योगरूढ़ शब्द के उदाहरण दीजिए ? example of yog rudh words in hindi योगरूढ़ शब्द किसे कहते है

By   September 23, 2021

योगरूढ़ शब्द किसे कहते है अर्थ क्या होता है ? योगरूढ़ शब्द के उदाहरण दीजिए ? example of yog rudh words in hindi ?

शब्द रचना, अर्थ, वाक्य रचना

प्रश्न: अक्षर किसे कहते हैं?
उत्तर: वह ध्वनि या ध्वनि समूह जिसका उच्चारण एक साँस याप्रयत्न में होता है, अक्षर कहलाता है।
प्रश्न: शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: शब्द-एक या अधिक वर्षों से बनी हुई स्वतंत्र सार्थक ध्वनि को ‘शब्द‘ कहते हैं। या निश्चित अर्थ को प्रकट करने वाले वर्ण-समूह को शब्द कहते हैं।
प्रश्न: रूढ़ शब्द किसे कहते हैं
उत्तर: जो शब्द एक अर्थ विशेष या वस्तु विशेष के लिये प्रयुक्त ! हों या जो अपने मूल रूप में व्यवहार में लाये जायें। जैसेकुर्सी, फूल आदि। ‘कुर्सी‘ कहते ही हमारे दिमाग में चार पाँव वाली वह चीज, जिस पर बैठा जा सकता है, घूम की जाती है।
प्रश्न: यौगिक शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: वे शब्द जो दो या अधिक शब्दों के योग से बने हों, उन्हें यौगिक शब्द कहते हैं। जैसे-हिम ++ आलय = हिमालय, प्रधान + मंत्री = प्रधानमंत्री।
प्रश्न: योगरूढ़ शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: जो शब्द दो शब्दों के मेल से तो बने हैं परन्तु किसी अन्य अर्थ विशेष का बोध करवाते हैं, एक निश्चित अर्थ के लिए प्रयुक्त होते हैं, उन्हें योगरूढ़ शब्द कहते हैं। उदाहरणार्थ -चारपाई अर्थात् चार पाये हैं जिसके। यहाँ चारपाई का अर्थ खाट से है न कि गाय, कुर्सी आदि से। इस प्रकार इन शब्दों में योग भी हुआ और निश्चित अर्थ रूढ़ भी हो गया।
प्रश्न: समासरूढ़ शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: सामसिक शब्दों में भी कुछ शब्दों का अर्थ रूढ़ हो गया है, उन्हें ‘समासरूढ़‘ शब्द कहते हैं, जैसे-दशानन। दशानन का अर्थ ‘दशमुख वाला‘, पर यह शब्द केवल रावण के लिए प्रयुक्त होता है। पीताम्बर, नीलकण्ठ, षडानन, पंचानन आदि शब्द समास रूढ़ शब्द हैं।
प्रश्न: तत्सम शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: जो शब्द संस्कृत से ज्यों के त्यों ले लिए गये, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं। जैसे-भूमि, प्रथम, राष्ट्र आदि।
प्रश्न: तद्भव शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: संस्कृत से आए शब्दों से उत्पन्न हुए शब्द तद्भव शब्द कहलाते हैं। अर्थात् जिन्हें हिन्दी की प्रकृति के अनुरूप ढ़ाल लिया गया, जैसे- काम, बरस, माँ आदि।
प्रश्न: आगत या विदेशी शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: जो शब्द किसी दूसरी भाषा से स्वीकार कर लिये गये, जैसे- कैंची, बटन, तोप, कागज आदि। कुछ तो ज्यों के त्यों ले लिये गए, जैसे- कागज, ऑफिस आदि। कुछ को हिन्दी की प्रकृति के अनुरूप ढाल लिया गया, जैसे जमीन, त्रासदी आदि।
प्रश्न: देशी शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: स्थानीय बोलियों या उपभाषाओं से आये क्षेत्रीय शब्द देशी या देशज शब्द कहे जाते हैं, जैसे: ढूँढ़ना, खाट आदि।
प्रश्न: संकर शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट हो गया है कि दो भाषाओं के मिश्रण से बने शब्द संकर कहलाते हैं, जैसे: रेलगाड़ी रेल . (अंग्रेजी) गाड़ी (हिन्दी), जाँचकर्ता जाँच (हिन्दी) कर्ता (संस्कृत)।
व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर शब्द भेद
ऽ शब्द के निम्नलिखित आठ भेद हैं-
ऽ उपर्युक्त आठ प्रकार के शब्दों को विकार की दृष्टि से दो भागों में बाँटा जा सकता है।
चार विकारी शब्द चार अविकारी शब्द
1. संज्ञा
2. सर्वनाम
3. विशेषण
4. क्रिया 5. समुच्चयबोधक
6. क्रियाविशेषण
7. सम्बन्धबोधक
8. विस्मयादिबोधक
शब्द रचना के अंतर्गत महत्वपूर्ण अध्याय
ऽ उपसर्ग की परिभाषा-वे शब्दांश, जो किसी शब्द के आरम्भ में लगकर उनके अर्थ में विशेषता ला देते हैं अथवा उसके अर्थ को बदल देते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं।
जैसे-परा-पराक्रम, पराजय, पराभव, पराधीन, पराभूत
उपसर्ग के कार्यः
(1) शब्द के अर्थ में कोई अंतर नहीं ला पाते
(2) शब्द के मूल अर्थ को उल्टा कर देते हैं।
(3) शब्द के मूल अर्थ में एक नवीन विशेषता ला देते है।
उपसर्गों की संख्या
संस्कृत-उपसर्ग (19)
(1) अति- बाहुल्य (अधिक, उस पार)
(2) अधि- सामीप्य, ऊपर, श्रेष्ठ
(3) अनु- पीछे, साथ, समान
(4) अप- दूर, हीनता, विरुद्ध
(5) अभि- ओर, सामीप्य
(6) अव- दूर, नीचे
(7) आ -तक, कम, इधर
(8) उत्, उद्- ऊपर, उन्नति
(9) अप- निकट, सहायक, छोटा
(10) दुः दुर्, दुश्, दुष्, दुस्- बुरा,कठिन
(11) नि- नीचे, भीतर
(12) निः निस्, निर्- बिना, बाहर, निषेध
(13) परा- पीछे, उलटा,
(14) परि- चारो ओर
(15) प्र- अधिक, आगे
(16) प्रति- ओर, उलटा, विरोध, प्रत्येक
(17) वि- बिना, अलग, विशेषता
(18) सम्- पूर्ण, अच्छी तरह, संयोग
(19) सु- अच्छा, सुन्दर, सहजी
हिंदी उपसर्ग-(10)
(1) अ-अन-रोकना, मना करना
(2) अध-आधे, अपूर्ण
(3) ऊन- एक कम
(4) औ (अव) – मना करना
(5) दु- हीन, बुरा
(6) नि- अभाव, विशेष, निषेध
(7) बिन- निषेध
(8) भर- ठीक पूरा
(9) कु (द)- बुरा, हीन
(10) सु (स)- श्रेष्ठ साथ .
विशेष टिप्पणी-हिंदी में कुछ व्याकरण लेखक ‘क‘ और ‘स‘ क्रमशः नवें और दसवें (कु एवं के विकार) को अलग मान-कुल बारह उपसर्ग बताते हैं, परन्तु इन दोनों को अलग उपसर्ग नहीं माना जाना चाहिए।
उर्दू उपसर्ग-(19)
(1) अल (अरबी)- निश्चित
(2) ऐन- ठीक, पूरा
(3) कम- थोड़ा, हीन
(4) खुश- अच्छा, शुभ
(5) गैर- भिन्न, विरुद्ध
(6) दर- में
(7) ना- अभाव
(8) फिल् – में, फी (अरबी) में प्रति
(9) ब- अनुसार, में, से ओर
(10) बद- बुरा, अशुभ
(11) बर- ऊपर, पर
(12) बा- साथ, अनुसार
(13) बिल (अरबी) – साथ, से, में
(14) बिला (अरबी)-बिना
(15) बे-बिना
(16) ला (अरबी)-बिना, निषेध, अभाव
(17) सर- मुख्य, श्रेष्ठ
(18) हम (संस्कृत सम से)-साथ, समान
(19) हर-प्रत्येक
(नोट-उर्दू के सारे उपसर्ग अरबी-फारसी से लिए गये हैं। ये संख्या में लगभग (19) हैं।)
प्रत्यय की परिभाषा
प्रत्यय की व्युत्पत्ति है प्रति $ अय = प्रत्यय अर्थात् बाद में चलने या लगने वाला। जो शब्दांश शब्दों के अन्त में लगकर उनके अर्थ को बदल देते हैं, वे प्रत्यय कहलाते हैं। प्रत्यय अविकारी शब्दांश है जो बाद में जोड़े जाते हैं। जैसे-‘लिख‘ शब्द में ‘आवट‘ प्रत्यय जोड़ने से ‘लिखावट‘ शब्द बनता है।
ऽ प्रत्यय के जुड़ने से अधूरे शब्द पूरे हो जाते हैं।
ऽ प्रत्यय का विधान धातु से होता है।
प्रत्यय से –
सब्जी + वाला = सब्जीवाला
मूलशब्द प्रत्यय यौगिकशब्द
विशेष: प्रत्ययों का अपना अर्थ कुछ भी नहीं होता और न ही इनका प्रयोग स्वतंत्र रूप से होता है।
प्रत्यय

तद्धित प्रत्यय कृत्प्रत्यय
(1) कृत्वाचक तद्धित (1) कृत्वाचक कृदन्त
(2) ऊन (लघुता) वाचक (2) कर्मवाचक कृदन्त
(3) संबंधवाचक तद्धित (3) करणवाचक कृदन्त
(4) गणनावाचक तद्धित (4) भाववाचक कृदन्त
(5) सादृश्यवाचक तद्धित (5) क्रियावाचक कृदन्त
(6) भाववाचक तद्धित (6) कृत्वाचक कृदन्तीय
(7) गुणवाचक तद्धित विशेषण
(8) स्थानवाचक तद्धित
(9) स्त्रीवाचक तद्धित
शब्द रचना, वाक्य रचना, अर्थ
ः पुनर्विलोकन
ऽ स्वरयुक्त व्यंजन है- अक्षर
ऽ निश्चित अर्थ को प्रकट करने वाले वर्ण-समूह को क्या कहते हैं? – शब्द
ऽ शब्द के कितने भेद होते हैं? – आठ
ऽ ‘किताबघर‘ कैसा शब्द है- संकर
ऽ ‘तहसीलदार‘ कैसा शब्द है- संकर
ऽ ‘खनखन‘ कैसा शब्द है?- ध्वन्यात्मक
ऽ ‘रिक्शा‘ संबंधित है- जापानी भाषा
ऽ ‘बेगम‘, ‘दरोगा‘ व ‘चाकू‘ संबंधित है- तुर्की से
ऽ ‘हिमालय कैसा शब्द है? – यौगिक शब्द
ऽ ‘पीताम्बर‘, ‘पंचानन‘ व ‘रावण‘ कैसा शब्द है? – समास की
ऽ ‘अत्यन्त‘, ‘निर्वाह‘ में क्रमशः कौन-सा उपसर्ग निहित है?-अति, निर्
ऽ ‘अध्यक्ष‘, ‘उनतीस‘ में क्रमशः कौन-सा उपसर्ग निहित है?-अधि, उन
ऽ उपसर्गों की संख्या है- (3)
ऽ संस्कृत उपसर्ग हैं- (19)
ऽ हिन्दी उपसर्ग हैं- (10)
ऽ उर्दू उपसर्ग हैं – (19)
ऽ ‘अनु‘ उपसर्ग का अर्थ है- बाद में, पीछे, साथ
ऽ ‘सु‘ उपसर्ग का अर्थ है-अच्छा , सुन्दर, सहज
ऽ ‘बा‘ संबंधित है- उर्दू उपसर्ग से
ऽ ‘अध‘ उपसर्ग संबंधित है-हिन्दी उपसर्ग से
ऽ लुटेरा‘, ‘ठकुराइन‘ में क्रमशः प्रत्यय हैं- एरा, आइन
ऽ जो प्रत्यय धातुओं के अंत में लंगते हैं वे हैं- कृत् प्रत्यय
ऽ जिस प्रत्यय से बने शब्दों से कर्ता को बोध हो, वे हैं-
कृत्वाचक कृदन्त
ऽ जो प्रत्यय संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण के अंत में लगकर उन्हें नये शब्द बनाते हैं, वे हैं- तद्धित प्रत्यय
ऽ जिससे समता का बोध हो, वे हैं- सादृश्यवाचक तद्धित
ऽ उपसर्ग के अन्य नाम हैं- आदि प्रत्यय, व्युत्पत्तिमूलक प्रत्यय, रचनात्मक प्रत्यय
ऽ बचपन, गर्मी, गरीबी, दिखावा- भाववाचक तद्धित
ऽ मानव, दानव, यादव- अपत्यवाचक एवं संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय
ऽ पढ़नेवाला, दिखनेवाला, लड़ाका- कृत्वाचक प्रत्यय
ऽ सुनार, लुहार, कहार, चमार, मशालची- कृतवाचक तद्धित
ऽ मिलनसार, चालबाज, मेजपोश में क्रमशः प्रत्यय है- सार, बाज, पोश। अर्थानुसार वाक्य हैं- आठ
ऽ जिस वाक्य में किसी बात का होना पाया जाय-विधानार्थक वाक्य
ऽ जिस वाक्य से प्रश्नात्मक भाव प्रकट हो- प्रश्नार्थक वाक्य
ऽ जिस वाक्य से संकेत का बोध हो- संकेतार्थक वाक्य
ऽ ‘वाह ! क्या सुन्दर दृश्य है।‘ यह कैसा वाक्य है- विस्मयादि बोधक वाक्य।
ऽ वाक्य के प्रमुख खण्ड है- दो (उद्देश्य व विधेय)
ऽ रचनानुसार वाक्य के भेद हैं- तीन (साधारण वाक्य, संयुक्त वाक्य, मिश्रित वाक्य)।
ऽ ‘पूजा गाना गा रही है।‘ यह कैसा वाक्य है- साधारण वाक्य
ऽ ‘पूजा पढ़ती है और कोचिंग भी पढ़ाती है। यह कैसा वाक्य है- संयुक्त वाक्य
ऽ ‘जो मोबाइल मेज पर रखी है, वह पूजा को पुरस्कार स्वरूप मिली है।‘ यह कैसा वाक्य है- विशेषण उपवाक्य

ऽ ‘जो, जब-जब, कि, इसलिए पर, और, तथा‘ शब्द हैं-संयोजक शब्द
ऽ संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया शब्द हैं- विकारी शब्द
ऽ समुच्चयबोधक, क्रियाबोधक, संबंधबोधक, विस्मयादिबोधक शब्द है- अविकारी शब्द

ऽ शब्द भाषा की कैसी इकाई है? – स्वतंत्र एवं सार्थक इकाई
ऽ सामान्यतः शब्द के कितने प्रकार होते हैं? – 2