अल्पजीवी पादप (ephemeral plant life cycle example meaning in hindi) सकृत्फली (monocarpic plant)

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(ephemeral plant life cycle example meaning in hindi) अल्पजीवी पादप क्या है ? सकृत्फली (monocarpic plant) किसे कहते है ? उदाहरण और जीवनकाल कितना होता है ?

जीवनकाल में विविधता (diversity in longevity) : निरंतर वृद्धिशील अग्रस्थ कलिकाओं की सक्रियता के कारण वृक्ष अनिश्चितकाल तक अथवा लम्बे समय तक अपनी लम्बाई अथवा ऊँचाई और क्षेत्रफल में वृद्धि कर सकते है। इसके विपरीत प्राणियों में वृद्धि काल सिमित होता है। सामान्यतया प्राणियों के परिमाप में वृद्धि इनके लैंगिक परिपक्वता प्राप्त कर लेने के बाद रुक जाती है। इसके विपरीत पौधों विशेषकर वृक्षों में ऐसा नहीं होता है। इसलिए प्राणियों के विपरीत अधिकांश आवृतबीजी वृक्षों का जीवनकाल असिमित होता है। प्रतिवर्ष इनमे नयी जड़ों , शाखाओं , पत्तियों , पुष्प और फलों की उत्पत्ति होती है। वृक्षों की लम्बाई और तने के घेरे में लगातार बढ़ोतरी होती रहती है। द्विबीजपत्री वृक्षों के तने का घेरा जैसे जैसे बढ़ता है तो इसके साथ ही इनकी पुरानी छाल (परित्वक) भी उतर जाती है और इस तने पर नयी छाल आ जाती है। परन्तु एकबीजपत्री वृक्षों जैसे नारियल में क्योंकि तने की द्वितीयक वृद्धि नहीं पायी जाती। अत: इनकी ऊंचाई अथवा लम्बाई तो बहुत अधिक बढ़ जाती है परन्तु तने की मोटाई नहीं बढती है , साथ ही ऐसे वृक्ष शाखाविहीन होते है। द्विबीजपत्री वृक्षों के दीर्घ जीवनकाल की तुलना इनका जीवनकाल सिमित होता है।

जीवनकाल की विविधता के आधार पर न केवल आवृतबीजियों अपितु अन्य संवहनी पौधों को भी विभिन्न वर्गों में बाँटा जा सकता है जो कि निम्नलिखित प्रकार से है –

1. अल्पजीवी पादप (Ephemeral plant) : इस श्रेणी में शामिल पौधों का जीवनकाल अत्यल्प अथवा बहुत छोटा , केवल कुछ सप्ताह से लेकर 1-2 माह का होता है। क्योंकि इनका वृद्धि काल बहुत थोड़ी अवधि के लिए होता है। जिसके कारण जीवनकाल भी छोटा हो जाता है। इस प्रकार के अल्पजीवी पौधे सामान्यतया मरूभूमि के अतिशुष्क क्षेत्रों या अत्यंत शीत प्रदेशों में पाए जाते है , जहाँ सामान्य जीवनयापन के लिए अत्यंत प्रतिकूल अथवा विषम परिस्थितियां मौजूद रहती है। इस श्रेणी के उदाहरणों में मोल्यूगो सरवियाना (जीवनकाल 10 से 15 दिन) और ऐरेबिडोप्सिस (जीवनकाल 20 से 28 दिन) आदि पौधों के नाम उल्लेखनीय है।

2. एकवर्षीय पादप (annuals) : वैसे तो अल्पजीवी पौधों को भी इस श्रेणी में रखा जा सकता है , लेकिन इस श्रेणी में सामान्यतया उन पादप प्रजातियों को शामिल किया गया है , जिनका जीवन काल अल्पजीवी पौधों की तुलना में तो निश्चित रूप से बहुत अधिक होता है लेकिन यह जीवन अवधि एक वर्ष तक ही सिमित होती है अथवा इससे कुछ कम होती है। इस एक वर्ष की अवधि के दौरान ही इन पौधों के जीवनचक्र की सभी गतिविधियों अथवा अवस्थायें संपन्न होती है। इनकी लम्बाई और क्षेत्र में वृद्धि होना और अन्य कार्य जैसे पुष्पन होता है , बीज बनते है और इनका प्रकीर्णन हो जाता है। ये सारे कार्य पुरे हो जाने पर इनके पादप शरीर की मृत्यु हो जाती है। उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि इनके बीज ही , इन पौधों की चिरकालिता संरचनाएं है जिनके द्वारा ये विषम परिस्थितियों में अपना अस्तित्व बनाये रखते है।

उदाहरण : गेहूं , मक्का और चावल आदि।

3. द्विवर्षीय पादप (biennial plants) : इस श्रेणी के पौधों को अपना जीवनचक्र सम्पूर्ण करने के लिए दो अनुकूल ऋतुओं अर्थात दो वर्षो की आवश्यकता होती है। प्रथम वर्ष में इनकी कायिक वृद्धि होती है जबकि दुसरे वर्ष में इनका पुष्पन और बीज निर्माण होता है। सामान्यतया इनमें खाद्य पदार्थो के संचय हेतु विशेष रूपांतरित संरचनाएँ जैसे – कंदिल जड़ें अथवा घनकंद और इसी प्रकार की संग्राहक संरचनाएं विकसित होती है। इनमें प्रतिकूल परिस्थितियों में पौधे के सफलतापूर्वक जीवनयापन अथवा चिरकालिता हेतु खाद्य पदार्थ संगृहीत होते है। उदाहरण : गाजर , मूली और चुकंदर।

4. बहुवर्षीय पादप (perennial plants) : इस श्रेणी के पौधों का जीवन काल निश्चित ही दो वर्षो से अधिक होता है। सामान्यतया ये अनेक वर्षो तक जीवित रहते है और विशेष मौसम अथवा ऋतू में इनका पुष्पन और बीज निर्माण होता है। आम , बरगद और पीपल आदि वृक्ष , कैर , कैरोंदा और आंकड़ा आदि क्षुप और सरपूंखा जैसे शाक आदि बहुवर्षीय पौधों के महत्वपूर्ण उदाहरण है।

बहुवर्षीय पौधों में पुष्पन और फल निर्माण की आवृति के आधार इनको दो उपश्रेणियों में विभेदित किया गया है –

(i) सकृत्फली (monocarpic plant) : इन बहुवर्षीय पौधों के सम्पूर्ण जीवनकाल में पुष्पन , फल निर्माण और बीजों का विकास केवल एक ही बार होता है। बीज निर्माण के बाद इनकी मृत्यु हो जाती है।

उदाहरण : अगेव और केला आदि।

(ii) बहुकृत्फली (polycarpic plants) : परिपक्व हो जाने के पश्चात् इन बहुवर्षीय पादपों में प्रतिवर्ष पुष्पन और फल निर्माण होता है , जैसे – आम और निम्बू आदि।