जाने मधुमक्खियों की जातियाँ कौन कौनसी है , नाम बताओ Caste of Honey bee in hindi भारत में प्रमुख मधुमक्खी की जाति ?

मधुमक्खियों की जातियाँ :

भारत में मधुमक्खियों की निम्न जातियां पाई जाती है।

  1. एपिस डोरसेटा, जाएन्ट रॉक-हनीबी (Apis dorsata) : आध्य माक्षका। यह भारत सबस बड़ी मधुमक्खी है। इसका शरीर पीला व भरे रंग का होता है। यह मैदानों से लेकर पर्वतो पर 500 मीटर ऊंचाई तक पायी जाती है परन्त गर्मियों में 2000 मीटर ऊँचाई तक प्रवसन करती है। यह ऊँचे पेडों या बडी इमारतों के छज्जों पर अपने छत्ते बनाती है। इस जाति की मक्खी से प्राप्त शहद हमारे देश में कुल एकत्र किए जाने वाले शहद का 75 प्रतिशत है परन्तु यह जातिअपने  गुस्सैल व परिमित (conservation) स्वभाव के कारण पालन के ज्ञात तरीकों के लिए उपयुक्त नहीं है
  2. एपीस फ्लारिया (Apis florea) : भुनगा, भ्रामर या औद्यालक : यह छोटी मधुमक्खी सफेद रंग की लाल धारियाँ लिए होती है। मैदानों व 500 मीटर ऊँचाई तक के पहाड़ी भागों में पाई जाती है । इसक छत्ते छोटे होते हैं तथा एक छत्ते से औसतन 500 ग्राम शहद प्राप्त होता है। इसका शहद सबसे अधिक मीठा होता है। पालन की दष्टि से यह जाति विशेष उपयोगी नहीं है।
  1. एपिस सिराना (Apis cerana indica) : खैरामक्षिका : भारतीय परिस्थितियों में पालन के लिये यह उपयुक्त मधुमक्खी है। इसके तीन प्रभेद (strain) हमारे यहाँ पाए जाते हैं। पिसिया (Picea) पहाड़ों में पाए जाने वाला प्रकार है तथा पिरोनी (Pironi) तराई प्रदेश में पाया जाता है। तीसरा प्रभेद लाइटर इण्डिका है जो मैदानों में मिलता है।

पहले इसे एपिस इण्डिका (Apis indica) भी कहा जाता था। यह पीले रंग की होती है तथा इसकी पीठ पर भूरी धारियाँ होती हैं। यह मक्खी अंधकार पसन्द करती है तथा दरारों, कोटरों, खण्डहरों जैसे अन्धेरे स्थानों पर छत्ते बनाती है।

इसके एक छत्ते से औसतन 5 से 7 किलो शहद प्राप्त होता है। अच्छे रखरखाव से यह उत्पादन दुगुना किया जा सकता है। पालन हेतु जिन आधुनिक चल चौखट छत्तों (Movable Frame hives) का प्रयोग आजकल किया जाता है उन्हें यह मक्खी आसानी से अपना लेती है अत: यह पालन हेतु उपयुक्त है।

  1. एपिस मेलिफेरा (Apis mellifera) : यूरोपीय मधमक्खी : यह मधुमक्खी पूर्व वर्णित तीन जातियों की तरह भारत की देशी जाति नहीं है। इसे यूरोप से भारत लाया गया है। यह भारतीय मक्खियों से बड़ी है तथा पालन के लिए उपयुक्त है।

एक छत्ते में मधुमक्खियों की जनसंख्या (Population of honey bee in a comb or hive) : जन्तु जगत में मधुमक्खी ही एक ऐसा जन्तु है जिसमें सुसंगठित समाज व सामाजिक जीवन पाया जाता है। मधुमक्खियों के समाज या कालोनियाँ बहुवर्षीय (perineal) होती है। ग्रीष्म ऋतु में एक अच्छी सुविकसित कॉलोनी में 50,000 से 80,000 मधमक्खियाँ पायी जाती है। इनमें से एक जननक्षम मादा रानी, कुछ सेंकडों में नर मक्खियाँ तथा शेष सभी बन्ध (sterile) मादा श्रमिक मक्खियाँ होती है।

मधमक्खी की ज्ञातियाँ (Caste of Honey bee)

मधुमक्खियों के सामाजिक जीवन में भी दीमकों की तरह बहुरूपता (polymorphism) मिलती है। मधुमक्खियों में निम्न तीन प्रकार की ज्ञातियाँ या प्रकार पाये जाते हैं

  1. घुमक्षिका या नर (Drone)

नर अगुणित (haploid) होते हैं। मधुमक्खी के छत्ते में नरों की संख्या बहुत कम होती है। ये छत्ते में कोई काम नहीं करते हैं। जीवन में सिर्फ इनका एक ही कार्य होता है। ये आवश्यकता पड़ने पर मादा को निषेचन हेतु शुक्राणु उपलब्ध कराते हैं। इसी कारण ये ड्रोन वृन्दन से पूर्व उत्पन्न होते हैं। जब भोजन की कमी आती है या फूलों का मौसम गुजर जाता है तब छत्ते से नर या घुमक्षिकाओं को खदेड़ दिया जाता है।

वृन्दन के समय नर रानी के साथ कामद उड़ान (nuptial flight) हेतु निकलते हैं। मैथुन के उपरान्त नर की मृत्यु हो जाती है।

  1. रानी (Queen)

रानी छत्ते की एक मात्र वयस्क जननक्षम मादा होती है। मादा भी अण्डोत्पादन के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य नहीं करती। मादा द्विगुणित (diploid) होती है। मादा सामान्यतया आकार में बड़ी होती है तथा यह छत्ते के निचले भाग में पाई जाती है। एक छत्ते में यदि दो रानियाँ उत्पन्न हो जाएँ तो वे या तो प्राणान्तक युद्ध में जुट जाती है अथवा इनमें से एक को छत्ता त्यागना पड़ता है।

  1. श्रमिक (Workers)

श्रमिक द्विगुणित (diploid) बन्ध्य मादाएँ हैं जिनमें जनन-तंत्र अविकसित होता है। छत्ते में प्रजनन के अतिरिक्त सभी कार्य जैसे-रक्षा, छत्ते को गर्म या ठण्डा रखना (मौसम के अनुसार), घुमक्षिका व रानी के पोषण की व्यवस्था, अण्डों की देखभाल करना, छत्ता बनाना, डिम्भकों को पोषण देना आदि श्रमिक ही पूर्ण करते हैं। छत्ते की आबादी का अधिकांश भाग इन्हीं मेहनती श्रमिकों का बना होता है।

मधुमक्खियों में दीमकों की तरह सैनिक नहीं पाए जाते हैं। श्रमिक ही सैनिकों की तरह भी काम करते हैं। इनके उदर पर उपस्थित अण्डनिक्षेपक ( ovipostitor) रूपान्तरित होकर डंक (sting) बनाता है जो अक्रान्ता पर हमला करने के काम आता है

मधुमक्खियों की विश्व में लगभग बीस हजार जातियाँ पाई जाती हैं। इनमें से 80 से 90 प्रतिशत एकल होती है। शेष अलग-अलग प्रकार का सामाजिक जीवन प्रदर्शित करती हैं जिन्हें अलग-अलग नाम दिए गए हैं। यहाँ जो वर्णन किया गया है वह एपिस मेलिफेरा (Apis-mellefera) नामक जाति पर आधारित है। मधुमक्खी पालन हेतु काम ली जा रही अन्य जातियों में भी ऐसा ही सामाजिक जीवन पाया जाता है। इसे अतिसामाजिक (hypersocial) जीवन भी कहा जा सकता है। यह सुसामाजिक कीटों का एक अग्रगत स्वरूप है जिसमें जननशील मादा प्रजनन हेतु इतनी अधिक विशिष्टीकृत हो जाती है कि स्वयं अपना छत्ता नहीं बना पाती है तथा उसके लिए उसे श्रमिकों की आवश्यकता होती है।

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