अन्तरराष्ट्रीय व्यापार क्या है ? अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लाभ और हानि प्रकार International trade in hindi

By   December 25, 2020

International trade in hindi अन्तरराष्ट्रीय व्यापार क्या है ? अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लाभ और हानि प्रकार ?

उद्देश्य
यह इकाई भूमंडलीकरण की अवधारण और भूमंडलीकरण के प्रादुर्भाव के लिए उत्तरदायी मुख्य घटकों से संबंधित हैं। इस इकाई में भूमंडलीकरण के सूचकों और भारतीय उद्योग पर इसके संभावित प्रभाव की चर्चा करेंगे। इस इकाई को पढ़ने के बाद आप:
ऽ उत्पादन के भूमंडलीकरण का अर्थ समझ सकेंगे;
ऽ भूमंडलीकरण के परिदृश्य के कारकों को पहचान सकेंगे;
ऽ भूमंडलीकरण के सूचकों को पहचान सकेंगे; और
ऽ भूमंडलीकरण की प्रक्रिया का सामना कर रहे भारतीय उद्योगों की क्षमताओं और दुर्बलताओं के संबंध में जान सकेंगे।

प्रस्तावना
आप अन्तरराष्ट्रीय व्यापार अर्थात् दो देशों के बीच व्यापार से भलीभाँति परिचित होंगे। एक देश उन वस्तुओं का निर्यात करता है जिसका उत्पादन वह कम लागत पर कर सकता है तथा उन वस्तुओं का आयात करता हैं जिसकी उन्हें आवश्यकता होती है अथवा जिसका वे अपने देश में उत्पादन नहीं कर सकते हैं। आप जानते हैं कि भारत अन्य वस्तुओं के साथ-साथ चाय, कॉफी और आभूषणों का बहुत बड़ा निर्यातक है। आप यह भी जानते हैं कि भारत कच्चा तेल और औद्योगिक मशीनों का आयात करता है। इसी प्रकार अनेक देश उन उत्पादों का आयात करते हैं जिसका वे कम लागत पर उत्पादन नहीं कर सकते। एक देश का निर्यात दूसरे देश का आयात है। व्यापार के माध्यम से देशों के बीच आर्थिक अन्तक्र्रिया होती है। जब एक देश के श्रमिक किसी दूसरे देश में काम करने जाते हैं तो इससे भी आर्थिक अन्तक्र्रिया होती है। विदेशी कंपनियाँ भारत आती हैं. और कार, टी.वी., तथा अन्य वस्तुओं के उत्पादन के लिए यहाँ कारखाना लगाती हैं। इसे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कहते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, जो भारत में उत्पादन करती हैं, वे अपने उत्पादों का दूसरे देशों को भी निर्यात करती हैं। विश्व अर्थव्यवस्थाओं के साथ घरेलू अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती हुई अन्तक्र्रिया को सामान्यतया भूमंडलीकरण कहते हैं। अब आप कह सकते हैं कि पहले के वर्षों में भी अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार होता था और स्वतंत्रता से पूर्व के वर्षों में भी भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ मौजूद थीं, तो इस बढ़ती हुई अन्तक्र्रिया जिसे भूमंडलीकरण कहा जाता है के बारे में नया क्या हैं? यह अन्तरराष्ट्रीयकरण से भिन्न कैसे है? कौन से कारक इस बढ़ते हुए अन्तक्र्रिया के लिए उत्तरदायी है? अथवा कौन से कारकों ने भूमंडलीकरण की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। यहाँ हमारा संबंध मुख्यरूप से उत्पादन संबंधी गतिविधियों के भूमंडलीकरण से है।

भूमंडलीकरण का अर्थ
हमने भूमंडलीकरण की परिभाषा विश्व अर्थव्यवस्था के साथ घरेलू अर्थव्यवस्था की बढ़ती हुई अन्तक्र्रिया की प्रक्रिया के रूप में की है। यह अन्तक्र्रिया वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार तथा अन्तरराष्ट्रीय निवेश के माध्यम से होती है। भूमंडलीकरण का एक महत्त्वपूर्ण सूचक विश्व उत्पादन में निर्यात का बढ़ता हुआ हिस्सा है। इस समय विश्व उत्पादन का पाँचवाँ हिस्सा अर्थात् 20 प्रतिशत से अधिक का निर्यात होता है। 1950 के दशक में यह 10 प्रतिशत से भी कम था। इसी प्रकार विश्व के विनिर्माण उत्पादन में विनिर्माण निर्यात का हिस्सा काफी बढ़ा है। यह उत्पादन कार्यकलापों के तीव्र भूमंडलीकरण का द्योतक है। तब इस प्रक्रिया में नया क्या है?

अन्तरराष्ट्रीय श्रम विभाजन की प्रक्रिया में अगला चरण भूमंडलीकरण है। उत्पादक उत्पादन प्रक्रिया को विभिन्न चरणों में विभक्त करने की कला सीख चुके हैं। अब एक वस्तु का उत्पादन कई चरणों में होता है तथा प्रत्येक चरण अलग-अलग देशों में पूरा किया जाता है। अब हम एक अत्यन्त साधारण उदाहरण लेते हैं। रंगीन टेलीविजन का उत्पादन तीन चरणों में होता है। पहला चरण टी.वी. का डिजायन तैयार करना है, दूसरा चरण टी.वी. के विभिन्न पुर्जाें का विनिर्माण और तीसरा चरण इन पुर्जाें को जोड़कर टी.वी. तैयार करना है। एक अमरीकी कंपनी टी.वी. का डिजायन तैयार करती है और फिर वह मलेशिया में उत्पादकों को टी.वी. के पुर्जे तैयार करने का आदेश देती है। ऐसा क्यों? क्योंकि मलेशिया में पुर्जा तैयार करना अमरीका की अपेक्षा सस्ता है। मलेशिया के उत्पादक पुर्जे तैयार करने के बाद इसे चीन निर्यात कर देते हैं। क्यों? क्योंकि चीन में टी.वी. तैयार करने के लिए पुर्जे जोड़ने की मजदूरी लागत अत्यन्त ही कम है और अमरीकी कम्पनी ने उन्हें पुर्जाें को चीन भेजने के लिए कहा है। चीन की कंपनी पुर्जाें को जोड़कर टी.वी. तैयार करती है और फिर इनका निर्यात अमरीकी कंपनी को कर देती है। फिर अमरीकी कंपनी इसे उपभोक्ताओं के हाथ बेचती है। कई वस्तुओं के उत्पादन को इस तरह से अलग-अलग चरणों में बाँटना संभव है। उत्पादन का प्रत्येक चरण उस देश में पूरा किया जाता है जहाँ उस चरण को पूरा करने की सबसे अनुकूल दशाएँ होती हैं। विकसित देशों की बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन के भूमंडलीकरण की इस प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। आप अमरीका की फोर्ड मोटर कंपनी के बारे में अवश्य जानते होंगे। यह यूरोपीय बाजार के लिए फोर्ड एस्कोर्ट कार का उत्पादन करती है। इस कार के कल-पुर्जे स्पेन में जोड़े जाते हैं। इस कार के विभिन्न कल-पुर्जे विभिन्न उत्पादकों द्वारा विनिर्मित किए जाते हैं तथा फोर्ड कंपनी को निर्यात कर दिए जाते हैं। ये निम्नलिखित स्थानों पर अवस्थित हैं:
1) क्लच और स्टीयरिंग व्हील (युनाइटेड किंगडम)
2) ग्लास (कनाडा)
3) फैन बेल्ट (डेनमार्क)
4) कार्बुरेटर लैम्प (इटली)
5) स्पीडोमीटर (जर्मनी)
6) इंजन (अमरीका)
7) टायर (नीदरलैंड)

दूसरे शब्दों में, भूमंडलीकरण का अभिप्राय विभिन्न देशों की उत्पादन प्रणालियों के बीच सशक्त सहलग्नता से है। भूमंडलीकरण से विभिन्न देशों में स्थित उत्पादन इकाइयों के नेटवर्क का प्रादुर्भाव हुआ है। इस तरह से विकासशील देश अन्तरराष्ट्रीय व्यापार में हिस्सा लेकर लाभ उठाते हैं। वे उत्पादन के श्रम प्रधान चरणों में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं क्योंकि वहाँ जनसंख्या और श्रम बल का बहुतायत होता है।

भूमंडलीकरण के कारक
श्रम का इस तरह से अंतरराष्ट्रीय विभाजन सिर्फ 1980 और 1990 के दशकों के दौरान ही क्यों हो सका? यह पहले भी विद्यमान था किंतु अस्सी और नब्बे के दशक में इसका तीव्र विकास हुआ। इसके दो महत्त्वपूर्ण कारण बताए जा सकते हैं। एक, विकसित देशों में मजदूरी लागत अपेक्षाकृत अधिक थी और वहीं विकासशील देशों में यह अपेक्षाकृत कम थी। विकसित देशों के उत्पादक विकासशील देशों में कम उत्पादन लागत का लाभ उठाना चाहते थे। दो, अन्तरराष्ट्रीय व्यापार के मार्ग में मौजूद अवरोधों में कुछ कमी आई। ये अवरोध क्या थे?

पद्ध सर्वप्रथम, देश आयातित वस्तुओं पर बहुत ज्यादा टैरिफ (कर) लगाते थे। गैट के अन्तर्गत विकसित देशों ने विकासशील देशों से आयातित वस्तुओं पर धीरे-धीरे परक्रामण टैरिफ (दमहवजपंजपवदे जंतपििे) घटा दिया। विकसित देशों में 1950 के दशक में आयातित वस्तुओं पर 50 प्रतिशत कर हुआ करता था जबकि 1980 के दशक में यह घट कर मात्र 4 प्रतिशत ही रह गया।

पपद्ध दूसरा, परिवहन लागत में कमी आई है। इससे अन्तरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिला। उदाहरण के लिए, आप जानते हैं कि दूसरे देशों को जहाजों से वस्तुएँ भेजी जाती हैं। 1980 से 1996 के दौरान समुद्र मार्ग से वस्तुओं के विदेश भेजने के माल ढुलाई भाड़ा लागत में 70 प्रतिशत की कमी आई। विगत 15 वर्षों के दौरान वायुमार्ग से भी माल ढुलाई के भाड़े में कमी हुई है।

पपपद्ध तीसरा, संचार लागत में कमी आई है। विकसित देशों में अन्तरराष्ट्रीय कॉल के प्रति मिनट लागत में भारी कमी आई है। अमरीका में स्थित एक उत्पादक के लिए किसी विकासशील देश में स्थित उत्पादक को टेलीफोन करना और उससे सम्पर्क साधना अत्यन्त ही सस्ता है। संक्षेप में, दो देशों के बीच लम्बी दूरी के संचार लागत में भारी कमी आई है। इससे विभिन्न देशों में स्थित उत्पादकों का भूमंडलीय संजाल (नेटवर्क) स्थापित करने में काफी मदद मिली है। इसे ही भूमंडलीकरण समझा जाने लगा।

बोध प्रश्न 1
1) अन्तरराष्ट्रीय व्यापार से आप क्या समझते हैं? .
2) अन्तरराष्ट्रीय व्यापार और अन्तरराष्ट्रीय निवेश में अंतर स्पष्ट कीजिए।
3) उन तीन प्रमुख माध्यमों का उल्लेख कीजिए जिनके द्वारा घरेलू अर्थव्यवस्था और विश्व
अर्थव्यवस्था के बीच संपर्क होता है।
4) भूमंडलीकरण के कारकों का वर्णन कीजिए।