खुला परिसंचरण तंत्र किसे कहते हैं ? बंद परिसंचरण तंत्र की परिभाषा क्या है ? closed and open circulatory system in hindi

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closed and open circulatory system in hindi खुला परिसंचरण तंत्र किसे कहते हैं ? बंद परिसंचरण तंत्र की परिभाषा क्या है ? अंतर write the difference between open type and closed type circulatory system ?

खुला और बंद प्रकार का परिसंचरण तंत्र –

रक्त परिसंचरण तंत्र का प्रकार : परिसंचरण तंत्र मुख्यतः दो प्रकार का होता है –

  • खुला परिसंचरण तंत्र– यह इनवर्टीब्रेट जैसे एनेलिड्स (उदाहरण – जोंक) आर्थोपोडा (उदाहरण – प्रोन) और मोलस्का (उदाहरण mussel) आदि में पाया जाता है अपवाद सिफैलोपोडा | यहाँ हीमोलिम्फ रक्त वाहिनियों में नहीं बहता बल्कि खुले स्थान और चैनलों द्वारा उत्तकों में बहता है जिन्हें साइनस अथवा हीमोसील कहते है | साइनस में रक्त , ऊत्तक कोशिकाओं के सीधे सम्पर्क में होता है | खुले साइनस से रक्त का प्रवाह बहुत धीरे होता है और ऑक्सीजन वाहक वर्णक सामान्यत: रक्त प्लाज्मा में घुले होते है |

खुला परिसंचरण तंत्र कॉकरोच के उदाहरण को लेकर समझा जा सकता है | ह्रदय लंबा नलिकाकार और 13 कोष्ठों युक्त होता है | यह हिमोसिल के पेरिकार्डियल साइनस में स्थित होता है | ह्रदय का प्रत्येक कोष्ठ अधर साइनस से दरार जैसे छिद्र ऑस्टिया द्वारा ऑक्सीकृत रूधिर प्राप्त करता है | कॉकरोच में रक्त परिसंचरण के लिए एलेरी (alary) पेशियाँ जिम्मेदार हैं | प्रथम प्रकोष्ठ में एओर्टा (aorta) होता है जो सिर के साइनस में खुलता है और यह पेरिकार्डियल साइनस से पैरिन्यूरल और पैरिविसरल साइनस द्वारा जुड़ा होता है |

  • बंद परिसंचरण तंत्र : यह तंत्र ऐनेलिड्स (हिरूडिनेरिया में नहीं) और सभी वर्टीब्रेटा में पाया जाता है | यहाँ रक्त बंद वाहिनियों में गति करता है और ऊत्तक कोशिकाओं के सीधे सम्पर्क में कभी नहीं आता है | रक्त परिसंचरण तंत्र धमनी और शिराओं का नेटवर्क है जो केन्द्र में ह्रदय से जुड़ा होता है | बंद परिसंचरण तंत्र में रक्त के अधिक तीव्र प्रवाह के लिए पर्याप्त रक्त दाब उत्पन्न किया जाता है | बंद परिसंचरण तंत्र में धमनियों पेशीय अंगों में उनकी आवश्यकतानुसार रक्त प्रवाह का नियमन करती है |

कशेरुकी ह्रदय : वर्टीबेट का ह्रदय एक पेशीय , अयुग्मित पुम्पिग अंग है जो कि दोनों फेफड़ों के मध्य में वक्ष गुहा के बायीं तरफ स्थित होता है | ह्रदय शरीर के विभिन्न भागों में रक्त के वितरण को सुगम बनाता है | यह जन्तु के सम्पूर्ण जीवन काल में नियमित संकुचन और शिथिलन करता रहता है | निम्न वर्टीब्रेट जैसे – अस्थिल और उपास्थिल मछलियों में ह्रदय नलिकाकार संरचना है जहाँ 4 मुख्य भाग होते है – साइनस विनोसस , निलय , आलिन्द और कोनस आर्टिरीओसस , एक दुसरे के पीछे स्थित होते है और कम अथवा अधिक एक रेखीय क्रम में व्यवस्थित होते हैं | परिवर्धन काल के दौरान उच्च वर्टीब्रेट में आलिन्द और निलय ही रहते हैं | हालाँकि ये इनके अन्दर स्थित विभिन्न कपाटों के संयोजन से जटिल हो जाते है और खण्डीय (compartmentalized)हो जाते है | इन स्थितियों में साइनस विनोसस और कोनस आर्टिरियोसस अपनी वास्तविक स्थिति से प्रतिस्थापित हो जाता है और आलिन्द की दाई दिवार में और सम्बन्धित पाशर्व aorta में स्थापित हो जाते है |

  1. मछलियों का ह्रदय : मछलियों में ह्रदय दो चैम्बर युक्त होते है | जो आलिन्द और निलय है और साथ ही इनसे जुड़े आवश्यक कोष्ठ सायनस विनोसस और कोनस आर्टियोसस होते हैं | मछली में ह्रदय गिल्स को छोड़कर समस्त शरीर से अनोक्सीकृत रक्त प्राप्त करता है | गिल्स से ऑक्सीकृत रक्त पृष्ठ aorta में इक्कठा किया जाता है और शरीर को आपूर्ति की जाती है | मछलियों में ह्रदय केवल अनोक्सीकृत रूधिर प्राप्त करता है इसलिए यह venous heart कहलाता है | प्रत्येक संरचना के दौरान रक्त ह्रदय में केवल एक बार प्रवेश करता है इसलिए यह एकल परिसंचरण कहलाता है |
  2. एम्फीबियन ह्रदय : यह आलिन्द के दो कोष्ठों में विभाजन के कारण 3 प्रकोष्ठ युक्त होता है | दायाँ आलिन्द शरीर से अनोक्सीकृत रूधिर और बायाँ आलिन्द फेफड़ों से ऑक्सीकृत रूधिर प्राप्त करता है | आलिन्द वाले भाग में दो प्रकार का रक्त पूरी तरह पृथक होता है | निलय अविभाजित अथवा अकेला होता है ताकि दोनों आलिन्दों से आने वाला रक्त निलय में मिश्रित हो जाए | दो अतिरिक्त कोष्ठ साइनस – विनोसस और कोनस आर्टिरियोसस भी उपस्थित होते हैं |

एम्फिबियन में दोहरा परिसंचरण होता है | रक्त ह्रदय में दो विभिन्न परिसंचरण द्वारा प्रवेश करता है | यह फेफड़ों से ऑक्सीकृत रक्त प्राप्त करता है (पल्मोनरी परिसंचरण) और शेष भाग से अनोक्सीकृत रूधिर प्राप्त करता है | (सिस्टेमिक परिसंचरण)

  1. सरीसृप ह्रदय : सरीसृप ह्रदय अपूर्ण रूप से चार प्रकोष्ठीय होता है जिसमें 2 आलिन्द और दो आंशिक विभाजित निलय होते हैं अपवाद – मगरमच्छ इसमें निलय पूर्ण विभाजित होते हैं | कोनस आर्टिरियोसस आंशिक रूप से निलय से जुड़ा होता है | साइनस विनोसस भी उपस्थित होता है | रेप्टेलियन ह्रदय arteric – venous और दोहरे परिसंचरण युक्त पाया जाता है |
  2. पक्षियों और स्तनधारियों में ह्रदय : मैमेलियन और एवीज ह्रदय चार कोष्ठीय , दो आलिन्द और दो निलय युक्त होते है | ह्रदय का दायाँ आधा भाग पल्मोनरी संचरण से सम्बन्धित होता है | दायाँ आलिन्द अनाक्सीकृत अथवा अशुद्ध रक्त शरीर से प्राप्त करता है और दायाँ निलंद इस अनाक्सीकृत रक्त को फेफड़ों में पम्प कर देता है | बायाँ आधा ह्रदय सिस्टेमिक परिसंचरण से सम्बन्धित होता है | दोनों पल्मोनरी और सिस्टेमिक परिसंचरण संयुक्त रूप से दोहरा परिसंचरण कहलाते हैं |

जैविक मशीनरी की प्रत्येक संरचनात्मक इकाई को अपने जीवन के अस्तित्व के लिए पोषण और ऑक्सीजन की नियमित आपूर्ति की आवश्यकता होती है | विभिन्न कोशिकाओं में पोषण और ऑक्सीजन की नियमित आपूर्ति प्राप्त करने और उपापचयी व्यर्थ को निकालने के लिए एक तंत्र मार्ग बनाता है अथवा मदद करता है जिसे परिसंचरण तंत्र अथवा शिरा तंत्र कहा जाता है |

जीवों की जटिलता बढ़ने के साथ ही उत्पन्न मांगों के प्रत्युत्तर में अनेक प्रकार के परिसंचरण विकसित होते है |