बरसात तथा कृत्रिम बरसात , धुंध / कोहरा , ध्रुम के विद्युत अवक्षेप में उपयोग , artificial rainfall in hindi

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artificial rainfall in hindi , बरसात तथा कृत्रिम बरसात , धुंध / कोहरा , ध्रुम के विद्युत अवक्षेप में उपयोग :-

हमारे चारो ओर कोलाइड :

1. आकाश का नीला रंग : वायु में मिट्टी के कोलाइडी कण होते है . ये सूर्य के प्रकाश के दृश्य क्षेत्र से प्रकाश को अवशोषित कर लेते है तथा नीले रंग के प्रकाश को प्रकिर्णित करते है इसलिए आकाश नीला दिखाई देता है।

2. धुंध / कोहरा : वायु में धुल के कोलाइडी कण होते है। ओलांक से कम ताप पर वायु में उपस्थित जलवाष्प धुल के कणों पर संघनित हो जाती है।  ये छोटी छोटी बुँदे वायु में तैरती रहती है जिसे कोहरा या धुंध कहते है।

3. बरसात तथा कृत्रिम बरसात : बादल एरोसोल है अर्थात वायु में जल की छोटी छोटी बुँदे परिक्षिप्त रहती है।  जब बादल ठंडे स्थानों पर जाते है तो छोटी छोटी बुँदे मिलकर बड़ी बूंदों में बदल जाती है ये गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी पर गिरती है जिसे बरसात कहते है।

नोट : कभी कभी दो विपरीत आवेशित बादल के टकराने से भी बरसात होती है।

नोट : वायुयान की सहायता से बादलो पर विपरीत आवेशित सोल का छिडकाव करने से कृत्रिम बरसात होती है।

4. डेल्टा का निर्माण : नदी के जल में मिट्टी के ऋणावेशित कोलाइडी कण होते है , जब नदी का जल समुद्र के जल के सम्पर्क में आता है तो समुद्र के जल में उपस्थित धनायनों द्वारा मिट्टी के कोलाइडी कणों का स्कन्दन हो जाता है।  ये कण समुद्र के पैंदे में एकत्रित होते रहते है जिससे एक उभार बन जाता है जिसे डेल्टा बन जाता है।

5. रक्त स्त्राव को रोकने में : रक्त एल्बुमिनाइट है , यह ऋणावेशित सोल है।  जब कटे हुए स्थान पर फिटकरी (पोटाश ऐलम ) या FeCl3 का चूर्ण लगाते है तो धनयानो द्वारा रक्त का स्कंदन हो जाता है जिससे रक्त का बहना बंद हो जाता है।

6. मृदा की उपजाऊ क्षमता (उर्वरकता) बढाने में : उपजाऊ मृदा में मिट्टी के कोलाइडी आकार के कण होते है , इनका पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिक होने के कारण अधिशोषण की प्रवृति अधिक होती है अर्थात ये नमी तथा उर्वरको को अधिक अधिशोषित करते है जिससे मृदा की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि होती है।

कोलाइड के उपयोग

1. जल को स्वच्छ करने में : प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त जल में मिट्टी के कोलाइड कण होते है।  इसमें फिटकरी (पोटाश एलम) डालने पर फिटकरी के धनायनो द्वारा मिट्टी के कणों का स्कन्दन हो जाता है , इन्हें छानकर हटा देते है।

2. गंद वस्त्र को स्वच्छ करने की क्रियाविधि :

3. औषधी के रूप में : कोलाइड औषधियां अधिक प्रभावी होती है क्योंकि इनमे अधिशोषण की क्षमता अधिक होती है , ये निम्न है –

  • Ag सोल (आर्जिसोल) – नेत्र संक्रमण के उपचार में
  • Sb सोल – कालाजार उपचार में
  • S8 सोल – चर्म रोग के उपचार में
  • मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया – उदर रोग के उपचार में
  • Au सोल – अन्त: पेशी इंजेक्शन में

4. चर्म उद्योग में : चर्म जैली जैसा पदार्थ है इसमें प्रोटीन के धनावेशित कोलाइडी कण होते है इसे टेनिन अम्ल (ऋणावेशित सोल) में डालने पर चमड़ी की सतह पर स्कन्दन हो जाता है जिससे चमड़ी कठोर हो जाती है।

इससे जूते , चप्पल , पर्स आदि बनाये जाते है।

5. रबर उद्योग में :  रबर के पेड़ से प्राप्त गाढे दुधियाँ द्रव को लेटेक्स या रबर क्षीर कहते है। इसमें रबर के कोलाइडी कण होते है , लेटेक्स को गर्म करने पर रबर के कोलाइडी कणों का स्कन्दन हो जाता है अर्थात रबर प्राप्त होता है।

6. फोटोग्राफी में : जिलेटिन में AgBr के कोलाइडी कण होते है , इस विलयन के लेप फोटोग्राफी प्लेट पर कर दिया जाता है।

7. ध्रुम के विद्युत अवक्षेप में : कारखानों से निकलने वाले धुएँ में कार्बन आर्सेनिक के कण होते है।  इसे कोट्रेल अवक्षेप में से गुजारते है।  कोट्रेल अवक्षेप में उच्च विद्युत विभव के कारण कार्बन तथा आर्सेनिक के कणों का स्कन्दन हो जाता है , ये पैंदे में एकत्रित हो जाते है।

प्रश्न : निम्न के उदाहरण लिखो –

  परिक्षिप्त प्रावस्था परिक्षेपण माध्यम उदाहरण
हाइड्रोसोल ठोस पानी गोंद
एरोसोल ठोस / द्रव वायु बादल
एल्कोहल ठोस एल्कोहल ईथर व एल्कोहल में  , नाइट्रो सेलुलोज