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Chemical composition of pancreatic juice in hindi pH मान, अग्नाशयी रस का रासायनिक संगठन क्या है अग्न्याशय रस
पढ़िए Chemical composition of pancreatic juice in hindi , अग्नाशयी रस का रासायनिक संगठन क्या है अग्न्याशय रस pH मान ?
पित्त रस के स्त्रावण का नियंत्रण (Control of bile secretion)
पित्त रस का तंत्रिका तंत्र से कोई नियंत्रण नहीं होता है। इसका मात्र रासायनिक (chemical) अथवा हारमोन्स (hormonal) नियंत्रण होता है। पित्त में उपस्थित पित्त लवण यकृत को पित्त रस स्त्रावण हेतु उत्तेजित करते हैं। इस कारण पित्त लवणों को कोलेरेटिक कारक (choleretic factor) कहा जाता है।
आंत्र में आये हुये भोजन में वसा की उपस्थिति से ग्रहणी की सतह से कोलीसिस्टोकाइनिन (cholecystokinin) नामक हारमोन का स्त्रावण होता है जो रूधिर द्वारा पित्ताशय पर पहुँचकर उसे पित्त रस को बाहर निकालने हेतु उत्तेजित करता है। यह क्रिया पित्ताशय की पेशियों में संकुचन (contraction) तथा पित्त नली (bile duct ) में उपस्थित ओडाई का स्फिंक्टर (sphinctor of Oddi) पर होती है। ये दोनों क्रियाएँ कोलीसिस्टोकाइनिन हारमोन द्वारा सम्पूर्ण होती है।
(B) अग्नाशयी रस (Pancreatic juice) : यह एक क्षारीय द्रव होता है जो अग्नाशय की एसीनाई कोशिकाओं (acini cells) द्वारा स्त्रावित किया जाता है। यह अग्नाशयी नलिका द्वारा ग्रहणी की दूरस्थ भुजा में आता है।
अग्नाशयी रस का रासायनिक संगठन (Chemical composition of pancreatic juice) :
| 1. कुल भार (Total amount) 2. विशिष्ट गुरूत्वत (Specific gravity) 3. pH 4. अकार्बनिक घटक (Inorganic components) 5. जल ( Water ) 6. कार्बनिक घटक (Organic components) | 500 से 800 मि.ली/ 24 घण्टे में : 1.008 से 1.030 : 8.0 (क्षारीय) : Na’, K+, Ca++, Mg++, CF, SO‡®, HPO4, HCO3 :98.5% ट्रिप्सीनोजन (Trypsiogen), कीमोट्रिप्सीनोनज (Chymotrypsiogen), कार्बोक्सीपेप्टीडेज (Carboxypeptidase), एमीनोपेप्टीडेज (Aminoeptidase), एमाइलेज (Amylase), माल्टेस (maltase), सुक्रेज ( Sucrase), लैक्टेस (lactase), लाइपेज (Lipase), कोलेस्टेरोल (Cholesterol estrase) एस्ट्रेज एवं पॉलीन्यूक्लिओटाइडेज (Polynucleotidase) आदि । |
अग्नाशयी एन्जाइम्स की पाचक क्रिया (Digestive action of pancreatic enzymes) (i) ट्रिप्सीनोजन (Trypsinogen) : यह एन्जाइम ट्रिप्सिन (trypsin) एन्जाइम की निष्क्रिय (inactive) प्रावस्था होती है। ट्रिप्सीनोजन ग्रहणी की श्लेष्मिका सतह द्वारा स्त्रावित एंटेरोकाइनेज (enterokinase) एन्जाइम द्वारा अपनी क्रियाशील अवस्था ट्रिप्सिन में बदल जाता है।
ट्रिप्सीनोजन एंटेरोकाइनेज, एन्जाइम ट्रिप्सिन
ट्रिप्सिन एक एन्डोपेप्टाइडेज (endopeptidase) एन्जाइम है जो प्रोटीन्स की मध्यस्थ अवस्थाओं पर क्रिया करके उन्हें पॉलीपेप्टाइड्स (polypeptides) एवं डाइपेप्टाइड्स (dipeptides) में परिवर्तित कर देता है ।
प्रोटीन्स ट्रिप्सिन पॉलीपेप्टाइड्स एवं डाइपेप्टाइड्स
(मेटप्रोटीन्स, प्रोटीओजेज एवं पेपटोन्स)
(ii) कीमोट्रिप्सीनोजन (Chymotrypsinogen) : यह भी प्रोटीन को पचाने वाला एक एन्डोपेप्टाइडेज एन्जाइम है जो ट्रिप्सिन की उपस्थिति में अपनी क्रियाशील अवस्था कीमोट्रिप्सिन (choymotrypin) में यह भी ट्रिप्सिन की तरह प्रोटीन्स को पॉलीपेप्टाइड्स एवं डाइपेप्टाइड्स में परिवर्तित कर देता है ।
कीमोट्रिप्सीनोजन ट्रिप्सिन एन्जाइम कीमोट्रिप्सिन
प्रोटीन्स कीमोट्रिप्सिन एन्जाइम पॉलीपेप्टाइड्स एवं डाइपेटाइड्स
(मेटप्रोटीन्स, प्रोटीओजेज
पेप्टोन्सद्ध
यह एन्जाइम जठन रेनिन (gastric rennin) की तरह दूध को दही में परिवर्तित करने की क्षमता भी रखता है।
(iii) कार्बोक्सीपेप्टाइडेज (Chrboxypeptidase) : यह एक शक्तिशाली एक्सोपेप्टाइडेज (expeptidase) एन्जाइम है। यह पॉलीपेप्टाइड्स एवं डाइपेप्टाइड्स के अन्तिम पेप्टाइड बंध (peptide bond) को तोड़ता है जिससे अमीनों अम्ल ( amino acid) स्वतंत्र होते हैं।
पॉलीपेप्टाइड्स कार्बोक्सी पेप्टाइडेज् एन्जाइम अमीनो अम्ल
(iv) अमीनोपेप्टाइडेज (Aminopetidase) : यह Mg या Mn युक्त एक एक्सोपेप्टाइडेज एन्जाइम है जो कार्बोक्सीपेप्टाइडेज की तरह पॉलीपेप्टाइड्स एवं डाइपेप्टाइड्स के अन्तिम पेप्टाइड बंध को तोड़ता है जिससे अमीनों अम्ल का निर्माण होता है।
(v) एमाइलेज या एंमाइलॉप्सिन (Amylase or Amylopsin) : यह एन्जाइम स्टार्च (starch) के पाचन का कार्य करता है। यह लार में उपस्थित एमाइलेज की तरह स्टार्च को माल्टोज में अपघटित कर देता है।
स्टार्च एमाइलेज माल्टोज → एन्जाइम
अग्नाशीय एमाइलेज कच्चे (raw), गेहूँ (wheat), चावल (rice) एवं मक्का (corn) इत्यादि पर भी क्रिया कर सकता है। इसकी पाचन क्षमता लार में उपस्थित एमाइलेज से अधिक होती है। (vi) माल्टेज (maltase) : यह माल्टोज (डाइसैकेराइड) का अपघटन करके उसे ग्लूकोज (मोनोसैकेराइड) में बदल देता है।
माल्टेज माल्टोज → ग्लूकोज
(vii) सूक्रेज (Sucrase) : यह सूक्रोज मोनोसैकेराइड्स) को अपघटित कर देता है ।
(vii) लेक्टेज (lactase) : यह दूध की शर्करा लैक्टोज (डाइसैकेराइड) को ग्लूकोज एवं गेलेक्टोस (दोनों मोनोसैकेराइड्स) में बदल देता है।
लेक्टोस लेक्टेज एन्जाइ → ग्लूकोज + गेलेक्टोस
(ix) लाइपेज या स्टिएप्सिन (Lipase or Steapsin): यह एन्जाइम पायसीकृत वसाओं emulsified fats) पर क्रिया करता है। यह पिन लवण एवं कैल्शियम ऑयन द्वारा उत्तेजित होता है । यह पायसीकृत वसाओं को वसा अम्ल ( fatty acids), ग्लिसरोल मोनोग्लीसराइड्स (monoglycerides) एवं डाइग्लीसराइड्स (diglycerides) में परिवर्तित कर देता है।
(x) कोलेस्टरोल एस्ट्रेज (Cholesterol estrase) : यह कोलेस्टरोल को उसके एस्टर (easter) में परिवर्तित कर देता है। यह की सतह से अवशोषित किया जा सकता है।
(xi) पॉलीन्यूक्लिओटाइडेजेस (polynucleotidases) : इनमें राइबोन्यूक्लिएस (ribonuclease एवं डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिए ( deoxyribonuclease) नामक एन्जाइम्स होते हैं। ये न्यूक्लिक अम्लों (nuclei acids) को उनकी सरल अवस्था न्यूक्लिओटाइड ( nucleotides) में परिवर्तित कर देते हैं।
न्यूक्लिक अम्ल (पॉलीन्यूक्लिओटाइड्स) → न्यूक्लिओटाइड्स
पॉलीन्यूक्लिओटाइडेस एन्जाइम
अग्नाशयी रस के स्त्रावण का नियंत्रण (Control of pancreatic juice secreation) : अग्नाशयी रस का नियंत्रण तंत्रिका एवं अंत स्त्रावी तंत्र द्वारा होता है। अग्नाशयी रस का स्त्रावण वेगस तंत्रिका (vagus nerve) की सहानुकम्पी शाखा (parasymathetic branch) द्वारा होता है।
भोजन के काइम के रूप में ग्रहणी में प्रवेश करने पर ग्रहणी की श्लेष्मिका सतह से एक अक्रियाशील पदार्थ प्रोसिक्रिटिन (prosecretin) का स्त्रावण होता है। यह HCI के सम्पर्क में आने पर क्रियाशील सिक्रिटन में बदल जाता है। सिक्रीटिन की उपस्थित को सर्वप्रथम बेलिस एवं स्टारलिंग (Bayliss and Starling) ने 1902 में प्रयोगों द्वारा दर्शाया था। यह हारमोन रूधिर द्वारा अग्नाशय पर पहुँचकर अग्नाशयी रस को स्त्रावित करवाता है।
हार्पर एवं रापर (Harper and Reper, 1943) के अनुसार पेंक्रियाजाइमिन (pancreozymin) हारमोन भी ग्रहणी की श्लेष्मिका सतह से स्त्रावित होता है जो अग्नाशय के एन्जाइम्स के उत्पादन कार्य को नियंत्रित करता है। सिक्रिटिन अग्नाशयी रस के आयतन को तथा पेंक्रियोजाइमिन उसकी मात्रा को नियंत्रित करता है।
इस प्रकार पित्त रस एवं अग्नाशयी रस द्वारा ग्रहणी में भोजन के अधिकांश अंश का पाचन होता है। विभिन्न पाचक रसों के मिलने से काइम ( chyme ) और भी अधिक पतला हो जाता है जिसे अब काइल (chyle) कहते हैं।
- आंत्र में भोजन का पाचन (Digestion of food in small intestine) : अर्धपाचित भोजन काइल के रूप में क्रमाकुंचन द्वारा छोटी आंत्र (small intestine) मुख्य भाग में प्रवेश करता है। आंत्र में भोजन का पुनः अपघटन होता है जिससे यह सरल अवस्था में बदल जाता है जो आंत्र की सतह से आसानी से अवशोषित किया जा सकता है।
छोटी आंत्र की अन्दर की सतह पर निम्न दो प्रकार की ग्रन्थियाँ पाई जाती है :
- बूनर्स ग्रन्थियाँ (Brunnar’s glands) : ये ग्रन्थियाँ मुख्य रूप से ग्रहणी की श्लेष्मिका सतह पर पाई जाती है। ये ग्रन्थियाँ एक क्षारीय पदार्थ स्त्रावित करती है जिसमें म्यूसिन (mucin) एवं एक प्रोटीन विघटनकारी एन्जाइम होता है। श्लेष्म विघटनकारी एन्जाइम प्रोटीन के पाचन का कार्य करता है।
- आंत्रीय ग्रन्थियाँ (Intestinal glands) : ये लीबरकूहन की प्रगुहिकाएँ (crypts of liberkuhn) होती है। ये रसांकुरों (villi) के बीच-बीच में स्थित होती है। इनमें विभिन्न प्रकार की कोशिकायें होती है जो श्लेष्म (mucous ) एवं अनेक प्रकार के एन्जाइम को स्त्रावित करती है।
दोनों प्रकार की ग्रन्थियों से स्त्रावित को आंत्रीय रस (intestinal juice) या सक्कस एण्टेरीकस (succus entericus) कहते हैं।
आंत्रीय रस (Intestinal juice ) : यह एक क्षारीय (alkaline) पदार्थ होता है जिसमें 98.5% जल, 1.0% अकार्बनिक घटक (inorganic components) एवं 0.5% कार्बनिक घटक (organic components) होते हैं।
आंत्रीय रस का रासायनिक संगठन (Chemical composition of pancreatic juice)
| 1. जल ( Water ) 2. अकार्बनिक घटक (Inorganic components) 3. कार्बनिक घटक (Organic components) | :98.5% : 1.0% Na+, Mg2+, Ca2+, CI HCO37K’, PO43- etc. :0.5% म्यूसिन (Mucin). एन्टेरोकाइनेज (Enterokinase), इरेप्सिन (Erespin), माल्टेस (Maltase), सूक्रेस (Sucrase), लैक्टेस (Lactase), लाइपेस (Lipase), पॉलीन्यूक्लिओडाइडेस (Polynucleotidases), न्यूक्लिओटाइडेज (Nucleotidase), फॉस्फेटेज (Phosphatases) न्यूक्लिओसाइडेज (Nucleosidase) आदि।
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आंत्रीय रस में उपस्थित कार्बनिक घटकों का वर्णन निम्न हैं:
- म्यूसिन (Mucin ) : यह भोजन को लसलसा एवं स्नेहकित ( lubricate) बनाने का कार्य करता है।
(ii) एन्टोरोकाइनेज (Enterokinase) : यह अग्नाशयी रस में उपस्थित निष्क्रिय ट्रिप्सिनोजन कां सक्रिय ट्रिप्सिन एन्जाइम में बदलता है।
(iii) इरेप्सिन (Erepsin) : यह अमीनोपेप्टाइडेस (aminopeptidase) एवं डाइपेप्टाइडेस (dilpetidase) एन्जाइम्स का समूह होता है जो प्रोटीन्स की मध्यस्थ अवस्थाओं (intermediate stages) को अन्त में अमीनों अम्लों (amino acids) में परिवर्तित कर देते हैं।
प्रोटीओजेस, पेप्टोन्स अमीनोपेप्टाइडेस डाइपेप्टाइड्स
एवं
पॉलीपेप्टाइड्स
डाइपेप्टाइड्स डाइपेप्टाइडेस अमीनो अम्ल
(iv) माल्टेस (Maltase) : यह भोजन में उपस्थित माल्टोस को सरल शर्करा ग्लूकोस (glucose) में बदल देता है।
(v) सूक्रेस या इन्वर्टेस ( Sucrase or Invertase) : यह भोजन में उपस्थित सूक्रोस को ग्लूकोस एवं फ्रक्टोस में परिवर्तित कर देता है।
सूक्रोस सूक्रेस या इन्वटेंस ग्लूकोस + फ्रक्टोस
(vi) लैक्टेस (Lactase) : यह लैक्टेस शर्करा को ग्लूकोस एवं ग्लेक्टोस में बदल देता है।
लैक्टोस लैक्टेस → ग्लूकोस + ग्लेक्टोस
(vii) लाइपेस (Lipase) : यह शेष बची पायसीकृत वसा को मोनो एवं डाइग्लिराइड्स, ग्लिसरॉल एवं वसीय अम्लों में परिवर्तित कर देता है ।
वसा लाइपेस मोनो एवं डाइग्लिसराइड्स + वसीय अम्ल + ग्लिसरॉल
ये न्यूक्लिक अम्लों पर क्रिया करते हैं जिससे न्यूक्लिओटाइड्स के मध्य उपस्थित फॉस्फोडाइस्टर (phosphodiester) बंध टूट जाते हैं तथा न्यूक्लिओटाइड्स एक दूसरे से पृथक् हो जाते हैं।
न्यूक्लिक अम्ल पालीन्यूक्लिओटाइडेस न्यूक्लिओटाइड्स
(ix) फॉस्फेटेज ( Phosphatase ) : ये न्यूक्लिओटाइड में उपस्थित फॉस्फोरिक अम्ल को पृथक करता है जिससे न्यूक्लिओसाइड का निर्माण होता है।
न्यूक्लिओटाइड फॉस्फेटेज → न्यूक्लिओसाइड + फॉस्फोरिक अम्ल
(x) न्यूक्लिओसाइडेज (Nucleosidase) : यह न्यूक्लिओसाइड पर क्रिया करता है जिससे पेंटोज शर्करा एवं नाइट्रोजन क्षारक का निर्माण करता है।
न्यूक्लिओसाइड न्यूक्लिओसाइडेज → पेंटोज शर्करा + नाइट्रोजन क्षारक
इस प्रकार आंत्र में भेजन के जटिल अवयव विभिन्न एन्जाइम्स द्वारा सरलतम अणुओं में बदल जाते हैं।
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