पारिस्थितिकी क्या है Ecology के जीव संगठन के चार स्तर

पारिस्थितिकी (Ecology):  जीव विज्ञान की वह शाखा जिसमें जीवन तथा भौतिक पर्यावरण के बीच होने वाली पारस्परिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है |

पारिस्थितिकी जीव संगठन के चार स्तरों से संबंधित है |

  • जीव :  पर्यावरण का प्रत्येक जीवित घटक जीव कहलाता है |
  • समष्टि : एक ही प्रजाति के सजीव समूह को समष्टि कहते हैं |
  • समुदाय :  एक से अधिक प्रजातियां के प्राणियों एवं पौधों के समूह को समुदाय कहते हैं उदाहरण –  पादप समुदाय ,  जंतु समुदाय एवं सूक्ष्मजीव समुदाय |
  •  जीवोम : जीवोम क्षेत्रीय समुदाय होते हैं जिसमें लगभग समान जलवायु विय  परिस्थितियां होती हैं इनमें विशिष्ट प्रकार के पादप व जंतु ही निवास करते हैं |  उदाहरण – टुंड्रा ,  मरुस्थल ,  तथा वर्षा वन आदि मुख्य जीवोम  है |

प्रमुख अजैव कारक :

  • ताप :   ताप जीवो के आधार उपापचय कार्यकीय प्रकार्यों तथा शरीर एंजाइमों की बल गति को प्रभावित करता है ताप सहनशीलता के आधार पर प्राणी दो प्रकार के होते हैं
  • प्रथुतातापी : वे प्राणी जो अत्यधिक ताप को सहन कर सकते हैं प्रथुतातापी  कहलाते हैं |
  • तनुतापी  : वीडियो कम ताप में रहते हैं तनुतापी  कहलाते हैं |
  1. जल :  जलीय जीवों के लिए जल की गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है इसके आधार पर प्राणी दो प्रकार के होते हैं |
  • प्रथुलवणी : वह प्राणी जो अत्यधिक लवणीय [ खारे]  जल में पाए जाते हैं प्रथुलवणी कहलाते हैं
  • तनु लवणी : वह प्राणी जो कम लवणता वाले जल में पाए जाते हैं|
  1.  प्रकाश :  प्रकाश  प्राणी की वृद्धि जनन वह वर्णकता को प्रभावित करता है प्रकाश की एक सापेक्षिक अवधि [ द्विप्तिकाल] मैं पौधों में पुष्पन प्रेरित होता है |

प्रश्न 1 :  क्या कारण है कि लाल शैवाल अधिकतर समुद्र की गहराई में पाए जाते हैं ?

उत्तर :  लाल शैवाल अधिकतर समुद्र की गहराई में पाए जाते हैं क्योंकि इनका मुख्य  वर्णक आर-फाइकोऐरीथ्रिन (r-phycoerythrin) नीले हरे भाग वाली दृश्य प्रकाश की स्पेक्ट्रम का उपयोग प्रकाश संश्लेषण में करता है ,  नीले हरे स्पेक्ट्रम का भाग कम तरंगधैर्य के कारण पानी में गहराई तक पहुंच पाता है लाल शैवाल वहां भी जीवित रह सकते हैं जहां और कोई प्राणी जीवित नहीं रह सकता है |

  1.  मृदा :  मृदा का पीएच(Ph) ,  खनिज लवण ,  स्थल की आकृति आदि किसी क्षेत्र की वृद्धि का निर्धारण करते हैं |