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Thermodynamic Scale of Temperature in hindi ऊष्मागतिक ताप पैमाना क्या है , परिभाषा ऊष्मा गतिकी
जानिये Thermodynamic Scale of Temperature in hindi ऊष्मागतिक ताप पैमाना क्या है , परिभाषा ऊष्मा गतिकी ?
ऊष्मागतिक ताप पैमाना (Thermodynamic Scale of Temperature)
सभी ताप पैमाने तापमापी (thermometers) में प्रयुक्त द्रव्यों के गुणों पर निर्भर करते हैं जैसे पारद तापमाथी में पारे के रेखीय प्रसार पर गैस तापमापी में गैस के आयतन प्रसार पर तथा प्रतिरोधी तापमापी में पदार्थ के प्रतिरोधी पर। इन सभी तापमापियों के पाठ्यांक पूर्णतः समान नहीं होते हैं। अतः किसी निकाय का यथार्थ ताप मापन के लिए एक ऐसे ताप पैमाने का उपयोग होना चाहिए जो पदार्थ के गुणों पर निर्भर नहीं करता हो । वैज्ञानिक केल्विन ने सर्वप्रथम कार्नो इंजन पर आधारित एक ताप पैमाने की कल्पना की जिसे ऊष्मागतिक ताप पैमाना कहते हैं। इसका कारण है कि कार्नो इंजन की दक्षता इंजन के कार्यकारी द्रव्य के गुणों पर निर्भर नहीं करती है बल्कि उन तापों पर निर्भर करती है जिनके मध्य यह इंजन कार्य करता है। माना एक उत्क्रमणीय (reversible) कार्नो इंजन θ1 ताप पर ऊष्मा Q1 ग्रहण करता है और θ2 ताप पर ऊष्मा Q2 निष्कासित करता है।
चूंकि कार्नो इंजन की दक्षता दोनों तापों θ1 व θ2 पर निर्भर करती है इसलिए दक्षता इन दोनों तापों की फलन होगी।
जहाँ F (θ1, θ2) ताप θ1 व θ2 का एक अन्य फलन है। माना यह उत्क्रमणीय इंजन अन्य तापों θ2 व θ3 (जब θ2 > θ3 ) के बीच कार्य करता है तथा θ2 ताप पर Q2 ऊष्मा ग्रहण करता है। और θ3 ताप पर Q3 ऊष्मा निष्कासित करता है।
इसी प्रकार, यदि यह उत्क्रमणीय इंजन ताप θ2 तथा θ3 के बीच कार्य करता हुआ ताप θ2 पर ऊष्मा Q2 ग्रहण करता है तथा ताप θ3 पर ऊष्मा] Q3 निष्कासित करता है तो
उपर्युक्त समीकरण के बायीं ओर का व्यंजक केवल θ1 व θ3 तापों का फलन है इसलिए दायीं ओर का व्यंजक भी ताप θ1 तथा θ3 का फलन होना चाहिए। अतएव इस सम्बन्ध की वैधता के लिए दायीं ओर के फलन इस प्रकार होने चाहिए कि ताप θ2 की निर्भरता समाप्त हो जाये। अतः समीकरण (6) तभी सत्य होगा जब F (θ1 , θ2) का रूप Φ (θ1)/Φ (θ2) की भांति हो। इस प्रकार समीकरण (6) की संतुष्टि के लिए –
समीकरण (7) से स्पष्ट है कि फलन ) Φ (θ) ताप θ का रेखीय फलन है और ताप वृद्धि के अनुत्क्रमानुपाती होता है। अत: इस फलन )Φ(θ) को ताप मापन के उपयोग में लाया जा सकता है। यदि Φ(θ) ताप फलन को नवीन ताप पैमानें में ताप τ मान लें तो
यह नवीन ताप पैमाना जो कार्यकारी द्रव्य के गुणों पर निर्भर नहीं करता है ऊष्मागतिक ताप पैमाना कहलाता है। इस ताप पैमाने पर किन्हीं दो तापों का अनुपात उन्हीं दोनों तापों के मध्य कार्य कर रहे कार्नो इंजन के द्वारा ग्रहण की गई तथा निष्कासित ऊष्माओं के अनुपात के बराबर होता है ।
उत्क्रमणीय इंजन की दक्षता
(i) परम शून्य ताप (Absolute zero temperature)
समीकरण (10) से
τ2 = 0 पर Q2 = 0 तथा n = 1
ऊष्मागतिकी ताप पैमाने का परम शून्य ताप उत्क्रमणीय इंजन के सिंक का वह ताप है जिस पर इंजन द्वारा सिंक में ऊष्मा निष्कासित नहीं होती है और स्रोत से जितनी ऊष्मा ग्रहण की जाती है वह पूर्णरूप से कार्य में परिणित हो जाती है अर्थात् उत्क्रमणीय इंजन की दक्षता 100% होती है। यही परम शून्य ताप की ऊष्मागतिक परिभाषा है।
किसी भी द्रव्य का ताप परम शून्य ताप से कम होना सम्भव नहीं है क्योंकि यदि सिंक का ताप τ2 ऋणात्मक है तो इसकी दक्षता 100 % से अधिक हो जायेगी और तब यह इंजन सिंक से भी ऊष्मा का ग्रहण करेगा जो ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम के विरुद्ध है।
(i) ऊष्मागतिकी ताप पैमाने पर एक अंश ( degree) का आकार ( size) ऊष्मागतिकी ताप पैमाने के 1 भाग के आकार (size) को ज्ञात करने के लिये जल के क्वथनांक (boiling point) τs तथा हिमांक (freezing point) τi के बीच कार्य करता हुआ एक उत्क्रमणीय कार्नो इंजन लेते हैं। माना चित्र में इस इंजन के कार्नो चक्र को P-V सूचक आरेख पर ABCD चक्र द्वारा प्रदर्शित किया गया है जिसमें AB एवं CD क्रमश: τs एवं τi ताप एंव पर समतापी वक्र है। .: कार्नो इंजन द्वारा किया गया कार्य W = ABCD का क्षेत्रफल यदि इस कार्य क्षेत्र को समतापी वक्र के समानान्तर वक्र खींच कर 100 बराबर भागों में बाँट दिया जाये और इसके एक भाग के क्षेत्रफल के बराबर कार्य करने वाला कोई कार्नो इंजन लें तो इस कार्नो इंजन के स्रोत एवं सिंक के बीच तापान्तर 1° के बराबर होगा। अतः यदि किसी उत्क्रमणीय इंजन के द्वारा किया गया कार्य जल के क्वथनांक एवं हिमांक के बीच कार्नो इंजन के द्वारा किये गये कार्य का 1/100 वाँ भाग है तो इस उत्क्रमणीय इंजन के स्रोत एंव सिंक के बीच तापान्तर 1° के बराबर होता है। इस परिभाषानुसार τs – τi = 100 (iii) अज्ञात ताप ज्ञात करना माना एक कार्नो इंजन क्वथनांक τs पर Qs ऊष्मा ग्रहण करता है तथा हिमांक τi Qi ऊष्मा निष्कासित करता है
इसके τi ताप का मान ज्ञात हो जाता है। अब यदि यह कार्नो इंजन अज्ञात ताप τ तथा हिमांक के बीच कार्य कर रहा है और ताप पर ऊष्मा Q ग्रहण करता है तो
समीकरण (13) से τi का मान रखने पर
इस प्रकार इस समीकरण से अज्ञात ताप τ का निर्धारण हो जाता है।
(iv) ऊष्मागतिक ताप पैमाने तथा गैस पैमाने की तुल्यता हम जानते हैं कि आदर्श गैसं तापमापी द्वारा मापे गये ताप T1 व T2 के बीच कार्य करने वाले कार्नो इंजन की दक्षता
तथा ऊष्मागतिक ताप पैमाने द्वारा मापे गये ताप τ1 व τ2 के बीच समान कार्नो इंजन की दक्षता
अर्थात् इन ताप पैमानों पर किन्हीं दो तापों की निष्पति समान होती है। समीकरण ( 3 ) से, यदि T 2 = 0 हो तो τ2 भी शून्य के बराबर होना चाहिए। दूसरे शब्दों में, दोनों ताप पैमानों के परम शून्य आदर्श इंजन के सिंक के उस ताप को व्यक्त करते हैं जिसके लिए कार्नो इंजन की दक्षता 100% होती है ।
दोनों ताप पैमानों में जल के क्वथनांक तथा हिमांक बिन्दु के मध्य तापान्तर भी 100 के बराबर होता है अर्थात्
इसलिए दोनों ताप पैमानों में 1° का आकार भी समान होता है। माना कार्नो इंजन जल क्वथनांक तथा हिमांक बिन्दु के मध्य कार्य कर रहा है इसलिए समीकरण ( 1 ) व (2) से कार्नो इंजन की दक्षता
अतः ऊष्मागतिकी ताप पैमाने तथा गैस ताप पैमाने में जल के क्वथनांक तथा हिमांक बिन्दु के ताप समान है, दोनों पैमानों के 1° का आकार समान है तथा दोनों पैमाने के प्रारम्भिक ताप (परम शून्य) भी समान है इसलिए दोनों ताप पैमाने परस्पर समतुल्य होते हैं।
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