भ्रूण विज्ञान के जनक कौन हैं father of embryology in india in hindi भारतीय एम्ब्रियोलॉजी के पिता भारत में

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father of embryology in india in hindi भ्रूण विज्ञान के जनक कौन हैं भारतीय एम्ब्रियोलॉजी के पिता भारत में किसे माना जाता है ?

उत्तर : भारत में भ्रूणविज्ञान का जनक या पिता “प्रो. पंचानन माहेश्वरी (prof. P. maheshwari)” को कहा जाता है | ये एक भारतीय वैज्ञानिक है जिनका जन्म राजस्थान राज्य के जिला जयपुर में हुआ था | Panchanan Maheshwari एक बहुत बड़े वनस्पति शास्त्री थे उनके आविष्कार से वनस्पति जगत में मानो एक नयी दिशा में गति की हो |

वनस्पति विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत उच्चवर्गीय पौधों की जनन सम्बन्धी प्रक्रियाएँ जैसे – युग्मकजनन , परागण , निषेचन , भ्रूण , परिवर्धन और बीज तथा फल निर्माण का अध्ययन किया जाता है उसे भ्रूण विज्ञान या भ्रुणिकी (एम्ब्रियोलॉजी) कहते है।

पौधों के लैंगिक प्रक्रम का ज्ञान मानव को आज से कई हजार वर्ष पूर्व भी था। इसका उल्लेख सबसे पहले थियोफ्रेस्टस (theophrastus) ने अपनी पुस्तक “इन्क्वायरी इनटू प्लांट्स” (enquiry into plants) नामक पुस्तक में किया था। जीव विज्ञान की अन्य शाखाओं के समान भ्रूण विज्ञान के क्षेत्र में भी सूक्ष्मदर्शी के आविष्कार (सन 1665) के बाद अभूतपूर्व प्रगति हुई। इससे पूर्व अधिकतर वैज्ञानिक पादपों में लिंग की उपस्थिति से सहमत नहीं थे।
सर्वप्रथम एन. ग्रू (n. grew 1684) ने अपनी पुस्तक “अनाटॉमी ऑफ़ प्लान्ट्स” (anatomy of plants) में पुंकेसर का नर जननांग के रूप में उल्लेख किया। इसके पश्चात् आर. के. केमरेरियस (R. K. camerarius) ने स्पष्ट किया कि अंडाशय अपनी वर्तिका के साथ मादा जननांग का कार्य करता है। कॉलरूटर (joseph kolreuter 1761) ने परागण क्रिया में कीटों के महत्व को प्रतिपादित किया। एमीसी (amici 1824) ने आवृतबीजियों के लैंगिक जनन में पराग कणों के योगदान की और पराग कण से परागनली (पोलन ट्यूब) के निर्माण की खोज की।
इसके पश्चात् स्ट्रासबर्गर (strasburgar 1884) ने नर और मादा युग्मकों के संलयन की प्रक्रिया की खोज की और एस. जी. नावासिन (S. G. Nawaschin ) 1898 ने द्विनिषेचन (डबल फर्टिलाइजेशन) या त्रिसंलयन (ट्रिपल फ्यूज़न) की खोज की। द्विनिषेचन की क्रिया सभी आवृतबीजियों में बिना किसी अपवाद के पाई जाती है। इस प्रकार 20 वीं शताब्दी तक भ्रूण विज्ञान के क्षेत्र में अप्रत्याशित उन्नति हुई।
भारत में प्रो. पंचानन माहेश्वरी (prof. P. maheshwari) को “भ्रूण विज्ञान का जनक” कहा जाता है। प्रोफेसर माहेश्वरी द्वारा लिखित पुस्तक “एन इंट्रोडक्शन टू दी एम्ब्रियोलोजी ऑफ़ एन्जियोस्पर्म्स” (an introduction to the embryology of angiosperms 1950) आज भी एक महत्वपूर्ण सन्दर्भ पुस्तक के रूप में स्थापित है। उनके द्वारा सम्पादित अन्य पुस्तक “रिसेन्ट एडवांसेज इन दी एम्ब्रियोलोजी ऑफ़ एंजियोस्पर्म्स” (recent advances in embryology of angiosperms 1963) भ्रूण विज्ञान सम्बन्धी महत्वपूर्ण प्रकाशन माना जाता है।

प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1 : पुष्प है –
(अ) रूपांतरित प्ररोह
(ब) रूपांतरित रोम
(स) रूपांतरित जड़
(द) रूपान्तरित ग्रंथि
उत्तर : (अ) रूपांतरित प्ररोह
प्रश्न 2 : परिदल पुंज है –
(अ) रूपान्तरित पर्व
(ब) रूपान्तरित पर्ण
(स) रूपान्तरित पर्व संधि
(द) रूपान्तरित कलिका
उत्तर : (ब) रूपान्तरित पर्ण
प्रश्न 3 : पुष्प है –
(अ) शंकु के समकक्ष संरचना
(ब) पर्ण
(स) तना
(द) मूल के समकक्ष संरचना
उत्तर : (स) तना
प्रश्न 4 : बीजाण्ड है –
(अ) गुरुबीजाणु पर्ण
(ब) लघुबीजाणु पर्ण
(स) लघुबीजाणु धानी
(द) गुरुबीजाणुधानी
उत्तर : (द) गुरुबीजाणुधानी
प्रश्न 5 : अंकुरित परागण है –
(अ) नर युग्मकोदभिद
(ब) लघुबीजाणु पर्ण
(स) गुरुबीजाणु पर्ण
(द) लघुबीजाणु धानी
उत्तर : (अ) नर युग्मकोदभिद