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परमाणु क्रमांक क्या है , परिभाषा , उदाहरण what is atomic number in hindi परमाणु संख्या किसे कहते है ?
इसे Z से प्रदर्शित किया जाता है।
किसी भी परमाणु को पहचानने के लिए परमाणु क्रमांक एक अद्वितीय पहचान प्रदान करता है , अर्थात परमाणु क्रमांक हर परमाणु का अलग अलग होता है अत: इसके आधार पर हर परमाणु को पहचान मिलती है।
परमाणु क्रमांक (Z) और न्यूट्रॉन की संख्या के योग को उस परमाणु का परमाणु भार कहते है।
चूँकि सामान्य अवस्था में अर्थात परमाणु पर कोई आवेश न हो तो इस स्थिति में इलेक्ट्रॉन और प्रोटोन की संख्या बराबर होती है इस स्थिति में परमाणु क्रमांक का मान इलेक्ट्रान की संख्या के बराबर होता है।
किसी भी परमाणु में न्यूट्रॉन की संख्या अलग अलग हो सकती है , जब एक ही प्रकार के परमाणुओं में अलग अलह न्यूट्रॉन की संख्या पायी जाती है तो इन परमाणुओं को आइसोटोप कहते है।
किसी भी परमाणु के लिए परमाणु भार की गणना निम्न प्रकार करते है –
परमाणु भार = प्रोटोन + न्यूट्रॉन
आइसोटोप परमाणुओं में परमाणु क्रमांक तो समान होता है अर्थात उनमे प्रोटोन की संख्या तो समान होती है लेकिन न्यूट्रॉन की संख्या अलग अलग होती है , इसलिए इन्हें आइसोटोप परमाणु कहते है।
कोई भी रासायनिक तत्व जब आवर्त सारणी में रखा जाता है तो यह परमाणु क्रमांक के आधार पर ही रखा जाता है , आवर्त सारणी में तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु क्रमांक के रूप में रखा जाता है।
आवर्त नियम के अनुसार किसी परमाणु को आवर्त सारणी में रखने के लिए उस तत्व के भौतिक और रासायनिक गुणों को ध्यान में रखा जाता है लेकिन सामान्यत: देखे तो आवर्त सारणी में तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु क्रमांक के रूप में लिखते है।
परमाणु क्रमांक की परिभाषा : “किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटोन की संख्या को ही परमाणु क्रमांक कहते है। “
तत्व, संकेत एवं परमाणु संख्या
तत्वों के नाम
(हिन्दी में) तत्वों के नाम
(अंग्रेजी में) संकेत परमाणु संख्या
हाईड्रोजन 1
हीलियम 2
लथियम 3
कार्बन 6
नाईट्रोजन 7
आॅक्सीजन 8
सोडियम 11
मैग्नीशियम 12
एल्युमिनियम 13
फाॅस्फोरस 15
क्लोरीन 17
पोटेशियम 19
कैल्शियम 20
मैंगनीज 25
लोहा 26
काॅपर 29
जस्ता 30
चाँदी 47
टिन 50
सोना 79
परमाणु एवं परमाणु संरचना
परमाणु संरचनाः परमाणु का केन्द्रीय भाग ठोस भारी, धनावेशित होता है जो प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉनों का बना होता है, इसे नाभिक कहते हैं। नाभिक प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन का बना होता है। नाभिक के चारों ओर ऋणावेशित इलेक्ट्रान एक निश्चित कक्षा में चक्कर लगाते हैं। प्रोटॉन और इलेक्ट्रान पर समान तथा विपरीत आवेश होता है।
डाल्टन ने सर्वप्रथम कई पदार्थों की रचना का अध्ययन किया, निष्कर्ष निकाला कि सभी पदार्थ अति सूक्ष्मकणों से मिलकर बने हैं, जिन्हें पुनः विभक्त नहीं किया जा सकता। डाल्टन ने इन्हें ‘परमाणु‘ कहा है।
परमाणुः किसी रासायनिक तत्व का वह सबसे छोटा भाग, जिसमें उस तत्व की समस्त विशिष्टताएँ सुरक्षित हैं, परमाणु कहलाता है। परमाणु का एक रासायनिक अस्तित्व होता है, अर्थात् यह विभाज्य नहीं है। प्रत्येक परमाणु, इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन से मिलकर बना होता है।
अणुः किसी यौगिक का वह सूक्ष्तम विभाज्य कण होता है, जिसमें यौगिक की समस्त विशेषताएँ सुरक्षित होती हैं। अणु का निर्माण परमाणु से ही होता है।
एक परमाणु में जितने प्रोटॉन होते हैं, उतने ही इलेक्ट्रान होते हैं, अर्थात् परमाणु आवेश रहित होता है। परमाणु रासायनिक तत्वों की सूक्ष्मतम इकाई होती है, लेकिन उनका सामान्यतया स्वतन्त्र अस्तित्व नहीं हो सकता है।
किसी तत्व के दो या दो से अधिक परमाणु मिलकर एक पृथक् और स्वतन्त्र अस्तित्व का निर्माण करते हैं, इसे अणु कहा जाता है। उदाहरण- ऑक्सीजन के रूप में होता है, अर्थात् ऑक्सीजन के दो परमाणु मिलकर ऑक्सीजन के अणु का निर्माण करते हैं। ओजोन अणु में ऑक्सीजन के तीन परमाणु होते हैं।
यदि परमाणु पर इलेक्ट्रॉनों की संख्या में वृद्धि हो जाये तो परमाणु ऋणावेशित हो जाता है, इसे ऋणायन कहते हैं। जब परमाणु से इलेक्ट्रान का ह्रास हो जाता है तो परमाणु धनावेशित हो जाता है तो इसे धनायन कहा जाता है, जैसे (हाइड्रोजन $ आयन)।
परमाणु संख्याः वह मूलभूत संख्या जो उस परमाणु के नाभिक से प्राप्त प्रोटॉनों की संख्या को बतलाती है, परमाणु संख्या कहलाती है। यह संख्या, इलेक्ट्रानों की संख्या के भी बराबर होती है। जैसे का परमाणु क्रमांक-8 अर्थात् के नाभिक में 8 प्रोटॉन है।
परमाणु भारः परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों की संख्या का योग परमाणु भार कहलाता है।
परमाणु के मूलकणः परमाणु में 3 मूलकण हैं
– प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन। किन्तु, परमाणु के संगठन में स्थाई और अस्थाई कणों की संख्या अब लगभग 30 तक पहुँच गई है। इनमें से अधिकतर प्रोटॉन, न्यूट्रॉन तथा इलेक्ट्रॉन के विघटन से उत्पन्न होते हैं और अधिकतर अस्थाई कण ही हैं। इनमें से कुछ कण द्रव्यमान कण तथा कुछ ऊर्जा कण के रूप में होते हैं।
इलेक्ट्रॉनः इलेक्ट्रान अति सूक्ष्म ऋणावेशित कण होते हैं तथा परमाणु के नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। इनकी खोज 1897 में जे. जे. टामसन ने किया था। इलेक्ट्रॉन पर 1.6ग10-19 कूलॉम का आवेश होता है। इनका द्रव्यमान 9.1 x 10 ^ 31 किग्रा0 होता है। यह एक स्थाई मूल कण होता है। इस पर एक इकाई ऋण आवेश होता है। इलेक्ट्रान कण तथा तरंग दोनों अवस्था में पाया जाता है। इसकी खोज 1919 में रदरफोर्ड ने की थी।
प्रोटॉनः प्रोटॉन की खोज 1919 में रदरफोर्ड नामक वैज्ञानिक ने किया। प्रोटान परमाणु के नाभिक में पाया जाने वाला एक धन आवेशित कण होता है, जिस पर आवेश 1.6 x 10^19 कूलॉम होता है। प्रोटॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान से अधिक होता है।
न्यूट्रॉनः न्यूट्रान की खोज 1932 में जेम्स चैडविक ने किया था। यह नाभिक में पाये जाने वाला उदासीन कण है अर्थात् इस पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता है। एक न्यूट्रान का द्रव्यमान एक प्रोटॉन के द्रव्यमान के बराबर होता है।
समस्थानिकः किसी रासायनिक तत्व के दो या उससे अधिक रूपों, जिसमें परमाणु क्रमांक एक समान तथा परमाणु भार भिन्न-भिन्न अर्थात् परमाणु के नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या सामान तथा न्यूट्रानों की संख्या भिन्न हो।
समभारिकः विभिन्न तत्वों के उन परमाणुओं को समभारिपक कहते हैं, जिनका परमाणु भार समान होता है तथा परमाणु क्रमांक भिन्न-भिन्न, अर्थात् उनमें प्रोटॉनों (और इलेक्ट्रॉनों) की संख्या भिन्न-भिन्न हो। उदाहरण – आर्गन, पोटेशियम तथा कैल्शियम तीनों समभारी हैं। इन तीनों का परमाणु भार 40 है जबकि परमाणु क्रमांक क्रमशः 18, 19, 20 होता है।
खोज खोजकर्ता
परमाणु सिद्धान्त डाल्टन
परमाणु संरचना वोर और रदरफोर्ड
इलेक्ट्रॉन जे.जे. थॉमसन
प्रोटॉन रदरफोर्ड
न्यूट्रॉन चैडविक
प्लास्टिक अलेक्जेंडर
परमाणु संख्या माजले
रेडियो एक्टिविटी हेनरी वेकुरल
रेडियम मैडम क्यूरी
यूरेनियम क्लापरोथ
पाश्चुरीकरण लुई पाश्चर
किण्वन लुई पाश्चर
विद्युत बैटरी वोल्टा
एन्टीवायोटिक्स अलेक्जेण्डर फ्लेमिंग
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