अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark reaction in hindi) , Calvin – Benson cycle/C3 plants

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अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark reaction) : डार्क रिएक्शन की खोज Black mann (1905) नामक वैज्ञानिक के द्वारा की गयी।

इस अभिक्रिया के जैव रासायनिक चरणों का अध्ययन कैल्विन नामक वैज्ञानिक के द्वारा अपने साथियो के साथ की।

अप्रकाशिक अभिक्रिया हरितलवक के स्ट्रोमा भाग में संपन्न होती है।

विभिन्न प्रकार के पादपो में कार्बन डाई ऑक्साइड को ग्रहण करने हेतु विभिन्न पदार्थ पाए जाते है जिसके कारण कार्बन डाइ ऑक्साइड के अपघटन हेतु निम्न विधियाँ पायी जाती है –

1. Calvin – Benson cycle/C3 plants

2. Hatch & Slack pathway /C4 plants

3. Crass ulacian acid metabolism / CAM plants

1. Calvin – Benson cycle/C3 plants

प्रकृति में पाए जाने वाले कुछ पादपो के हरितलवक के स्ट्रोमा भाग में अवशोषित CO2 के अणुओं को शर्करा रूप कार्बोहाइड्रेट के रूप में स्थरिकृत करने हेतु सर्वप्रथम एक तीन कार्बन वाले यौगिक के द्वारा ग्रहण किया जाता है , जिसके कारण ऐसे पादपो को C3 पादपों के नाम से जाना जाता है।

 C3 पादपों में अवशोषित CO2 के शर्करा रुपी कार्बोहाइड्रेट के रूप में स्थिरीकृत पथ को कैल्विन – बैन्सन तथा उनके साथियों के द्वारा खोजा गया जिसके कारण यह चक्र Calvin – Benson चक्र कहलाता है।

उपरोक्त वैज्ञानिको के द्वारा इस चक्र की खोज हेतु सन 1946 से 1953 के मध्य कार्य किया गया तथा इस हेतु इन वैज्ञानिको के द्वारा एक कोशिकीय हरित – शैवाल chlorella तथा seuedesmus पर C14 के Rediorsotopic पदार्थ C14O2 का उपयोग करते हुए उपरोक्त पथ की खोज की तथा यह प्रतिपादित किया गया की CO2 को ग्रहण करने वाला प्रथम यौगिक PGA है।  [phosphoglyceric acid] [3 कार्बन वाला यौगिक]

इस कार्य हेतु उपरोक्त वैज्ञानिको को सन 1961 में नोबल पुरस्कार (NP) दिया गया।

इस चक्र में C6H12O6 के निर्माण हेतु संपन्न होने वाली अभिक्रियाएँ निम्न प्रकार से है।

i. Ribulose monophosphate का Phosphorylation : अप्रकाशिक अभिक्रिया में कार्बन डाई ऑक्साइड को सर्वप्रथम 5 कार्बन वाले Ribulose 1,5-Biphosphate के द्वारा ग्रहण किया जाता है जिसका निर्माण Ribulose monophosphate से phospho pento kinase enzyme की उपस्थिति होता है , इस क्रिया हेतु ATP के 6 अणु की आवश्यकता होती है।

नोट : कार्बन डाइ ऑक्साइड के अपघटन के अन्तर्गत एक अणु ग्लूकोज के निर्माण हेतु छ: अणु कार्बन डाई ऑक्साइड की आवश्यकता होती है जिसे ग्रहण करने हेतु 6 अणु Ribulose – 1,5-Biphosphate की आवश्यकता होती है।

ii. Ribulose – 1,5-Biphosphate का कार्बोक्सिलीकरण : Ribulose mono फॉस्फेट के फास्फोरिलीकरण से निर्मित Ribulose – 1,5-Biphosphate , कार्बन डाई ऑक्साइड तथा जल के अणु के साथ मिलकर कार्बोऑक्सीलेज एंजाइम की उपस्थिति में प्रथम स्थायी यौगिक PGA का निर्माण करता है।

iii. PGA का फॉस्फोरिलीकरण : C3 चक्र के अंतर्गत प्रथम स्थायी यौगिक PGA के निर्माण के पश्चात् PGA को Phosphoglucer Kinase एंजाइम की उपस्थिति में 1 , 3 – di PGA में बदल दिया जाता है।

iv. 1,3 Di PGA का अपचयन : 12 अणु 1,3 di PGA के निर्माण के पश्चात् NADPH + H+ की उपस्थिति में स्था एन्जाइम Trios Phosphate dehydrogenase कि उपस्थिति में 12 अणु 3-PGAL का निर्माण होता है तथा साथ में सह उत्पाद के रूप में फॉस्फोरिक अम्ल के 12 अणुओं का निर्माण होता है।

नोट : 10 अणु PGAL से Ribulose मोनो फॉस्फेट का संश्लेषण निम्न अवस्थाओं में संपन्न होता है –

(a) DHAP का निर्माण : 10 अणु PGAL में से 4 अणु trios phosphate isomarase enzyme की उपस्थिति में DHAP का 4 अणुओं में परिवर्तित हो जाते है जिसे Di hydroxy acetone फॉस्फेट के नाम से जाना जाता है।

(b) फ्रक्टोस – 1,6 – बाई फॉस्फेट का निर्माण : Fructose -1,6- Bi phosphate के निर्माण हेतु दो अणु PGAL तथा 2 अणु DHAP का उपयोग किया जाता है , इन अणुओं के उपयोग से Fructose -1,6- Di phosphate का निर्माण होता है तथा उपयोग किया जाने वाला एंजाइम Aldotase कहलाता है।

इस अभिक्रिया के फलस्वरूप 2 अणु Fructose -1,6- Di phosphate के निर्मित होते है।

(c) Fructose -1,6- Di phosphate से फ्राक्टोस -6- फॉस्फेट का निर्माण : Fructose -1,6- Di phosphate के दो अणुओ से phosphatase नामक एंजाइम की उपस्थिति में दो जल के अणुओं के साथ अभिक्रिया करके 2 अणु Fructose -6-Phosphate के निर्मित करते है तथा सह उत्पाद के रूप में दो अणु फास्फोरिक अम्ल के उत्पन्न होते है।

(d) Xylulose -5- फॉस्फेट तथा erythrose-5- phosphate का निर्माण : इस अभिक्रिया के अन्तर्गत 2 अणु fructose-6-phosphate के तथा 2 अणु PGAL के उपयोग किये जाते है व Trans Ketolase नाम एंजाइम की उपस्थिति में 2-2 अणु Xylulose-5-phosphate तथा erythrose-5-phosphate के निर्मित किये जाते है।

(e) Pseudoheptulose -1,7 Phosphate का निर्माण : इस अभिक्रिया के अन्तर्गत 2 अणु DHAP तथा 2 अणु erythrose-5-फॉस्फेट के उपयोग किये जाते है जिनके फलस्वरूप Transaldolose नामक एन्जाइम की उपस्थिति में 2 अणु Pseudoheptulose -1,7, Di phosphate के निर्मित किये जाते है।

(f) Pseudoheptulose 7 फॉस्फेट का निर्माण : इसके निर्माण के अन्तर्गत 2 अणु Pseudoheptulose1-7 Di phosphate के अणु के उपयोग किये जाते है।

(g) Ribose -5- फॉस्फेट तथा Xylulose-5-फॉस्फेट का निर्माण : 2 अणु PGAL तथा 2-अणु Pseudoheptulose1-7-phosphate के उपयोग करके Transketolase नामक एंजाइम की उपस्थिति में 2 अणु Ribose-5-फॉस्फेट तथा 2 अणु Xylulose-5-फॉस्फेट के निर्मित होते है।

(H) Ribulose Mono phosphate का निर्माण : इस क्रिया के अन्तर्गत 2 अणु Ribulose-5-phosphate के phosphopeuto isomrase की उपस्थिति में 2 अणु Ribulose-5-फॉस्फेट का निर्माण करते है , वही 4 अणु Xylulose-5-phosphate , phosphopneto apimerase की उपस्थिति में 4 अणु Ribulose-5-Phosphate का निर्माण कर लेते है इसके फलस्वरूप 6 अणु Ribulose मोनो फॉस्फेट का पुर्नस्थापना होता है जिनका फास्फोरिलीकरण 6 अणु Ribulose-1-5-Di phosphate का निर्माण कर देता है जो कार्बन डाई ऑक्साइड के अणुओं को पुनः ग्रहण कर C3 चक्र को बनाये रखता है।

नोट : C3 चक्र के अंतर्गत ग्लूकोज के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सभी अभिक्रिया पादपो में होने वाले श्वसन की क्रिया ग्लाइकोलाइसिस की अभिक्रियाओ की विपरीत अभिक्रिया होती है जिसके कारण इसे Glycolytic उत्क्रमण या Glycolytic Reversion के नाम से जाना जाता है।