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(atomic physics in hindi class 12th) परमाण्वीय भौतिकी :

प्रस्तावना : दार्शनिक वैज्ञानिको के अनुसार किसी भी पदार्थ के निर्माण के लिए मूलभूत पांच तत्वों की आवश्यकता होती है –

आकाश , पृथ्वी , वायु , जल एवं अग्नि।

महर्षि कणाद नामक वैज्ञानिक ने पदार्थ के निर्माण के लिए एक परिकल्पना दी जिसके अनुसार किसी भी पदार्थ का निर्माण सूक्ष्म अविभाज्य कण द्वारा होता है।

महर्षि कणाद ने अपने ग्रन्थ वैषेविक में इस सूक्ष्म अविभाज्य कण को परमाणु नाम दिया।

डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के अनुसार परमाणु एक ऐसा सूक्ष्म अविभाज्य व नष्ट न होने योग्य कण होता है जिसे किसी भी रासायनिक या भौतिक प्रक्रियाओ द्वारा न तो नष्ट किया जा सकता है और न ही विभाजित किया जा सकता है।

  • आवोगाद्रो नामक वैज्ञानिक के अनुसार परमाणु एक ऐसा सूक्ष्म कण है जो रासायनिक प्रक्रिया में तो भाग लेता है परन्तु एकल परमाणु का स्थायित्व नहीं होता है , ठीक इसी प्रकार अणु भी एक ऐसा सूक्ष्म कण है जो रासायनिक प्रक्रिया में भाग लेता है तथा एकल अणु का स्थायित्व भी होता है।
  • आवोगाद्रो के अनुसार समान ताप व दाब पर किसी भी गैस के समान आयतन में अणु या परमाणुओं की संख्या भी समान होती है।
  • आवोगाद्रो के अनुसार किसी भी पदार्थ के एक ग्राम अणु में परमाणुओं की संख्या 6.023 x 1023 होती है जिसे आवोगाद्रो संख्या कहते है।

J.J. थोमसन नामक वैज्ञानिक ने परमाणु में ऋणावेशित कण इलेक्ट्रॉन की खोज की।

गोल्डस्टिन नामक वैज्ञानिक ने कैथोड किरणों को परमाण्वीय गैस में से गुजारकर परमाणु के धनावेश की खोज की।
उपरोक्त तथ्यों से यह निष्कर्ष निकलता है कि परमाणु अविभाज्य कण नहीं है।

जे.जे. थॉमसन का परमाणु मॉडल

जे जे थोमसन के अनुसार –
  • परमाणु 10-10 मीटर कोटि की त्रिज्या का एक धनावेशित ठोस गोला होता है जिसका धनावेश व ऋण आवेश सम्पूर्ण गोले में समान रूप से वितरित रहते है।
  • इस धनावेशित ठोस गोले में ऋणावेशित कण इलेक्ट्रॉन जगह जगह इस प्रकार धंसे रहते है जिस प्रकार किसी तरबूज में उसके बीज धंसे हो इसलिए इसे थोमसन का तरबूज मॉडल भी कहते है।
  • परमाणु में धनावेशन व ऋणावेशन की मात्रा समान होने के कारण परमाणु विद्युत रूप से उदासीन होता है।
  • परमाणु के धनावेशित ठोस गोले में ऋणावेशित कण इलेक्ट्रॉन जगह जगह इस प्रकार अन्त: स्थापित होते है जिस प्रकार किसी मीठे व्यंजन (पुडिंग में) उसका स्वाद बढाने के लिए प्लम (आलू बखारे) अंत: स्थापित होते है इसलिए जे जे थोमसन के परमाणु मॉडल को प्लम पुडिंग मॉडल के नाम से भी जाना जाता है।
  • जे जे थोमसन के परमाणु मॉडल द्वारा तापायनिक उत्सर्जन , प्रकाश विद्युत प्रभाव व आयनीकरण की व्याख्या करने में सफलता प्राप्त हुई।

जे जे थोमसन के परमाणु मॉडल की असफलता के कारण

    1. जे.जे. थोमसन के अनुसार जब किसी परमाणु को बाह्य ऊर्जा देते है तो उसमे उपस्थित सभी इलेक्ट्रोन बाह्य ऊर्जा ग्रहण करके अलग अलग आवृति से कम्पन्न करते है।  इलेक्ट्रॉन जिस आवृत्ति से कम्पन्न करते है उसी आवृति की विद्युत चुम्बकीय तरंग का उत्सर्जन भी करते है इसलिए एक परमाणु से `विद्युत चुम्बकीय तरंगो का स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है परन्तु हाइड्रोजन परमाणु में केवल एक ही इलेक्ट्रॉन होने के कारण केवल एक ही विद्युत चुम्बकीय तरंग उत्सर्जित होनी चाहिए परन्तु वास्तव में हाइड्रोजन परमाणु से भी विद्युत चुम्बकीय तरंगो का स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है। इस तथ्य को जेजे थोमसन समझाने में असफल रहा।
    2. रदरफोर्ड के α प्रकीर्णन प्रयोग को भी जेजे थोमसन समझाने में असफल रहा।

इन असफलताओ के कारण जेजे थोमसन के परमाणु मॉडल को निरस्त कर दिया गया।