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चीनोपोडियेसी – कुल क्या है (chenopodiaceae family in hindi) पौधों के नाम लिस्ट चिनोपोडियेसी

(chenopodiaceae family in hindi) चीनोपोडियेसी – कुल क्या है पौधों के नाम लिस्ट चिनोपोडियेसी के बारे के जानकारी लक्षण गुण वानस्पतिक नाम बताइए ?
चीनोपोडियेसी – कुल (chenopodiaceae family) :
(चीनीपोडियम कुल , पालक कुल ; Goose foot family , beet family)
वर्गीकृत स्थान : बेन्थम और हुकर के अनुसार
प्रभाग – एन्जियोस्पर्मी
उप प्रभाग – डाइकोटीलिडनी
वर्ग – मोनोक्लेमाइडी
श्रेणी – कर्वेम्ब्री
कुल – चीनोपोडियेसी

कुल चीनोपोडियेसी के विशिष्ट लक्षण (salient features of chenopodiaceae)

  1. अधिकांश सदस्य एकवर्षी अथवा बहुवर्षी शाक , मुख्यतः लवणोद्भिद और स्पष्टत: मरुद्भिदीय लक्षणों युक्त।
  2. तना और पत्तियाँ प्राय: माँसल और कोमल।
  3. पुष्प क्रम ससीमाक्षी अथवा पेनिकल।
  4. पुष्प छोटे , केवल एक चक्रीय परिदलपुंज , नियमित , उभयलिंगी अथवा एकलिंगी , पंचतयी।
  5. पुंकेसर-5 , परिदल सम्मुख।
  6. जायांग द्विअंडपी , युक्तांडपी अंडाशय उधर्ववर्ती , एककोष्ठीय , आधारीय बीजांडन्यास।
  7. फल दृढ फलिका जो चिरलग्न परिदलों में आवरित रहता है।

प्राप्तिस्थान और वितरण (occurrence and distribution )

द्विबीजपत्री पौधों के इस कुल में लगभग 105 वंश और 1400 पादप जातियाँ सम्मिलित की गयी है जो कि विश्व के सामान्यत: सभी भागों में पाई जाती है। परन्तु अधिकांशत: इस कुल के पौधे मरुदभिदीय और लवणोद्भिदीय आवासों में मुख्यतः प्रेरित घास के मैदानों , उत्तर अमेरिका और भूमध्यसागर तटीय क्षेत्रों में पाए जाते है।

कायिक लक्षणों का विस्तार (range of vegetative characters)

प्रकृति और आवास : इस कुल के सदस्य सामान्यतया एकवर्षीय अथवा द्विवर्षीय शाक होते है लेकिन कुछ सदस्य क्षुप होते है , जैसे – साल्सोला , कदाचित , लघु वृक्ष जैसे हेलोजाइलोन जो लगभग 20 फूट ऊँचाई तक का छोटा वृक्ष होता है।
एक पादप साल्सोला फोइटिडा को साल्टवर्ट कहते है और यह समुद्री किनारे पर खारी मिट्टी में उगने वाला लवणोदभिद पादप है , सुयडा तथा सेलोकोर्निया की विभिन्न जातियाँ दलदली स्थानों में पाई जाती है।
मूल : मूसला जड शाखित।
स्तम्भ : उधर्व , शाकीय , बेलनाकार , रोमिल , ठोस , शाखित और हरा।
पर्ण : सामान्यतया सरल और एकान्तरित लेकिन सेलीकोर्निया और नीट्रोफिला में पत्तियाँ सम्मुख , कुछ अन्य उदाहरणों जैसे स्यूडा में पत्तियाँ , छोटी और माँसल और सघन रोमिल परत द्वारा आवरित होती है।
सेलीकोर्निया में स्तम्भ मांसल और संधित होता है प्रत्येक पर्व कप के समान चक्र में समाप्त होता है। मांसल कप पर्व संधि पर स्थित दो संयुक्त समानित पर्णों का प्रतिनिधित्व करता है।

पुष्पी लक्षणों का विस्तार (range of floral characteristics)

पुष्पक्रम : सामान्यतया मिक्षित , ससीमाक्षों के गुच्छ , ससीमाक्ष युग्म शाखित के रूप में प्रारंभ होते है लेकिन चरम शाखन में एकल शाखित ससीमाक्ष में परिणित हो जाते है पुष्प सामान्यतया लघु और हरे रंग के होते है।
पुष्प : पुष्प सहपत्री , त्रिज्यासममित , सूक्ष्म , अवृन्त अथवा अवृंत प्राय: , एकपरिदलपुंजी उभयलिंगी अथवा एकलिंगी। पादप उभयलिंगाश्रयी जैसे – सारकोबेटस अथवा एकलिंगाश्रयी जैसे – ग्रेइया , में हो सकते है। जायांगधर कदाचित परिजायांगी जैसे बीटा।
परिदल पुंज : सामान्यतया 5 परिदल पाए जाते है जिनको टेपल्स कहते है , परिदल अथवा टेपल्स बाह्यदलाभ होते है , कभी कभी परिदलों की संख्या 3-4 जैसे – सेलीकोर्निया में या केवल 2 जैसे – एट्रीप्लेक्स में हो सकती है। परिदल स्वतंत्र या संयुक्त होते है। परिदलपत्र सामान्यत: चिरलग्न और इनका विन्यास कोरछादी होता है। कभी कभी नर पुष्पों में परिदल पुंज अनुपस्थित होता है।
परिदल सामान्यतया समान आकार के होते है लेकिन कुछ वंशो में जैसे हेलोक्निमम और ऐलेक्जेंड्रा में ये आकार और स्वरूप में भिन्न होते है।
परिदल सामान्यतया हरे , पतले , का भाग या पक्षमय , कंटकी अथवा माँसल हो सकते है और फलों के प्रकीर्णन में सहायक होते है।
पुमंग : सामान्यतया पुंकेसर-5 , सामान्यतया पुंकेसरों की संख्या परिदलों के बराबर होती है और पुंकेसर परिदल सम्मुख होते है .कुल के विभिन्न सदस्यों में यहाँ तक कि एक जाति के विभिन्न पौधों में भी पुंकेसरों की संख्या में भिन्नता देखी जा सकती है जैसे – चीनोपोडियम में। स्वतंत्र पुंकेसरी , भीतर को वक्रित परिदलभिमुख , आधारलग्न , परागकोष द्विकोष्ठी और स्फुटन लम्बवत।
जायांग : द्विअंडपी अथवा त्रिअंडपी , युक्तांडपी , अंडाशय , उधर्ववर्ती लेकिन कुछ पौधों जैसे चुकंदर में अंडाशय अधोवर्ती अथवा अर्ध अधोवर्ती , अंडाशय एककोष्ठीय और बीजांडन्यास आधारीय होता है। वर्तिका एकल , अन्तस्थ , छोटी , वर्तिकाग्र द्विशाखी।
फल और बीज : परिदलपुंज में आवरित नट अथवा एकिन , चुकंदर में पिक्सीडियम बीज भ्रूणपोषी और भ्रूण वक्रित।
परागण और प्रकीर्णन : कुल चीनीपोडीयेसी के सदस्यों में परागण किस प्रकार होता है , यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। पर अधिक सम्भावना यहाँ वायु परागण की ही है क्योंकि पुष्प अत्यंत छोटे होने के साथ साथ गन्धहीन और मकरंदहीन होते है स्वपरागण भी संभव है।
पुष्प सूत्र :

आर्थिक महत्व (economic importance)

I. खाद्योपयोगी पादप :
  1. चीनोपोडियम एल्बम – बथुआ , सब्जी के लिए।
  2. चीनोपोडियम म्यूरेल – चौलाई , सब्जी के लिए।
  3. चिनोपोडियम क्विनोआ – बीज उबाल कर खाए जाते है।
  4. स्पाइनेसिया ओलेरेसिया – पालक सब्जी के लिए।
  5. एट्रीप्लेक्स हार्टेन्सिस – कच्चे पर्ण सब्जी के रूप में खाए जाते है।
  6. बीटा वल्गेरिस – चुकंदर , इसकी लाल और मोटी जड़ें खाने के काम आती है , इसकी एक किस्म बीटा वल्गेरिस वेरायटी रापा शक्कर बनाने के काम आती है , इसमें शर्करा की मात्रा 7% से 15% तक होती है। जिस प्रकार भारत में शक्कर के लिए गन्ने का महत्व है , उसी प्रकार यूरोप में चुकंदर महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त , चुकंदर के कंदील जड़ों से लाल रंग भी निकाला जाता है।
II. शोभाकारी पादप :
  1. कोचिया इंडिका – बुई।
  2. कोचिया स्कोपेरिया
  3. सेलीकोर्निया हर्बेसिया।
  4. चिनोपोडियम बोट्रिस – Jerusalem oak.
  5. चिनोपोडियम एम्ब्रोसिआयाडिस – Mexican Tea
III. पशुचारा :
  1. एट्रीप्लेक्स क्रेसीफ़ोलिया।
  2. साल्सोला ब्रायोस्मा।
  3. स्यूडा फ्रूटीकोसा – लूनक , ऊँट इसे चाव से खाते है।
  4. चिनोपोडियम एल्बम – बथुआ।
IV. अन्य :
  1. चीनोपोडियम एम्ब्रोसोइडिस – इस पौधे से प्राप्त तेल हुकवर्म के विनाश हेतु प्रयुक्त करते है।
  2. साल्सोला फोइटिडा – इस झाड़ी से शोरा प्राप्त किया गया है , प्राय: क्षारीय भूमि में इसका पौधा पाया जाता है। इससे सड़ी मछली जैसी गंध आती है और ऊँट इसे बड़े चाव से खाता है।

बन्धुता और जातिवृतीय सम्बन्ध : कुल चीनोपोडियेसी की अमेरेन्थेसी कुल से अत्यधिक समानता है क्योंकि दोनों कुलों में पुंकेसर एक चक्र में पाए जाते है। अंडाशय एककोष्ठीय होता है और बीजांड केवल एक और आधारीय होता है लेकिन दोनों कुलों के पुष्पक्रम और परिदलपुंज भिन्न (अर्थात अमेरेन्थेसी में स्पाइक पुष्पक्रम और परिदल पत्र शुष्क) होते है।

हचिन्सन के अनुसार चीनोपोडियेसी एक विकसित कुल है , जिसकी उत्पत्ति संभवतः केरियोफिल्लेशस पूर्वजों से हुई है।

कुल चीनोपोडियेसी के प्रारूपिक पादप का वानस्पतिक वर्णन (botanical description of typical plant from chenopodiaceae)

चीनोपोडियम एल्बम लिन. (chenopodium album linn.) :
स्थानीय नाम – बथुआ।
प्रकृति और आवास – बहुतायत से पाया जाने वाला एकवर्षीय शाकीय खरपतवार।
मूल : शाखित मूसला जड़।
स्तम्भ : उधर्व , शाखित , कोणीय अथवा धारीधार , हरा अथवा बैंगनी , शाकीय।
पर्ण : सरल , एकान्तरित , सवृंत , अननुपर्णी , अंडाकार अथवा अधिगोल भालाकार , स्तम्भीय और शाखीय , अच्छिन्नकोर अथवा दाँतेदार , शिराविन्यास एकशिरीय जालिकावत।
पुष्पक्रम : संघनित ससीमाक्षी।
पुष्प : अवृंत , सहपत्री , पूर्ण , त्रिज्यासममित , उभयलिंगी , पंचतयी , जायांगधर।
परिदलपुंज : परिदलपत्र – 5 , बाह्यदलाभ विन्यास कोरछादी , पृथक परिदली अपाती।
पुमंग : पुंकेसर-5 , स्वतंत्र पुन्केसरी , परिदल सम्मुख एक चक्रिका पर स्थित , परागकोष द्विकोष्ठी , अंतर्मुखी आधारलग्न।
जायांग : द्विअंडपी , युक्तांडपी , अंडाशय उधर्ववर्ती , एक कोष्ठीय , बीजांडविन्यास आधारीय , बीजांड एक और वक्रित।
फल : अस्फुटन शील यूट्रीकल , जो अपाती परिदल पुंज में परिबद्ध रहता है।
पुष्प सूत्र :

प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1 : चिनोपोडियेसी कुल को किस वर्ग में रखा जाता है –
(अ) पोलीपेटेली
(ब) गेमोपेटेली
(स) मोनोक्लेमाडी
(द) उपरोक्त कोई नहीं
उत्तर : (स) मोनोक्लेमाडी
प्रश्न 2 : साल्वर्ट कहलाता है –
(अ) साल्सोला
(ब) एट्रीप्लेक्स
(स) चीनोपोडियम
(द) सेलीकोर्निया
उत्तर : (अ) साल्सोला
प्रश्न 3 : मांसल कप पर्व संधि पायी जाती है –
(अ) चीनोपोडियम में
(ब) एट्रीप्लेक्स में
(स) सेलीकोर्निया में
(द) माल्वा में
उत्तर : (द) माल्वा में
प्रश्न 4 : शर्करा प्राप्त होती है –
(अ) बीटा वल्गेरिस से
(ब) एट्रीप्लेक्स से
(स) चीनोपोडियम से
(द) सालसोला से
उत्तर : (अ) बीटा वल्गेरिस से
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