JOIN us on
WhatsApp Group Join Now
Telegram Join Join Now

हिंदी माध्यम नोट्स

ठोस कचरा क्या है | ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016 | निराकरण उपाय , लाभ परिभाषा solid waste management in hindi

(solid waste management in hindi) ठोस कचरा क्या है | ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016 | निराकरण उपाय , लाभ परिभाषा ?

ठोस कचरे का एकत्रण , परिवहन और निराकरण (disposal of solid waste in hindi)

नगरपालिका / निगमों के लिए ठोस कूड़े कचरे का एकत्रण , परिवहन तथा निराकरण एक बड़ी समस्या रही है। यह सेवा न केवल खर्चीली है , अपितु यह अत्यंत श्रम भी माँगती है। इसकी अपनी विशेष समस्याएं है –

1. लोगों को अपने घरेलु कूड़े कचरे के निपटान के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती है : नगरों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 0.4 से 0.5 किलोग्राम की सीमा तक घरेलू कूड़ा उत्पन्न किया जाता है। सामान्यतया वह सामग्री जो पुनर्चक्रित (पुनर्युक्त) की जा सकती है , जैसे – कागज , प्लास्टिक , बोतलें आदि , घर में बचा ली जाती है तथा केवल वे वस्तुएँ जो किसी भी तरह काम में नहीं आ सकती है , उन्हें कूड़े कचरे की तरह फेंक दिया जाता है।

कुछ नगरों के कतिपय क्षेत्रों में , परिस्थिति को सुधारने के प्रयास किये गए है , जहाँ कुछ कूड़ेदान कुछ दूरी पर रखे गए है अथवा ठेलागाड़ियाँ कुछ दूरी पर रखी गई है। जहाँ यह आशा की जाती है कि लोग अपना घरेलु कूड़ा कचरा इसमें डालेंगे। यह प्रणाली सफलतापूर्वक इस कारण से काम नहीं कर रही है कि गृहणियाँ सामान्यतया घरेलू कूड़ेदान तक जाना पसंद नहीं करती है। इस तरह घरेलू कूड़े कचरे को एकत्र करने की वर्तमान प्रणाली अत्यधिक अस्वास्थ्यपूर्ण एवं त्रुटीपूर्ण है।

2. पारस्परिक ठेलागाड़ियों का प्रयोग : अनेक नगरों में विभिन्न प्रकार की ठेलागाड़ियाँ घरेलू कूड़े कचरे तथा सडक झाड़न को कूड़ादानी स्थलों तक ले जाने के लिए काम में ली जाती है। सामान्यतया यह पारंपरिक गाड़ियाँ ठीक ढंग से निर्मित नहीं होती है तथा इनमें ले जाया गया कूड़ा लोगों के लिए अत्यन्त अस्वास्थ्यकर दशाएँ उत्पन्न करता है। इसके वाहन के समय भी अत्यधिक अकुशल तरीके से भरे होने के कारण यह स्थान स्थान पर छलक कर गंदगी पैदा करता जाता है। उस कूड़े के ढेर का कूड़ादानी स्थल पर छोटे छोटे ढेरों में चारों तरफ जमीन पर खाली किया जाता है तथा यह कूड़ा लोगो के सामने तब तक खुला पड़ा रहता है , जब तक कि उसे उठा न लिया जाए। इस प्रकार इसका निपटान वातावरण को प्रदूषित करता है।

3. कूड़ा एकत्रण स्थल की दिशा : कोई निश्चित सीमा निर्धारित नहीं होती है कि वह दूरी क्या होनी चाहिए जो कि एक सफाई कर्मचारी को अपनी ठेलागाडी में एकत्र किये कूड़े कचरे को जमा करने के लिए उपयुक्त होगी। कुछ नगरों में कूड़ादानी स्थल छोटे तथा बहुत अधिक नजदीक है जबकि कुछ नगरों में सफाई कर्मचारी को आधे किलोमीटर से अधिक दूरी कूड़ादानी स्थल पर कूड़े कचरे को जमा करने के लिए जाना पड़ता है। यह स्थल सामान्यतया खुले अथवा आंशिक ढके होते है। कुछ स्थानों पर कूड़ा कचरा जमा करने के लिए पक्के निर्माण कराये गए है लेकिन इन स्थलों का अनुभव भी संतोषप्रदता से दूर है। खुले कूड़ेदान स्थल सदा आँखों का कांटा होते है। छोटे बच्चे इन स्थलों पर कागज , प्लास्टिक , चीथड़े आदि एकत्र करते है , अवारा जानवर कूड़ा कचरा खाने के लिए यहाँ एकत्र होते है। यह कूड़ा कचरा चारों तरफ फैला हुआ रहता है तथा प्राय: सडक के आवागमन में व्यवधान तो डालता ही है , साथ ही विभिन्न वाहनों से उत्पन्न तरंगों एवं हवा के झोंको द्वारा प्रसारित भी होता है।

4. मलबे का हटना : नगरीय क्षेत्रों में भवन निर्माण सामान्यतया चलता ही रहता है , पुराने भवन गिरा दिए जाते है। वर्तमान भवनों में परिवर्तन एवं परिवर्धन होते है। परिणाम यह होता है कि प्रत्येक दिन बहुत सा कूड़ा कचरा पैदा होता है , दुर्भाग्यवश इस कूड़े कचरे को एकत्र तथा हटाने की प्रणालियाँ विकसित नहीं की गयी है।

5. व्यावसायिक कूड़ा कचरा : हालाँकि हमारे देश में व्यावसायिक क्रिया का विकास तेजी से विस्तृत हुआ है तथा भवन खड़े हो जाते है। बाजारी कूड़े कचरे के निपटान की प्रणाली को अभी भी सुधारा नहीं गया है। बहुत से व्यावसायिक क्षेत्रों में कागज प्लास्टिक पुलिंदा बाँधने की सामग्री आदि को अभी भी सडको अथवा रास्तों पर फेंक दिया जाता है अथवा किसी कोने में अव्यवस्थित ढंग से जमा कर दिया जाता है। व्यावसायिक कूड़े कचरे के इक्कठे करने की नियमित प्रणाली अभी भी लागू नहीं की गयी है। इसलिए किसी भी समय अप्रिय कूड़े के ढेर दिखाई देते है। बहुत कम व्यावसायिक केंद्र वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए अपनी दिशाओं को ठीक रखते है।

6. औद्योगिक कूड़ा कचरा : औद्योगिक क्षेत्रों में बहुत बड़ी मात्रा में कूड़ा कचरा पैदा होता है। बहुधा टनों कूड़ा कचरा औद्योगिक क्षेत्रों में नगर निगम की अथवा शासकीय भूमि पर डाल दिया जाता है तथा वह वहां महीनों और वर्षों अनिपटित पड़ा रहता है।

7. औषधालीय कूड़ा कचरा : नगरीय क्षेत्रों में बहुत से औषधालय तथा परिचार्यगृह होते है , जहाँ संक्रामक कूड़ा कचरा नगर से एकत्र किये गए सामान्य कूड़े में न मिलने दिया जाए क्योंकि यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न कर सकता है। दुर्भाग्यवश कई नगरों में औषधालीय कूड़ा कचरा सामान्यतया जलाया नहीं जाता तथा अस्वास्थ्यकर ढंग से सामान्य कचरे के साथ जमा कर दिया जाता है।

अक्सर गरीब बच्चे इस औषधालीय कूड़े कचरे से कुछ उपयोगी सामग्री जैसे रुई , सिरिंज आदि चुनते पाए जाते है , जो बाजार में पुनः पहुँच दी जाती है तथा पुनः उपयोग में ले ली जाती है ; ऐसे पुनर्चक्री अभ्यासों से उत्पन्न स्वास्थ्य संकट का सुविधा से अनुमान किया जा सकता है।

8. लिटर बिनों की अप्रावधानता : नगरीय क्षेत्रों में काफी बड़ी अस्थायी जनसंख्या देखी जाती है। लोग दूर के क्षेत्रों से खरीददारी करने आते है तथा वह सडकों पर खाते है एवं बेकार कागज , प्लास्टिक , कूड़ा , सिगरेट की डिब्बियां आदि सडकों पर फेंक देते है। इसका परिणाम यह होता है कि आवागमन के मार्ग कभी भी साफ़ सुथरे नहीं रहते। अत: नगरीय क्षेत्र में लीटर डिब्बो का प्रावधान आवश्यक है।

9. कूड़े कचरे का परिवहन तथा स्वास्थ्य जोखिम : नगरों में ठोस कूड़े कचरे में परिवहन के लिए बहुत से ढंग अपनाए जाते है। ऐसी भी जगह है जहाँ हाथ गाड़ियाँ , ठेले , ठोस कूड़े कचरे को ले जाने के लिए काम में लाये जाते है। ट्रेक्टर ट्रालियों का प्रयोग भी होता है। कूड़े कचरे को ढोने के लिए ट्रक भी काम में लाये जाते है , लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन यानों को कूड़े से कूड़ा कचरा संचयन स्थल पर भरा जाता है। सामान्यतया कूड़ा कचरा खुली कूड़ादानी स्थल यसास आंशिक रूप से बंद क्षेत्र में किया जाता है लेकिन कूड़े को उठाने की प्रणाली अत्यधिक अप्रभावी है एवं कूड़ा उठाने के लिए लगाये गए मजदूरों को जोखिम का सामना करना पड़ता है। वह किसी सामान्य साधन का प्रयोग करके हाथों में छोटे डिब्बे , बाल्टी आदि भरते है एवं 6 से 7 मीटर ऊंचाई तक कूड़े कचरे को उठाते है तथा फिर यान में इसे फेंकते है। इसका परिणाम यह होता है कि धुल तथा कूड़े के कण जो हवा में आ जाते है , स्वास्थ्य संकट पैदा करते हुए मजदूरों की श्वास प्रणाली में घुस जाते है।

नगरों में भूमि की उपलब्धता बहुत कम होती है तथा कूड़े को बहुत अधिक दूरियों तक ले जाना पड़ता है जो परिवहन की लागत को बढ़ा देता है एवं इसी तरह कूड़े के निपटान के लिए जो एक ट्रक करीब 6 टन कूड़ा कचरा एक बार ले जा सकता है , उसमे केवल 3 टन ठोस कूड़े का ही परिवहन होता है।

कूड़े कचरे का निराकरण अर्थात निपटान (waste disposal)

हमारे नगरों में सामान्यतया कूड़े कचरे का निराकरण भूमि भरण में किया जाता है। बहुत कम कूड़ा खाद बनाने तथा जलाने में लेते है। जो कुछ हम नगरों में करते है उनके लिए शब्द स्वास्थ्यकर भूमिभरण का प्रयोग नहीं कर सकते है।
नगरों में ठोस कचरे के जमा करने के तरीके अत्यंत लापरवाही वाले है। निपटान के स्थलों को अनियोजित ढंग से चुनते है एवं जमा करने के स्थलों के पास रहने वाले लोगो के लिए भरपूर संकट एवं स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न करते हुए अत्यधिक अस्वास्थ्यकर ढंग से जमा कर देते है। कूड़े कचरे को उलटने का कभी नियंत्रण नहीं किया जाता है तथा सामान्यतया एकत्रण स्थल पर जमा किये गए कूड़े कचरे का दिन के अंत में बेकार सामग्री से ढका नहीं जाता है जिससे दुर्गन्ध तथा गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती है। अत: नगरों में एकत्र किये जाने वाले ठोस कूड़े कचरे के निपटान की विधियाँ पुरानी और अप्रभावी है जिनमे तुरंत सुधार की आवश्यकता है। दैनिक कूड़े कचरे के समुचित निपटान में बरती जाने वाली कमियाँ निम्नलिखित है –
  1. कूड़ा उठाने की वर्तमान विधियाँ प्राचीन है जिससे इस काम में लगे मजदूरों को स्वास्थ्य संकट उत्पन्न होता है।
  2. नागरिकों को अपने घरेलू कचरे के निराकरण के लिए उपयुक्त सुविधाएँ नहीं है।
  3. हाथों से ट्रकों को भरने तथा कूड़े कचरे के एकत्रण स्थल से उठाकर नगर की सीमा से बाहर ले जाने की परिवहन प्रणाली अनुपयुक्त है।
  4. कूड़ा डालने के स्थल सामान्यतया खुले होते है।
  5. औद्योगिक कूड़े कचरे के उचित निराकरण के लिए कोई सुविधा नहीं है।
  6. एकत्रण स्थलों को वैज्ञानिक ढंग से चुना जाता है तथा कूड़े कचरे के निपटान को व्यवस्थित ढंग से नहीं किया जाता।
  7. सामान्य कूड़े कचरे के साथ साथ औषधालीय संक्रामक कूड़े कचरे का निराकरण स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक होता है।
Sbistudy

Recent Posts

Question Tag Definition in english with examples upsc ssc ias state pcs exames important topic

Question Tag Definition • A question tag is a small question at the end of a…

1 week ago

Translation in english grammer in hindi examples Step of Translation (अनुवाद के चरण)

Translation 1. Step of Translation (अनुवाद के चरण) • मूल वाक्य का पता करना और उसकी…

1 week ago

Report Writing examples in english grammer How to Write Reports explain Exercise

Report Writing • How to Write Reports • Just as no definite rules can be laid down…

1 week ago

Letter writing ,types and their examples in english grammer upsc state pcs class 12 10th

Letter writing • Introduction • Letter writing is an intricate task as it demands meticulous attention, still…

1 week ago

विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक विशेषताएँ continents of the world and their countries in hindi features

continents of the world and their countries in hindi features विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक…

1 week ago

भारत के वन्य जीव राष्ट्रीय उद्यान list in hin hindi IAS UPSC

भारत के वन्य जीव भारत में जलवायु की दृष्टि से काफी विविधता पाई जाती है,…

1 week ago
All Rights ReservedView Non-AMP Version
X

Headline

You can control the ways in which we improve and personalize your experience. Please choose whether you wish to allow the following:

Privacy Settings
JOIN us on
WhatsApp Group Join Now
Telegram Join Join Now