द्विक लवण किसे कहते है , द्विक लवण की परिभाषा क्या है , (double salt in hindi)

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(double salt in hindi) द्विक लवण किसे कहते है , द्विक लवण की परिभाषा क्या है : लवण अलग अलग प्रकार के हो सकते है।  क्रिस्टल का आकार तथा क्रिस्टल की संरचना लवण के रंग , गुण , स्वाद , पारदर्शिता आदि को प्रभावित करता है।

द्विक लवण दो अलग अलग सामान्य क्रिस्टलीय लवणों का मिश्रण होता है अर्थात दो भिन्न सामान्य क्रिस्टलीय लवणों से मिलकर द्विक लवण का निर्माण होता है। 

याद रखे कि यहाँ अलग अलग से तात्पर्य है कि मिश्रण में प्रत्येक लवण अपनी अद्वितीय क्रिस्टलीय संरचना रखता है , दोनों अलग अलग अद्वितीय लवण के गुणों के आधार पर द्विक लवण के गुण परिवर्तित होते है। 

अत: हम कह सकते है कि द्विक लवण यौगिक का एक अलग ही वर्ग होता है , द्विक लवण बनाने के लिए दोनों साधारण लवण समान ऋणायन होते है तथा दोनों समान समान ऋणायन युक्त सामान्य लवणों को आपस में मिश्रित करके शुष्क होने तक इसे वाष्पित किया जाता है जिसके फलस्वरूप द्विक लवण प्राप्त होता है। 

द्विक लवण के उदाहरण : 

पहला उदाहरण टुट्टन का लवण है जो एक द्विक लवण है , इसका उपयोग किसी रासायनिक अभिक्रिया के विश्लेषण के लिए किया गया और रसायनों में प्रकाश के फैलाव की घटना को समझने के लिए भी इसी लवण का उपयोग किया गया। 

दूसरा उदाहरण आता है फिटकिरी का जो एक प्रकार का द्विक लवण है , इसका उपयोग हमारे दैनिक जीवन में बहुत अधिक होता है जैसे फिटकरी का उपयोग अचार आदि को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है अर्थात अचार को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के लिए फिटकरी को परिरक्षण के रूप में किया जाता है आदि। 

द्विक लवण का अस्तित्व केवल ठोस अवस्था में ही होता है अर्थात यह ठोस अवस्था में ही पाया जाता है , जब द्विक लवण को जलीय विलयन में डाला जाता है तो यह आयनों में विभक्त हो जाता है। 

इन लवणों में धातु आयन अपनी सामान्य संयोजकता प्रदर्शित करता है। 

द्विक लवणों में तीन आयन बनते है जिनमे दो सामान्य धनायन और एक ऋण आयन होता है।