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विधुत युग्मित परिपथ किसे कहते हैं (Electrically Coupled Circuits in hindi)
भौतिक विज्ञान में विधुत युग्मित परिपथ किसे कहते हैं (Electrically Coupled Circuits in hindi) ?
विधुत युग्मित परिपथ (Electrically Coupled Circuits),
प्रेरकत्व L व धारिता C युक्त परिपथ वैद्यत दोलित्रों (Electrical oscillators) का कार्य करते है।
LC परिपथों में युग्मन दो प्रकार से होता है
(i)धारितीय युग्मन (Capacitive coupling)
(ii) प्रेरकत्वीय युग्मन (Inductive coupling)
(i) धारिता युग्मित LC परिपथ (Capacitive coupled LC circuit)
माना दो प्रतिरोध मुक्त LC परिपथ है जिन्हें चित्र (22) के अनुसार धारिता के द्वारा युग्मित किया गया है सरलता के लिये माना दोनों LC परिपथ समरूप हैं अर्थात दोनों परिपथा में प्रेरकत्व (inductance) का मान L तथा धारिता (capacitance) का माना C है दोनों LC परिपथो को, मध्य के संधारित्र सहायता से एक-दूसरे के साथ युग्मित किया जाता है। माना इसकी धारिता का मान भी C है।
माना किसी समय संधारित्रों के प्लेटों पर आवेशों का मान क्रमशः Q1 , Q2 तथा Q3 है तथा परिपथों में धारा क्रमशः I1 तथा I2 हैं।
यदि परिपथ 1 में धारा के परिवर्तन की दर dl1 /dt है तो प्रेरकत्व L में उत्पन्न विद्युत वाहक बल L dl1/dt संधारित्र पर आवेश Q1 विभवान्तर – Q1/C उत्पन्न करेगा। बीच के संधारित्र पर आवेश Q3 विभवान्तर Q3 /C उत्पन्न करेगा, जिससे धारा I1 का मान बढ़ेगा।
L dl1/dt = – Q1/C + Q3/C …………………………….(1)
इसी प्रकार परिपथ 2 में
L dl2/dt = Q2/C – Q3/C …………………………………(2)
समीकरण (1) तथा (2) को अवकलित करने पर
L d2l1/dt2 = – 1/C Dq1/dt + 1/C Dq3/dt ………………………………………(3)
Ld2l2/dt2 = 1/C Dq2/dt – 1/C DQ3/dt ……………………….(4)
Dq1/dt = l1
DQ2/dt = – I2
DQ3 /dt = (I2 – I1)
उपरोक्त मानों को समीकरण (3) तथा (4) में रखने पर
L d2I1/dt2 = – 1/C I1 + 1/C (I2 – I1) ……………………..(5)
L d2I2/dt = 1/C I2 – 1/C (I2 – I1) …………………………(6)
यदि समीकरण (5) तथा (6) में L को m से, 1/C को k से I1 को x से तथा I2 को y से प्रतिस्थापित करें तो समीकरण दो युग्मित यांत्रिकी दोलकों (Two coupled mechanical oscillators) के समीकरण के समरूप होंगे। इसकी दो सामान्य विधायें होंगी।
प्रथम विधा के लिये I2 = I1 लेने पर
L d2I1/dt2 = – l1/C
D2I1/dt2 + I1/LC = 0 ………………………………(7)
इस समीकरण (7) का सामान्य हल होगा
I1 = a cos (ω1 t + φ1)
यहाँ प्रथम सामान्य विधा की कोणीय आवृति ω1 = √1/LC ………………………………….(8)
द्वितीय कम्पन विधा के लिये I1 = I2 लेने पर
L d2I1/dt2 = – 3I1/C
या d2I1/dt2 + 3I1/LC = 0 ………………………(9)
इस समीकरण का सामान्य हल होगा
I = b cos (ω2 t + φ2)
यहाँ ω2 = √3/LC …………………………………….(10)
जो द्वितीय सामान्य विधा की कोणीय आवृत्ति होती है।
प्रथम विधा में बीच के संधारित्र पर कोई आवेश नहीं होता है। (अर्थात् Q3 = 0) इस संधारित्र को हटान पर आवेशों की गति प्रभावित नहीं होती है। प्रथम विधा में आवेश Q1 तथा Q2 के परिमाण हमेशा बराबर लेकिन विपरीत प्रकृति के होते हैं।
द्वितीय कम्पन विधा में आवेश Q1 तथा Q2 के परिमाण बराबर लेकिन समान प्रकृति के होते हैं। इसलिए Q3 आवेश का मान Q1 या Q2 के परिमाण का दुगुना लेकिन विपरीत प्रकृति का होता है।
(iii) प्रेरकत्वीय युग्मित LC परिपथ (Inductively coupled LCcircuit)
माना दो प्रतिरोध रहित LC परिपथ है जिन्हें निम्न चित्रानुसार (23) द्वारा व्यवस्थित किया गया है। ये दोनों LC परिपथ, प्रेरकत्वीय युग्मित होते हैं क्योंकि इनके बीच में अन्योन्य प्रेरकत्व (mutual inductance) होता है जबकि एक परिपथ में प्रवाहित धारा के कारण उत्पन्न चुम्बकीय फ्लक्स दूसरे परिपथ से सम्बद्ध होता है। फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियमानुसार किसी समय जब चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तित होता है तो दोनों परिपथों में विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है।
माना परिपथों 1 व 2 में प्रेरक्त्व क्रमशः L1 तथा L2 और धारितायें क्रमशः C1 तथा C2 हैं। यह माना जाय कि फलक्स का कोई क्षरण (leakage) नहीं हो रहा है तथा प्राथमिक कुण्डली में से इकाई मात्रा की भाग पवाहित करने पर कुल उत्पन्न चुम्बकीय फ्लक्स रेखायें, द्वितीयक कुण्डली के सभी चक्करों से सम्बद्ध होती हैं तो दोनों परिपथों के बीच अन्योन्य प्रेरकता
M = √L1 L2
सामान्यतया कुण्डली से फ्लक्स का क्षरण होता है इसलिए M< √L1 L2 होता है।
अनुपात M/√ L1, L2 = K को युग्मन गुणांक (coupling coefficient) कहते हैं। यह युग्मन की मात्रा (strength of coupling) को नापता है।
माना किसी समय धारितायें C1 तथा C2 पर आवेशों के मान क्रमशः Q1 तथा Q2 तथा परिपथों में तात्कालिक धाराओं के मान क्रमशः I1 तथा I2 हैं
परिपथ में उत्पन्न वोल्टता संधारित्र पर विभवान्तर के तुल्य होगी, अर्थात्
L1 Di1/dt + M dl2/dt = Q1/C1
या L1 dl1/dt + Q1/C2 – M Dl2/dt = 0 ………………………….(1)
तथा परिपथ 2 के लिये
L2 dl2/dt + Q2/C2 – M dl1/dt = 0 ………………………..(2)
समीकरण (1) को अवकलित करने पर
L1 d2l1/dt2 + 1/C1 Dq1/dt – M d2l2/dt2 = 0
DQ1/dt = l1
L1 d2l1/dt2 + 1/c1 I1 – M d2l2/dt2 = 0
D2l1/dt2 + 1/L1C1 I1 – M/L1 d2l2/dt2 = 0
यदि ω1 प्रथम परिपथ की स्वाभाविक कोणीय आवृत्ति हो तो ω1 = √1/L1C1
D2I1/dt2 + ω12l1 – M/L1 d2l2/dt2 = 0 …………………………(3)
समीकरण (2) को अवकलित करने पर
D2l2/dt2 + 1/L2C2 I2 – M/L2 d2l1/dt2 = 0
यदि ω2 द्वितीय परिपथ की स्वाभाविक कोणीय आवृत्ति हो तो
ω2 = √1/L2C2
d2l2/dt2 + ω22 l2 – M/L2 d2I1/dt2 = 0 ………………………………(4)
समीकरण (3) तथा (4) दो युग्मित समीकरण हैं। धारा के परिवर्तन की सामान्य विधा ज्ञात करने के लिये माना कोई विधा कोणीय आवृत्ति ω तथा कला नियतांक φ पर प्राप्त होती है तो
I1 = A cos (ωt + φ) ………………………(5)
I2 = B cos (ωt + φ) ……………………(6)
समीकरण (5) तथा (6) को दो बार अवकलित करने पर
D2l1/dt2 = – ω2l1 ……………………………….(7)
D2l2/dt2 = – ω2l2 ……………………………….(8)
समीकरण (7) तथा (8) का मान समीकरण (3) में रखने पर
– ω2 l2 + ω12 l1 – M/L1 (-ω2 I2) = 0
या I1 (ω21 – ω2) + M/L1 ω2I2 = 0
या I1 (ω2 – ω21) = M/L1 ω2I2
जिससे I1/I2 = M ω2/L1(ω2 – ω21) …………………………………(9)
इसी प्रकार समीकरण (7) तथा (8) का मान समीकरण (4) में रखकर हल करने पर
– ω2I2 + ω22 I2 – M/L2 (-ω2I1) = 0
या I2(ω22 – ω2) + M/L2 ω2I1 = 0
या I2(ω2 – ω22) = M/L2 ω2I1
जिससे I1/I2 = L2(ω2 – ω22)/M ω2 ……………………….(10)
अतः समीकरण (9) तथा (10) के अनुसार
M ω2/L1(ω2 – ω21) = L2(ω2 – ω22)/M ω2
L1L2 (ω2 – ω21) (ω2 – ω22) = M2 ω4
(ω2 – ω21) (ω2 – ω22) = M2/L1L2 ω4
लेकिन K = M/ √L1L2
(ω2 – ω21) (ω2 – ω22) = K2 ω4 ……………………………(11)
समीकरण (11) ω2 का द्विघात समीकरण है तथा इसके हल से सामान्य विधाओं की आवृत्तियाँ प्राप्त होंगी।
यदि दोनों परिपथ समरूपी हों, अर्थात्
L1 =L2 = L तथा C1 = C2 = C हो तो
ω1 = ω2 = ω0 = 1/ √LC
इस विशेष स्थिति में समीकरण (11) से
(ω2 – ω20)2 = K2 ω4
(ω2 – ω20) = Kω2
जिससे ω = ω0/√1 + K
चूंकि आवृत्ति का मान ऋणात्मक नहीं हो सकता है इसलिये दो सम्भावित आवृत्तियाँ (allowed frequencies) होगी
ω = ω0/√1+K
जिससे ω” = ω0/√1-K
उपरोक्त दोनों आवृत्तियाँ ω ‘ तथा ω” दो समान प्रेरकत्वीय युग्मित LC परिपथ के सामान्य विधाओं की आवृत्तियाँ होती हैं। यदि धारा के आयाम तथा आवृत्ति (ω) के बीच वक्र खींचा जाए तो आवृत्ति प्रत्याभिव्यक्ति वक्र (frequency response curve) निम्न प्रकार का होता है जिसे चित्र (24) में प्रदर्शित किया गया है। आवृत्ति प्रत्याभिव्यक्ति वक्र में दो उच्चिष्ठ (maxima) प्राप्त होते हैं।
(A) युग्मन तथा प्रतिरोध लोड का प्रभाव (Effect of coupling and resistive load)
चित्र (3.8-3) के आवृत्ति प्रत्याभिव्याक्त वक्र (frequency response curve) के अध्ययन से यह ज्ञात होता कि जब k का मान न्यून (k-0) होता है अर्थात् दोनों परिपथों के बीच युग्मन दुर्बल (weak) होता है तो प्रत्येक परिपथ अपनी प्राकृतिक आवृत्ति स कम्पन करता है अर्थात ω’= ω” = ω0 । इस स्थिति में आवृत्ति प्रत्याभिव्यक्ति वक्र में केवल एक ही उच्चिष्ठ प्राप्त होता है, अर्थात् दोनों उच्चिष्ठ एक दूसरे पर सम्पाती होते है। जब युग्मन गुणांक k का मान अधिक होता है अर्थात् दोनों परिपथों के बीच में प्रबल युग्मन (tight coupling) होती है तो आवृत्ति प्रत्याभिव्यक्ति वक्र में दो उच्चिष्ठ प्राप्त होते हैं तथा (ω” – ω) का मान अर्थात् ω’ व ω” में अन्तर अधिक हो जाता है।
उपरोक्त विश्लेषण में परिपथों को प्रतिरोध रहित माना गया है तथा प्रतिरोध के प्रभाव को नगण्य किया गया है व्यावहारिक रूप में कुछ प्रतिरोध परिपथ में हमेशा उपस्थित रहता है जिसके कारण आयाम का अधिकतम मान सीमित ही रहता है।
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