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यूकेरियोट में जीन नियमन क्या है | Gene Regulation in Eukaryotes in hindi ब्रिटन-डेविडसन का यूकेरियोट जीन नियमन मॉडल

(Gene Regulation in Eukaryotes in hindi) यूकेरियोट में जीन नियमन क्या है ब्रिटन-डेविडसन का यूकेरियोट जीन नियमन मॉडल किसे कहते है ?

जैकब व मोनाड की मीरोजाइगोट का अध्ययन
(Study of merozygote by Jacob and Monad)
जेकब व मोनाड ने मीरोजाइगोट के अध्ययन के पश्चात् निम्न निष्कर्ष निकाले-z
़ प्रभावी है dominant Z – उत्परिवर्तित जीन पर (over mutant gene)
y़ प्रभावी है dominant Y- उत्परिवर्तित जीन पर (over mutant gene) ं
ं़ प्रभावी है dominant a- उत्परिवर्तित जीन पर (over mutant gene)
1 प्रभावी है dominant i- उत्परिवर्तित जीन पर (over mutant gene)
o~ dominant OC
जीन i सक्रिय दमन प्रोटीन बनाती है। i. असक्रिय दमन प्रोटीन बनाती है।
i़ O़Z़Y़a़
i-O़Z़Y़a़
i़O़Z-Y-a-
i-O़Z़y़a़
प्रोकेरियोटिक व यूकेरियोटिक जीन नियमन (gene expression) का तुलनात्मक विवरण
क्र.सं. प्रोकेरियोटिक (Prokaryotic) यूकेरियोटिक (Eukaryotic)
1.

 

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प्रोकेरियोटिक जीवों में जीन नियमन नियामक (promoter), एक वर्धक (promoter) तथा एक प्रचालक (operater) के समन्वयन (coordination) द्वारा सम्पन्न होता है।
m-आरएनए से पहले पूर्व m आरएनए नहीं बनता।

एक्सॉन् व इन्ट्रॉन नहीं पाये जाते।

पूर्व एमआरएनए नहीं बनता।

स्पलाइसिंग प्रक्रिया अनुपस्थित ।

 

एन्जाइम आरएनए पॉलिमरेज द्वारा सम्पन्न होता है।

पॉली बहुसमपारी/सिस्ट्रोनिक (Polycistronic)

एक m-आरएनए एक या एक से अधिक प्रोटीन कोडित करते हैं। यूकेरियोटिक जीन नियमन में संवेदक (sensor), समाकलक (integrator), ग्राही (receptor) एवं उत्पादक (producer) जीनी जीनों द्वारा सम्पन्न होता है।

m-आरएनए से पहले पूर्व m-आरएनएए (pre-mRNA निर्मित होता है।
इसमें पुनरावर्ती अनुक्रम के कारण पर्व एमआरएन में एक्सान (सक्रिय जीन) व इन्ट्रॉन (नॉन कोडित जीन) उपस्थित रहते हैं।
पूर्व एमआरएनए (pre-mRNA)निर्मित होता है जिसमें इन्ट्रॉन स्लाइसिंग (Splicing) द्वारा हटाये जाते हैं।
स्पलाइसिंग प्रक्रिया द्वारा लम्बा पूर्व m-आरएनए इन्द्रेन सेअलग होकर छोटा m-आरएनए जिसमें लगातार एक्सॉन उपस्थित रहते हैं, निर्मित होता है।
इसका संपूर्ण भाग प्रोटीन को कोडित कर सकता है। एन्जाइम आरएनए पॉलीमरेज II द्वारा संभव होता है।
एकसमपारी मोनोसिस्ट्रोनिक (monocistronic)

एक m-आरएनए मात्र एक ही प्रोटीन को कोडित करते हैं।

यूकेरियोटिक अनुलेखन न्यूक्लियस में होकर कोशिकाद्रव्य में अनुदित होता है। m-आरएनए दीर्धजीवी होता है। अनुलेखन पूर्व m-आरएनएज आरएनए पॉलीमेरेज अर्थात आरएनए पॉलिमरेज प्प् द्वारा संवर्धित होता है। यह हमेशा एकमात्र प्रोटीन कोड करता है। आरएनए न्यूक्लिलिओटाइड में 5′ सिरे पर केप ‘cap’ तथा 3 सिरे पर पॉली पुच्छ द्वारा रूपान्तरित होते हैं। यह इनको स्थिर करने में सहायक है यूकरियोटिक जीन में प्रोटीन कोडित जीन एन्ट्रॉन जीन (असक्रिय के मध्य स्थित रहते हैं अतः लगातार कोडित अनुक्रम प्राप्त करने के लिय स्थित रहते हैं। पूर्व m आरएनए का इन्ट्रॉन भाग को हटाना आवश्यक होता है। जिसे स्पलाइसिंग द्वारा हटाया जाता है यह यूकेरियोटिक जीन नियमन की एक आवश्यक किया है जो आरएनए-प्रोटीन सम्मिश्र द्वारा सम्पन्न होती है जिसे ‘cap’ कहते हैं। पूर्ण विकसित mRNAs तब न्यूक्लियस से राइबोसोम पर प्रोटीन के रूप में अनुदन के लिये कोशिकाद्रव्य में जाते है।
यह सभी प्रेरित (inducable) हो सकते हैं जिससे जीन उत्परिवर्तित होता है जो सामान्य कार्य नहीं कर सकता है। यहाँ यह निष्कर्ष निकलता है कि सिस व ट्रांस दोनो स्थलों (position) पर जीन दमनकर प्रोटीन प्रसारित (dffiusable) है परन्तु O स्थल मात्र Cis position पर ही अहेतुक (constitutive) रहते हैं। Cis स्थिति में आपरेटर जीन गुणसूत्र पर रचनात्मक जीन के बराबर स्थित होने पर ही उसे प्रभावित करेगा परन्तु ट्रांस स्थिति में रेगुलेटर जीन उसी कोशिका के किसी अन्य गुणसूत्र पर स्थित होने पर भी उन जीनों को प्रभावित कर सकता है। अतः रेगूलेटर जीन के प्रभाव के लिए दमनकर का आसानी से प्रसारित (dffiusable) होना अत्यन्त आवश्यक है जो प्रसारित होकर अन्य गुणसूत्र पर प्रभाव उत्पन्न कर सके जबकि आपरेटर जीन दमनकर की सक्रियता का एक मात्र स्थान है।
यूकेरियोट में जीन नियमन
(Gene Regulation in Eukaryotes)
यूकेरियोट में मात्र 2-15% जीन ही अभिव्यक्ति एक समय में कर पाते हैं अतः इनमें भी जीन नियंत्रण की प्रणाली मौजूद रहती है। यूकेरियोट के जीन निम्न प्रकार के होते हैं
(प) इनमें r-[RNA] 5S RNA तथा t-RNa की कई प्रतिलिपियाँ मौजुद रहती हैं।
r-RNA का अनुलेखन आरएनए पालीमरेज (-1) द्वारा होता है।
5S RNA तथा t-RNA का अनुलेखन आरएनए पॉलीमरेज-III द्वारा होता है।
(ii) जीन की एकमात्र प्रति मौजूद रहती है।
इनका अनुलेखन आरएनए पालीमरेज-II द्वारा होता है। यूकेरियोट में आरएनए हिस्टोन व नॉन हिस्टोन प्रकार का होता है। क्रोमोटीन में डीएनए, हिस्टोन व नान-हिस्टोन भाग होते हैं। यूकेरियोट में विशिष्ट नियमन में नान हिस्टोन प्रोटीन भाग लेते हैं परन्तु हिस्टोन प्रोटीन जीन की सक्रियता का दमन करते हैं। निम्नलिखित प्रेक्षण (observations) द्वारा उपर्युक्त निष्कर्ष प्राप्त हुआ।
(1) नान हिस्टोन प्रोटीन हिस्टोन की तुलना में तीन गुनी भिन्नता प्रदर्शित करते हैं।
(2) नान हिस्टोन में ऊतक विशिष्ट प्रकार के होते हैं इनके डीएनए के बन्धन भी विशेषता लिए होते हैं।
(3) इन विट्रो (In vitro) स्थिति में संवर्धन (culture) के दौरान कुछ नान हिस्टोन आरएनए संश्लेषण को प्रेरित करते पाए
गए।
(4) कुछ विशिष्ट नानहिस्टोन का संश्लेषण जीन सक्रियता के प्रेरण के साथ जुड़ा होना। जीन नियमन के लिए हिस्टोन व
नान. हिस्टोन के मध्य एक पारस्परिक क्रिया (interaction between histones and non-histones) जिम्मेदार होती है जिसमें हिस्टोन प्रोटीन अवशिष्ट (non-specific) रूप से प्रोटीन संश्लेषण को रोकती है तथा नान हिस्टोन द्वारा विशिष्ट रूप से आरएनए संश्लेषण में प्रेरित होता है।
यूकेरियोट के मॉडल अध्ययन करते समय निम्न बातों का ज्ञान आवश्यक है जिनके आधार पर मॉडल बनाया गया है-
;1) डीएनए केन्द्रक में होने पर भी प्रोटीन संश्लेषण कोशिका द्रव्य में सम्पन्न होता है।
(2) डीएनए का प्रमुख भाग सीमित न्यूक्लियोटाइड अनुक्रमों की अनेक प्रतियों द्वारा निर्मित होता है। पुनरावर्ती डीएनए
(repetitive DNA) वह कहलाता है। इसमें सक्रिय जीनों की अनुपस्थिति मानी गयी है। ऐसा डीएनए जीन नियमन “d” कार्य करता है।
ब्रिटन-डेविडसन का यूकेरियोट जीन नियमन मॉडल
(Britten & Davidson model for regulation of gene in Eurkaryots)
इसे ब्रिटन डेविडसन जीन मॉडल के नाम से जाना जाता है। यह मॉडल 1973 में वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत किया गया।
इस मॉडल में जीन नियमन के लिए डीएनए के अनुक्रमों के निम्न चार भाग स्थित होते हैं.
(1) उत्पादक जीन (Producer gene)- यह प्रोकेरियोट के ऑपरॉन मॉडल के संरचनात्मक का के समान ही माना गया है।
(2) ग्राह्यी जीन (Receptor gene)- यह आवश्यक प्रोटीन हेतु संश्लेषित आपरेटर जीन के समतुल्य है तथा यह प्रत्येक प्रोडयूसर जीन के पास ही स्थित रहता है। यह दमनकर और डीएनए के साथ जुड़कर आरएनए पोलीमरेज की उत्पादन जीन पर गति रोकता है।
(3) समाकल जीन (Integrator gene)-समाकल जीन (Integrator gene) इनकी तुलना रेगर जीन से की जा सकती है। यह जीन सक्रियक आरएनए.के संश्लेषण करके जीन की कि को नियंत्रित करते है। सक्रियक आरएनए प्रत्यक्ष अथवा प्रोटीन संश्लेषण के माध्यम द्वारा जीन को सक्रिय करके उसकी गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं।
(4) संवेदक जीन (Sensor gene)- यह जीन समाकलन जीन के अनुलेखन को प्रेरित करके उसका नियमन करते हैं तथा अधिनियमक (super regulator) कहलाते हैं। इस जीन पर हॉरमोन अथवा अन्य अणु इस जीन को पहचान कर इसके साथ जुड़कर जीन के अभिव्यक्ति (expression) में परिवर्तन उत्पन्न कर देते हैं। इस प्रकार समाकलन जीन का अनुलेखन के लिए संवेदक स्थान पर हार्मोन प्रोटीन गठबंधन होना आवश्यक है।
बिट्न डेविडसन मॉडल में कुछ अन्य निष्कर्ष निम्न प्रकार ह
(1) उत्पादक तथा समाकलन जीन ऐसे अनुक्रम हैं जो आरएनए का संलेषण करते है ।
(2) ग्राह्यी तथा संवेदक जीन वे अनुक्रम है जो आरएनए के संलेषण में कोई भाग नहीं लेते हैं परन्तु मात्र अणु विशेष की पहचान में सहायता करते है।
(3) एक ही स्थल पर ग्राह्यी जीन व समाकलन जीन की संख्या एक से अधिक भी पायी गयी है।
(4) एक से अधिक उपर्युक्त जीनों के स्थित होने से एक ही कोशिका के अनेक जीनों का एक साथ नियमन किया जा सकता है।
(5) ग्राह्यी जीन की अनेक प्रतिलिपियाँ मौजूद हो सकती है जो मात्र एक ही प्रेरण (activator) की पहचान करके एक जैव संश्लेषण मार्ग (pathways) के लिए आवश्यक अनेक एन्जाइमों का संश्लेषण एक साथ ही कर सकती हैं।
(6) ग्राह्यी तथा समाकलक जीन की कई प्रतिलिपियों की मौजूदगी के कारण एक ही प्रकार के जीन की आवश्यकता अलग-अलग दिशाओं में होने पर एक साथ ही नियमन संभव है।
(7) उत्पादक जीन में एक से अधिक ग्राह्यी जीन मौजूद रहते हैं। प्रत्येक ग्राह्यी एक एक्टीवेटर के प्रति अनुक्रिया प्रदर्शित करता है। विभिन्न एक्टीवेटर एकमात्र जीन सक्रिय कर सकते हैं। इसी प्रकार एकमात्र एक्टीवेटर भी अनेक जीन की पहचान कर
सकता है।
(8) अनेक समाकलन जीन एक ही संवेदक जीन पर समूह में उपस्थित हो सकते हैं। एक संवेदकजीन द्वारा नियंत्रित अनेक उत्पादक जीनों की सम्पूर्ण समष्टि (population) को बैटरी का नाम दिया गया है। कई बार संवेदक जीन अनेक समाकलन
जीन के साथ संबंधित होते हैं तब एक ही समय में सभी समाकलित जीनों का अनुलेखन हो सकता है।
नवीनतम जानकारी के अनुसार – 30 क्षेत्र (30 nucleotide upstream) पर जो छोटा अनुक्रम (sequence) मौजूद रहता है वह अनुलेखन के लिए आवश्यक पाया गया है। इसकी खोज गोल्डबर्ग होग्नेस नामक वैज्ञानिकों द्वारा की गयी है अतः इसे गोल्डबर्ग होग्नेस बॉक्स अथवा TATA का नाम दिया गया है।
CAAT बॉक्स कुछ जीनों में प्रमोटर क्षेत्र में – 70 से — 18 क्षार युग्मों के बीच स्थित रहते हैं । ये भी नियमन में भाग लेते हैं।