राय पिथौरा किसे कहा जाता है ? किला राय पिथौरा का निर्माण किस शासक ने करवाया था ? क्या है अर्थ

By   July 21, 2021

किला राय पिथौरा का निर्माण किस शासक ने करवाया था ? क्या है अर्थ राय पिथौरा किसे कहा जाता है ?

परिशिष्ट-1
दिल्ली-सात बहनों का एक शहर
परिचय
भारत की राजधानी दिल्ली, महान एवं शक्तिशाली साम्राज्यों के अनुक्रमण या उत्तराधिकारियों का केंद्र रही है जिसने दिल्ली को सबसे लंबे समय तक सेवारत राजधानियों और विश्व में सबसे प्राचीन आबाद नगरों में से एक बनाया। इसे एक ऐसे नगर के रूप में जाना जाता है जिसे कई बार निर्मित किया गया, विध्वंसित किया गया तथा पुनर्निमित किया गया क्योंकि भारतीय उप-महाद्वीप पर सफलतापूर्वक आक्रमण करने वाले बाह्य आक्रमणकारी राजधानी दिल्ली नगरी को लूटते थे और जो लोग जीतने और समराज्य स्थापित करने के लिए आते थे, वे इस नगर की रणनीतिक स्थिति से इतना प्रभावित होते थे कि इसे अपनी राजधानी बना लेते और अपने तरीके से इसका पुनर्निर्माण करवाते थे। दिल्ली की मूर्त विरासत का मूल भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान लुटियन की दिल्ली में कुछ ब्रिटिशकालीन वास्तुकला सहित हिंदू और इस्लामी (नगर पर इस्लामी शासन सात सदियों तक रहा) है।

प्राचीन साहित्य में दिल्ली के इतिहास का सन्दर्भ मिथकों और किंवदंतियों पर आधारित हैं। हिंदू महाकाव्य महाभारत के अनुसार, इंद्रप्रस्थ, ‘भगवान इंद्र का नगर‘ नामक नगर पांडवों की राजधानी थी। ऐसा दृढ़ विश्वास है कि पुराना किला प्राचीन इन्द्रप्रस्थ के स्थल पर बना है। इस स्थल से उत्तरी काले पॉलिशदार मृद्भाण्डों (700-200 ई.पू.) को उत्खनित किया गया है और चित्रित धूसर मृद्भाण्ड के टुकड़े सतह पर पाए गए हैं जिससे अपेक्षाकृत अधिक पुरानी, संभवतः 1,000 ईसा पूर्व पुरानी बस्ती के संकेत मिलते हैं। ऐतिहासिक अभिलेखन के अनुसार, दिल्ली में अभी तक सात नगरों की पहचान की गई है।

दिल्ली के सात नगर
दिल्ली के सात शहर निम्न हैं:
ऽ किला राय पिथौरा या लालकोट
ऽ सिरी
ऽ तुगलकाबाद
ऽ जहांपनाह
ऽ फिरोजाबाद
ऽ शेरगढ़ या दिल्ली शेर-शाही
ऽ शाहजहानाबाद

किला राय पिथौरा या लालकोट
10वीं सदी में स्थापित दिल्ली के पहले नगर लालकोट को अभिलेखित ऐतिहासिक तथ्यों की उपलब्धता के कारण इसकी पहचान मिली। इस नगर को पृथ्वीराज चैहान ने बसाया था जिसे राय पिथौरा के रूप में भी जाना जाता था। आरंभ में दिल्ली तोमर राजपूतों के हाथों में थी जिनके हाथों से इसे पृथ्वीराज के पूर्वजों ने छीन लिया था। संभवतः तोमर शासक पाल ने प्रथम ज्ञात नियमित किला – लाल कोट बनवाया था, जिस पर पृथ्वीराज चैहान ने अधिकार कर लिया और अपने इसका किला राय पिथौरा तक विस्तार किया। हालांकि पृथ्वी राज चैहान ने दिल्ली से शासन नहीं किया। उसके
की राजधानी अजमेर में स्थित थी। किला राय पिथौरा का बड़े पैमाने पर फैले खण्डहर कुतुब मीनार के पास स्थित है।

सिरी
खिलजी वंश के विभिन्न शासकों में, अलाउद्दीन खिलजी सर्वाधिक विदित है। उसे 14वीं सदी के आरंभ में दिल्ली के दसरे नगर, अर्थात् सिरी का निर्माण करवाने का श्रेय दिया जाता है। इस अवधि में निर्मित वास्तुकला पर सल्जुक शैली का प्रभाव था। कारीगरी के रूप में यह पश्चिम एशिया के मंगोल हमलों से जूझ से रहे सल्जुकी राजवंश से दिल्ली दरबार में शरण लेने वालों के साथ आई और इसने दिल्ली की वास्तुकला में योगदान दिया। आज, मोटे पत्थर की दीवारों वाला भाग और जलाशय, जिसे हौज खास कहा जाता है, सिरी के किले का प्रतिनिधित्व करता है।

तुगलकाबाद
ग्यासुद्दीन तुगलक ने 14वीं सदी के दूसरे दशक में राजसी और भव्य तुगलकाबाद की स्थापना की थी। उसने यहां एक किला बनवाया था जिसके अवशेष अभी भी बचे हैं। वह तुगलक वंश के विभिन्न शासकों में से प्रथम था।

जहांपनाह
ग्यासुद्दीन तुगलक के बेटे मोहम्मद-बिन-तुगलक ने 14 वीं सदी के पूर्वार्द्ध में जहांपनाह को बसाया था। वह एक कल्पनादर्शी व्यक्ति था, लेकिन इसके संबंध में असामान्य बात यह थी कि उसने चीजों को अलग ढंग से करने का प्रयास किया। उसके द्वारा लिए गए बहुत से निर्णयों में सभी असफल रहे। जहांपनाह, किला राय पिथौरा और सिरी के बीच में दीवार का अहाता है। इसे कई बार दिल्ली का चैथा नगर भी कहा जाता है।

फिरोजाबाद
तुगलक वंश के अगले शासक, मोहम्मद-बिन-तुगलक के भतीजे फिरोज शाह तुगलक ने फिरोजाबाद या फिरोज शाह कोटला नाम से दिल्ली का 5वां नगर बनवाया। इसे यमुना नदी के किनारे 14वीं सदी के उत्तरार्द्ध में बनवाया गया था। यह महलों, स्तम्भों वाला हॉल, मस्जिदों, पिजन टॉवर (कबूतर मीनार) और पानी की टंकी से युक्त ऊंची-ऊंची दीवारों वाला अहाता है। महल के शीर्ष पर अशोक स्तंभ लगाया गया है। फिरोज शाह ने बड़े पैमाने पर कुतुब मीनार, नसीरुद्दीन महमूद के सुल्तान-ए-गढ़ी मकबरे और हौजखास के पुनरुद्धार और मरम्मत का काम भी हाथ में लिया। उसने उत्तरी दिल्ली के कटक पर सीढ़ीदार कुआं और आखेट लॉज का भी निर्माण करवाया था।

शेरगढ़
वर्तमान पुराना किला शेरशाह की रचना है जब वर्ष 1540 ईस्वी में उसने हुमायूं से दिल्ली को अधिकृत कर लिया था। हुमायूं ने मूल रूप से दीनपनाह नाम से नगर का निर्माण करवाया था। शेरशाह ने इसको नष्ट कर इसका नया नाम दिल्ली शेर शाही रखा। शेर-शाह एवं हमायं के खंडहर पर्यटकों के मुख्य आकर्षण के केंद्र हैं ।

शाहजहांनाबाद
मुगल बादशाह शाहजहां राजधानी को पुनः दिल्ली वापस लाया और एक किले और नए नगर का निर्माण करवाया जिसे उसने शाहजहांनाबाद कहा। वर्ष 1642 में नवरोज के दिन शाहजहांनाबाद का उद्घाटन किया गया, शाहजहांनाबाद का क्षेत्र अब पुरानी दिल्ली के रूप में जाना जाता है, जहां लाल किला, जामा मस्जिद, आदि जैसे भव्य स्मारक विद्यमान हैं।
दिल्ली का वर्तमान स्वरूप तोमरों से लेकर मुगल और ब्रिटिश तक कई परिवर्तनों से गुजरा है। सुनियोजित प्रशासनिक राजधानी बनाने में एडविन लुटियन और एडवर्ड बेकर का योगदान उल्लेखनीय है।