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wittig reaction mechanism in hindi example फिटिंग अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण क्या है

फिटिंग अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण क्या है wittig reaction mechanism in hindi example ?

कार्बोनिल यौगिकों की अमोनिया के साथ अभिक्रिया

अमोनिया के साथ फॉर्मेल्डिहाइड अन्य ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइडों से भिन्न अभिक्रिया देता  है | ऐरोमैटिक एल्डिहाइड की अमोनिया के साथ अभिक्रिया ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइड से भिन्न होती है। ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइड एवं कीटोन भी अमोनिया के साथ अभिक्रिया में भिन्नता प्रदर्शित करते हैं। कुछ उदाहरण निम्न प्रकार हैं-

(1) फार्मेल्डिहाइड की अमोनिया के साथ अभिक्रिया यह अमोनिया के साथ अभिक्रिया करके हेक्सामेथिलीन टेट्राऐमीन अथवा यूरोट्रापान अथवा ऐमीनोफॉर्म बनाता है।

अभिक्रिया की क्रियाविधि निम्नलिखित प्रकार है-

(2) ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइडों की अमोनिया के साथ अभिक्रिया-

फार्मेल्डिहाइड के अतिरिक्त अन्य सभी ऐल्डिहाइड अमोनिया के साथ ईथरीय विलयन में ऐल्डिहाइड अमोनिया देते हैं। ये ऐल्डिहाइड अमोनिया अस्थाई होते हैं और सुगमता से इनका चक्रीय बहुलकीकरण हो जाता है। उदाहरणार्थ, ऐसीटेल्डिहाइड अमोनिया से क्रिया करके ऐसीटैल्डिहाइड अमोनिया बनाता है जो वास्तव में ट्राइमेथिल हेक्साहाइड्रोट्राइऐजीन का ट्राइहाइड्रेट होता है।

(3) बेंजेल्डिहाइड की अमोनिया के साथ अभिक्रिया – अमोनिया के साथ बेन्जेल्डिहाइड ऐल्डिहाइड–अमोनिया जैसा सरल यौगिक नहीं बनाता है वरन यह एक जटिल क्रिस्टलीय यौगिक हाइड्रो बेन्जामाइंड (Hydrobenzamide) बनाता है।

(4) कीटोन की अमोनिया के साथ अभिक्रिया – कीटोन अमोनिया के साथ अभिक्रिया करके जटिल संघनन उत्पाद बनाते हैं। यदि प्रोपेनॉन की क्रिया अमोनिया के साथ की जाए और उत्पाद मिश्रण को अम्लीकृत किया जाए तो डाइ ऐसीटोन ऐमीन (I) और ट्राइ ऐसीटोन ऐमीन (II) बनते हैं। यदि अभिक्रिया कमरे के ताप पर की जाए तो मुख्य उत्पाद (1) होता है और उच्च ताप पर की जाए तो (II) मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है। अभिक्रिया की क्रिया – विधि अनिश्चित है परन्तु यह माना जा सकता है कि अमोनिया (क्षार) की उपस्थिति में प्रोपेनॉन के दो अणु ऐल्डोल संघनन द्वारा मेसीटिल ऑक्साइड (4-मेथिल पेन्ट -3-ईन-2–ऑन) और तीन अणु फोरोन (2,6-डाइमेथिल हेप्ट -2, 5-डाइ ईन-4-ऑन) देते हैं जो फिर अमोनिया से अभिक्रिया करके डाइ ऐसीटोन ऐमीन (1) तथा ट्राइ ऐसीटोन ऐमीन (II) बना लेते हैं।

एरोमेटिक तृतीयक ऐमीन के साथ संघनन पर ट्राइफेनल व्युत्पन्न बनाता है जो ऑक्सीकरण पर मेलाकाइट हरित नामक रंजक बनाता है।

विटिंग अभिक्रिया (Witting Reaction)

ऐल्डिहाइड एवं कीटोन फॉस्फोरस यलाइड (Phosphorous ylides) के साथ शुष्क ईथर में अभिक्रिया करके प्रतिस्थापित ऐल्कीन बनाते हैं। इस अभिक्रिया को विटिंग- अभिक्रिया और फॉस्फोरस यलाइड को विटिंग अभिकर्मक कहते हैं।

फॉस्फोरस यलाइड को निम्नलिखित दो संरचनाओं का अनुनाद संकर माना जाता है-

विटिंग अभिक्रिया की सम्भावित क्रियाविधि निम्न प्रकार दी जा सकती है-

प्रथम पद – ऐल्डिहाइड या कीटोन फॉस्फोरस यलाइड के साथ अभिक्रिया करके ऑक्साफॉस्फीटेन बनाते हैं

पद 2– ऑक्साफॉस्फीटेन ऐल्कीन एवं ट्राइफेनिल फॉस्फीन ऑक्साइड में अपघटित हो जाता है

 मैनिक अभिक्रिया (Mannich Reaction)

इनोल रूप में अस्तित्व में रहने वाले यौगिक (अर्थात वे यौगिक जिनमें कम से कम एक सक्रिय H-परमाणु उपस्थित हो) जैसे कार्बोनिल यौगिक या नाइट्रोयौगिक की फॉर्मेल्डिहाइड और प्राथमिक या द्वितीयक ऐमीन के साथ अभिक्रिया से प्राप्त यौगिक मानिश क्षार (Mannich base) और अभिक्रिया मैनिक अभिक्रिया कहलाती है। उदाहरणार्थ-

(i) ऐसीटोन की फार्मेल्डिहाइड एवं डाइऐथिलऐमीन के साथ अभिक्रिया को निम्न प्रकार प्रदर्शित कर सकते हैं:-

(1) बहुलकीकरण अभिक्रियाऐं (Polymerisation reactions):-

निम्नतर ऐल्डिहाइडों के बहुलकीकरण पर निश्चित संघटन वाले बहुलक बनते हैं जबकि उच्चतर ऐल्डोहाइडों के बहुलकीकरण पर अनिश्चित संघटन वाले बहुलक बनते हैं।

(i) फार्मेल्डिहाइड के तीन अणु अम्ल की उपस्थिति में ट्राइऑक्सेन देते हैं।

(ii) ऐसीटैल्डिहाइड के चार अणु मिलकर मैटाऐल्डिहाइड बनाते हैं।

(2) क्लैजन संघनन:-

दो एस्टर अथवा एक एस्टर एवं एक कीटोन संघनित होकर क्लैजन अभिक्रिया देते हैं। यह संघनन क्षारीय उत्प्रेरकों जैसे सोडियम एथॉक्साइड, सोडामाइड की उपस्थिति में होती है ।

क्लैजन अभिक्रिया (Claisen’s reaction) :- ऐरोमैटिक ऐल्डीहाइड अथवा कीटोन, एक अन्य कार्बोनिल यौगिक के साथ तनु क्षारीय माध्यम में संघनित होकर a,p- असंतृप्त यौगिक बनाते है। इसे क्लैजनश्मिट अभिक्रिया भी कहते हैं ।

(4) रिफॉर्मेट्स्की अभिक्रिया (Reformatsky’s reaction):- Q- हैलोजन एस्टर धात्विक जिंक तथा ईथर की उपस्थिति में कार्बोनिक यौगिकों से अभिक्रिया पर B- हाइड्रॉक्सी एस्टर देते हैं।

(5) टिशेन्को अभिक्रिया (Tischenko’s reaction) :- ऐलुमीनियम एथॉक्साइड की उपस्थिति में ऐल्डीहाइड, कैनीजारों प्रकार की अभिक्रिया में समान क्रियाविधि कर एस्टर का निर्माण करते हैं। उदाहरणार्थ,

(6) हेलोफार्म अभिक्रिया (Haloform reaction):– वे कार्बोनिल समूह जिनमें CH, C – समूह होता है, हैलोजन तथा क्षार के साथ गरम करने पर हैलोफार्म बनाते हैं। उदाहरणार्थ, ऐसीटोन, आयोडीन तथा सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया पर आयडोफार्म बनाता है। उदाहरणार्थ,

आयडोफॉर्म पीले रंग को अवक्षेप के रूप में प्राप्त होता है। अभिक्रिया की क्रियाविधि निम्नलिखित प्रकार है।

रक्षी समूह के रूप में ऐसीटैल समूह का उपयोग (Uses of acetals as protecting groups)

ऐल्डिहाइड या कीटोन के ऐल्कोहॉलिक विलयन में HCI गैस प्रवाहित करने पर पहले हेमीऐसीटैल बनता है जो ऐल्कोहॉल के दूसरे अणु के साथ अभिक्रिया करके ऐसीटैल बना देता है।

सरल ऐल्कोहॉल के साथ HCl (g) की उपस्थिति में कीटोन के साथ अभिक्रिया पर ऐसीटैल (कीटैल) नगण्य रूप में बनता है । परन्तु कीटोन चक्रीय ऐसीटैल सुगमता से बना लेते हैं। (कीटोन के साथ ऐल्कोहॉल की अभिक्रिया से बने यौगिकों को कीटैल कहते हैं। परन्तु IUPAC प्रणाली इसको मान्यता नहीं देती है अतः इन्हें यहाँ ऐसीटैल से ही जाना जायेगा ) ।

जब कीटोन की अभिक्रिया 1,2-डाइऑल की अधिकता के साथ करते हैं तो चक्रीय ऐसीटैल बनते हैं। अभिक्रिया अम्ल की सूक्ष्म मात्रा की उपस्थिति में होती है।

यदि चक्रीय ऐसीटैल की जलीय अम्ल के साथ अभिक्रिया करें तो यह पुनः कीटोन एवं 1,2-डाइऑल में परिवर्तित हो जाता है।

यद्यपि ऐसीटैल जलीय अम्ल की उपस्थिति में संगत ऐल्डिहाइड एवं कीटोन में जल अपघटित हो जाते हैं परन्तु क्षार की उपस्थिति में स्थायी हैं और जल अपघटित नहीं होते ।

ऐसीटैल के इस गुण के कारण ही इन्हें ऐल्डिहाइड एवं कीटोन के रक्षी समूह के रूप में प्रयुक्त करते हैं। किसी यौगिक में ऐल्डिहाइड एवं कीटोन समूह की अवांछित अभिक्रिया को रोकने के लिए पहले उसे ऐसीटैल में बदल लेते हैं। अब यौगिक में उपस्थित अन्य समूह की अभिक्रिया को क्षारीय माध्यम में करने के पश्चात प्राप्त उत्पाद में उपस्थित ऐसीटैल समूह को अम्लीय माध्यम में जल अपघटन करके पुनः ऐल्डिहाइड या कीटोनिक समूह में परिवर्तित कर लेते हैं। मुख्य रूप से चक्रीय ऐसीटैल ही रक्षी समूह के रूप प्रयुक्त होते हैं।

उदाहरणार्थ (i) निम्नलिखित पर विचार करें-

इस अभिक्रिया को करने के लिए पहले 5- हेक्साइन -2-ऑन की अभिक्रिया NaOH से करके इसे ऐसीटिलिनिक ऐनायन में बदलना चाहिए और फिर इसकी अभिक्रिया मेथिल आयोडाइड से कर देनी चाहिए परन्तु ऐसीटिलिनिक आयन बनाने के लिए लिया गया अभिकर्मक कार्बोनिल समूह को ऐल्कोहॉलिक समूह में बदल देगा । अतः पहले कार्बोनिल समूह का रक्षण आवश्यक है। अतः इसका ऐसीटैल बनाकर रक्षण करते हैं । अभिक्रिया अनुक्रम को निम्न प्रकार प्रदर्शित कर सकते हैं।

अपचयित हो जाता है । परन्तु कीटो समूह का अपचयन – COOC2H5 समूह की अपेक्षा इन अपचायकों द्वारा अधिक सुगमता से हो जाता है। अतः केवल – COOC2H, का अपचयन करने के लिए कीटो : का चक्रीय ऐसीटैल बनाकर रक्षण कर लेते हैं। अपचयन के बाद प्राप्त यौगिक में ऐसीटैल समूह को कीटो समूह में बदलने के लिए उसका अम्लीय जल अपघटन कर देते हैं।

-COOH समूह का LiAlH से अपचयन करने पर यह – CH2OH समूह में बदल जाता है परन्तु कीटो समूह – C – का अपचयन – COOH समूह की अपेक्षा अधिक सुगमता से – CHOH में हो जाता है।

अतः कीटो समूह को चक्रीय ऐसीटैल बनाकर रक्षित कर लेते हैं। उपर्युक्त परिवर्तन के अभिक्रिया अनुक्रम को निम्न प्रकार प्रदर्शित कर सकते हैं।

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