जानेंगे Artificial blood in hindi , कृत्रिम रक्त क्या है , किसे कहते हैं , परिभाषा लिखिए उदाहरण नाम ?

कृत्रिम रक्त (Artificial blood)

रक्त को प्रतिस्थापित करने वाले तरल की खोज शताब्दियों पूर्व से की जा रही है। 17वीं शताब्दी में भी रक्ताधान के प्रयोग किये गये थे। उस समय इनकी आवश्यकता दुर्घटना में घायल व्यक्तियों की जान बचाने, रोगियों में रक्त की कमी को पूरा करने एवं माताओं में प्रसव के समय होने वाली रक्त की कमी को पूरा करने हेतु महसूस की गयी थी। आधुनिक समय में यह आवश्यकता अनेक नये रोगों जैसे एड्स, केन्सर, हिपेटाइटिस – B, थैलेसेमिया, Rh समूह, रक्त दाव कोशिका (sickel cell anaemia) जैसे मामलों में, रोगी के रक्त आधान करने या ( पूरा का पूरा ) रक्त बदलने के संदर्भ में अधिक महत्वपूर्ण हो गयी है। जैसे-जैसे इस प्रकार के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है, रक्त की आपूर्ति करने के प्रयास और अधिक किये जाने लगे हैं। लोगों को रक्त दान करने हेतु प्रोत्साहित करना, कैम्प लगाना जैसे कार्यक्रम किये जाने लगे हैं। युद्ध के समय जब हजारों लीटर रक्त की एक साथ आवश्यकता होती है, दूरियाँ अधिक होती है, समय कम होता है तथा इच्छित समूह का रक्त नहीं मिलता तो रक्त की कमी से ऐसे लोगों की भी मृत्यु हो जाती है जिन्हें आसानी से बचाया जा सकता है। छोटे एवं विकासशील देशों में गम्भीर रोगों का युद्ध के समय यह समस्या और गम्भीर हो जाती है।

अमेरिका जैसे देश में भी रक्त दान करने वाले लोगों की संख्या में लगातार कमी आती जा रही है रक्त की आपूर्ति हेतु एवं आने वाले समय में बढ़ते गम्भीर रोगों के कारण यह समस्या विकट हो जायेगी इसमें कोई सन्देह दिखाई नहीं देता ।

मानव के रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन एक चतुष्क प्रोटीन है। यह एक गोलाकार अणु है जो चार उप इकाईयों से बना होता है। प्रत्येक उप इकाई में Fe युक्त पोरफाइरिन पाया जाता है। प्रत्येक हीमोग्लोबिन अणु में ग्लोबिन की चार कुण्डलित पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएं तथा हीम के चार अणु होते हैं। हीमोग्लाबिन के हीम अणुओं में ऑक्सीजन के साथ एक कोमल व आसानी के साथ खुलने वाला प्रतिवर्ती बन्ध बना लेने की क्षमता होती है। वयस्क में ग्लोबिन की चार कुण्डलित श्रृंखलाओं में 20 व 2B प्रकार की होती है। जबकि नवजात शिशुओं में ये 2x व 2y (गामा) प्रकार की होती है। मनुष्य में 16 वे गुणसूत्र पर BY व 8 श्रृंखलाओं को संश्लेषित करने वाले जीन पाये जाते हैं।

उपरोक्त जानकारी को आधार मान कर ही वैज्ञानिकों ने रक्त को प्रतिस्थापित करने वाले तरल की खोज के प्रयास किये हैं।

कृत्रिम रक्त अथवा रक्त को प्रतिस्थापित करने वाले ऐसे तरल जो हीमोग्लोबिन पर आधारित हो एवं ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता युक्त हो की खोज में 1960 से पूर्व कोई सफलता नहीं मिल सकी। 1960 में डॉ. लेलेण्ड क्लार्क (Dr. Leland Clark) ने परफ्लूरोकार्बन यौगिकों को लेकर इस दिशा में प्रयोग आरम्भ किये। प्लाज्मा की अपेक्षा परफ्लूरोकार्बन के विलयन में आक्सीजन 100% अधिक विलेय है। चूँकि ये यौगिक जल विरागी प्रकृति (hydrophobic) के हैं अत: प्लाज्मा ऑक्सीजन वाहक के रूप में इनके इमल्शन के रूप में प्रयोग किये जाने पर रूकावट उत्पन्न हो गयी। ग्रीन क्रॉस कारपोरेशन जापान ने फ्लूरोनिक 64 (pluronic – 64 ) को एमल्सिफाइंग कारक रूप में प्रस्तुत किया किन्तु चिकित्सकीय जाँच में परफ्लूरोकार्बन का उपयोग खरा नहीं उतरा। इस इमल्शन में फ्लूओसॉल का प्रतिशत कम ही रखा गया था किन्तु प्लूरोनिक – 64 को जब रोगी की शिराओं में अन्तक्षेपित किया गया तो कुछ जटिलताएं सामने आयी । इमल्शन तकनीक में कुछ सुधार पर परफ्लूरोकार्बन को घोलने वाले पदार्थों का उपयोग किया गया ताकि ऑक्सीजन वहन क्षमता उच्च ही बनी रहे एवं अन्य बाधाएं दूर की जा सके। जिन इमल्शन का उपयोग किया जा रहा है  इन्हें 4°C पर कुछ माह तक के लिये संग्रह किया जा सकता है। अब तक इस क्षेत्र में की गयी खोज को निम्न प्रकार से वर्णित किया जा सकता है- अमेरिका की जैव प्रौद्योगिक कम्पनी एलिआन्स फार्मास्युटिकल्स ने ऑक्सीजेन्ट (oxygent) नामक तरल रसायन टेफलोन के उत्पादन से बनाया है। यह तरल शल्य चिकित्सा के उपरान्त रोगियों को रक्त के साथ कुछ अनुपात में दिया गया। इन रोगियों में स्वयं के रक्त के बनने की क्षमता जारी रही है। इसके और परीक्षण किये जा रहे हैं।

मानव रक्त में से हीमोग्लोबिन का उपयोग कर हीमअसिस्ट (hemeassist) नामक रक्त को प्रतिस्थापित करने वाला तरल बनाया है। इसके भी चिकित्सकीय परीक्षण किये जा रहे हैं।

“पॉलीहीम” (polyheme) नामक रक्त को प्रतिस्थापित करने वाला तरल एक अन्य कम्पनी द्वारा जारी किया गया है। शल्य चिकित्सा के दौरान रोगियों के रक्त का 60% भाग इसके द्वारा बदले जाने पर कोई प्रतिकूल प्रभाव दृष्टिगत नहीं हुआ है। इसके भी अन्य परीक्षण किये जा रहे हैं।

ट्रान्सजनिक पौधों से भी क्रियाशील हीमोग्लोबिन प्राप्त किये जाने के समाचार शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। यदि इस प्रकार के प्रयास सफल रहते हैं तो जैव संहति (biomass) की भाँति इन्हें प्राप्त किया जा सकेगा। आने वाले कुछ वर्षों में निश्चय ही इस क्षेत्र में सफलता मिल सकेगी ऐसी सम्भावना है।

ट्रान्सजनिक सुअर से हीमोग्लोबिन प्राप्त करने में काफी हद तक सफलता प्राप्त की जा चुकी है। इसके और परीक्षण किये जा रहे हैं।

एंजाइम्स (Enzymes )

अनेक किण्वक जो मानव देह में पाचन एवं अन्य क्रियाओं हेतु जैव उत्प्रेरक के रूप में आवश्यक होते हैं जटिल गोलाकार प्रोटीन्स होते हैं, अनेक जीवाणुओं, कवक व प्रोटोजोआ द्वारा भी बनाये जाते हैं। इनका उपयोग चिकित्सा व औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। प्राणियों की आन्त्र में अनेकों सहजीवी सूक्ष्मजीव (symbiotic microbes) सेल्यूलोज नामक एन्जाइम स्त्रावित कर सेल्यूलोज के पाचन में सहायता करते हैं। रोमन्थी प्राणियों (Ruminants) की आन्त्र में रुमिनोकॉकस (Ruminococcus) जीवाणु उपस्थित रहते हैं एवं घास का पाचन कर शर्कराओं में रूपान्तरित कर देते हैं। जैव तकनीक द्वारा इनके उत्पादन व उपयोग की संभावनाएँ बढ़ गई हैं। सारणी- 25.5 में सूक्ष्मजीवियों द्वारा उत्पादित कुछ किण्वकों को दर्शाया गया है।

सारणी 25.5 सूक्ष्मजीवों द्वारा उत्पादित कुछ एन्जाइम

क्र.सं.

 

एन्जाइम उत्पादक सूक्ष्मजीव

 

एन्जाइम

 

प्रभावित क्रिया

 

1. एसपरजिलस जाति

 

एमाइलेज

 

स्टार्च से माल्टोज

 

2.   पेक्टिन लयनकारी

 

पेक्टिन का लयन

 

3. राइजोपस जाति

 

माल्टेज

 

माल्टेज से ग्लूकोज

 

4. बेसिलस सबटिलिस

 

प्रोटीएज

 

प्रोटीन से अमीनो अम्ल

 

5. बेसिलस सबटिलिस

 

पेनिसिलिनेज

 

पेनिसिलिन का विखण्डन

 

6. बेसिलस सेरेयस

 

पेनिसिलिनेज

 

पेनिसिलिन का विखण्डन

 

7. स्ट्रेप्टोकॉकस पायोजेन्स

 

स्ट्रेप्टोडॉर्नेज

 

डी. एन. ए. का विखण्डन

 

8. स्ट्रेप्टोकॉकस पायोजेन्स स्ट्रेप्टोकाइनेज

 

फाइब्रिन का विखण्डन

 

9. यीस्ट

 

इनवरटेज

 

लेक्टोस से ग्लूकोज तथा

 

10. यीस्ट लैक्टेज

 

गेलेक्टोज, लेक्टोज का

लयन

 

विटामिन्स (Vitamins)

प्राणियों के प्राकृतिक भोजन में पाये जाने वाले कार्बनिक पदार्थ जो सामान्य वृद्धि, जनन एवं सामान्य उपापचयी क्रियाओं हेतु सूक्ष्म मात्रा में आवश्यक होते हैं विटामिन कहलाते हैं। इनकी कमी होने पर अनेक रोग हो जाते हैं ये भी जैव उत्प्रेरकों की तरह ही कार्य करते हैं। मानव देह में केवल मात्र विटामिन D का संश्लेषण किया जाता है शेष सभी विटामिन बाह्य स्रोतों भोजन आदि से प्राप्त होते हैं। अनेक सूक्ष्मजीव मानव देह में बाहर विटामिन्स का संश्लेषण करने की क्षमता रखते हैं। इनकी इस क्षमता का उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में किया जाता है । अनेकों जाति के जीवाणु व कवक विटामिन C. B2 व B12 के संश्लेषण की क्षमता रखते हैं कुछ सूक्ष्मजीव -केरोटीन का संश्लेषण भी करते हैं जो विटामिन A के संश्लेषण हेतु उपयोगी होता है। विटामिन B2 या राइबोफ्लेविन, यीस्ट, एशबिया गॉसिपी (Ashhya gossypii) व एरमोथिसियम एशिबि (Eremothecium ashbyii) के द्वारा विटामिन B12 या कोबाल्मिन का संश्लेषण स्ट्रेप्टोमायसेस समूह के जीवाणु, बेसिलस मेगाथिरियम (Bacillus megatherium), प्रोपिनियोबैक्टिरियम फ्रेडेरिची (Propioniobacterium freudeureichii) व प्रो. शेरमानी (P shermani) द्वारा किया जाता है।

स्टीरॉएड हारमोन्स (Steroid hormones)

पिछले तीन दशकों में हार्मोन्स का उपयोग अनेक रोगों के उपचार में अत्यधिक होने लगा है। इतः इनके औद्योगिक उत्पादन के सम्बन्ध में अनेक प्रयोग किये गये हैं। इनका उपयोग शोथ, केन्सर, एलर्जी एवं त्वरक रोगों में होने लगा है। ये बेहोश करने वाली दवाओं एवं संतान न होने वाले रागों के उपयोग में लाये जाते हैं। एडरीनल कॉरटेक्स एवं जनदों द्वारा स्त्रावित हार्मोन्स को जन्तु के उत्तकों से प्राप्त करने में अनेकों कठिनाइयाँ आती हैं। अतः वैज्ञानिकों ने डी ऑक्सीकॉलिक अम्ल द्वारा कॉर्टीसोन नामक हार्मोन प्राप्त करने की दिशा में अनुसंधान आरम्भ किया। सूक्ष्मजीव इस अम्ल को सरलता से प्रोजीस्टेरॉन में बदलने की क्षमता रखते हैं। पीटरसन तथा मरे (Peterson and Murray, 1952) ने पाया कि प्रोजीस्टेरॉन को राइजोपस अरहीजस (Rhizopus arrhizus) एवं राइजोपस नाइग्रिकेन्स (R. nigricans) नामक फफूंद अधिक सक्रिय एवं उपयोगी 11 हाइड्रोक्सी प्रोजीस्टेरॉन में बदल सकती है, इसी प्रकार ये जीव कॉरटीसोन, हाइड्रोकारटीसोन और अन्य स्टीरॉड्स की कमी से मनुष्य में बन्ध्यता ( sterility) लैंगिक परिवर्तन, लैंगिक चक्र का अव्यवस्थित होना, कार्बोहाइड्रेट्स के उपापचय का असामान्य होना, तंत्रिका संबंधी अव्यवस्थाएँ आदि हो जाती हैं। स्टीरॉइड्स द्वारा इन रोगों का उपचार सम्भव होता है।

स्टीरॉइड्स के औद्योगिक उत्पादन हेतु कवक, प्रोटोजोआ, शैवाल एवं कुछ जीवाणुओं का उपयोग इस कार्य हेतु किया जाता है। सूक्ष्मजीव का संवर्धन सरल माध्यम में 16-48 घण्टे के लिये उपयुक्त pH व ताप पर किया जाता है। संवर्धन माध्यम में ग्लूकोज अथवा सुक्रोज कार्बन स्त्रोत एवं मक्के का तरल नाइट्रोजन एवं खनिज लवणों के स्त्रोत के रूप में मिलाये जाते हैं। कुछ मात्रा में स्टीरॉइड भी मिलाया जाता है। एन्जाइम द्वारा अनावश्यक पदार्थ न बने अतः अवरोधक पदार्थ भी सूक्ष्म मात्रा में मिलाये जाते हैं। कुछ घण्टो या कुछ दिनों के उपरान्त जब सूक्ष्मजीवों द्वारा स्त्रावित एन्जाइम इच्छित स्टीरॉइड का परिवर्तन कर देते हैं तो क्लोरोफॉर्म, मिथाईलीन क्लोराइड अथवा इथाइलीन क्लोराइड को घोलक के रूप में काम में लेते हैं व क्रोमेटोग्राफी की विधि से क्रिस्टल के रूप में शुद्ध स्टीरॉइड प्राप्त किये जाते हैं। जिब्रेलिन (Gibberellin) समान पौधों के हार्मोन जो तने की वृद्धि एवं कोपलों (buds) के खिलने की क्रिया को प्रभावित करते हैं। जिब्रेला फ्यूजीकोराई (Gibberella fujikuroi) नामक कवक द्वारा उत्पन्न किये जाते हैं।

जैव तकनीक का उपयोग किये जाने के कारण इन हारमोन्स के अन्तर्राष्ट्रीय मूल्यों में अत्यधिक कमी आयी है। औद्योगिक रूप से इसके उत्पादन एवं गुणात्मक स्तर पर इन औषधि स्तर के हारमोन्स में आवश्यक सुधार की संभावनाएँ खोजी जा रही हैं।

प्रश्न (Questions)

  1. निम्नलिखित के अतिलघु उत्तर दीजिये

Give very short answer of the following

  1. जीन प्रस्थापन चिकित्सा प्रणाली हेतु कौन से वाहक प्रयुक्त किये जाते हैं ?

Which vector is used for gene replacement therapy.

  1. पी. सी. आर. से क्या आशय है ?

What is meant by PCR ?

  1. डी. एन. ए. की असंख्य प्रतिलिपियाँ प्राप्त करने हेतु किस आधुनिक एवं द्रुत विधि का उपयोग काय जाता है ?

Which modern fast method of DNA replication is used to obtain many copies of it?

  1. पेनिसिलिन के अतिरिक्त कौनसा अन्य प्रतिजैविक पदार्थ कवक से प्राप्त किया जाता है ? इनका नाम बताइये।

Which antibiotic substance other pencilin is obtained from fungi ? name it.

  1. पेनिसिलिन के खोज कर्त्ता का नाम बताइये ।

Write the name of discoverer of penicillin.

  1. टीके की खोज करने वाले वैज्ञानिक का नाम बताइये ?

Name the scientist who discovered vaccine.

  1. जैव प्रौद्योगिकी द्वारा संश्लेषित तीन प्रोटीन्स या पेप्टाइड के नाम बताइये जो मानव हेतु औषध महत्त्व के हों।

Write three names of proteins or peptides which are synthesized by biotechology and are of human medicinal importance.

  1. आनुवंशिक तौर पर रूपान्तरित सूक्ष्मजीवों से तैयार दो उत्पादों के नाम व प्राप्ति स्त्रोत बताइये।

Write two names of products prepared from genetic engineered mecrobes.

  1. अब तक कितने प्रतिजैविक ज्ञात हैं तथा कितने बाजार में उपलब्ध है ?

How many types of antibiotics are known today and how many of them are available in market ?

  1. मदिरा उद्योग में किस एन्जाइम का उपयोग किया जाता है ?

Which enzyme is used in wine industry?

  1. संश्लेषित इन्टरफेरॉन मानव देह में क्या करते हैं ?

What role is played by synthesized intrferon in human body?

  1. लघु उत्तरात्मक प्रश्न ( Short answer question)
  2. वैक्सीन को परिभाषित कीजिये ।

Define vaccine.

  1. टीके के प्रकारों के बारे में लिखिये ।

Write about type of vaccines.

  1. निम्नलिखित पर टिप्पणी कीजिये ।

Write short notes on-

(i) किण्वक व कृत्रिम रक्त (Enzyme and antificial blood).

  1. निम्नलिखित पर टिप्पणी कीजिये-

Write short note on –

(i) पी. सी. आर. (P.C.R.)

(ii) टीके (Vaccines)

III. निम्न प्रवेश के उत्तर विस्तार से दीजिये।

Answer the following questions in detail.

1.मानव कल्याण में जीवाणुओं के योगदान की विवेचना करें।

Discuss the role of bacteria is human welfare.

  1. प्रतिजैविकों पर एक लेख लिखिये ।

Write an essay on antibiotics.

  1. निम्नलिखित की विवेचना कीजिये ।

Discuss the following.

(i) टीके (Vaccines)

  1. पी. सी. आर. पुनर्योगज डी.एन.ए. तकनीक की अपेक्षा अधिक उपयोगी क्यों है ?
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