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भाप के इंजन का आविष्कार कब और किसने किया , steam engine invention industrial revolution in hindi
steam engine invention industrial revolution in hindi भाप के इंजन का आविष्कार कब और किसने किया ?
प्रश्न: वाष्प इंजन का आविष्कारकर्ता कौन था? जेम्सवॉट का इसमें क्या योगदान रहा।
उत्तर: सर्वप्रथम 1712 में टामसन न्यूकोमैन ने खानों से पानी बाहर निकालने के लिए वाष्प इंजन का आविष्कार किया। 1150 जेम्सवॉट ने न्यूकोमैन के इंजन के दोषों को दूर कर कम खर्चीला, हल्का और उपादेय बनाया।
प्रश्न: जार्ज स्टीफेन्सन
उत्तर: अंग्रेज जार्ज स्टीफेन्सन ने 1884 में प्रसिद्ध भाप इंजन ‘राकेट‘ का आविष्कार कर परिवहन क्षेत्र में तहलका मचा दिया।
औद्योगिक क्रांति के प्रमुख आविष्कार एवं आविष्कारकर्ता
कपड़ा उद्योग
क्रम सन् आविष्कारकर्ता आविष्कार कार्य
1. 1733 जॉन के फ्लाइंग शटल बुनाई मशीन
2. 1764 जेम्स हारग्रीब्ज स्पिनिंग जेनी कताई मशीन (स्पिनिंग)
3. 1769 रिचर्ड आर्कराइट वाटरफ्रेम यांत्रिक चरखा
4. 1779 सेम्युअल क्राम्पटन स्पिनिंग म्यूल कताई (स्पिनिंग)
5. 1787 एडमंड कार्टराइट पावरलूम स्पिनिंग मशीन-पहली मशीन जो शक्ति से चलती थी।
6. 1793 ऐली हिवटले कॉटन जिन कपास ओटने की मशीन
7. 1825 रिचर्ड रॉबर्ट्स बुनाई मशीन (स्पिनिंग मशीन) पहली स्वचालित मशीन
8. 1846 एलियास हो सिलाई मशीन पहली सिलाई मशीन शक्ति के क्षेत्र में
9. 1712 टॉमसन न्यूकोमैन वाष्प इंजन खानों से पानी बाहर खींचने के लिए
10. 1769 जेम्सवॉट भाप इंजन न्यूकोमैन के इंजन को दोषों को दूर कर लौह इस्पात उद्योग
11. 1730 अब्राहम डर्बी एण्ड जाॅन रोबक पत्थर के कोयले की खोज-कोक का आविष्कार
12. 1784 हेनरी कोर्ट शुद्ध व अच्छा लोहा बनाने की तकनीकी
13. 1856 हेनरी बेसेमर बेसेमर प्रक्रिया-ढलवाँ लौहे से सीधे इस्पात जंगरोधी
अन्य आविष्कार और उसके आविष्कारक
क्रम आविष्कार् आविष्कारकर्ता संबंधित देश संबंधित वर्ष
1. सड़क निर्माण की तकनीक मकॉडम स्कॉटलैण्ड –
2. वाष्प इंजन टामस न्यूकोमेन इंग्लैण्ड 1712
3. नहर बनाने की तकनीक जैम्स ब्रिडल इंग्लैण्ड 1761
4. वाष्प इंजन जैम्स वाट इंग्लैण्ड 1769
5. शुद्ध लोहा निर्माण की तकनीक हेनरी कोर्ट इंग्लैण्ड 1784
6. प्रथम वाष्पचालित नौका रॉबर्ट फुल्टन अमेरिका 1807
7. वाष्प इंजन (रॉकेट) जॉर्ज स्टीफेसन इंग्लैण्ड 1814
8. रबर का वल्कनीकरण चार्ल्स गुडइयर अमेरिका 1839
9. पहला न्यूमैटिक टायर (संरचना) रॉबर्ट विलियम थॉमसन स्कोटिश 1847
10. पहला न्यूमैटिक टायर (निर्माण) जॉन बॉयन डनलप स्कोटिश 1888
11. तार-यंत्र सैमुओल मौर्स अमेरिका 1844
12. इस्पात निर्माण की तकनीक हेनरी बैसेमर इंग्लैण्ड 1856
13. अटलांटिक केबल साईरस फील्ड अमेरिका 1866
14. स्वेज नहर फर्दिनेंड द लैस्सैप फ्रांस 1869
15. टेलीफोन ग्राहम बैल इंग्लैण्ड 1876
नोट: औद्योगिक क्रांति से संबंधित आविष्कारों में से प्रायः अतिलघत्तरात्मक प्रश्न आते रहते हैं। प्रश्नों के उत्तर में आविष्कार का सन, आविष्कारकर्ता का नाम, उसका देश तथा आविष्कार का संबंध आदि का विवरण दिया जाना चाहिए। जैसे –
प्रश्न: निम्न का आविष्कार किसने किया ?
(1) सिलाई मशीन (2) न्यूमैटिक टायर
उत्तर: (1) सिलाई मशीन: पहली सिलाई मशीन का आविष्कार 1846 में अमेरिकन ऐलियास हो ने किया।
(2) न्यूमैटिक टायर: पहली बार 1888 में स्कॉटिश जॉन बायन डनलप ने किया।
प्रश्न: ‘‘जो भी औद्योगिक क्रान्ति की बात करता है, वह कपास की ही बात करता है।‘‘ टिप्पणी कीजिए।
उत्तर: किसी देश में औद्योगिक क्रान्ति तभी हो सकती है जब उस देश में उद्योगों की स्थापना हेतु आवश्यक दशाएँ मौजूद हों। उसको आधारभूत सुविधाएँ प्राप्त हों। पूँजी, कच्चा माल, बाजार, आवागमन के साधन आदि मौजूद हों। इसके साथ ही साथ सस्ता श्रम एवं भारी मशीनरी हेतु लौह एवं इस्पात की प्रचुर मात्रा में आपूर्ति हो। इन दशाओं के उपलब्ध न होने पर औद्योगिक क्रान्ति सम्भव नहीं है।
ब्रिटेन में सर्वप्रथम औद्योगिक क्रान्ति हुई। इसका कारक था इस प्रकार की दशाएँ एवं आधारभूत संरचना का उन्नत होना। उद्योगों की स्थापना में कच्चे माल की सुलभता अति आवश्यक है। जैसे सूती वस्त्र उत्पादन हेतु कपास की आवश्यकता है। इंग्लैण्ड अपने उपनिवेशों के कारण इसकी पर्याप्त आपूर्ति करने में सक्षम हुआ था। वह भारत तथा अन्य अफ्रीकी देशों तथा एशियाई देशों से कच्चे माल को सस्ते दामों पर खरीद कर अपने कारखानों हेतु इंग्लैण्ड भेजता था।
इन कच्चे मालों से तैयार माल का विक्रय वह भारत सहित अपने उपनिवेशों में करता था। इससे उसे दोहरा लाभ था। उपनिवेशों के कारण सस्ता माल उपलब्ध था तथा महँगे दामों पर बेचने हेतु उसे बड़ा बाजार भी प्राप्त था। इसी का परिणाम रहा है कि इसने अन्य यूरोपीय देशों की तुलना में अपना औद्योगीकरण तीव्र, पहले करके आर्थिक वाणिज्यवाद के चरण की शुरूआत की। अन्य यूरोपीय राष्ट्रों जैसे फ्रांस, जर्मनी आदि में कच्चा माल सुलभ न होने से वहां औद्योगीकरण अपेक्षाकृत देरी से हो सका। क्योंकि उद्योगों की स्थापना और उसका संचालन कच्चे माल पर निर्भर था जिसकी आपूर्ति न होने पर संयंत्रों के बन्द हो जाने का खतरा होता है। इसलिए जो भी उद्योगों की स्थापना करना चाहता है वह कपास जैसे कच्चे माल की माँग करता है।
फ्रांस, रूस, जर्मनी, स्पेन आदि यूरोपीय देशों में इसकी कमी थी जिससे उन्होंने इसकी आपूर्ति सुनिश्चित कर लेने के बाद ही अपना औद्योगीकरण किया। यद्यपि वहां पर पूँजी, बाजार, श्रम आदि उपलब्ध थे परन्तु कच्चे माल की आपूर्ति अपर्याप्त थी। इसलिए यह कहा जा सकता है कि उद्योगों की स्थापना हेतु कच्चा माल, अति आवश्यक है। इसके अभाव में उद्योग नहीं लगाये जा सकते। कच्चे माल की मांग औद्योगिक तथा विकासशील सभी राष्ट्रों में होती है, तभी वह राष्ट्र औद्योगीकृत बनता है।
प्रश्न: ब्रिटेन के बाहर अन्य देशों में औद्योगीकरण के कारणों की समीक्षा करते हुए अपने विचार व्यक्त करें।
उत्तर: अमेरिका में औद्योगिक क्रांति
ब्रिटेन के औद्योगीकरण के पश्चात् अन्य देशों में भी इसके प्रभाव दिखाई देते हैं। इस प्रकार यह परवर्ती भू-मण्डलीकरण का आधार बनता प्रतीत होता है। अमेरिका के औद्योगीकरण के प्रमुख सहायक तत्त्वों की विवेचना करें तो इनमें जनसंख्या वृद्धि एवं श्रमिकों की बहुलता, प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता जिनमें, लौह-इस्पात (सुपीरियर लेक क्षेत्र), कोयला (अप्लेशियन एवं पेसिलवेनिया क्षेत्र) प्रमुख हैं। अमेरिकी संविधान का निर्माण एवं नीतिगत औद्योगीकरण का प्रारम्भ, उद्योगों के प्रति सरकार की संरक्षणात्मक नीति, राजनीतिक एवं सामाजिक स्वातंत्र, निगमों एवं स्टॉक एक्सचेंजों की उपस्थिति थे।
इन कारकों के अतिरिक्त नेपोलियन द्वारा संचालित महाद्वीप व्यवस्था के दौरान अमेरिकी खाद्य सामग्री की इंग्लैण्ड एवं यूरोप में माँग के कारण अमेरिकी विदेशी व्यापार का विस्तार हुआ जो वियना कांग्रेस-1815 ई. के बाद भी जारी रहा। इसके अतिरिक्त अमेरिका में जहाजरानी, रेलवे एवं सड़क परिवहन के विकास ने भी औद्योगीकरण में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
इसके अलावा अमेरिका कपास उत्पादन में अग्रणी था और माँस पैकिंग के क्षेत्र में अमेरिका का एकाधिकार था। बोस्टन क्षेत्र में सूती कपड़ा उद्योग का वृहत् विकास हुआ और अन्य क्षेत्र न्यू इंग्लैण्ड और पेंसिलवेनिया निर्मित हुए। अमेरिका में बडे-बडे कारखानों और उद्योगों के शेयर जनता में बिक्री हेतु जारी किये गए तथा स्टॉक एक्सजेंच की अवधारणा का विकास हुआ। उन्नत बैंकिंग प्रणाली एवं मुद्रा की स्थिरता भी अमेरिका में औद्योगिक क्रान्ति के विकास में सहायक सिद्ध हए।
रूस में औद्योगिक क्रांति
रूस में औद्योगिकीकरण देर से प्रारम्भ हुआ जिसके उत्तरदायी कारणो में –
पर्यावरणीय कारक: रूस का विशाल क्षेत्रफल और सीमित जनसंख्या, न्यून आबादी क्षेत्रों में संसाधनों को अधिकता जलवायविक, अनियमितता, अनाज उत्पादन कम, चरागाह क्षेत्र में कमी, दुर्गम क्षेत्रों में यातायात साधनों का अभाव।
कृषि का पिछड़ापन: जिसमें उत्तरी यूरोपीय भूमि अपेक्षाकृत कम उपजाऊ होना, किसानों को निर्धनता. उर्वरक मशीनों की अनुपलब्धता।
नहरें, परिवहन एवं संचार साधनों का सीमित विकास।
कृषि दास व्यवस्था का अस्तित्व जिससे उनमें गतिशीलता का अभाव था। इसी प्रकार सामुदायिक समहों के कारण भी औद्योगीकरण के अवसर नहीं थे।
लेकिन बाद में रूस में औद्योगीकरण का प्रारम्भ हुआ जिसके उत्तरदायी कारकों में –
1861 ई. में कृषि दासता की समाप्ति हो गई और किसान अब उद्योग एवं बाजार में हिस्सा लेने लगे तथा उनकी गरीबी में कमी आई और अब वह नकद भुगतान करने में समर्थ हुआ जिससे घरेलू बाजार के विस्तार का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसी प्रकार राज्य द्वारा निवेश, उपभोग एवं उत्पादन का जिम्मा उठाते हए चार मुद्दों, बजट, मुद्रा की विदेशों में स्थिरता, आयात-नियति पर आधारित व्यापार सन्तुलन तथा विदेशी ऋण अदायगी पर विशेष ध्यान दिया। साथ ही राज्य द्वारा एलेक्जेण्डर ने गोरशेन क्रोन, प्रस्तावित औद्योगीकरण प्रारूप को अपनाया गया। यह प्रारूप आर्थिक पिछड़ेपन की परिस्थिति में भी तीव्र औद्योगीकरण की संकल्पना पर आधारित था। 1890 ई. के पश्चात् रेलवे निर्माण में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई, इसी के साथ-साथ सूती वस्त्र उद्योग के मशीनीकरण, भारी उद्योगों के विकास, बैंकों की स्थापना और व्यापार सन्तुलन पर आधारित आयात-निर्यात नीति ने रूस में औद्योगीकरण को व्यापक आधार प्रदान किये।‘‘
जापान में औद्योगिक क्रांति
ब्रिटेन की औद्योगीकरण व्यवस्था का प्रभाव जापान में भी दिखाई देता है। जापान में औद्योगीकरण तुकोआवा वंश के शासन के समापन के बाद मेइजी स्थापना के साथ प्रारम्भ हुआ। इस हेतु मेइजी शासन द्वारा अलग से वित्त मंत्रालय की स्थापना की तथा उद्योगों के विकास के लिए विभिन्न संरचनाओं का विकास किया। नीति उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित किया गया और उन्हें सरकार द्वारा ऋण प्रदान किये गए। सरकार द्वारा प्रदत्त ऋणों के द्वारा विदेशी पूँजी या उद्योगों में निवेश सम्भव हुआ। उद्योगों के विकास हेतु खनन उद्योगों पर बल दिया गया तथा मुद्रा एवं बैंकिंग प्रणाली का विकास हुआ। औद्योगीकरण के अन्य उत्तरदायी कारकों में यातायात के साधनों का विकास, साधनों एवं डाक-तार प्रणाली का विकास, कृषि का पुनर्गठन आदि थे। इस प्रकार जापान में भी औद्योगीकरण सम्भव हुआ।
जर्मनी में औद्योगिक क्रांति
जर्मनी में औद्योगिक क्रांति का प्रारम्भ ब्रिटेन के समान ही इस्पात और कोयला उद्योगों के विकास के साथ-साथ हुआ और इसका प्रभाव सर्वप्रथम कपड़ा उद्योग और यातायात के क्षेत्र में देखने को मिला। जर्मनी के एकीकरण के समय विभिन्न सामरिक आवश्यकताओं हेतु रेलवे लाइनों का विकास और युद्ध सामग्री के उत्पादन की तीव्रता ने इसे अधिक गतिशील बनाया। राजनैतिक एकीकरण के पूर्व प्रशा एवं दूसरे जर्मनी राज्यों के मध्य होने वाले व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक शुल्क मुक्त क्षेत्र की स्थापना का प्रयास किया गया था जिसने औद्योगिक क्रांति को प्रोत्साहित दिया। अमेरिका के समान जर्मनी में भी वैज्ञानिकों एवं आविष्कारों ने इसमें महत्त्वपूर्ण योगदान दिया गया। 19वीं शताब्दी के अन्त तक जर्मन उद्योग काफी बड़े पैमाने पर स्थापित किये जा चुके थे और पारस्परिक सैनिक संस्कार वाले कुलीन शासन वर्ग के अनेक सदस्य, औद्योगीकरण के क्षेत्र में प्रवेश कर सफल उद्यमी बन चुके थे। ब्रिटेन और अमेरिका के समान जर्मनी के कुछ प्रमुख नगर कच्चे माल की उपलब्धि या समुद्री बन्दरगाहों तक आसान पहुँच के कारण औद्योगिक क्रान्ति से दूसरों की अपेक्षा अधिक लाभान्वित हुए।
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