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एकक कोष्ठिका में अवयवी कणों की संख्या , इकाई सैल में कणों की संख्या (number of constituent particles in a unit cell)

(number of constituent particles in a unit cell) एकक कोष्ठिका में अवयवी कणों की संख्या , इकाई सैल में कणों की संख्या : जैसा कि हम जानते है कि एकक कोष्ठिका के नियमित पुनरावर्ती से सम्पूर्ण क्रिस्टल का निर्माण होता है इसलिए किसी क्रिस्टल में कई एकक कोष्ठिका उपस्थित रहती है और इन पर उपस्थित अवयवी कण एक दूसरे से सम्बंधित रहते है अर्थात कोई एक अवयवी कण एक से अधिक एकक कोष्ठिकाओं से समबन्धित रह सकता है या बंटा हुआ हो सकता है।

किसी एकक कोष्ठिका में अवयवी कणों के रूप में परमाणु , अणु या आयन कुछ भी हो सकते है , और जब ये अवयवी कण अलग अलग स्थिति पर होते है तो पडोसी एकक कोष्ठिका के साथ इनकी सहभागिता या बंटवारा अलग होता है अर्थात पडोसी एकक कोष्ठिका का कुछ हिस्सा हो सकता है।

अब हम गणना करते है कि किसी एकक कोष्ठिका या इकाई सेल में कितने अवयवी कण स्थित रहते है , इस गणना के लिए हमें इकाई सेल या एकक कोष्ठिका के कुछ सामान्य गुणों का अध्ययन करना पड़ेगा और उनकी संरचना हमें याद होनी चाहिए ताकि यह हमें आसानी से समझ में आ सके।

1. जब कोई अवयवी कण एकक कोष्ठिका के कोने पर स्थित हो तो कोनो पर स्थित अवयवी कण आठ पडोसी एकक कोष्ठिकाओं द्वारा सहभागिता होता है अर्थात कोने पर स्थित किसी अवयवी कण में एकक कोष्ठिका का आठवां हिस्सा होता है , इसलिए प्रत्येक एकक कोष्ठिका में इसका 1/8 वाँ भाग होता है।

2. जब कोई अवयवी कण एकक कोष्ठिका के केंद्र पर स्थित होता है तो इसमें पडोसी किसी अन्य एकक कोष्ठिका की कोई भागीदारी या सहभागिता नहीं होती है इसलिए केंद्र में स्थित अवयवी कण पूरा का पूरा उसी एकक कोष्ठिका का होता है जिसमें यह उपस्थित रहता है।

3. जब कोई अवयवी कण किसी एकक कोष्ठिका के फलक के केंद्र पर स्थित हो तो इसमें पडोसी दो एकक कोष्ठिकाओं के सहभागिता से होता है अर्थात फलक के केंद्र पर स्थित अवयवी कण दो एकक कोष्ठिकाओं में बंट जाता है जिससे प्रत्येक एकक कोष्ठिका के हिस्से में फलक के केंद्र पर स्थित अवयवी कण का आधा हिस्सा आता है , अर्थात प्रत्येक एकक कोष्ठिका में इसका केवल 1/2 वाँ भाग सम्बंधित रहता है।

4. एकक कोष्ठिका के किनारे पर स्थित किसी अवयवी कण में चार एकक कोष्ठिकाओं की सहभागिता होती है अर्थात किनारे पर स्थित अवयवी कण चार एकक कोष्ठिकाओं से सम्बंधित रहता है , इससे प्रत्येक एकक कोष्ठिका के हिस्से में किनारे वाले अवयवी कण का चौथा हिस्सा आता है।

अर्थात प्रत्येक कोष्ठिका में इस कण का केवल 1/4 वाँ भाग सम्बन्धित रहता है।

निष्कर्ष

कोने का अवयवी कण का हिस्सा = 1/8

फलक का अवयवी कण = 1/2

केंद्र का अवयवी कण की भागीदारी = 1

किनारों का अवयवी कण = 1/4