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कृत्रिम श्वसन (artificial respiration in hindi) Artificial ventilation meaning in hindi कृत्रिम श्वास in English
कृत्रिम श्वसन (artificial respiration in hindi) , कृत्रिम श्वास in English क्या है ? Artificial ventilation meaning in hindi परिभाषा किसे कहते है ? , प्रकार ?
कृत्रिम श्वसन परिभाषा : जब कभी श्वसन क्रिया संदमित हो जाए या अनुपस्थित हो तब कृत्रिम श्वसन की आवश्यकता होती है। उदाहरण – कार्डियक एरेस्ट , इलेक्ट्रिक शॉक , कार्बन मोनो ऑक्साइड विषाक्तता , सिर पर चोट लगने और डूबने के दौरान कृत्रिम श्वसन के अलग अलग तरीके उपयोग किये जा सकते है। सामान्य तरीके निम्नलिखित है –
मुँह से मुँह संवातन
मुंह से नाक में संवातन
टैंक श्वसन
मुँह से मुँह संवातन (mouth to mouth respiration) : इसमें मरीज को समतल सतह पर पीठ के बल लिटा दिया जाता है। सिर को उसके आमाशय के स्तर से थोडा नीचे रखा जाता है।
मुँख और गले को श्लेष्मा , भोजन आदि से मुक्त किया जाता है। श्वास देने वाला वायु की लीकेज को रोकने के लिए मरीज के नासा छिद्रों को बंद कर देता है।
गहरी श्वास लेता है और इसे मरीज के मुंह में छोड़ता है , जब तक कि छाती ऊपर उठी न दिखे।
ऑपरेटर शीघ्रता से अपने मुह को निष्क्रिय साँस छोड़ने के लिए दूर ले जाता है। यह प्रक्रिया वयस्क में 1 मिनट में 10 से 15 बार दोहराई जाती है। एक सामान्य व्यक्ति सामान्यतया फेफड़ो में 20 mm Hg नियमित धनात्मक दबाव पर जीवित रह सकता है लेकिन कुछ मिनट के लिए 30 mm Hg से अधिक होने पर मृत्यु हो सकती है।
पल्मोनरी वायु-आयतन और फेफड़ों की क्षमता
(i) ज्वारीय आयतन (TV) : यह सामान्य श्वसन के दौरान ग्रहण की गयी या बाहर निकाली गयी वायु का आयतन है। औसत वयस्क आदमी में इसकी मात्रा लगभग 500 ml होती है। अन्दर ग्रहण की गयी 500 ml वायु से केवल 350 ml स्वच्छ वायु फेफड़ो के वायुकोषों तक पहुँचती है। यह वायुकोष आयतन कहलाता है।
जबकि लगभग 150 ml अन्दर ग्रहण की गयी वायु नासा कोष्ठ से अंतिम श्वसनिकाओं तक श्वसन प्रणाली से बची रहती है जिसे मृत स्थान आयतन (dead space volume) कहते है।
(ii) अन्त:श्वास आरक्षित आयतन (IRV) या संपूरक वायु आयतन : यह वायु का अतिरिक्त आयतन है जो कि सामान्य ज्वारीय आयतन के अतिरिक्त बलपूर्वक ग्रहण किया जाता है। यह लगभग 2000 से 300 ml होता है।
(iii) अन्तश्वास सामर्थ्य (inspiratory capacity) (IC) : यह वायु की मात्रा है जो कि एक व्यक्ति सामान्य उच्छवासन के बाद अधिकतम स्तर तक अन्दर ले सकता है।
IC = TV + IRV
(iv) नि:श्वसन आरक्षित आयतन (ERV) या पूरक वायु आयतन : यह ज्वारीय आयतन के अतिरिक्त वायु की मात्रा है जो एक सामान्य ज्वारीय नि:श्वसन के बलपूर्वक उच्छवासन द्वारा बाहर निकाली जा सकती है। यह 1000 से 1500 मि.ली. होता है।
(v) जैविक सामर्थ्य (VC) : यह वायु की वह अधिकतम मात्रा है जो बलपूर्वक inhalation के बाद बल पूर्वक नि:श्वसन exhalation द्वारा फेफड़ो से बाहर निकाली जा सकती है।
फेफड़ो की जैविक क्षमता = TV + IRV + ERV
= 500 + 300 + 1100 = 4600 ml
जैविक क्षमता की सीमा = 3.5 – 4.5 लीटर (सामान्य वयस्क व्यक्ति में)
जैविक क्षमता एथेलिट्स , पर्वतारोहियो , आदमियों और जवानों में अधिक होती है।
जैविक क्षमता धुम्रपान द्वारा कम हो जाती है।
(vi) अवशेषी आयतन (RV) : यह बलपूर्वक उच्छवसन के बाद फेफड़ो के वायुकोष में बची वायु का आयतन है। यह लगभग 1500 मिली होता है।
(vii) कार्यात्मक अवशेषी सामर्थ्य (FRC) : यह सामान्य उच्छवसन के बाद फेफड़ो में बची वायु का भाग है।
FRC = ERV + RV = 1100 + 1500 = 2600 ml
(viii) कुल फुफ्फुसीय सामर्थ्य (TLC) : यह अधिकतम नि:श्वसन (टीएलसी) प्रयास के बाद फेफड़ो और श्वसन मार्ग (respiratory passage) में वायु की मात्रा है।
TLC = VC + RV
= 3.5 – 4.5 + 1.5 लीटर
= 5-6 लीटर (औसत 5800 मिली)
FRC , RV और TLC के अलावा अन्य फुफ्फुसीय माप साधारण स्पाइरोमीटर की सहायता से ज्ञात कर सकते है।
बाह्य श्वसन
गैसों का फुफ्फुसीय आदान प्रदान –
सारणी : श्वसनी गैसों का आंशिक दाब (mm Hg)
| गैस | ग्रहण की गयी वायु | Alveolar air | Venous blood | Arterial blood | Expired air |
| ऑक्सीजन | 158 | 100 | 40 | 95 | 116 |
| कार्बन डाइ ऑक्साइड | 0.3 | 40 | 46 | 40 | 32 |
| नाइट्रोजन | 596 | 573 | 573 | 573 | 565 |
सारणी : गैसों की मात्रा (प्रतिशत में)
| गैस | Inspired air | Alveolar air | Venous blood | Arterial blood | Expired air |
| ऑक्सीजन | 21 | 13.1 | – | 19.8 | 16 |
| कार्बन डाइ ऑक्साइड | 0.04 | 5.3 | 52.7 | 49 | 4 |
| नाइट्रोजन | 78.6 | 78 | 78 | 78 | 78 |
गैसीय विनिमय (Exchange of gases)
तालिका से ज्ञात होता है कि कूपिका वायु में CO2 और O2 सांद्रता ग्रहण की गयी वायु से कम होती है। (कुपिकाओं में अवशेषी वायु के साथ मिलने के कारण) परन्तु यह फुफ्फुस केशिकाओं में अनाक्सीकृत रक्त में उच्च होती है। जिससे ऑक्सीजन कुपिकीय वायु से पल्मोनरी धमनी के केशिकीय रूधिर में विसरित हो जाती है।
पल्मोनरी शिरा का PO2 लगभग 95 mm Hg और ऑक्सीजन सांद्रता 19.8 प्रतिशत होती है।
कूपिका केशिकाओं के अनाक्सीकृत रुधिर का PCO2 46 mm Hg और CO2 सांद्रता 52.7 प्रतिशत होती है। यह कुपिकीय PCO2 40 से उच्च होता है इसलिए CO2 कूपीकीय रूधिर से कुपिकीय वायु में विसरित होती है। जब तक कि आक्सीकृत रुधिर का PCO2 40 और CO2 सांद्रता 49 प्रतिशत न हो जाए।
गैसों का विनिमय केवल घुलित अवस्था में उच्च सान्द्रता से निम्न सान्द्रता की ओर होता है। इसी कारण कूपिका की आंतरिक सतह की श्लेष्मा झिल्ली सदैव श्लेष्मा से नम रखी जाती है।
अन्त: श्वसन
कम सक्रीय उत्तक की तुलना में सक्रीय उत्तक में pO2 कम होता है और pCO2 उच्च होता है। इसलिए एक अधिक सक्रीय उत्तक में ऑक्सीहीमोग्लोबिन से अधिक ऑक्सीजन मुक्त होती है। प्रति डेसीलीटर रक्त उत्तकों में लगभग 4.6 ml ऑक्सीजन मुक्त करता है , ऑक्सीहीमोग्लोबिन से 4.4 ml और प्लाज्मा से 0.17 ml ऑक्सीजन मुक्त करता है। कोशिकीय स्तर पर अन्त:कोशिकीय pCO2 लगभग 45-68 mm Hg (100 ml) (औसत 52 mm Hg) जबकि धमनी रूधिर में 40 mm Hg होता है। इसलिए रक्त कोशिकाओं से कार्बन डाइ ऑक्साइड शरीर कोशिकाओं में तीव्रता से वितरित होती है। जिससे रक्त का pCO2 40 mm Hg से 46 mm Hg तक बढ़ जाता है।
जब धमनिय रूधिर परिधीय उत्तकों तक पहुँचता है तो इसका pO2 95 mm Hg होता है। जबकि अंत: कोशिकीय द्रव्य में केवल 20 mm Hg होता है जो रुधिर से उत्तकों में ऑक्सीजन का तीव्र विसरण उत्पन्न करता है ताकि रक्त का pO2 लगभग 40 mm Hg तक गिर जाए।
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