एक निषेचित बीजाण्ड में युग्मनज की कुछ समय की प्रसुप्ति के बारे में आप क्या सोचते हैं ?

एक निषेचित बीजाण्ड में युग्मनज की कुछ समय की प्रसुप्ति के बारे में आप क्या सोचते हैं ?

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प्रश्न 12. एक निषेचित बीजाण्ड में युग्मनज की कुछ समय की प्रसुप्ति के बारे में आप क्या सोचते हैं ?
उत्तर : जब निषेचन की क्रिया होती है तो निषेचित बीजाण्ड के भ्रूणकोष में द्विगुणित युग्मनज (zygote) और त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक (primary endospermic nucleus) को छोड़कर अन्य कोशिकाएँ विघटित हो जाती हैं। अर्थात यहाँ द्विगुणित युग्मनज एवं त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणकोष केन्द्रक विघटित नहीं हो पाती है बाकी इनके अलावा अन्य कोशिकाओं का विघटन हो जाता है |  निषेचन क्रिया के तुरन्त बाद युग्मनज का विभाजन प्रारम्भ नहीं होता। प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक से एक निश्चित सीमा तक भ्रूणपोष के विकसित हो जाने के पश्चात् भ्रूण का विकास शुरू होता है। यह एक प्रकार का अनुकूलन होता है ,  यह इसलिए होता है ताकि विकासशील भ्रूण को सुनिश्चित पोषण प्राप्त हो सके। त्रिगुणित भ्रूणपोष की कोशिकाओं में भ्रूण के लिए उपयोगी खाद्य पदार्थ संचित (संरक्षित या स्टोर) रहते हैं। अत: बीजाण्ड में युग्मनज की कुछ समय की प्रसुप्ति भ्रूणपोष को विकास की पर्याप्त अवधि व अवसर प्रदान करती है। साथ ही भ्रूण को पोषण सुनिश्चित कराती है।

सरल भाषा में समझे –

जब निषेचन की क्रिया होती है तो निषेचन के बाद बीजांड में युग्मनज का विकास होता है या युग्मनज बनता है | यह बीजांड अध्यावरण होकर एक परत का निर्माण कर लेता है जिसे बीजावरण कहा जाता है | इस प्रकार बीजांड के बाहरी अध्यावरण के कारण बाहरी कवच तथा अन्दर वाले अध्यावरण से अंत: कवच का निर्माण होता है | इस भ्रूणपोष के अन्दर खाद्य पदार्थ एकत्रित होने लगता है | साथ ही इसके अन्दर जल का मान धीरे धीरे कम होने लगता है जिसके कारण बीजांड शुष्क हो जाता है और धीरे धीरे बीजांड के अन्दर की कार्यिकी क्रियाएं रुकने लगती है जिसकी वजह से युग्मनज के फलस्वरूप बना हुआ नया भ्रूण सुप्तावस्था में पहुँच जाता है इस प्रक्रिया को युग्मनज प्रसुप्ति कहा जाता है | इस प्रकार बीज आवरण से घिरा हुआ , एकत्रित भोजन युक्त यह सुसुप्त भ्रूण को ही बीज कहते हैं |