विद्रोह तथा प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का स्वरूप ग्रहण कर लिया ।
सार रूप में यह कहा जा सकता है कि 1857 का विद्रोह सैनिक विद्रोह से कछ अधिक तथा राष्ट्रीय विद्रोह से कुछ कम था। इतना ही नहीं इसनें स्वाधीनता संग्राम आन्दोलन की नींव रखी तो दूसरी ओर इसने ब्रितानी शासकों को भारत पर लम्बे समय तक शासन करने की राजनीति नए सिरे से बनाने के लिए प्रेरित किया।