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two port network in hindi द्वि द्वारक जाल किसे कहते हैं दो पोर्ट जाल की परिभाषा क्या है उदाहरण
जानिये two port network in hindi द्वि द्वारक जाल किसे कहते हैं दो पोर्ट जाल की परिभाषा क्या है उदाहरण ?
चर्तुटर्मिनल जाल या द्वि- द्वारक जाल (FOUR-TERMINAL NETWORK OR TWO-PORT NETWORK)
चित्र (1.7-1) में प्रदर्शित चार टर्मिनल जटिल जाल (complex
network) है जिसमें अनेक प्रतिरोध, प्रेरकत्व, संधारित्र आदि एक दूसरे से सम्बन्धित अवयव (interconnected ) हो सकते हैं। चार टर्मिनल के जाल के व्यवहार की निवेशी (1, 1) तथा निर्गम (2, 2) टर्मिनलों पर मापित राशियों के रूप में व्यक्त कुछ प्राचलों (parameters) के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इन्हें चार टर्मिनल जाल के प्राचल कहते हैं। चार टर्मिनल के जाल के विश्लेषण में यह माना जाता है कि ब्लैकबॉक्स N में प्रयुक्त सभी अवयव जैसे प्रतिरोध, प्रेरकत्व, संधारित्र,
ट्रान्सफॉर्मर इत्यादि सरल रेखीय अवयव (linear elements) है अर्थात् इन अवयवों के लिये वोल्ट – एम्पियर अभिलाक्षणिक वक्र सरल रेखीय है।
(A) चार टर्मिनल जाल के प्राचल (Parameters of Four Terminal Network)——
चार टर्मिनल जाल के निम्न प्राचलं होते हैं-
(i)
Z-प्राचल (Z-parameters) या खुला परिपथ प्रतिबाधा प्राचल (open circuit impedance parameters)-
(ii) Y-प्राचल (Y-parameters) या लघुपथित प्रवेश्यता प्राचल (short circuit admittance parameters)-
(iii) h–प्राचल (h-parameters) या संकर प्राचल (hybrid parameters)
(i) Z-प्राचल (Z-parameters ) या खुला परिपथ प्रतिबाधा प्राचल (Open circuit impedance parameters)—–माना चित्र (17- 1 ) में प्रदर्शित चार टर्मिनल के जाल के निवेशी तथा निर्गम सिरों से सम्बन्धित वोल्टतायें क्रमश: v1 तथा v2 और धारायें क्रमश: I1 तथा I2 है। यदि I1 तथा I2 को स्वतंत्र चर ( independent variables) मान लें तो चार टर्मिनल जाल के लिये व्यापक फलन सम्बन्ध (general functional relation) होंगे-
V1 = f1 (i1, i2)
V2 = f2 (i1, i2)
की प्रत्यावर्ती वोल्टता तथा धारा प्रयुक्त की जाये तो उत्पन्न परिवर्तनों को गणितीय रूप में लिखा जा सकता है-
वोल्ट – एम्पियर अभिलाक्षणिक रेखीय होने के कारण आंशिक अवकलनों (partial derivatives) का मान नियत होगा तथा उनकी विमायें प्रतिबाधा की विमा होंगी। वोल्टता तथा धारा में परिवर्तनों को क्रमश: Vव I से लिखने पर –
उपरोक्त प्रतिबाधायें Z11, Z12 , Z22 तथा Z21 को चार टर्मिनल जाल के Z-प्राचल (पैरामीटर) कहते हैं। इन्हें खुला परिपथ प्रतिबाधा प्राचल (impedance parameters) भी कहते हैं।
समीकरण (3) तथा (4) को 2- प्राचलों के रूप में लिखने पर,
(ii) Y-प्राचल (Y-Parameters) या लघुपथित प्रवेश्यता प्राचल ( Short circuit admittance parameters)—–यदि v1 तथा v2 को स्वतंत्र चर ( independent variables) मान लें तो चार टर्मिनल जाल के लिये व्यापक फलन सम्बन्ध होंगे-
यदि परिपथ में कम मान की प्रत्यावर्ती धारा या ज्यावक्रीय धारा (sinusoidal current) लगायी गयी है तथा उस भाग में जहाँ वोल्ट – एम्पियर अभिलाक्षणिक वक्र का ढाल या आशिक अवकलज नियत हो तो उपरोक्त समीकरणों (8) तथा (9) को निम्न रूप में लिखा जा सकता है-
उपरोक्त प्रवेश्यतायें Y11 , Y12 , Y22 तथा Y21 को चार टर्मिनल जाल के Y – प्राचल कहते हैं। इन्हें लघुपथित प्रवेश्यता प्राचल भी कहते हैं।
समीकरण (10) तथा (11) को Y-प्राचलों के रूप में लिखने पर,
(iii) h – प्राचल (h-parameters) या संकर प्राचल (Hybrid parameters ) – यदि निवेशी धारा i1 तथा निर्गम वोल्टता V2 को स्वतंत्र चर ( independent variables) मानें (इन चरों से ऐसे प्राचलों का सेट प्राप्त होता है कि जो कि ट्रॉन्जिस्टर परिपथ के विश्लेषण के लिये विशेष रूप से उपयोगी होता है) तो इस अवस्था में फलन सम्बन्ध
यदि परिपथ में कम मान का प्रत्यावर्ती या ज्यावक्रीय संकेत लगाया जाये तो सरल रेखीय क्षेत्र में आंशिक अवकलज का मान नियत होगा । अत: समीकरण ( 15 ) तथा ( 16 ) को निम्न रूप में लिखा जा सकता है –
उपरोक्त गुणा’को’ (coefficients) h11, h12, h22 तथा h21 को चार टर्मिनल जाल के h-प्राचल कहते हैं। इन्हें संकर- प्राचल (hybrid parameter) भी कहते हैं क्योंकि इन्हें परिभाषित करने में खुले व लघु पथित दोनों प्रकार के समापनों का उपयोग होता है।
समीकरण (17) तथा ( 18 ) को प्राचलों के रूप में लिखने पर
(B) चार टर्मिनल जाल के विभिन्न प्राचलों का आपस में सम्बन्ध
z तथा Y प्राचलों का आपस में सम्बन्ध
समीकरण ( 5 ) तथा (6) से तथा Z पैरामीटरों के लिये,
माना कि उपर्युक्त समीकरण में V1 तथा V2 ज्ञात है तो इन्हें I1 तथा I2 के लिये हल करने पर क्रेमर के नियम से (By Cramer rule)
(ii) Z तथा प्राचलों का आपस में सम्बन्ध-
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