चतुष्फलकीय रिक्ति , अष्टफलकीय रिक्ति , चतुष्फलकीय रिक्तियाँ , अष्ट फलकीय रिक्तियां Tetrahedral voids in hindi

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tetrahedral and octahedral voids in hindi difference चतुष्फलकीय रिक्ति , अष्टफलकीय रिक्ति , चतुष्फलकीय रिक्तियाँ , अष्ट फलकीय रिक्तियां क्या है ?

1. एक परत पर दूसरी परत रखना : इस संकुलन में द्विविमीय षट्कोणीय निबिड़तम संकुलित प्रथम परत पर दूसरी परत को इस प्रकार से रखते है कि दूसरी परत के गोले प्रथम परत के अवनमनों में समा जाए , इस प्रकार इसमें दो तरह की रिक्तियों का निर्माण होता है –

(i) चतुष्फलकीय रिक्ति (Tetrahedral voids in hindi)
(ii) अष्टफलकीय रिक्ति (Octahedral voids in hindi)
 चतुष्फलकीय रिक्ति
 अष्टफलकीय रिक्ति
 1. यह रिक्ति चार गोलों के सहयोग से बनती है।
 यह रिक्ति छ: गोलों के सहयोग से बनती है।
 2. एक परत की त्रिकोण रिक्ति पर दूसरी परत का गोला आ जाने से चतुष्फलकीय रिक्ति का निर्माण होता है।

एक परत की त्रिकोण रिक्ति पर दूसरी परत की त्रिकोण रिक्ति आ जाने से अष्टफलकीय रिक्ति का निर्माण होता है , इसमें से एक त्रिकोण रिक्ति उधर्व मुखी व दूसरी त्रिकोण रिक्ति अधोरिक्ति होती है।

3.

दूसरी परत पर तीसरी परत को रखना : अवयवी गोलों की दूसरी पर जब तीसरी परत को रखा जाता है तो इसमें चतुष्फलकीय रिक्ति या अष्टफलकीय रिक्तियों का आसादन (ढक दिया जाता है ) हो जाता है।
अत: इसमें दो संभावनाएं बनती है –
(A) चतुष्फलकीयरिक्तियों का आसादन : चतुष्फलकीय रिक्ति के आसादन से षट्कोणीय निबिड़तम संकुल (HCP) का निर्माण होता है , इस व्यवस्था में अवयवी गोलों की प्रथम परत तीसरी परत के साथ तथा दूसरी पर चौथी परत के साथ समानता रखती है इसे ABAB परतीय व्यवस्था भी कहते है , इस व्यवस्था में उपसहसंयोजन संख्या 12 व संकुलन क्षमता 74% होती है।
जिंक व मैग्नीशियम में ऐसी व्यवस्था पायी जाती है।
(B) अष्टफलकीय रिक्तियों का आच्छादन : अष्टफलकीय रिक्तियों के आच्छादन से घनीय निबिड़तम संकुलन (CPP) का निर्माण होता है , इस व्यवस्था में अवयवी गोलों की प्रथम परत चौथी परत के साथ तथा दूसरी परत पाँचवी परत के साथ एवं तीसरी परत छट्ठी परत के साथ समानता रखती है इसे ABC ABC परतीय व्यवस्था में कहते है , इस व्यवस्था में उपसहसंयोजन संख्या 12 तथा संकुलन क्षमता 74% होती है।
उदाहरण : Ag व Cu में इस प्रकार की व्यवस्था पायी जाती है।
प्रश्न : षट्कोणीय निबिड़तम संकुलन (HCP) व घनीय निबिड़तम संकुलन (CCP) में अंतर लिखिए।
उत्तर :

 षट्कोणीय निबिड़ संकुलन (HCP)
 घनीय निबिड़तम संकुलन (CCP)
 1. यह संकुलन चतुष्फलकीय रिक्तियों के आच्छादन से बनता है।
यह संकुलन अष्टफलकीय रिक्तियों के आच्छादन से बनता है।
 2. इसमें ABAB परतीय व्यवस्था पायी जाती है।
 इसमें ABC ABC परतीय व्यवस्था पाई जाती है।
 3. इसमें अवयवी गोलों की संख्या छ: तथा उपसहसंयोजन संख्या (CN) = 12 व संकुलन क्षमता = 74% होती है।
 इसमें अवयवी गोलों की संख्या चार तथा उपसहसंयोजन संख्या (CN) =  12 तथा संकुलन क्षमता 74% होती है।
4. उदाहरण : Zn , Mg आदि। उदाहरण : Ag तथा cu आदि।

FCC व CCP में चतुष्फलकीय एवं अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या व स्थान निर्धारण करना

1. चतुष्फलकीय रिक्तियाँ : यदि एक FCC एकक कोष्ठिका को आठ छोटे लघु घनो में विभाजित किया जाए तो प्रत्येक लघु घन में एक चतुष्फलकीय रिक्ति बनती है , इस प्रकार एक FCC एकक कोष्ठिका में कुल आठ चतुष्फलकीय रिक्तियां होगी या FCC एकक कोष्ठिका के एक काय विकर्ण (जो केंद्र से होकर गुजरे) पर दो चतुष्फलकीय रिक्तियाँ पाई जाती है , इस प्रकार एक एफसीसी एकक कोष्ठिका के कुल चार काय विकर्ण पर आठ चतुष्फलकीय रिक्तिया होगी।
2. अष्टफलकीय रिक्तियां : FCC एकक कोष्ठिका में अष्टफलकीय रिक्तियाँ केंद्र और किनारे पर पायी जाती है , FCC एकक कोष्ठिका के केन्द्र में एक पूर्ण अष्टफलकीय रिक्ति एवं प्रत्येक किनारे पर अष्टफलकीय रिक्ति का 1/4 भाग पाया जाता है , इस प्रकार एक FCC एकक कोष्ठिका में कुल अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या निम्न  होगी।
अष्टफलकीय रिक्ति = केंद्र पर + किनारे पर
अष्टफलकीय रिक्ति = (1 x 1) + (1/4 x 12) = 1 + 3 = 4
FCC में अवयवी गोलों की संख्या = कोने पर + फलक पर
FCC में अवयवी गोलों की संख्या = (1/8 x 8) + (1/2 x 6) = 1 + 3 = 4 गोले
अत: FCC या CCP व HCP में अवयवी गोलों की संख्या के बराबर अष्टफलकीय रिक्तियां पाई जाती है तथा अवयवी गोलों की संख्या से दुगुनी चतुष्फलकीय रिक्तियाँ पायी जाती है।
किसी यौगिक में उपस्थित ऋण आयन FCC या CCP या HCP जालक का निर्माण करते है तथा धनायन चतुष्फलकीय या अष्टफलकीय रिक्तियों में भरे जाते है।
प्रश्न 1 : एक यौगिक x और y दो तत्वों से मिलकर बना है , y तत्व के परमाणु CCP संरचना बनाते है तथा x तत्व के परमाणु सभी अष्टफलकीय रिक्तियों को भरते है , इस यौगिक का सूत्र बताइये।
उत्तर : CCP संरचना में अष्टफलकीय रिक्ति व अवयवी गोलों के मध्य अनुपात 1:1 होता है , अत:
x : y
(सभी अष्टफलकीय रिक्तियों में उपस्थित धनायन) : (CCP संरचना में उपस्थित ऋण आयन)
1 : 1
यौगिक सूत्र = xy
प्रश्न 2 : एक यौगिक दो तत्वों M व N से मिलकर बना है , N तत्व के परमाणु HCP संरचना बनाते है तथा M तल के परमाणु चतुष्फलकीय रिक्तियों का 1/3 भाग भरते है इस यौगिक का सूत्र बताइए।
उत्तर : HCP संरचना में चतुष्फलकीय रिक्ति व अवयवी गोलों के मध्य अनुपात 2:1 होता है अत:
उत्तर : M : N
(चतुष्फलकीय रिक्ति के 1/3 भाग में उपस्थित धनायन) : (HCP संरचना में उपस्थित ऋण आयन)
2 x 1/3 : 1
2/3 x 3 : 1 x 3
2:3
अत: यौगिक का सूत्र M2N3 होगा।
प्रश्न 1 : एक यौगिक X तथा Y दो तत्वों से निर्मित है। Y तत्व के परमाणुओं (ऋणायन) से cpp बनता है तथा X तत्व के परमाणु (धनायन) सभी अष्टफलकीय रिक्तियों में भरे होते है। यौगिक का सूत्र क्या है।

उत्तर : cpp जालक तत्व Y से बनता है।
अत:  Y परमाणुओं की संख्या = 8 x 1/8 + 6 x 1/2 = 4
अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या = 4
अत: X परमाणुओं की संख्या = 4
यौगिक में X तथा Y परमाणुओं का अनुपात = X : Y = 4 : 4 = 1 : 1
अत: यौगिक का सूत्र XY होगा।
प्रश्न 2 : तत्व B के परमाणुओं से hcp जालक बनता है। और तत्व A के परमाणु 2/3 चतुष्फलकीय रिक्तियाँ भरते है। A तथा B तत्वों से बनने वाले यौगिक का सूत्र क्या है।
उत्तर : hcp जालक में B परमाणुओं की संख्या = 12 x 1/6 + 2 x 1/2 + 3 = 6
अत: चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या = 12
चूँकि परमाणु A केवल 2/3 चतुष्फलकीय रिक्तियों में उपस्थित है।
अत: A परमाणुओं की संख्या = 12 x 2/3 = 8
अत: यौगिक में A:B = 8:6
अथवा A:B = 4:3
यौगिक का सूत्र = A4B3

चतुष्फलकीय तथा अष्टफलकीय रिक्तियों का स्थान निर्धारित करना (locating tetrahedral and octahedral voids)

(a) चतुष्फलकीय रिक्तियों का स्थान निर्धारित करना – फलक केन्द्रित (fcc) या घनीय निबिड़ संकुलित (ccp) जालक की एकक कोष्ठिका को आठ छोटे घनों में विभाजित किया जा सकता है। जिसमें परमाणु एकांतर कोनों पर उपस्थित है। अर्थात प्रत्येक छोटे घन के चार परमाणु है देखिये चित्र इन चारों परमाणुओं के केन्द्रों को जोड़ने पर एक चतुष्फलकीय संरचना बनती है , जिसके केंद्र में एक रिक्ति है।
इस प्रकार प्रत्येक छोटे घन में एक रिक्ति है। चूँकि छोटे घनों की संख्या 8 है अत: इस संरचना में 8 चतुष्फलकीय रिक्तियाँ है।
चूँकि ccp या fcc एकक कोष्ठिका में परमाणुओं की संख्या 4 होती है। अत: प्रति परमाणु चतुष्फलकीय रिक्तियों की संख्या 2 होगी।
एक अष्टफलकीय रिक्ति घन के केंद्र पर है।
इसी प्रकार प्रत्येक किनारे के मध्य बिंदु पर भी एक अष्टफलकीय रिक्ति है क्योंकि यह बिंदु भी छ: परमाणुओं से घिरा हुआ है। चार परमाणु उसी एकक कोष्ठिका के है जबकि 2 परमाणु निकटवर्ती एकक कोष्ठिका के है। चूँकि घन का प्रत्येक किनारा चार एकक कोष्ठिकाओं में सहभाजित होता है। अत: अष्टफलकीय रिक्ति भी चार एकक कोष्ठिकाओं में सहभाजित होगी।
अत: एकक कोष्ठिका में उसका योगदान केवल 1/4 होगा।
अत: अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या = 1+3 = 4
ccp और fcc संरचना की एकक कोष्ठिका में परमाणुओं की संख्या भी 4 होती है।
अत: अष्टफलकीय रिक्तियों की संख्या = एकक कोष्ठिका में कणों की संख्या