पैमाने का प्रतिफल किसे कहते हैं ? पैमाने के बढ़ते प्रतिफल का नियम क्या है पैमाने के अनुसार प्रतिफल का नियम

By   July 15, 2021

पैमाने के बढ़ते प्रतिफल का नियम क्या है पैमाने के अनुसार प्रतिफल का नियम पैमाने का प्रतिफल किसे कहते हैं ?

पैमाने का प्रतिफल क्या है ?
(अ) शाश्वत/कालातीत परिघटना
(ब) दिशारहित परिघटना
(स) अल्पकालिक परिघटना
(द) दीर्घकालिक परिघटना
S.S.C.  मल्टी टास्किंग परीक्षा, 2014
उत्तर-(द)
साधन के प्रतिफल (परिवर्तनीय अनुपात) तथा पैमाने के प्रतिफल के बीच अंतर स्पष्ट है। जहां साधन का प्रतिफल उत्पादन फलन की अल्पकालीन व्याख्या से संबंधित है वहीं पैमाने का प्रतिफल उत्पादन फलन की दीर्घकालीन व्याख्या से संबंधित है। इस प्रकार साधनों के प्रतिफल की स्थिति में उत्पादन फलन Qx =(L)K या क्रियात्मक रूप में Qx = f (L) होगा जबकि दीर्घकालीन उत्पादन फलन Qx1 = f (aL , aK) होगा।
पैमाने के अनुसार, प्रतिफल का नियम एक……………धारणा है।
(अ) दीर्घ-चालित उत्पादन की
(ब) मौसमी उत्पादन की
(स) बहुत अल्पचालित उत्पादन की
(द) अल्पचालित उत्पादन की
S.S.C. मल्टी टास्किंग परीक्षा, 2014
उत्तर-(अ)
सामान्यतया ‘पैमाने के प्रतिफल‘ से अभिप्राय उत्पादन के साधनों में इस प्रकार के परिवर्तन से है जिससे उनके बीच का अनुपात अपरिवर्तित रहे। इस प्रकार साधन के प्रतिफल (परिवर्तनीय अनुपात) तथा पैमाने के प्रतिफल के बीच अंतर स्पष्ट है। जहां साधन का प्रतिफल उत्पादन फलन की अल्पकालीन व्याख्या से संबंधित है, वहीं पैमाने का प्रतिफल उत्पादन फलन की दीर्घकालीन व्याख्या से संबंधित है। अतः अभीष्ट उत्तर विकल्प (अ) है।
कॉब-डॉगलस उत्पादन फलन Q = ALak(1-a) किस पर आधारित है?
(अ) मापक का विकासमान प्रतिफल
(ब) मापक का ह्रासमान प्रतिफल
(स) मापक का स्थिर प्रतिफल
(द) मापक का अस्थिर प्रतिफल
S.S.C. संयुक्त स्नातक स्तरीय (Tier – I) परीक्षा, 2017
उत्तर-(स)
कॉब-डॉगलस उत्पादन फलन का विकास पॉल डॉगलस तथा सी डब्ल. कॉब ने, वर्ष 1930 में किया था जो कि प्रथम कोटि के समरूप रेखीय उत्पादन फलन का एक रूप है। यह निम्नवत है Q = ALak (1-a) मापक के स्थिर प्रतिफल पर आधारित है जहां Q- समग्र राष्ट्रीय उत्पाद, L तथा K क्रमशः श्रम तथा पंजी की मात्रा को दर्शाते हैं। A, a तथा (1-a) धनात्मक स्थिरांक है। कॉब-डॉगलस फलन के संदर्भ में स्थिर प्रतिफल से तात्पर्य है कि उत्पादन में उत्पादन के साधनों (पूंजी तथा श्रम) के सापेक्षिक अंश सदैव स्थिर रहते हैं।
प्रतिफल की आंतरिक दर –
(अ) ब्याज दर से कम होनी चाहिए, यदि फर्म को निदेश करना है
(ब) लाभों के वर्तमान मूल्य को लागतों के वर्तमान मूल्य के बराबर
बनाती है
(स) गिरती है, जब किसी निवेश का वार्षिक प्रतिफल बढ़ता
(द) फर्म के सभी निवेशों के लिए बाजार ब्याज दर के बराबर होती है
S.S.C. संयुक्त हायर सेकण्डरी (10़2) स्तरीय परीक्षा, 2014
उत्तर-(ब)
प्रतिफल की आंतरिक दर (Internal rate of return) का NPV (Net Present Valve) से इंगित करते हैं –
NPV = n Σ 1= 0 xi/(1़r)i
यह बॉण्ड बाजार से संबंधित (Term) है।
जब किसी फर्म द्वारा किए गए निवेशों की संख्या बढ़ती है, तो इसके प्रतिफल की आंतरिक दर –
(अ) ह्रासमान सीमांत उत्पादिता के कारण गिरती है
(ब) यदि अन्य बातें पूर्ववत रहें, गिरती है क्योंकि ब्याज की बाजार दर
गिरेगी
(स) वर्तमान उपभोग पूर्वानुमति के लिए फर्म की क्षतिपूर्ति के लिए
बढ़ती है
(द) बढ़ती है क्योंकि बचतों का स्तर गिरेगा
S.S.C. संयुक्त हायर सेकण्डरी (10़2) स्तरीय परीक्षा, 2014
उत्तर-(अ)
ह्रासमान सीमांत उत्पादिता का नियम यह बतलाता है कि एक इनपुट को बढ़ाने और अन्य को उसी स्तर पर रखने से शुरुआत में प्रतिफल बढ़ेगा परंतु बार-बार ऐसा करने (अर्थात् निवेशों की या बढाने) से प्रतिफल में गिरावट आएगी।
वर्द्धमान प्रतिफल नियम का अर्थ है –
(अ) वर्द्धमान लागत (ब) ह्रासमान लागत
(स) वर्द्धमान उत्पादन (द) वर्धमान आय
S.S.C. संयुक्त स्नातक स्तरीय (Tier-I) परीक्षा, 2014
उत्तर-(ब)
वद्र्वमान प्रतिफल या ह्रासमान लागतों से आशय उत्पादन की उस परिस्थिति से है जिसमें उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ औसत तथा सीमांत लागतों में भी ह्रास होता है। यह पद अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से संबंधित है।
यदि ह्रासमान दर पर सीमांत प्रतिफल बढ़ जाता है तो कुल प्रतिफल –

(अ) बढ़ जाता है (ब) घट जाता है
(स) स्थिर बना रहता है (द) शून्य हो जाता है
S.S.C. संयुक्त स्नातक स्तरीय (Tier – I) परीक्षा, 2014
उत्तर-(अ)
यदि ह्रासमान दर पर सीमांत प्रतिफल बढ़ जाता है तो कुल प्रतिफल बढ़ जाता है।
परिवर्ती अनुपात नियम की तीसरी स्थिति को कहते हैं –
(अ) ऋणात्मक प्रतिफल (ब) धनात्मक प्रतिफल
(स) समानुपातिक प्रतिफल (द) वर्धमान प्रतिफल
S.S.C. संयुक्त हायर सेकण्डरी (10़2) स्तरीय परीक्षा, 2013
उत्तर-(अ)
‘परिवर्ती अनुपात नियम‘ (Law of VariableProportions) की तीन स्थितियां हैं प्रथम वर्द्धमान प्रतिफल (Increasing Return), द्वितीय -ह्रासमान प्रतिफल (Diminishing Return) तथा तृतीय – ऋणात्मक प्रतिफल (Negative Return)।
यदि सभी निवेशों में परिवर्तन के कारण उत्पाद में समानुपाती परिवर्तन होता है, तो यह किससे संबद्ध मामला बनता है?
(अ) स्केल में वर्धमान प्रतिफल
(ब) स्केल में ह्रासमान प्रतिफल
(स) स्केल में परिवर्ती प्रतिफल
(द) स्केल में नियत प्रतिफल
S.S.C.C.P.O. परीक्षा, 2015
उत्तर-(द)
पैमाने का सम प्रतिफल (Costant Returns to Scale) की स्थिति में आगत (input) तथा निर्गत (Output) में समान आनुपातिक परिवर्तन होता है। अतः यदि सभी आगतों में निश्चित अनुपात में परिवर्तन के कारण निर्गत में उसी अनुपात में परिवर्तन होता है तो इसे स्केल में नियत प्रतिफल या पैमाने का सम प्रतिफल कहा जाता है।

इसके अंतर्गत बिक्री लागत नहीं है –
(अ) अल्पाधिकार (ब) द्वयाधिकार
(स) पूर्ण प्रतियोगिता (द) एकाधिकारी प्रतियोगिता
S.S.C.CPO  परीक्षा, 2012
उत्तर-(स)
पूर्ण प्रतियोगिता के अंतर्गत बिक्री लागत नहीं होती है जबकि एकाधिकारिक प्रतियोगिता, द्वयाधिकार तथा अल्पाधिकार के अंतर्गत बिक्री लागत शामिल होता है।
वह बिना व्यय की लागतें, जो तब उत्पन्न होती हैं जब कोई उत्पादक फर्म स्वयं स्वामित्व रखती है तथा उत्पादन की कुछ चीजों की पूर्ति करती है, क्या कहलाती हैं?
(अ) सुव्यक्त लागते (ब) मौलिक लागतें
(स) अंतर्निहित लागतें (द) प्रतिस्थापना लागतें
S.S.C. संयुक्त हायर सेकण्डरी (10़2) स्तरीय परीक्षा, 2013
उत्तर-(स)
‘अंतर्निहित लागतें‘ वह लागतें हैं जिनका भुगतान फर्म द्वारा फर्म के स्वामी को किया जाता है। जैसे-निजी पूंजी पर ब्याज, निजी वेतन आदि।
निम्नलिखित में से कौन-सा उत्पादन का एक कारक है?
(अ) कोयला (ब) उद्यमकर्ता
(स) ऊर्जा (द) प्रौद्योगिकी
S.S.C. मल्टी टॉस्किंग परीक्षा, 2014
उत्तर-(ब)
वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन के लिए आवश्यक संसाधनों को उत्पादन के कारक कहते हैं। उत्पादन के कारक उत्पादन प्रक्रिया में निविष्टियां (Inputs) हैं। उत्पादन के कारकों को 4 वर्गों में बांटा गया है- भूमि, श्रम, पूंजी तथा उद्यमवृत्ति या संगठन।
भारतवर्ष में निम्नलिखित किस उद्योग में पानी की खपत सबसे अधिक होती है ?
(अ) कागज तथा पल्प (ब) कपड़ा उद्योग
(स) थर्मल पावर (द) अभियांत्रिकी/इंजीनियरिंग
S.S.C. संयुक्त स्नातक स्तरीय (Tier-I) परीक्षा, 2015
उत्तर-(स)
भारत वर्ष में थर्मल पावर में पानी की खपत सबसे अधिक होती है।
मांग पैदा करने के लिए जरूरत है-
(अ) उत्पादन की (ब) दाम की
(स) आय की (द) आयात की
S.S.C. मैट्रिक स्तरीय परीक्षा, 2008
उत्तर-(स)
मांग पैदा करने के लिए सबसे जरूरी आय होती है। आय रहन पर ही व्यक्ति मांग करता है। मांग को प्रभावित करने वाली प्रमुख बात उपभोक्ता की आय ही है। आय के बढ़ने से क्रय शक्ति बढ़ती है। अतः आय के बढ़ने-घटने पर मांग भी बढ़ती-घटती है।

निम्नलिखित में से किसको राष्ट्रीय ऋण नहीं माना जाता?
(अ) राष्ट्रीय बचत पत्र (ब) दीर्घावधि पॉलिसी
(स) बीमा पॉलिसी (द) भविष्य निधि
S.S.C. स्नातक स्तरीय परीक्षा, 2008
उत्तर-(अ)
राष्ट्रीय बचत पत्र को राष्ट्रीय ऋण की श्रेणी में नहीं रखा जाता है।
बैंकिंग की प्रवृत्तियों और प्रगति पर भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्ष 2008-09 के दौरान भारतीय बैंकों में गैर-निष्पादन परिसंपत्तियों (NPA’S) का प्रतिशत वर्ष 2008 में कितना था?
(अ) 2.3 प्रतिशत (ब) 2.6 प्रतिशत
(स) 3.5 प्रतिशत (द) 5.2 प्रतिशत
S.S.C. स्नातक स्तरीय परीक्षा, 2010
उत्तर-(अ)
2008-09 के दौरान भारतीय बैंकों में गैर-निष्पादन परिसंपत्तियों (NPA’s) का प्रतिशत 2.3 था। वर्ष 2012 के दौरान भारतीय बैंकों में गैर-निष्पादन परिसंपत्तियों (NPA’s) का 3.0ः रहा। GNPAs of SCBs सितंबर, 2014 में 4.5% हो गया जो मार्च, 2014 में 4.1% था। जहां GNPAs : Gross Non Performing Assets. SCBs : Commericial Banks Scheduled. मार्च, 2015 में सभी SCBs का NNPA (NetNon – Performing Assets) To Total Net Advances 2.5% के लगभग था।
नया पूंजी निर्गम रखा जाता है-
(अ) द्वितीयक बाजार में (ब) अलभ्य वस्तु बाजार में
(स) प्राथमिक बाजार में (द) काला बाजार में
S.S.C.Section off. परीक्षा, 2006
उत्तर-(स)
शेयर बाजार को दो बाजारों में बांटा गया है-प्राथमिक और द्वितीयक बाजार। जब नया पूंजी निर्गम प्रस्ताव किया जाता है तो वह प्राथमिक बाजार में रखा जाता है। द्वितीयक बाजार में इलेक्ट्रॉनिक रूप में शेयरों का कारोबार होता है।
अन्य बातें समान होने पर किसी वस्तु की मांग की मात्रा में कमी किस कारण से हो सकती है?
(अ) उस वस्तु की कीमत में वृद्धि
(ब) उपभोक्ता की आय में वृद्धि
(स) उस वस्तु की कीमत में गिरावट
(द) उपभोक्ता की आय में गिरावट
S.S.C. संयुक्त हायर सेकण्डरी (10़2) स्तरीय परीक्षा, 2014
उत्तर-(अ)
अन्य बातें समान रहने पर किसी वस्तु की मांग की मात्रा में कमी, उस वस्तु की कीमत में वृद्धि के कारण होती है क्योंकि कीमत एवं मांग में विलोम संबंध होता है, अर्थात् कीमत बढ़ेगी तो मांग घटेगी तथा कीमत घटेगी तो मांग बढ़ेगी।
मांग वक्र कब अंतरित नहीं होता?
(अ) जब केवल ऐवजी उत्पादों की कीमतें बदलती हैं।
(ब) जब विज्ञापन व्यय में कोई बदलाव होता है।
(स) जब केवल वस्तुओं की कीमत बदलती है।
(द) जब केवल आय बदलती है।
S.S.C. संयुक्त हायर सेकण्डरी (10़2) स्तरीय परीक्षा, 2015
उत्तर-(स)
वस्तु की कीमतों में परिवर्तन से मांग वक्र का विवर्तन न होकर मांग वक्र में विस्तार तथा संकुचन की प्रक्रिया होती है। मांग वक्र पर , नीचे की ओर चलना मांग में विस्तार जबकि ऊपर की ओर चलना मांग में संकुचन कहलाता है।
घरेलू बाजार में टमाटर का दाम बढ़ेगा, यदि –
(अ) देश में टमाटर की भरपूर फसल हो
(ब) क्रेताओं का रुझान आयातित-संसाधित किस्म की और हो जाए (स) ताजे टमाटरों का निर्यात अन्य देशों को किया जाए
(द) टमाटरों के उत्पादन का खर्चा कम हो गया हो
S.S.C. मैट्रिक स्तरीय परीक्षा, 2006
उत्तर-(स)
जब घरेलू टमाटर का निर्यात किया जाएगा तो घरेलू बाजार में टमाटर कम हो जाएगा जिससे उसका दाम बढ़ जाएगा क्योंकि जिस वस्तु की पूर्ति कम हो जाती है उस वस्तु की मांग बढ़ जाती है।
निम्नलिखित किस कारण से एक आवश्यकता मांग बन जाती है?
(अ) क्रय क्षमता (ब) क्रय की आवश्यकता
(स) क्रय की इच्छा (द) वस्तु की उपयोगिता
S.S.C. स्नातक स्तरीय परीक्षा, 2010
उत्तर-(स)
जब वस्तु की खपत बढ़ जाती है तब उसकी उपयोगिता बढ़ जाती है जिस कारण से आवश्यकता मांग बन जाती है। क्रय की इच्छा आवश्यकता को मांग में बदल देती है।