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क्रांतिक कोण , पूर्ण आन्तरिक परावर्तन , शर्तें , उदाहरण

प्रश्न 1: क्रातिक कोण की परिभाषा दीजिए अपतर्वनाक और क्रान्तिक कोण में सम्बन्ध ज्ञात कीजिए तथा पूर्ण आन्तरिक परावर्तनप कि परिभाषा देकर इसकी शर्त लिखिए।

क्रांतिक कोण (critical angle):- सघन माध्यम में आपतन कोण का वह मान जिसके लिए विरल माध्यम में आपवर्तन कोण 90 degree होता है। क्रान्तिक कोण कहते है।

नोट:-

1. काँच और हवा के लिए क्रान्तिक कोण का मान लगभग 42 डिग्री होता है।

2. हीरे और हवा के लिए क्रांतिक कोण का मान 24.2 डिग्री होता है।

3. पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की घटना में 100 % (प्रतिशत) आपतित ऊर्जा परावर्तित हो जाती है।

पूर्ण आन्तरिक परावर्तन(Full internal reflection):- यदि सघन माध्यम में आपतित किरण को क्रांतिक कोण से अधिक कोण पर आपतित कराये तो यह उसी माध्यम में लौट जाती है इस घटना को पूर्ण आन्तरिक परावर्तन कहते है।

शर्तें (conditions):-

1. किरण सघन माध्यम से चलकर विरल माध्यम के पृष्ठ पर पड़नी चाहिए।

2. आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए।

प्रश्न 2 : पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के उदाहरण समझाइये ?

(1)मरीचिका:-

चित्र

गर्मी के दिनों में जब तेज गर्मी पड़ती है तो पृथ्वी का धरातल गर्म हो जाता है और हवा की परते भी गर्म हो जाती है। गर्म होने पर हवा की परतों का अपवर्तनांक कम हो जाता है। अतः पृथ्वी तल से जैसे जैसे ऊपर की ओ जाते हैं हवा की परतों का अपवर्तनांक बढ़ता जाता है। जब किसी पेड़ से प्रकाश की किरणे नीचे की ओर आती है तो सघन से विरल माध्यम में जाने के कारण उत्तरोत्तर अभिलम्ब से दूर हटती जाती है और पृथ्वी के निकट आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से अधिक हो जाने के कारण पूर्ण आन्तरिक परावर्तन हो जाता है और प्रेरक्षक को ये किरणे पृथ्वी के पृष्ठ के नीचे से आती हुई इस प्रकार मालूम पड़ती है जैसे कि वहाँ तालाब या पोखर से परावर्तित किरणे पहुच रही हो इस प्रकार वह जल होने की भ्रम की स्थिति हो जाती है जिसे मरीचिका कहते है।

(2) हीरा (Diamond):- हीरे और हवा के लिए क्रांतिक कोण का मान 24.20 होता है। अतः हीरे में प्रकाश की किरण यदि अन्दर पहुँच जाती है तो बार बार उसका पूर्ण आन्तरिक परावर्तन होता रहता है। इसलिए हीरे में चमक होती है हीरे की चमक कारीगर के तराशने पर ही निर्भर करती है वह इसको इस प्रकार तराशता हैं कि बार बार पूर्ण आन्तरिक परावत्रन की घटना हो अतः प्रकाश की किरण इसमें से बाहर न निकल पाने के कारण हीरा चमकता रहता है।

(3) किरण का 90 डिग्री एवं 180 डिग्री से मोडना:- इसके लिए विशेष आकृति का एक प्रिज्म लेते है। जिसका एक कोण 90 डिग्री और शेष दो कोण 45 डिग्री , 45 डिग्री के होते है। जब प्रकाश की किरण पृष्ठ पर लम्बव्त आपतित होती है तो बिना विचलित हुए सीधी चली जाती है और दूसरे पृष्ठ पर 45 डिग्री कोण पर आपतित होती है काँच और हवा के लिए क्रांतिक कोण का मान लगभग 42 डिग्री होता है। अतः पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की घटना होती है इस प्रकार चित्र में दिखाये अनुसार किरण को 90 डिग्री एवं 180 डिग्रीसे मोड़ा जा सकता है।

(4) प्रकाशीय तंतु (Optical filament):- यह बाल की आकृति का एक विशेष काँच का बना होता है। जिसके अन्दर वाले भाग को कोर कहते है। जबकि बाहरी भागको आछांदित भाग कहते है। आछंदित भाग का अपवर्तनांक क्लैडिंग परत अपवर्तनांक से थोड़ा कम होता है जब कोर के प्रकाश कि किरण कोर पर आपतित होता है तो आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से अधिक होने पर किरण का बार बार पूर्ण आन्तरिक परावर्तन होने से एक सिरे से दूसरे सिरे तक बिना ऊर्जा क्रान्ति के पहुंच जाती है।

7 comments

  1. Yadi kird viral se saghan madyme jaati h to critical angle and poord aantrik paravrtan kaya hoga ha to kaya hpga

    1. Viral se Sagan me Jane par Kiran wapas viral me kabhi nahi aaygi kyoki isme adaptor Kiran or prast ke bich angle apwartit Kiran or prast ke bich angle se Kam hota he

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