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सिख धर्म में अंतिम संस्कार कैसे किया जाता है (Sikh Death Rituals in hindi) सिक्ख समाज में अंतिम संस्कार संबंधी अनुष्ठान
(Sikh Death Rituals in hindi) सिख धर्म में अंतिम संस्कार कैसे किया जाता है what does sikh do with their dead bodies? know in hindi what happens to soul after death in sikhism ?
सिक्ख समाज में अंतिम संस्कार संबंधी अनुष्ठान (Sikh Death Rituals)
सिक्खों का मानना है कि गर्म जलवायु वाले स्थानों में अंतिम संस्कार जल्द से जल्द कर देना चाहिए। यदि यह मृत्यु के एक दिन बाद हो सके तो अच्छा है। उनमें मृतक का दाह संस्कार ही किया जाता है। शव को जल में विसर्जित करने की भी छूट रहती है और इसे । गलत नहीं माना जाता। लेकिन दाह संस्कार की प्रथा पांच सौ वर्षों से चली आ रही है। भस्म को धरती में दबाया जा सकता है। संतों की समाधियों और पवित्र स्थल इसके उदाहरण हैं। वैसे आमतौर पर भस्म को पास की किसी नदी में विसर्जित कर दिया जाता है। सिक्खों में अंत्येष्टि के स्थल पर किसी प्रकार का स्मारक बनाना अच्छा नहीं समझा जाता और उनके गुरुओं ने भी इन बातों के लिए मना किया है। लेकिन हमें ऐसे स्थलों पर गुरुद्वारे नजर आते हैं । इस प्रकार, पूर्व सांक्रांतिक कार्यों को फुर्ती और कुशलता के साथ निपटाया जाता है और अंत्येष्टि के लिए दाह संस्कार को ही अपनाया जाता है।
दाह संस्कार, एक पारिवारिक कर्म (Cremation, A Family ffAair)
सिक्खों में दाह संस्कार के समय मृतक का पूरा परिवार मौजूद रहता है, जबकि हिंदुओं में परिवार की महिलाएं घर पर ही रह जाती हैं, मृतक को स्नान कराया जाता है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि उसे सिक्ख पंथ के पांच चिह्नों- कृपाण, कच्छा, कंघा, कड़ा, और केश-से सज्जित कर लिया गया है। शव को एक अर्थी पर शव यात्रा के साथ श्मशान भूमि तक ले जाया जाता है। शोक करने वाले भजन गाते हैं। चिता को अग्नि देने का काम मृतक का कोई घनिष्ठ पुरुष रिश्तेदार करता है और दाह संस्कार के दौरान संध्याकालीन भजन गाया जाता है। इस अवसर पर अरदास और प्रार्थना भी की जाती है।
शोक करने वाले जब घर लौटते है तो वे हाथ मुंह अवश्य धोते हैं। अनेक तो नहाते भी हैं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का आद्योपांत पाठ शुरू किया जाता है जो अगले दस दिनों तक चलता रहता है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ एक-एक घंटे होता है और बीच-बीच में अंतराल रहता है। इस तरह पूरा ग्रंथ पढ़ लिए जाने तक पाठ चलता रहता है। पूर्व साक्रांतिक रीतियों में शव को तैयार करना और वस्त्र पहनाना भी शामिल होता है। लेकिन चिता जलाने के साथ सांक्रांतिक अनुष्ठान आते हैं। उसके बाद उत्तर सांक्रांतिक अनुष्ठान शुरू होते हैं और शोक करने वालों के घर पहुंच कर नहाने, धोने और उपर्युक्त लिखित अनुसार दस दिन तक श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ होने तक ये भी चलते रहते हैं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ करने वाले इन अनुष्ठानों में संस्कार के व्यावसायिक पहलू का बोध कराते हैं और इन अनुष्ठानों से संस्कार के जीवन का अंग होने का भी बोध होता है क्योंकि इनसे यह संकेत मिलता है कि जहां जीवन है वहां मृत्यु भी होगी।
कड़हा प्रसाद (Karah Prasad)
सिक्खों के संस्कारों में एक सामाजिक प्रथा का गहरा सांस्कृतिक महत्व है और यह प्रथा है कड़ाह प्रसाद बांटना । शोक करने वालों को कड़ाह प्रसाद दिया जाता है। सामूहिक भोज का गहरा अर्थ होता है और यह सामाजिक जीवन की निरंतरता के महत्व को उस समय रेखांकित करता है जब इस जीवन को मृत्यु के हाथों ने छिन्न-भिन्न कर दिया होता है। जीवन में आस्था की यह पुष्टि कोप भवन में जाने, उपवास करने और अन्य रीतियों से शोक करने से कितनी अलग है। कड़ाह प्रसाद का वितरण भी एक उत्तर सांक्रांतिक संस्कार है और यह इस बात का बोध कराता है कि सांक्रांतिक चरण का अंत हो चुका है। यह समाज की दिशा परिवर्तन करने वाला संस्कार भी है क्योंकि यह प्रसाद संस्कार में मौजूद सभी लोगों को दिया जाता है।
ऐसा विश्वास किया जाता है कि सिक्ख जन्म अच्छे कर्मों का फल होता है। इससे व्यक्ति गुरबानी के संपर्क में आता है और इस प्रकार वह मोक्ष की तलाश करता है, मृत्यु की अवस्था के निकट पहुंचे व्यक्ति को भी गुरबानी पढ़ कर सुनाई जाती है, जिसका संदेश यह है कि नाम सबसे मूल्यवान संपत्ति है और जो लोग इस का जाप नहीं करते वे अपने किए पर पछताएंगे।
कार्यकलाप 1
आपने हिन्दुओं, ईसाइयों या सिक्खों किसी के भी अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया हो और उनके जो अनुष्ठान आपको ध्यान में हो उनका दो पृष्ठों में वर्णन करें। उनके विभिन्न अनुष्ठानों का प्रचलित व्याख्याओं के अनुसार अर्थ स्पष्ट करने का प्रयास करें। संभव हो तो, अध्ययन केंद्र के अन्य छात्रों के साथ अपने उत्तर का मिलान करें।
प्रश्न : सिक्खों में अंतिम संस्कार की मुख्य रस्मों का वर्णन कीजिए। अपना उत्तर 5-7 पंक्तियों में लिखिए।
उत्तर : सिक्खों में सामान्यतया दाह संस्कार किया जाता है। उनमें समाधि बनाने की परंपरा नहीं है। शव को स्नान कराया जाता है और सिक्खों के पांच (कक्कों) से उसे सज्जित किया जाता है। प्रार्थनाओं की बीच दाह संस्कार किया जाता है। शोक करने वाले जब घर लौटते हैं तब श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ शुरू होता है। अरदास के बाद कड़ाह प्रसाद दिया जाता है, और भजन-कीर्तन किया जाता है।
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