JOIN us on
WhatsApp Group Join Now
Telegram Join Join Now

हिंदी माध्यम नोट्स

Categories: Uncategorized

शहरी आतंकवाद क्या होता है | शहरी आतंकवाद किसे कहते है , परिभाषा , निकाय उपाय urban terrorism definition in hindi

city terrorism definition in hindi urban terrorism in hindi essay शहरी आतंकवाद क्या होता है | शहरी आतंकवाद किसे कहते है , परिभाषा , निकाय उपाय लिखिए ?

शहरी आतंकवाद
शहरी आतंकवाद में जैसा कि नाम से आभास होता है आतंकवादी गतिविधियां शहरी क्षेत्र में होती हैं। इसके विद्यमान रूप का एक नया तथ्य है-लोकतांत्रिक समाज को विखंडित करना है जो कि सर्वाधिकारवादी शासन को प्रोत्साहित करता है।

 शहरी आतंकवादी निकाय
अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद विस्तृत रूप से शहरी प्रकृति का है। इसकी शुरूआत 1940 में फिलिस्तीन के इरगन जूई लेयूमी (आई जेड एस) द्वारा हुई। लेयूमी ने शहरी क्षेत्र में आतंकवाद के संचालन में काफी प्रचार किया। सन 1969 में ब्राजील ने भी यही रास्ता अपनाया। यह शहरी आतंकवाद ब्राजील, ऊरूगवे, ग्वाटेमाला तथा फिलिस्तीन आदि देशों में साथ साथ शुरू हुआ। अराफात के फिलिस्तिनी लिब्रेशन ऑरगनाईजेशन (पी एल ओ का सबसे संघटक भाग) अलफतेह है जिसका आतंक सम्पूर्ण मध्य पूर्व में फैला हुआ है। शेष सभी अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी कार्यवाहियां पी एल ओ के छोटे छोटे संगठनों द्वारा की जाती है जिनका अपना एक स्थाई घर नहीं है। अतः उनके लिए आतंकवादी पद्धति का त्याग एक बहुत दूर का निर्धारित लक्ष्य होगा। लेबनान भी लम्बे समय से मुस्लिम कट्टरता का निशाना बन चुका है।

सरकारी अभिकर्ताओं पर व्यक्तिगत अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी आक्रमण नहीं करते, क्योंकि ऐसा करना इनके लिए महंगा शाबित होता है। लेकिन इरान, ईराक व लीबिया इस नियम के अपवाद हैं। ये आतंकवादियों को सुविधाएं उपलब्ध कराते तथा फतवा भी जारी करते हैं जैसे कि ब्रिटिश भारतीय लेखक सलमान रूश्दी के लिए ईश निन्दा के आरोप पर फतवा जारी किया था। यद्यपि, ईराक के शासक सद्दाम हुसैन ने 1988 में हजारों इराकी कुर्दो को खत्म करने के लिए आतंकवाद का प्रयोग किया। अल्जीरिया तथा मिश्र ने भी मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा किये गये आतंकवादी प्रचार का सहारा लिया। आई आर ए ने बड़े पैमाने पर जनता से धन लूटा तथा संपूर्ण सैनिक ढांचे के रूप में मुख्यता सुस्पष्ट उत्तरी आयरलैंड के क्षेत्र में कार्यवाही की। कटटर आई आर ए सदस्य आज भी सक्रिय हैं तथा हत्याएं करने की प्रक्रिया को जारी रखे हुए हैं।

एक अदृश्य लेकिन बहुत ही भयानक आंतक वर्तमान में जातीय विभेद (ऐथेनिक क्लिजिंग) है जो कि सभ्यताओं की शुरूआत से ही अपक रूप में मौजूद हैं और यह उन बहुसंख्यक तथा अल्पसंख्यक के बीच संघर्ष है जिसमें बहुसंख्यक जातीय समुदाय अल्पसंख्यक समुदाय के क्षेत्र विशेष पर अपना आधिपत्य जमाते हैं और यह व्यवहार में आज जारी है। इसकी शुरूआत मुख्यता हिटलर व स्टालिन से मानी जाती है व 1991 में यूगोस्लोविया के विघटन के बाद क्राशिया और बोसनिया हरजेग्रोबिन में यह बड़े पैमाने पर उत्पन्न हुआ। पूर्व सोवियत संघ के कई राज्यों में वह कुछ हद तक जर्मनी में नये नाजियों द्वारा तुर्की मेहमान मजदूरों के साथ जातीय संघर्ष पाया जाता है। अभी भी यहां कई ऐसी जगह हैं जहां इस प्रक्रिया का जोखिम चला आ रहा है जैसे कि मैकाडोनीय तथा स्लोवाकिया में। इस आतंक की वजह से आज बड़े पैमाने पर मानव दुःख व्याप्त है जो 20वीं शताब्दी में आतंकवाद का सबसे खराब रूप माना जा सकता है। इस भयानक प्रक्रिया के लिए वो व्यक्ति जिम्मेदार हैं जो एक दूसरे की हत्या करने या खत्म करने को प्राथमिकता देते हैं न कि साथ साथ जीवन जीने को। अतः आज जातीय या नस्लीय विभेद आतंकवाद का भयानक रूप धारण करता जा रहा है।

शहरी आतंकवादियों की तकनीकें
प्रबंधन के दौरान शहरी आतंकवादियों के द्वारा कई प्रकार की तकनीकें अपनाई जाती हैं जो कि इस प्रकार से हैं:
1) खाड़कू अर्थात् आतंकवादी-पर्यावरण तथा प्राणी के अधिकारों की रक्षा करना, गुट में होती मानव दुर्घटना को बचाना तथा उनके द्वारा बम के प्रयोग को परिरूद्ध करना व दूसरे हिंसक साधनों जो कि सम्पत्ति को नष्ट करते हैं को रोकना इत्यादि कार्य करते हैं जिससे जनता से मिलती सहानुभूति को बनाए रखा जा सके।

2) शहरी आतंकवादियों के द्वारा बम विस्फोट करना दूसरी तकनीक है। यह बहुत ही लोकप्रिय तकनीक है क्योंकि इसमें बम लगाने वाले व्यक्ति को बहुत ही कम जोखिम उठाना पड़ता है। यह वास्तव में सबसे ज्यादा भयानक व खूनी तकनीक है जिसमें हमेशा जन दुर्घटनाएं होती हैं। इस प्रकार के मामले में जनता को सबसे ज्यादा विरक्ति होती है। यांत्रिक कृत्रिमता बढ़ रही है व इस विकासवादी प्रक्रिया ने बम डालने वाले के लिए इसे बहुत ही छोटा बना दिया है जो बहुत कामयाब साधन है। यह अब इतनी ऊंचाई पर पहुंच चुका है कि हथियारों के प्रयोग पर रोक अब सिर्फ सामाजिक या मनोवैज्ञानिक हो सकती हैं, तकनीकी नहीं। इस प्रकार आतंकवाद के विरूद्ध जनता की जागरूकता की जरूरत है।

3) कुछ समय शहरी आतंकवादी मुठभेड़ आधारित अभेदकारी दुर्घटना करने के बजाय व्यक्ति विशेष को निशाना बनाकर गोली मारने जैसे साधनों के प्रयोग का प्रयत्न करते हैं। कुछ ऐसे विकास भी हुए हैं जिसने इस तकनीक को बहुत ज्यादा प्रभावित किया है जैसे कि परिष्कृत निशाना, (जो आतंकवादी को अपनी बंदूक को छिपाने में सफल बनाती है। जिससे वह अपने लक्ष्य को बहुत ही कम दूरी से साध सके), नियंत्रित आवाज के यंत्र का प्रयोग लम्बी दूरी हेतु सुविधाएं और हाल ही में जमीन से जमीन पर तथा जमीन से आकाश में वार करने वाली कीमती और कृत्रिम मिसाईल का प्रयोग।

4) छीना झपटी या धोखाधड़ी करना आतंकवाद के दूसरे कई रूप हैं। छीना छपटी की तकनीक का प्रयोग कंपनियों या अधिक ताकतों से उन्हें डराकर बड़े स्तर पर धन ऐंठने के लिए किया जाता है जैसे कि क्रांतिकारी या व्यावसायिक निकायों से बड़े स्तर पर फिरौती वसूलती है। इस धन से आतंकवाद आगे बढ़ता है। दूसरी तकनीकि अर्थात् धोखाधड़ी भी जनता को आतंकित करती है जो कि सीधी साधी जनता से ताकत या धोखाधड़ी के आधार पर पैसे वसूलती है।

5) किसी व्यक्ति विशेष का अपहरण करना भी शहरी क्षेत्र में काफी प्रचलित आतंकवादी तरीका है। यह सबसे ज्यादा उत्पीड़क तकनीक है जो बहुत प्राचीन है तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर है। इस विधि का प्रयोग आतंकवादियों के द्वारा अपने राजनीतिक उद्देश्य को प्राप्त करने व रियायते लेने, जैसे कि अपने साथी बन्दी आतंकवादियों को छुड़ाना, सरकार की नीतियों को बदलवाना व यहां तक की सरकार को बदलना शामिल है इत्यादि के लिए किया जाता है।

6) आतंक को बढ़ाने के लिए मेजबान को बन्दी बनाना आतंकवादियों का एक और रास्ता है। यह अपहरण से भिन्न तकनीक है इसमें मेजबान सभी के परिचित स्थान पर बंदी होता है। घर में मेजबान को बन्दी करने का तात्पर्य होता है कि उनके सगे संबंधी अर्थात् परिवारवालों व साथियों पर दबाव डालना तथा राजनीतिक मेजबान को बंदी का तात्पर्य आम जनता में अपने उद्देश्यों को उजागर करना होता है। कुछ समय मेजबान बंदियों को सुरक्षित रखा जाता है तथा उनके अनुसार स्थान चुना जाता है तथा फिरोती की रकम प्राप्त होने के बाद उन्हें जीवित ही सुरक्षित छोड़ दिया जाता है।

7) आतंक को बढ़ाने के लिए विमान अपहरण, रेलगाड़ी या जहाज अपहरण जैसे साधनों को भी प्रयोग किया जाता है। इसमें बंदी वाहन गतिशील रहता है तथा सामान्यतया यह मालूम होता है कि इस वक्त वह वाहन या बंदी कहां है। शहरी क्षेत्र में इस प्रकार के कदम उठाने की स्थिति की उपलब्धता होती है क्योंकि विमान, रेलगाड़ी या जहाज आदि शहरी जीवन के आधार है। ज्यादातर विमान अपहरण का प्राथमिक उद्देश्य राजनीतिक कारणों से अपने उद्देश्यों का प्रचार करना है।

शहरी आतंकवाद को रोकने के उपाय
शहरी आतंकवाद से लड़ने के लिए कई पद्धतियों को प्रयोग किया जाता है जिनमें से कुछ इस प्रकार से हैं:
1) वह व्यक्ति जिसे धमकियां मिली हैं या डराया गया है उसे सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाये ताकि उसकी रक्षा के लिए कुछ किया जा सके। घुसपैठिया धोखा देने के लिए हर एक तरीका अपनाएगा अतः सुरक्षा गार्डो को प्रवेश द्वार पर स्टाफ के सदस्यों के मिलने वाले व उनके वाहन की पूरी तरह जांच करनी चाहिए। सुरक्षा गार्डो के प्रशिक्षण व सतर्कता में आवश्यक सुधार किया जाये। यदि आवश्यक हो तो ऑफिस की इमारत में गोली रोक दस्ता अर्थात् बुलेट प्रूफिंग, लगाया जाये।

2) विस्फोटक जांच तकनीक में अत्यावश्यक सुधार किया जाये। विद्युत गोलीबारी साधन के लिए जांच तकनीक को व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। मानव खोजकर्ता की सामान्य इंद्रियों (जैसे देखना, सूंघने, सुनने या छूने) को विकसित किया जाये। बहुत सारी जांच चैकियां स्थापित की जाये तथा इसके लिए आवश्यक अनुसंधान हो ।

3) यदि हथियारबंद आतंकवादियों के हमले की संभावना है तो आतंकवादियों के संभावित शिकारी की प्रशिक्षित सुरक्षा रक्षकों के द्वारा सुरक्षा करने के जरूरत होगी। प्रशिक्षित अंगरक्षकों के द्वारा शिकार व्यक्ति को इस प्रकार की सलाह देकर खतरे में पड़ने से बचाया जा सकता है। निजी हथियारों का आगमन आतंकवादियों के लिए काफी सहायक रहा है अतः इस समस्या से निपटने के लिए सुरक्षा ताकतों को तुरन्त कार्यवाही करने व ठीक जगह गोली चलाने के लिए व्यक्तिगत रूप से प्रशिक्षित करना होगा। आतंकवादी गोलाबारी इत्यादि में सैनिकों और सशस्त्र पुलिस के व्यक्ति से कम अनुभवी होते हैं जिससे अचानक किये जाने वाले खतरे को कुछ मात्रा तक कम किया जा सकता है तथा कुछ समय तक वे पराजित किये जा सकते हैं।
4) जब आतंकवादियों का शिकार व्यक्ति कहीं यात्रा कर रहा है तो यह जोखिम भरा होता है विशेष कर कार से यात्रा। यात्रा सुरक्षा का मामला काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। एक अपहरण या हत्या के लिए एक बहुत संगठित योजना की जरूरत होती है इसलिए । अपहरणकर्ता को शिकारी व्यक्ति की यात्रा का विस्तृत ज्ञान होना चाहिए। इस प्रकार संभावित शिकारी व्यक्ति के आवागमन पर सख्त सावधानी रखनी चाहिए तथा यात्रा की योजनाओं के कई रूप होने चाहिए। ताकि अपहरणकर्ता मजबूरन अपना दूसरा शिकारी तलाश करने लगे। तथा हवाई या समुद्री यात्राओं में भी इसी प्रकार के निर्देशों का प्रयोग करे द्य शिकारी हवाई यात्री को जितना संभव हो सके विशेषतया टिकट की जांच या भोजनव्यवस्था के समय अप्रकट रहना चाहिए।
5) सामान्य पुलिस के काम के दौरान भी विस्फोट तथा आतंकवाद विरोधी दस्तों के विशेषज्ञों को तैनात किया जाये या इन दस्तों को एक ऐसा रूप दिया जाये जिससे ये जनता से मिलने वाली सहानुभूति को अपने कार्यों से रोक सके। आतंकवाद विरोधी दस्तों को आपराधिक व राजनीतिक आतंकवादियों अर्थात् दोनों को ही बेदखल करने के योग्य होना चाहिए। एक आपराधिक मामले को रोकथाम के तरीके से ज्यादा व शक्ति के कम से कम प्रयोग से हल करना चाहिए। बचाव कार्यवाही में चतुराईपूर्ण निर्णय व समय की बहुत कीमत होती है। उचितता अर्थात् परिशुद्धि भी बहुत महत्वपूर्ण है।

6) आतंकवादियों के हमले से जनता की सुरक्षा करना एक अच्छे खुफिया विभाग या दस्ते पर निर्भर करता है। अतः प्रत्येक देशों के खुफिया संगठनों के बीच एक सकारात्मक सहयोग । होना चाहिए। खुफिया सेवा में गोपनीयता या सतर्कता से पालन करना चाहिए। खुफिया और निजी निगरानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मानव खुफिया को पूरक रखा जाये और इसे उसकी जगह प्रतिस्थापित नहीं किया जाना चाहिए। पुलिस तहकीकात में मदद के लिए सुरक्षा कवच अवश्य हो तथा टेलीफोन टेप करने और इन्हें दूसरे यंत्र से गुप्त रूप से सुनने की सविधा दी जाये व विद्यत मॉनीटर भी उपलब्ध कराये जाये।

7) आतंकवाद के निवारण के लिए छदम व्यक्तिता को रोकना चाहिए तथा दूसरे देश से आने वाले सैलानियों की पहचान व जांच परिशुद्धता से होनी चाहिए जिससे की धोखेबाजी न हो सके। अंगुली के निशान (फिंगर प्रिंटस) की जांच प्रभावकारी रूप से आतंकवाद, अफीम की तस्करी तथा दूसरे अंतर्राष्ट्रीय अवरोध को रोकने के साधन के रूप में होनी चाहिए, जिससे कि स्वस्थ व्यवस्था में गिरावट न आ सके।

8) एक दृढ़ धारणा की प्रवृत्ति आतंकवाद या अपराध को डराती ही नहीं है अपितु इसे रोकती भी है लेकिन इसका सबसे अत्यावश्यक भाग है गवाह तथा प्रमाण एकत्रित करना। सफलतापूर्वक प्रश्नावली के लिए दोषी द्वारा दिये गये उत्तरों या कथनों व वास्तविक तथ्यों से प्रमाणों का मिलान करना चाहिए। यद्यपि जूरी के द्वारा की गई सुनवाई न्याय व स्वतंत्रता के लिए सबसे उत्तम साधन हो सकती है।

Sbistudy

Recent Posts

Question Tag Definition in english with examples upsc ssc ias state pcs exames important topic

Question Tag Definition • A question tag is a small question at the end of a…

2 weeks ago

Translation in english grammer in hindi examples Step of Translation (अनुवाद के चरण)

Translation 1. Step of Translation (अनुवाद के चरण) • मूल वाक्य का पता करना और उसकी…

2 weeks ago

Report Writing examples in english grammer How to Write Reports explain Exercise

Report Writing • How to Write Reports • Just as no definite rules can be laid down…

2 weeks ago

Letter writing ,types and their examples in english grammer upsc state pcs class 12 10th

Letter writing • Introduction • Letter writing is an intricate task as it demands meticulous attention, still…

2 weeks ago

विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक विशेषताएँ continents of the world and their countries in hindi features

continents of the world and their countries in hindi features विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक…

2 weeks ago

भारत के वन्य जीव राष्ट्रीय उद्यान list in hin hindi IAS UPSC

भारत के वन्य जीव भारत में जलवायु की दृष्टि से काफी विविधता पाई जाती है,…

2 weeks ago
All Rights ReservedView Non-AMP Version
X

Headline

You can control the ways in which we improve and personalize your experience. Please choose whether you wish to allow the following:

Privacy Settings
JOIN us on
WhatsApp Group Join Now
Telegram Join Join Now