कोशिका क्या है , कोशिका सिद्धांत ,प्रोकैरियोटिक कोशिका व यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर cells in hindi

(cells in hindi ) कोशिका क्या है : सभी जीव कोशिकाओं से बने होते है , कोशिका के कारण ही जीव स्वतंत्र जीवन व्यापन करते है तथा जीवन के सभी आवश्यक कार्य करने में सक्षम होते है अत: कोशिका सजीव शरीर की जनन सम चयनात्मक झिल्ली से परिबद्ध , संरचनात्मक व चयन क्रियात्मक इकाई है |

खोज : कोशिका की खोज का श्रेय रॉबर्ट हुक (1665) को जाता है , सर्वप्रथम ल्युवेन होक (1683) ने जीवाणुओं , RBC , शुक्राणुओं एवं अन्य एककोशिकीय जीवों का अध्ययन कर जीवित कोशिकाओं को देखा – रॉबर्ट ब्राउन (1831) ने कोशिका में केन्द्रक की खोज की तथा कोर्टी (1772) ने जीवद्रव्य को सर्वप्रथम देखा |

कोशिका सिद्धांत (Cell theory)

1838 में जर्मनी के वनस्पती वैज्ञानिक मैथियस स्लाइडन व 1839 में श्वसन ने विभिन्न पादप कोशिकाओं व जन्तु कोशिकाओं का अध्ययन कर कोशिका सिद्धांत दिया |

उनके अनुसार सभी पादपों व जन्तुओं का शरीर कोशिकाओ व उत्पाद से बना होता है तथा कोशिकाओं के बाहर पतली परत पायी जाती है जिसे जीव द्रव्य झिल्ली कहते है |

कोशिका सिद्धांत को निगेली व रन्डोल्फ विर्चोव ने 1855 में नए रूप में प्रस्तुत किया |

  1. सभी जीव कोशिकाओं तथा उनके उत्पादों से बने होते है |
  2. नवीन कोशिकाओं का निर्माण पुनरावर्ती कोशिकाओं के विभाजन से होता है |
  3. कोशिका सजीव शरीर की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई होती है |
  4. कोशिका में जीव के आनुवांशिक गुण निहित होते है |
  5. प्रत्येक कोशिका जीवन के उद्भव व स्वभाव को प्रदर्शित करती है |

कोशिका का समग्र अवलोकन

आकार के अनुसार कोशिकाओ में विविधता पायी जाती है , ये छाडाकार , सर्पिल , कोमाकार एवं विभिन्न आकार की हो सकती है | पादप कोशिकाओं का व्यास 15 से 100 म्यू तक होती है | सबसे छोटी कोशिका माइक्रोप्लाज्मा 0.3 माइक्रोमीटर लम्बाई की जबकि जीवाणु कोशिकाओं 3 से 5 माइक्रोमीटर की होती है |  यूकेरीयेटिक कोशिकाओं में शुतरमुर्ग का अण्डा सबसे बड़ी कोशिका होती है जिसका व्यास 15 सेंटीमीटर होता है , मानव में RBC का व्यास 7 माइक्रो मीटर होता है , तंत्रिका कोशिका शरीर की सबसे लम्बी कोशिका होती है | पादपों में बोहमेरिया निविया की कोशिकाओं 22-55 cm होती है |

कोशिकाएँ विम्बाकर , बहुभुजी , स्तंभी , घनाभ या धागे के समान आकृति की होती है | कोशिकाओं का भिन्न रूप उनके कार्य के अनुसार होता है |

विकास व केन्द्रक की संरचना के आधार पर कोशिकाएँ दो प्रकार की होती है –

  1. प्रोकेरियोटिक कोशिका / अससीम केन्द्रकी कोशिका (Prokoryotic cells) : ऐसी कोशिकाएँ जिनमे झिल्ली युक्त सुसंगठित केन्द्रक तथा दोहरी झिल्ली युक्त कोशिकांगो का अभाव होता है प्रोकेरियोटिक कोशिकाओ में केन्द्रक के समतुल्य अंग को केन्द्रकाभ कहते है | इन कोशिकाओं में आनुवांशिक पदार्थ गुणसूत्रों के रूप में न होकर नग्न , न्यूक्लिक अम्ल के रूप में होता है इनमे स्ट्रान प्रोटीन का अभाव होता है तथा श्वसन के लिए मिसोसोम होते है |
  2. यूकैरियोटिक कोशिका / समीमकेन्द्रकी कोशिका (ukargatic cells) : सभी उच्च पादपों व प्राणियों यूकैरियोटिक कोशिका होती है , इनमें सुसंगठित व झिल्ली युक्त केन्द्रक पाया जाता है | तथा दोहरी झिल्ली से परिबद्ध कोशिकांग पाये जाते है | इनमे आनुवांशिक पदार्थ गुणसूत्रों के रूप तथा स्ट्रोन प्रोटीन पायी जाती है |

प्रोकेरियोटिक कोशिका व यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर

लक्षण प्रोकेरियोटिक कोशिका यूकैरियोटिक कोशिका
1.       आकार छोटी व आध्य होती है | बड़ी व विकसित होती है
2.       केन्द्रक सुसंगठित केन्द्रक का अभाव सुसंगठित केन्द्रक उपस्थित
3.       आनुवांशिक पदार्थ नग्न न्यूक्लिक अम्ल के रूप में गुणसूत्रों के रूप में
4.       कोशिकीय श्वसन मीजोसोम द्वारा माइटोकोंड्रिया द्वारा
5.       कोशिकांग अनुपस्थित उपस्थित
6.       राइबोसोम 70 S प्रकार का 80 S प्रकार का
7.       हिस्टोन प्रोटीन अनुपस्थित उपस्थित
8.       कोशिका विभाजन सरल प्रकार का उपस्थित
9.       उदाहरण शैवाल , जीवाणु , माइकोप्लाज्मा , प्लूरोनिमोनिया समजीव (PPLO) उच्च पादप व उच्च जंतु

पादप व जंतु कोशिका में अंतर

लक्षण पादप कोशिका जन्तु कोशिका
1.       कोशिका भित्ति उपस्थित होती है अनुपस्थित होती है
2.       रसधानी बड़ी होती है छोटी या अनुपस्थित होती है
3.       पोषण स्वपोषी होती है परपोषी होती है
4.       तारककाय अनुपस्थित उपस्थित
5.       भोजन संचय स्टार्च के रूप में ग्लाइकोजन के रूप में
6.       कोशिका विभाजन कोशिका विभाजन के समय कोशिका पट का निर्माण होता है कोशिका खांच के रूप में निर्माण होता है

 

 

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