अर्द्धचालक में विद्युत चालन , धारा घनत्व , चालकता तथा प्रतिरोधकता का सूत्र , conduction in semiconductors in hindi

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conduction in semiconductors in hindi , अर्द्धचालक में विद्युत चालन , धारा घनत्व , चालकता तथा प्रतिरोधकता का सूत्र :-

प्रश्न : किसी भी नेज अर्द्धचालक के लिए उसमे उपस्थित नेज वाहक सांद्रता किन किन कारको पर निर्भर करती है ? सम्बंधित सूत्र लिखते हुए समझाइये।

उत्तर : किसी भी नेज अर्द्धचालक में किसी विशेष तापमान पर उत्पन्न नेज वाहक सान्द्रता ni का सूत्र निम्न प्रकार से दिया जाता है –

ni = A.T3/2 e-Eg/2KT

यहाँ K और A = नियतांक है।

T = तापमान

Eg = अर्द्धचालक के लिए वर्जित ऊर्जा अन्तराल है।

उपरोक्त सूत्र से यह स्पष्ट है कि नैज वाहक सांद्रता ni का मान अर्द्धचालक के तापमान T के साथ साथ अर्द्धचालक के पदार्थ की प्रकृति अर्थात अर्द्ध चालक के लिए वर्जित उर्जा अंतराल Eg पर भी निर्भर करता है।

जिन अर्द्धचालको के लिए ऊर्जा अन्तराल Eg का मान कम होता है उनके लिए नेज वाहक सांद्रता ni अधिक होती है जबकि जिन अर्द्धचालकों के लिए Eg का मान अधिक होता है उनके लिए ni का मान कम होता है।

अर्द्धचालको में होलो (holes) का प्रवाह एवं विद्युत चालन

किसी भी अर्द्धचालक में हॉलो के प्रवाह को निम्न चित्र की सहायता से समझाया जा सकता है –

जब अर्द्धचालक का तापमान बढ़ाया जाता है तब अनेक सहसंयोजी बंध टूटते है। प्रत्येक एक सहसंयोजी बंध के टूटने से एक मुक्त इलेक्ट्रॉन प्राप्त होता है जो क्रिस्टल में यादृच्छिक रूप से गमन कर सकता है। दिखाए गए चित्र में इस इलेक्ट्रॉन के अलग होने से स्थान A पर हॉल तैयार हो जाता है।

स्थान A के हॉल को भरने के लिए आस पास के सिलिकन के परमाणुओं के इलेक्ट्रॉन गति करने लगते है दिखाए गए चित्र में स्थान B का बाध्य इलेक्ट्रॉन अपने स्थान को छोड़कर स्थान A पर आ जाता है जिससे हॉल स्थान A से स्थान B पर स्थानांतरित होता है हुआ प्रतीत होता है।

चित्र से यह स्पष्ट है कि अर्द्धचालकों में इलेक्ट्रॉन एवं हॉल का प्रवाह एक दूसरे के विपरीत होता है।

ठीक इसी प्रकार दिखाए गए चित्रानुसार C स्थान का बध्य इलेक्ट्रोन स्थान B के हॉल पर चला जाता है जबकि स्थान B का हॉल स्थान C पर स्थानान्तरित हो जाता है।

प्रश्न : किसी भी अर्द्धचालक में विद्युत के चालन को समझाते हुए धारा घनत्व , अर्द्धचालन की चालकता तथा उसकी प्रतिरोधकता का सूत्र प्राप्त कीजिये।  

उत्तर : जब किसी अर्द्धचालक के सिरों के मध्य बैटरी नहीं लगाई जाती तब अर्द्धचालक में विद्युत क्षेत्र की अनुपस्थिति में सभी आवेश वाहक व यादृच्छिक गति करते है।

इनकी यादृच्छिक गति का नेट प्रभाव शून्य होता है।  इसलिए इस स्थिति में अर्द्धचालक में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है।

जब अर्द्ध चालक के दोनों सिरों के मध्य बैट्री को जोड़ा जाता है तब अर्द्धचालक में उत्पन्न विद्युत क्षेत्र के कारण सभी आवेश वाहक निश्चित दिशा में चलने लगते है। मुक्त इलेक्ट्रॉन विद्युत क्षेत्र के विपरीत जबकि हॉल विद्युत क्षेत्र दिशा में चलने लगते है।

आरोपित विद्युत क्षेत्र E के कारण मुक्त इलेक्ट्रोन एवं होल अपवाह करने लगेंगे।

यदि मुक्त इलेक्ट्रॉन एवं होलों की अपवाह चाल को क्रमशः Vn तथा Vp माने

तब –

Vn ∝ E [समीकरण-1]

Vp ∝ E    [समीकरण-1]

अथवा

Vn = μnE समीकरण-3

V = μpE समीकरण-4

आवेशों के अपवाह के कारण दोनों प्रकार के आवेशो से सम्बंधित धारा घनत्व को यदि क्रमशः Jp एवं Jn माना जाए तब –

कुल धारा घनत्व (J) = Jp + Jn समीकरण-6

चूँकि हम जानते है –

धारा घनत्व = आवेशो की सांद्रता x आवेश x अपवाह चाल

Jp = PeV= Pe μpE  समीकरण-7

इसी प्रकार –

J= n(-e)Vn

J= n(-e) μnE  समीकरण-8

उपरोक्त समीकरण-5 में समीकरण-7 एवं 8 से मान रखने पर –

धारा घनत्व (J) = Jp + Jn

J = Pe μpE  + n(-e) μnE

J = (Pe μp  + ne μn)E समीकरण-9

उपरोक्त समीकरण-9 किसी भी अर्द्धचालक के लिए उसके कुल धारा घनत्व को बताती है।

चूँकि J = σE

J/E =  (Pe μp  + ne μn)

चूँकि σ = J/E (चालकता)

σ = (Pe μp  + ne μn)  समीकरण-10

उपरोक्त समीकरण-10 किसी भी अर्द्धचालक के लिए उसकी चालकता का मान बताती है।

चूँकि किसी भी पदार्थ की प्रतिरोधकता उसकी चालकता का व्युत्क्रम होती है इसलिए –

प्रतिरोधकता (ρ) = 1/σ

(ρ) = 1/ (Pe μp  + ne μn)  समीकरण-11

उपरोक्त समीकरण-11 किसी भी अर्द्धचालक के लिए उसकी प्रतिरोधकता को बताती है।

नैज अर्द्धचालको तथा धातुओ की चालकता पर तापमान का प्रभाव :

जब किसी धातु का तापमान बढ़ाया जाता है तब उसमे उपस्थित मुक्त आवेशो (मुक्त इलेक्ट्रॉनो) की संख्या पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है।

तापमान के बढ़ने पर धातु के परमाणुओं एवं आयनों का कम्पन्न बढ़ जाता है जिसके कारण मुक्त इलेक्ट्रॉन की गतिशीलता में कमी आ जाती है इसी कारण धातुओं का तापमान बढाने पर उनकी चालकता कम होती जाती है।

अर्द्धचालको में सहसंयोजी बंध पाए जाते है इसलिए इनका तापमान बढाने पर इनके परमाणुओं एवं आयनों के कम्पनों पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है जबकि तापमान में वृद्धि के कारण सहसंयोजी बंध टूटने लगते है जिससे अर्द्धचालक में मुक्त आवेशो की सांद्रता बढ़ जाती है।  इसी कारण तापमान बढाने पर अर्द्धचालको की चालकता में वृद्धि हो जाती है।