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आग्नेय शैलो के गठन व सूक्ष्म संरचनाएं Textures of igneous rocks in hindi
Textures of igneous rocks in hindi (आग्नेय शैलो के गठन व सूक्ष्म संरचनाएं) : texture का अर्थ है किसी शैल में खनिज कणों की आकृति , आकार , एवं स्थिति व्यवस्था। या शैलो के विभन्न खनिज घटकों एवं कांच के पारस्परिक संबंधो को शैल गठन कहते है।
विभिन्न गठन समुच्चयो के सानिध्य से सूक्ष्म संरचना का निर्माण होता है। किसी शैल के गठन को निम्नलिखित के आधार पर परिभाषित किया जा सकता है।
1. क्रिस्टलन की दर (degree of crystallization)
2. क्रिस्टलों का आकार या कणिकता (size of grains ओर granularity)
3. क्रिस्टलों की आकृति (shape of crystals)
4. mutual relationship of crystals and glass (क्रिस्टलों और काचीय द्रव का पारस्परिक सम्बन्ध)
विभिन्न गठन समुच्चयो के सानिध्य से सूक्ष्म संरचना का निर्माण होता है। किसी शैल के गठन को निम्नलिखित के आधार पर परिभाषित किया जा सकता है।
1. क्रिस्टलन की दर (degree of crystallization)
2. क्रिस्टलों का आकार या कणिकता (size of grains ओर granularity)
3. क्रिस्टलों की आकृति (shape of crystals)
4. mutual relationship of crystals and glass (क्रिस्टलों और काचीय द्रव का पारस्परिक सम्बन्ध)
1. क्रिस्टलन की दर (degree of crystallization)
क्रिस्टलन की दर के आधार पर आग्नेय शैल के गठन को निम्नलिखित समूहों में विभाजित किया जा सकता है –
a. पूर्ण क्रिस्टली (holo crystalline) : जो शैल पूर्णतया क्रिस्टलीय पदार्थों से बने होते है उन्हें पूर्ण क्रिस्टली कहते है। गहराई पर निर्मित होने व शैल पूर्ण क्रिस्टलीत होते है। example – ग्रेनाइट
b. holohyaline (पूर्ण कांचीय) : जो शैल पूर्णतया अक्रिस्टलिय पदार्थ काँच के बने होते है उन्हें पूर्ण कांचिक कहते है। अंतर्वेधी के पाश्र्वो एवं भू पृष्ठ पर उद्गार की स्थितियों में श्यान मैग्मा में द्रुत शीतलन पर निर्मित होने वाले शैल पूर्ण कांचीय होते है। उदाहरण – टैकीलाइट (बैसाल्टी संघटन)
c. अंश क्रिस्टली या अर्द्ध क्रिस्टली (mero or hypo crytalline) : जिन शैलो में कुछ अंश क्रिस्टल का तथा कुछ अंश कांच का बना होता है उन्हें अंश क्रिस्टली कहते है। ये भू पृष्ठ पर उद्गार के फलस्वरूप निर्मित होते है। उदाहरण – सामान्य बैसाल्ट
2. क्रिस्टलों का आकार या कणिकता (size of grains ओर granularity)
क्रिस्टल का आकार शीतलन की गति , मैग्मा की श्यानता तथा क्रिस्टलित होने वाले पदार्थ की मैग्मा में सान्द्रता पर निर्भर है। यदि शीतलन की दर कम हो तो कणों को क्रिस्टलीत होने का समय मिल जाता है और बड़े क्रिस्टल बनते है। यदि शीतलन की दर तेज हो तो छोटे क्रिस्टल बनते है और यदि शीतलन की दर इतनी तेज हो की कण क्रिस्टलित न हो पाए तो ग्लाशी texture बनता है।
यदि क्रिस्टल केवल नेत्रों या लैंस की सहायता से देखे जा सके तो शैल को दृश्य क्रिस्टली (phanero crystalline) कहते है और यदि क्रिस्टल न देखे जा सके तो उने अदृश्य क्रिस्टली (aphanatic) कहते है।
दृश्य क्रिस्टली शैलो को मुख्य तीन भागों में बांटा गया है
a. स्थूलकणी
b. मध्यकणी
c. सूक्ष्म कणी
अदृश्य क्रिस्टली शैलो को दो भागों में बांटा गया है –
d. सूक्ष्म क्रिस्टली
e. गूढ़ क्रिस्टली
a. स्थूलकणी (coarse grained texture) : दृश्य क्रिस्टली शैलो में यदि क्रिस्टलों का औसत व्यास ५म्म से अधिक हो तो वे स्थूलकणी कहलाते है।
b. मध्यकणी (medium grained texture) : यदि क्रिस्टलों का औसत व्यास 5 से 1 mm के बीच हो।
c. सूक्ष्म कणी (fine grained texture) : यदि क्रिस्टलों का औसत व्यास 1 mm से कम हो।
d. सूक्ष्म क्रिस्टली (micro crystalline texture) : अदृश्य क्रिस्टली शैलो के कण यदि सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखे जा सके तो उन्हें सूक्ष्म क्रिस्टली कहते है।
e. गूढ़ क्रिस्टली (crypto crystalline) : सूक्ष्मदर्शी की सहायता से न पहचाने जा सकने वाले क्रिस्टलों को गूढ़ क्रिस्टली कहते है।
3. क्रिस्टलों की आकृति (shape of crystals)
क्रिस्टलों की आकृति का वर्णन क्रिस्टल के ज्यामितीय रूप तथा क्रिस्टल फलकता के आधार पर किया जा सकता है। इस आधार पर इन्हें तीन भागों में बांटा गया है।
i. पूर्ण फलकीय (Euhedral) : यदि क्रिस्टल में उसके समस्त क्रिस्टलीय फलकों के अनुरेख उपस्थित हो।
ii. अंश फलकीय (subhedral) : यदि क्रिस्टल फलक अंशत: फलकीय हो।
iii. अफलकीय (anhedral) : यदि क्रिस्टल में क्रिस्टल फलक न हो।
4. mutual relationship of crystals and glass (क्रिस्टलों और काचीय द्रव का पारस्परिक सम्बन्ध)
विभिन्न क्रिस्टलों के आपस में संबंधो के आधार पर आग्नेय शैलो के गठन के निम्नलिखित मुख्य प्रकार अभिनिर्धारित किये जाते है –
a. समकणिक गठन (equigranular texture)
b. असमकणिक गठन (inequigranular texture)
c. दैशिक गठन (directive texture)
d. अन्तर्वेधित गठन (intergrowth texture )
a. समकणिक गठन (equigranular texture) : यदि शैल के समस्त खनिज प्राय: समान आकार के हो तो उस शैल के गठन को समकणिक कहते है।
समकणिक गठन निम्न प्रकार के होते है –
- सर्वस्वरूपी (panidiomorphic texture ) : यदि समस्त समकणिक खनिज पूर्ण फलकीय हो तो शैलो के गठन को सर्वस्वरूपी कहते है। उदाहरण – lamprophyres
- (अंश स्वरुपिक) Hypidiomorphic texture : यदि समस्त समकणिक खनिज अंश फलकीय हो तो शैलो के गठन को अंश स्वरुपिक कहते है। example – granites and syenites
- (अपरुपक) allotriomorphic texture : यदि समस्त समकणिक अफलकीय हो तो शैलो के गठन को अपरूपक कहते है। उदाहरण – aplites
- (सूक्ष्म कणिक) microgranular texture : सूक्ष्मक्रिस्टलीय आग्नेय शैलो के क्रिस्टल सामान्यत: अफलकीय अथवा अंश फलकीय होते है ऐसे गठन सूक्ष्म कणिक गठन कहते है।
- orthophyric texture : कुछ उच्च फेल्सपेथिक शैल जैसे की ओर्थोफायरीज और पेलजियोफायरीज संभवतः सूक्ष्म कणिक व स्वरुपिक गठन रखते है। ऐसे गठन को ऑर्थोफायरिक कहते है।
- Felsitic texture: यदि एक आग्नेय शैल समान भार का गूढ़ क्रिस्टलीय पदार्थ रखती है तो ऐसे गठन को फेल्ससिटीक गठन कहते है।
b. असमकणिक गठन (inequigranular texture) : यदि आग्नेय शैल के विभिन्न खनिज क्रिस्टल एक ही आकार के न हो तो ऐसे गठन को असमकणिक गठन निम्न प्रकार के होते है –
- (दीर्घ क्रिस्टल अंतर्वेधी ) Porphyritic texture : पॉर्फिराइटी में बड़े क्रिस्टल या लक्ष्य क्रिस्टल (phenocryst) सूक्ष्म कणिक अंश क्रिस्टलों अथवा कांचीय आधात्रिक (groundmass ) में समावृत्त होते है। यदि आधा मैग्मा गहरायी पर अर्द्ध क्रिस्टलीत हो और एकाएक धरातल पर उद्ग्रित हो जाए तो पॉर्फिराइटी गठन विकसित होगी। यदि कुछ पदार्थ मैग्मा में अपेक्षतया अधिक सांद्रित हो तो उनके लक्ष्य क्रिस्टल बनेंगे। पॉर्फिराइटी गठन अधिकांशत: ज्वालामुखी एवं अधिवितलीय शैलो में सिमित है।
- लघु अन्तर्वेशी गठन (Poikilitic texture) : इस गठन में छोटे क्रिस्टल बिना किसी अभिविन्यास के बड़े क्रिस्टलों में परिबद्ध होते है। बड़े पोषक क्रिस्टल के लिए औयकोक्रिस्ट (ग्राही क्रिस्टल) तथा परिबद्ध क्रिस्टलों के लिए कैडाक्रिस्ट (गृहीत क्रिस्टल) नाम दिए जाते है।
- ophitic texture : यदि ग्राही क्रिस्टल औजाइट तथा गृहीत प्लेजिओक्लेज हो तो इस विशेष प्रकार के पायकिलिटी गठन को ओफाइटी गठन कहते है। इस प्रकार के गठन डोलेराइट के लिए प्रारूपिक है। इस गठन का विकास अपेक्षतया अधिक जटिल है। इस गठन के विकास के लिए आवश्यक है की एक मैग्मा में एक घटक अपेक्षतया अधिक मात्रा में उपस्थित हो तथा उसका क्रिस्टल मितस्थायी व्यवस्था में होता है। इस प्रकार पूर्ण निर्मित खनिज उसमे परिबद्ध हो जाते है।
- Intergranular and instersertal : यदि प्लेजिओक्लेज के बने ढांचे या जालक के मध्य त्रिकोणीय या बहुभुजाकर अन्तराल औजाइट , ओलिविन या लौह ऑक्साइड के कणों से पूरित हो तो उस व्यवस्था को अन्तराकणिक गठन कहते है। अन्तराल के कांचीय या गूढ़ क्रिस्टलीय पदार्थ भरण पर बने गठन को निर्विष्ट कांची कहते है।
c. दैशिक गठन (directive texture) : मैग्मा में क्रिस्टलन के समय प्रवाह के कारण दैशिक गठन का विकास होता है। प्रवाह द्वारा क्रिस्टल और क्रिस्टलीकाएं समान्तर रेखाओ तथा पट्टियों में विन्यस्त हो जाते है। मुख्य दैशिक गठन निम्न प्रकार के होते है।
- Trachytic texture : कुछ ज्वालामुखी शैल जैसे – ट्रेकाइट , फेल्सपारों के प्रवाह लावा प्रवाह की दिशा में समान्तर रेखाओ में व्यवस्थित हो जाते है। इसे ट्रेकाइटिक गठन कहते है।
- Hyalopilitic texture : ज्वालामुखी शैल में यदि फेल्सपार प्रवाह , ग्लासी पदार्थ के साथ मिश्रित पाया जाए तो ऐसे गठन को हाइलोफिलिटिक गठन कहते है।
d. अन्तर्वेधित गठन (intergrowth texture )
गलन क्रांतिक पर क्रिस्टलन तथा अपविलयन (विलयन का प्रतिकूल खनिजों का विभिन्न क्रिस्टल प्रवास्थाओ में पृथक्करण ) के कारण दो खनिज एक दूसरे के भीतर विकसित होते है। इस प्रकार विकसित गठन को अन्तवृद्धि गठन कहते है।
पर्थाइट (पोटाश फैल्सपार एवं प्लेजिओक्लेज ) तथा आलेखीय (क्वार्ट्ज तथा पोटाश फेल्सपार) अंतवृद्धि गलन क्रांतिक की स्थिति में क्रिस्टलन पर विकसित होती है।
पेग्मैटाइट तथा ग्रेनोफायर अन्तवृद्धि गठन के सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है।
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