विद्युत आवेश की परिभाषा क्या है electric charge in hindi , आवेश के गुण , SI , CGS इकाई मात्रक

By  
सब्सक्राइब करे youtube चैनल

आवेश के गुण , SI , CGS इकाई मात्रक , विद्युत आवेश की परिभाषा क्या है electric charge in hindi , किसे कहते है ? विमा  :-

विद्युत आवेश : प्रसिद्ध वैज्ञानिक थेल्स (thales) ने बताया की जब काँच की छड़ को रेशम के कपडे से रगड़ा जाता है तो कांच की छड़ रगड़न के बाद छोटे छोटे कणों , कागज़ के टुकड़े इत्यादि को चिपकाना प्रारम्भ कर देता है , घर्षण प्रक्रिया (रगड़ना) के बाद पदार्थ सामान्य की तुलना में कुछ अलग व्यवहार प्रदर्शित करता है और पदार्थ के इस विशेष गुण को ‘विधुत आवेश ‘ नाम दिया गया।

पदार्थ द्वारा आवेश (विशेष गुण) ग्रहण करने के पश्चात पदार्थ को आवेशित पदार्थ कहा जाता है।

 

आवेश क्या है ?

किसी भी पदार्थ के निर्माण के लिए मूल कणो में से आवेश भी एक है , हालांकि आवेश की कोई निर्धारित परिभाषा (definition) नहीं है लेकिन आवेश को इसके (आवेश) के द्वारा उत्पन्न प्रभावों के माध्यम से समझाया जाता है।

आवेश एक द्रव्य पर उपस्थित वह गुण है जिसके कारण वह द्रव्य चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है या इन क्षेत्रों का अनुभव करता है।

उदाहरण :

कांच की छड़ को जब रेशम के कपडे से रगड़ा जाता है तो कांच की छड़ पर धन आवेश तथा रेशम के कपडे पर ऋण आवेश आ जाता है।

विद्युत आवेश : द्रव्य के साथ जुड़ी हुई वह अदिश भौतिक राशि है जिसके कारण चुम्बकीय और वैद्युत प्रभाव उत्पन्न होते है , आवेश कहलाती है। किसी वस्तु में इलेक्ट्रॉनों को अधिकता अथवा कमी से आवेश की अभिधारणा प्राप्त होती है। ऋणावेशित वस्तु में इलेक्ट्रॉनों की अधिकता व धनावेशित वस्तु में इलेक्ट्रॉनो की कमी होती है।

आवेश के गुण

1. समान आवेश एक दूसरे को प्रतिकर्षित तथा असमान आवेश आकर्षित करते है। वस्तुओं के आवेशित होने का सही परिक्षण प्रतिकर्षण के द्वारा ही होता है क्योंकि अनावेशित वस्तु और आवेशित वस्तु के मध्य आकर्षण हो सकता है तथा दो विपरीत आवेशित वस्तुओं के मध्य भी आकर्षण होता है।
2. आवेश एक अदिश राशि है।
3. आवेश सदैव द्रव्यमान से सम्बद्ध रहता है। आवेशित किये जाने पर वस्तु का द्रव्यमान परिवर्तित होता है। यदि वस्तु से इलेक्ट्रॉन हटा लिए जाए तो वस्तु धनावेशित हो जाएगी और उसका द्रव्यमान कम हो जायेगा तथा वस्तु में इलेक्ट्रॉन डाल दिए जाए तो वस्तु का द्रव्यमान बढ़ जायेगा और वस्तु ऋणावेशित हो जाएगी। इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान अतिन्यून (9.1 x 10-31 किलोग्राम ) होने के कारण वस्तु के द्रव्यमान की तुलना में उसे आवेशित किये जाने पर द्रव्यमान में परिवर्तन नगण्य होता है।
4. आवेश क्वान्टीकृत होता है।  अर्थात जब किसी भौतिक राशि के केवल विविक्त मान ही संभव होते है तो वह राशि क्वान्टीकृत कहलाती है।
मिलिकेन के तेल बूंद प्रयोग द्वारा यह सिद्ध हुआ कि आवेश का वह न्यूनतम मान जो प्रकृति में सम्भव है , मुक्त इलेक्ट्रॉन का आवेश है। यदि एक इलेक्ट्रॉन का आवेश (e = 1.6 x 10-19 कूलाम) एक प्राथमिक  इकाई माना जाए अर्थात आवेश का क्वांटम तो किसी वस्तु पर आवेश e के पूर्णांको के गुणनफल के बराबर होगा अर्थात q = ± ne , यहाँ n = 1 , 2 , 3 , 4 . . . .. .
5. आवेश अचर है। अर्थात आवेश निर्देश तंत्र पर निर्भर नहीं करता है अर्थात वस्तु के वेग में परिवर्तन से आवेश परिवर्तित नहीं होता है। वस्तु का आवेश घनत्व एवं द्रव्यमान चाल पर निर्भर करता है और चाल में वृद्धि के साथ बढ़ता है।
6. आवेश की इकाई :
SI मात्रक या इकाई = कुलाम  [1 कूलाम = 1 एम्पियर x 1 सेकंड]
CGS मात्रक = स्टेट कुलाम या फ्रेंकलाइन  [1 कुलाम = 3 x 109 स्टेट कूलाम ]
1 कुलाम आवेश = 3 x 109 esu आवेश = 1/10 emu आवेश = 1/10 ऐब कुलाम
esu = स्थिर वैद्युत इकाई
emu = विद्युत चुम्बकी इकाई

विद्युत

लगभग 600 ईसा पूर्व में, यूनान के दार्शनिक थेल्स ने देखा कि जब अम्बर को बिल्ली की खाल से रगड़ा जाता है, तो उसमें कागज के छोटे-छोटे टुकड़े आदि को आकर्षित करने का गुण आ जाता है। यद्यपि इस छोटे से प्रयोग का स्वयं कोई विशेष महत्व नहीं था, परन्तु वास्तव में यही प्रयोग आधुनिक विद्युत युग का जन्मदाता माना जा सकता है। थेल्स के दो हजार वर्ष बाद तक इस खोज की तरफ किसी का ध्यान आकृष्ट नहीं हुआ। 16वीं श्ताब्दी में गैलीलियों के समकालीन डॉ. गिलबर्ट ने, जो उन दिनों इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ के घरेलू चिकित्सक थे, प्रमाणित किया कि अम्बर एवं बिल्ली के खाल की भाँति बहुत-सी अन्य वस्तुएँ-उदाहरणार्थ, काँच और रेशम तथा लाख और फलानेल- जब आपस में रगडे जाते है, तो उनमें भी छोटे-छोटे पदार्थो को आकर्षित करने का गुण आ जाता है।

घर्षण से प्राप्त इस प्रकार की विद्युत को घर्षण-विद्युत कहा जाता है। इसे स्थिर विद्युत भी कहा जाता है, बशर्ते पदार्थों को रगड़ने से उन पर उत्पन्न आवेश वहीं पर स्थिर रहे जहाँ वे रगड़ से उत्पन्न होते है। अतः स्थिर-विद्युतिकी भौतिक विज्ञान की वह शाखा है, जिसकी विषय-वस्तु वैसे आवेशित पदार्थो के गुणों का अध्ययन है, जिन पर विद्युत आवेश स्थिर रहते है।

आवेशों के प्रकार– जब घर्षण से विद्युत उत्पन्न की जाती है, तो जिसमें वस्तु रगड़ी जाती है और जो वस्तु रगडी जाती है दोनों ही में समान परिमाण में विद्युत आवेश उत्पन्न होते है, लेकिन दोनों वस्तुओं पर उत्पन्न आवेशों की प्रकृति एक दूसरे के विपरीत होती है। एक वस्तु पर के आवेश को ऋण आवेश तथा दूसरी वस्तु पर के आवेश को धन आवेश कहते है। आवेशा के लिए ऋणात्मक एवं धनात्मक पदों का प्रयोग सर्वप्रथम बेंजामिन फ्रेंकलिन ने किया था। बेंजामिन फ्रेंकलिन के अनुसार (प) काँच को रेशम से रगड़ने पर काँच पर उत्पन्न विद्युत को धनात्मक विद्युत कहा गया और (पप) एबोनाइट, या लाख की छड़ को फलानेल या रोएँदार खाल-इन दोनों में से किसी से रगड़ने पर उन पर उत्पन्न विद्युत को ऋणात्मक विद्युत कहा गया। घर्षण के कारण दोनों प्रकार की विद्युत बराबर परिमाण में एक ही साथ उत्पन्न होती है। नीचे के सारणी में कुछ वस्तुएँ इस ढंग से सजायी गयी है कि यदि किसी वस्तु को, किसी दूसरी वस्तु से रगड़कर विद्युत उत्पन्न की जाय, तो सारणी में जो पहले (पूर्ववर्ती) है, उसमें धन आवेश तथा जो बाद मे (उत्तरवर्ती) है, उसमें ऋण आवेश उत्पन्न होता है

1. रोआँ 2. फलानेल 3. चपड़ा4. मोम5. काँच

6. कागज  7. रेशम 8. मानव शरीर  9. लकड़ी  10. धातु

11. रबर  12. रेजिन  13. अम्बर  14. गंधक 15. एबोनाइट

उदाहरण- यदि काँच (5) को रेशम (7) के साथ रगड़ा जाय तो काँच में धन आवेश उत्पन्न होता है, लेकिन यदि काँच (5) को रोआँ (1) से रगडा जाय तो काँच में ऋण आवेश उत्पन्न होगा (उपर्युक्त सारणी के नियमानुसार)

सजातीय आवेशों में प्रतिकर्षण होता है अर्थात धन आवेशित वस्तुएँ एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती है और ऋण आवेशित वस्तुएँ भी एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती है। विजातीय आवेशों में आकर्षण होता है अर्थात एक धन आवेशित वस्तु और एक ऋण आवेशित वस्तु में आकर्षण होता है।

विद्युतीकरण का सिद्धान्त- घर्षण के कारण उत्पन्न आवेशों की घटना को समझाने के लिए भिन्न-भिन्न वैज्ञानिकों ने समय-समय पर अनेक सुझाव दिए है। वर्तमान में आधुनिक इलेक्ट्रॉन सिद्धांत सर्वमान्य है।

इलेक्ट्रॉन सिद्धांत- इस सिद्धान्त का विकास थॉमसन, रदरफोर्ड, नील्स बोर आदि वैज्ञानिकों के कारण हुआ है। इस सिद्धान्त के अनुसार जब दो वस्तुएँ आपस में रगड़ी जाती है, तो उनमें से एक वस्तु के परमाणुओं की बाहरी कक्षा से भ्रमणशील इलेक्ट्रॉन निकलकर दूसरी वस्तु के परमाणुओं में चले जाते है। इससे पहले वस्तु के परमाणुओं में इलेक्ट्रॅनों की कमी तथा दूसरी वस्तु के परमाणुओं के इनेक्ट्रॉन की वृद्धि हो जाती है। अतः पहली वस्तु धन आवेशिक एवं दूसरी वस्तु ऋण आवेशित हो जाती है।

62 Comments on “विद्युत आवेश की परिभाषा क्या है electric charge in hindi , आवेश के गुण , SI , CGS इकाई मात्रक

    1. कमल पटेल

      विधुत आवेश :प्रशिद्ध वैज्ञानिक थेल्स ने बताया कि जब किसी कांच की छड़ पर रेशम के कपडे को रगड़ा जाता है |तो काच की छड़ रगड़न के बाद छोटे छोटे कड़ो और कागज के टुकड़ों को चिपकाना प्रारम्भ कर देता है घर्षण प्रक्रिया के पश्चात पदार्थ सामान्य की तुलना में कुछ अलग व्यवहार करता है और पदार्थ के इस विशेष गुण को विधुत आवेश कहते है

      1. NILESH KUMAR

        Sir mujhe basic physics ke notes chahiye please help me sir Mai what’s app no. 8407040285

      2. Sonu

        Sir mujhe notes chahiye
        Sir help me
        6395286374 sir what’s aap kar dejiy

        1. admin Post author

          सोनू , ऐसी कोई सुविधा नहीं , अगर भविष्य में ऐसी कोई सुविधा रखते है तो यह सबके लिए समान रूप से लागू होगी | धन्यवाद

      3. Siddharth maurya

        Sir mujhe physics ki notes chahiye up board 12th ka what’s app no. 7618804239

    2. Amarjeet kumar

      Awesh kisi padarth ka Wah gun hai jo electrono ke asthanantaran ke phalswarup uttpan hota hai

      1. subodh ku

        Class12 physics and chemistry kaSir mujhe notes chayie what’s app no 9523149260

  1. Santosh kumar ram

    सर् हमें नोट चाहिए physics and chemistry 12th के मेरा फोन नम्बर 9006580817

  2. Pradeep Yadav

    Sir James numerical notes chahiye plz send sir

    1. Vikesh sunariwal

      Mere whats number 7728854795 par nots chahiye guru g (thanks)

  3. mahesh chand meena

    sir muje notes 11th 12th maths and physics ke chiye

  4. arjun kumar yaduwanshi

    sir mujhe physics ka numerical chahiye arjun kumar whatsap no. 6203437511

  5. Sonu gotka

    Sirहमे सोनु मास्टर जी गोटका सरधना मेरठ के नोट्स गेरनेहै subject physics

    1. Rabindra kumar

      Sir mujhe physics ka notes chahiye
      Mera whatsapp number 8969057613

  6. Rehan akhter

    Sir appka study material hamko chyea. Mara m no 9934131509

    1. admin Post author

      रहमान अख्तर , ऐसी कोई सुविधा नहीं है जिससे हम आपको नोट्स आपके नंबर पर भेज सके | कृपया वेबसाइट से ही अध्ययन करे , धन्यवाद

  7. Vishal kumar

    Sir mujhe nots chahiye ye hai mere whatsapp no 7462811879

  8. Mohd shakir

    Sir mujhko physics ke notes chahiye mera WhatsApp number ye h (8410536180)

  9. ram niwas

    sir total notes please whatsapp no. 82188887579 par send kar dena

  10. Faijan khan

    Plzz sir mughko physces boilogy chemstriy teeno subject ka note chahiye sir mera whatshapp number
    vodafone no 7379503361 jio no 6394144624 hai dear sir jii plzz send krdo

  11. Ajay Kumar

    Please share 12th class all subject notes my WhatsApp No. 8738888944

  12. Vikash

    sir mujhe physics and chemistry ka notes chaye mera whatsapp no 6202480702

  13. VIJAY PRATAP SINGH

    Sir physics notes hindi pdf send kr denge kya WhatsApp number 9628789423

  14. Dharamveer singh

    Sir mujhe intermediate ki physics ke notes chahiye kaise milenge my number 7409680339

Comments are closed.