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thermionic emission in hindi तापायनिक उत्सर्जन क्या है , ताप आयनिक उत्सर्जन किसे कहते हैं परिभाषा
जाने thermionic emission in hindi तापायनिक उत्सर्जन क्या है , ताप आयनिक उत्सर्जन किसे कहते हैं परिभाषा ?
तापायनिक उत्सर्जन (Thermionic Emission)
धातुओं में उनके परमाणुओं के संयोजी इलेक्ट्रॉनों (valence electrons) का, अन्य पूर्ण कोशों में स्थित इलेक्ट्रॉनों के आवरणी प्रभाव (screening effect) के कारण, उनके नाभिकों से बन्धन इतना दुर्बल होता है कि वे तापीय ऊर्जा से ही परमाणुओं से पृथक होकर जालक संरचना में मुक्त यदृच्छ गति करते हैं। धातु के पृष्ठ के निकट धन आयनों के आकर्षण बल के कारण इलेक्ट्रॉनों की स्थितिज ऊर्जा दूरी के साथ बढ़ती है तथा पृष्ठ के बाहर इसका मान अधिकतम (शून्य) हो जाता है। इस प्रकार इलेक्ट्रॉन धातु के पृष्ठ पर बाहर की ओर गति के विरुद्ध एक अवरोध अनुभव करता है। अन्य रूप में धातु के पृष्ठ पर एक विभव रोधिका (potential barrier) उत्पन्न हो जाती है जो इलेक्ट्रॉनों को बाहर निकलने नहीं देती। यदि इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा विभव रोधिका से अधिक होती है तो ही इलेक्ट्रॉन बाहर निकलने में समर्थ होगा। परम शून्य पर इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम प्रसंभाव्य ऊर्जा फर्मी ऊर्जा εF के तुल्य होती है। यदि किसी निर्देश ऊर्जा स्तर के सापेक्ष इलेक्ट्रॉन के लिए विभव रोधिका की ऊंचाई व फर्मी ऊर्जा स्तर क्रमश: εB तथा εF हों तो प्रति इलेक्ट्रॉन (εB – εF) ऊर्जा प्रदान करने पर धातु से इलेक्ट्रॉन बाहर निकलने में सफल होंगे। (εB – ∈F) को परम शून्य ताप पर धातु का कार्य फलन Φ(eV) कहते हैं। Φ का मान ताप पर निर्भर होता है परन्तु यह निर्भरता उपेक्षणीय है। यदि Φ का मान वोल्ट में हो तो ep = (∈B – ∈F)
इलेक्ट्रॉनों को धातु के पृष्ठ से बाहर निकालने में समर्थ बनाने के लिए अनेक प्रकार से ऊर्जा प्रदान की जा सकती है। यदि यह ऊर्जा ऊष्मा के रूप में धातु को गर्म कर दी जाती है तो इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन की प्रक्रिया को तापायनिक उत्सर्जन (thermionic emission) कहते हैं। इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन की अन्य विधियाँ हैं : फोटोनों (विकिरण) द्वारा ऊर्जा प्रदान कर ( प्रकाश विद्युत उत्सर्जन photo electric emission), विद्युत क्षेत्र प्रयुक्त कर ( क्षेत्र उत्सर्जन field emission) व गतिशील इलेक्ट्रॉनों के पुंज द्वारा ऊर्जा प्रदान कर ( द्वैतीयक उत्सर्जन secondary emission) ।
अब हम धातुओं के लिए मुक्त इलेक्ट्रॉन प्रारूप (free electron model) का उपयोग कर तापायनिक उत्सर्जन के द्वारा प्राप्त धारा घनत्व के लिए सम्बन्ध व्युत्पन्न करेंगे ।
फर्मी – डिरैक सांख्यिकी के अनुसार एकांक आयतन ( V = 1) में उन इलेक्ट्रॉनों की संख्या जिनके संवेग p व p + dp के मध्य होते हैं, निम्न होती है
2 का गुणा इलेक्ट्रॉनों के लिए चक्रण क्वान्टम संख्या के दो संभव मानों के कारण होता है। उपर्युक्त समीकरण में,
अतः उन इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व, जिनके संवेग घटक Px व Px + dpx, Py व Py + dpy तथा pz व pz + dpz के मध्य होते हैं, निम्न होगा
समीकरण (3) उन इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व है जिनके वेग के घटक Vx व Vx+dvx , Vy व VУ + dvy , dz + dvz के मध्य होते हैं।
तापायनिक उत्सर्जन में वे इलेक्ट्रॉन योगदान देते हैं जिनकी ऊर्जा फर्मी-ऊर्जा εF के सापेक्ष बहुत अधिक होती
जिससे exp [(∈ – ∈ F)/kT] का मान 1 के सापेक्ष बहुत अधिक होता है अत: हम हर में संख्या 1 की उपेक्षा कर सकते हैं।
मान लीजिए धातु का पृष्ठ X- अक्ष के लम्बवत् अर्थात् Y Z तल में है। धातु के पृष्ठ से केवल वे इलेक्ट्रॉन बाहर निकलने में समर्थ होंगे जिनके वेग के x घटक से सम्बद्ध ऊर्जा विभव रोधिका की ऊंचाई εB से अधिक होगी । अर्थात् धातु के से उत्सर्जन के लिए केवल वेग का x – घटक महत्त्वपूर्ण है । y व z घटकों के मान कुछ भी -∞ से ∞ तक हो सकते हैं। उन इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व जिनके वेग के x घटक Vx व vx + dvx के मध्य हैं।
धातु के पृष्ठ के निकट एक संकीर्ण क्षेत्र में यदि वेग vx से गतिशील इलेक्ट्रॉनों को पृष्ठ पर पहुंचने में लगा समय dt है तो पृष्ठ के क्षेत्रफल A पर dt समय में वेग घटक vx के आपतित इलेक्ट्रॉनों की संख्या (dnx) Avx dt जिससे प्रति एकांक समय प्रति एकांक क्षेत्रफल पर वेग घटक Vx के आपतित इलेक्ट्रॉनों की संख्या
अतः प्रति एकांक समय प्रति एकांक क्षेत्रफल पर आपतित उन इलेक्ट्रॉनों की संख्या, जो उपर्युक्त प्रतिबन्ध का पालन करते हैं, निम्न होगी
ये Nx इलेक्ट्रॉन एकांक समय में धातु के एकांक क्षेत्रफल से उत्सर्जित होंगे। अतः धारा घनत्व ( एकांक क्षेत्रफल से प्रवाहित धारा)
समीकरण (10) तापायनिक उत्सर्जन के लिये रिचर्डसन – डशमान समीकरण है। उपर्युक्त संबंध के अनुसार A नियतांक है व इसका मान 120 × 10^4 एम्पियर / मी.^2 / डिग्री^2 होना चाहिए परन्तु प्रायोगिक मान इससे बहुत कम तथा वृहत परास में प्राप्त होते हैं। इसका प्रमुख कारण अनेक इलेक्ट्रॉनों का धातु के पृष्ठ से परावर्तित होना है। यह स्पष्ट है कि उत्सर्जन धारा धातु के ताप व उसके कार्य फलन पर निर्भर होगी ।
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