JOIN us on
WhatsApp Group Join Now
Telegram Join Join Now

हिंदी माध्यम नोट्स

Categories: Uncategorized

अल्प सूचना प्रश्न क्या होता है | what is short notice questions upsc in hindi definition meaning

what is short notice questions upsc in hindi definition meaning अल्प सूचना प्रश्न क्या होता है ?

प्रश्न किस प्रकार पूछे जाते हैं
जिस सदस्य का प्रश्न किसी दिन के लिए तारांकित प्रश्न के रूप में गृहीत किया गया हो उसे अध्यक्ष द्वारा या सभापति द्वारा, जैसी भी स्थिति हो, प्रश्न पूछने के लिए कहा जाता है। वह सदस्य अपने स्थान पर खड़ा हो जाता है और सूची से केवल प्रश्न की संख्या पढ़कर, न कि प्रश्न का पाठ पढ़कर, अपना प्रश्न पूछता है। उसके बाद मंत्री प्रश्न का उत्तर देता है।
प्रश्नकाल के दौरान किसी प्रश्न पर या दिए गए उत्तर पर वाद विवाद की अनुमति नहीं होती। परंतु दिए गए उत्तर संबंधी किसी तथ्य के स्पष्टीकरण के प्रयोजन से अनुपूरक प्रश्नों या अनुवर्ती प्रश्नों के लिए अनुमति दी जा सकती है। जिस सदस्य के नाम में प्रश्न दर्ज हो वह दो अनुपूरक प्रश्न पूछ सकता है । अन्य सदस्य जिन्हें अध्यक्ष अनुमति दे एक एक पूरक प्रश्न पूछ सकते हैं । अध्यक्ष सामान्यतया एक प्रश्न पूछने के लिए सत्ता पक्ष के सदस्य को और दूसरा प्रश्न पूछने के लिए विपक्ष के सदस्य को पुकारता है। प्रश्न के महत्व को देखते हुए समुचित संख्या में अनुपूरक प्रश्नों के लिए अनुमति देकर और अनुपूरक प्रश्न पूछने का अवसर सदन के सब पक्षों के सदस्यों को देकर, अध्यक्ष इस अनूठे संसदीय उपाय की कुशलता सुनिश्चित करता है। इसके अतिरिक्त, प्रश्नकाल के सीमित समय में, वह प्रयास करता है कि यथासंभव अधिक से अधिक प्रश्न पूछे जाएं। प्रश्नकाल में अधिक से अधिक मौखिक प्रश्नों के उत्तर दिलाने के लिए अध्यक्ष का यह प्रयास रहता है कि किसी तारांकित प्रश्न पर सामान्यतया आठ मिनट से अधिक समय न लिया जाए। सही बात तो यह है कि यदि 60 मिनटों में 20 (प्रश्न लिए जाने हों तो एक प्रश्न पर औसतन तीन मिनट से अधिक नहीं लगने चाहिए। यदि) अध्यक्ष/सभापति यह महसूस करता है कि मामले पर पर्याप्त रूप से बात हो चुकी है तो वह उस सदस्य को पुकारता है जिसके नाम में सूची में अगला प्रश्न दर्ज हो । यह सिलसिला 12 बजे दोपहर तक चलता रहता है।
अनुभव यह रहा है कि प्रत्येक दिन की तारांकित प्रश्नों की सूची में दर्ज 20 प्रश्नों में से सदन में वास्तव में अधिक से अधिक पांच से सात प्रश्नों के ही उत्तर दिए जाते हैं । जहां तक शेष प्रश्नों का संबंध है, उनके लिखित उत्तर संबद्ध मंत्रियों द्वारा सभा पटल पर रखे गए मान लिए जाते हैं। इसी तरह, अतारांकित प्रश्नों के उत्तर भी प्रश्नकाल के अंत में सभा पटल पर रख दिए जाते हैं।

अल्प-सूचना प्रश्न
अविलंब लोक महत्व के किसी मामले के बारे में प्रश्न के मौखिक उत्तर के लिए सूचना पूरे दस दिन से कम अवधि में दी जा सकती है। ऐसे प्रश्न की सूचना देने वाले सदस्य को अल्प-सूचना पर प्रश्न पूछने के कारण संक्षेप में बताने होते हैं । यदि अध्यक्ष/सभापति महसूस करता है कि मामला अविलंबनीय स्वरूप का है तो संबंधित मंत्री से पूछा जाता है कि क्या वह अल्प-सूचना पर उत्तर देने की स्थिति में है और यदि हां तो किस तिथि को । यदि मंत्री अल्प-सूचना प्रश्न का उत्तर देने के लिए सहमत हो जाता है तो उसके द्वारा बताई गई तिथि इस हेतु निर्धारित की जाती है । यदि मंत्री अल्प-सूचना पर प्रश्न का उत्तर देने से इंकार करता हो और अध्यक्ष/सभापति की यह राय हो कि वह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण है कि सदन में उसका मौखिक उत्तर दिया जाना चाहिए तो वह निर्देश दे सकता है कि उस प्रश्न को उस दिन की मौखिक उत्तर के लिए प्रश्नों की सूची में प्रथम प्रश्न के रूप में रख दिया जाए जिस दिन वह प्रश्न कम से कम पूरे दस दिन की शर्त पूरी करने पर रखा जा सकता हो। किसी दिन की प्रश्न सूची में ऐसा केवल एक ही प्रश्न रखा जा सकता है।
प्रश्नकाल के अंत में अल्प-सूचना प्रश्न, यदि कोई हो तो, लिया जाता है और उसे वैसे ही निबटाया जाता है जैसे मौखिक उत्तर के लिए किसी प्रश्न को निबटाया जाता है। अल्प-सूचना प्रश्न गृहीत करने के लिए शर्ते वही हैं जो मौखिक उत्तर के लिए साधारण प्रश्नों की हैं।

गैर-सरकारी सदस्यों से पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न किसी गैर-सरकारी सदस्य से भी पूछा जा सकता है यदि उस प्रश्न का विषय किसी ऐसे विधेयक या संकल्प से या सभा के कार्य के किसी अन्य विषय से संबंधित हो जिसके लिए वह सदस्य उत्तरदायी रहा हो। ऐसे प्रश्न लोक सभा में कभी कभार ही पूछे जाते हैं और हो सकता है कि अधिवेशन बीत जाने पर भी ऐसा प्रश्न पूछा न जाए । ऐसे प्रश्न पर अनुपूरक प्रश्न नहीं पूछा जा सकता। अल्प-सूचना प्रश्न किसी गैर-सरकारी सदस्य से नहीं पूछा जा सकता।

आधे घंटे की चर्चा
किसी ऐसे प्रश्न से उत्पन्न होने वाले मामलों पर जिसका उत्तर सदन में दिया जा चुका हो, आधे घंटे की चर्चा लोक सभा में सप्ताह में तीन दिन, अर्थात सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को, बैठक के अंतिम आधे घंटे में की जा सकती है। राज्य सभा में ऐसी चर्चा सभापति द्वारा इस प्रयोजन के लिए नियत किसी दिन समान्यतया 5 बजे म.प. से 5.30 म.प. तक की जा सकती है । ऐसी चर्चा का विषय पर्याप्त लोक महत्व का होना चाहिए जो हाल के किसी तारांकित, अतारांकित या अल्प-सूचना प्रश्न का विषय रहा हो और जिसके उत्तर के किसी तथ्यात्मक मामले का स्पष्टीकरण करना आवश्यक हो।
जो सदस्य ऐसी चर्चा उठाना चाहता हो उसे उस दिन से कम से कम तीन दिन पूर्व, जब वह चर्चा उठाना चाहता हो, लिखित रूप में सूचना देनी होती है। अपनी सूचना में सदस्य के लिए उस मुद्दे या उन मुद्दों का उल्लेख करना अपेक्षित है जो वह उठाना चाहता हो । किसी दिन की बैठक के लिए आधे घंटे की चर्चा की केवल एक सूचना रखी जाती है । इसके अलावा, लोक सभा में एक सप्ताह में किसी एक सदस्य के नाम में केवल एक चर्चा रखी जाती है और कोई सदस्य एक ही अधिवेशन में दो से अधिक चर्चाएं नहीं उठा सकता। अध्यक्ष/सभापति प्रत्येक मामले में यह फैसला करता है कि क्या मामले के किसी तथ्यात्मक पहलू के स्पष्टीकरण की आवश्यकता है और क्या वह इतने लोक महत्व का है कि उसे चर्चा के लिए रखा जाए।
ऐसी चर्चा के बारे में सदन में प्रक्रिया यह है कि जिस सदस्य ने चर्चा की शुरुआत की हो उसके द्वारा संक्षिप्त बयान दिए जाने के पश्चात, अधिक से अधिक चार अन्य सदस्य, जिन्होंने इस आशय की पूर्व सूचना दी हो, किसी तथ्यात्मक बात के अग्रेतर स्पष्टीकरण के प्रयोजन से एक एक प्रश्न पूछ सकते हैं। उसके पश्चात अंत में संबंधित मंत्री चर्चा का उत्तर देता है।

प्रश्नकाल का मूल्यांकन
यद्यपि परिभाषा के अनुसार प्रश्न पूछने का प्रयोजन जानकारी प्राप्त करना है, तथापि व्यवहार में, अधिकांश-प्रश्नों का प्रयोजन जानकारी उपलब्ध कराना है। कभी कभी सदस्य को किसी विशिष्ट मामले में उससे अधिक जानकारी हो सकती है जितनी कि सरकार देने के लिए तैयार हो। ऐसी स्थिति में प्रश्न का वास्तविक प्रयोजन प्रशासनिक कमियों को उजागर करना, सरकार को परेशानी में डालना या सरकार को किसी असुविधाजनक बात के लिए वचनबद्ध करना या किसी कार्यवाही के लिए वचनबद्ध करना हो सकता है । एक प्रयोजन यह भी हो सकता है कि सदस्य ऐसी जानकारी रखते हुए भी व्यापक प्रचार के लिए चाहता हो कि उसका सदन में उल्लेख किया जाए।
संसदीय प्रश्नों से एक ओर यह संभव हो जाता है कि सरकार लोगों की, जो अपने प्रतिनिधियों को प्रश्नों के लिए सामग्री उपलब्ध कराते हैं, शिकायतों, समस्याओं और आशयों से अवगत हो जाए तो दूसरी ओर इन प्रश्नों के द्वारा सरकार की गतिविधियों और कार्यक्रमों, इसकी नीतियों और विभिन्न मामलों पर दृष्टिकोण को और प्रशासन के कार्यकरण के ढंग को लोग जान सकते हैं। सरकारी कार्य करने वालों पर संसदीय प्रश्नों के रोकात्मक प्रभाव के अलावा, प्रश्नों के द्वारा कार्यपालिका जान सकती है कि नीतियों को किस तरह कार्यरूप दिया जा रहा है और आम व्यक्तियों को ये किस तरह प्रभावित कर रही हैं। आजकल प्रशासनिक व्यवस्था का इतना विस्तार हो रहा है कि राजनीतिक नेताओं को, कार्यपालिका को और प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों को भी यह सब जानने में कठिनाई हो रही है कि उनके नियंत्रणाधीन विभागों में क्या कुछ हो रहा है। इस दृष्टि से संसदीय प्रश्न निश्चय ही कार्यपालिका के लिए सहायक होते हैं क्योंकि वे ऐसी बातों को प्रकाश में लाते हैं जिनसे आम लोगों का महत्वपूर्ण रूप से संबंध रहता है।
यह बात निश्चित रूप से कही जा सकती है कि सदस्य प्रश्न पूछने के अधिकार का प्रयोग करने में भारी रुचि दिखाते रहे हैं। प्रश्नों की प्रक्रिया अपेक्षतया सरल और आसान होने के कारण, यह संसदीय प्रक्रिया के अन्य उपायों की तुलना में संसद सदस्यों में अधिकाधिक प्रिय होती जा रही है। जितनी लोक सभाएं अस्तित्व में रह चुकी हैं उनमें गृहीत किए गए ऐसे प्रश्नों की, जिनके उत्तर दिए गए, संख्या देखने से यह बात स्पष्ट हो जाती है। (देखिये सारणी)
सारणी
अवधि सब श्रेणियों के गृहीत प्रश्नों की संख्या ।
पहली लोक सभा (1952-57) 43,725
दूसरी लोक सभा (1957-62) 24,631
तीसरी लोक सभा (1962-66) 56355
चैथी लोक सभा (1967-70) 93538
पांचवीं लोक सभा (1970-76) 98,606
छठी लोक सभा (1977-79) 50,144
सातवीं लोक सभा (1980-84) 1,02,927
आठवीं लोक सभा (1985-89) 98,390
नवीं लोक सभा (1989-91) 21550

पहली लोक सभा में गृहीत प्रश्नों की कुल संख्या 43,725 थी जो सातवीं लोक सभा में बढ़कर 1,02,927 हो गई। आठवीं लोक सभा में यह संख्या 98,390 और नवीं लोक सभा में 21,550 रही। यह भी देखा गया है कि अधिवेशनों के दौरान प्राप्त हुई प्रश्नों की सूचनाओं की संख्या में से 50 से 70 प्रतिशत गृहीत किए जाते हैं परंतु सूचियों में शामिल किए जाने वाले तारांकित और अतारांकित प्रश्नों की निर्धारित सीमा के कारण बजट अधिवेशन में केवल 33 प्रतिशत और मानसून तथा शरदकालीन अधिवेशनों में 30 से 45 प्रतिशत प्रश्न वास्तव में सूचियों में सम्मिलित हो पाते हैं। प्रति बैठक प्राप्त होने वाली प्रश्नों की सूचनाओं की औसत संख्या लगभग 600 बैठती है।
प्रश्नकाल का महत्व कुछ ऐसे उदाहरणों से पर्याप्त रूप से सिद्ध हो जाता है जबकि सतर्क सदस्यों द्वारा गंभीरता से प्रश्नों पर अनुवर्ती कार्यवाही करते रहने के कारण कानून के उल्लंघन, सरकार की नीतियों के उल्लंघन या सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के मामलों में सरकार को जांच करनी पड़ी। उनमें से कुछ उदाहरण, जिनमें जांच कराई गई, इस प्रकार हैं रू जीप कांड (1951), मूंदड़ा कांड (1957), आयात लाइसेंस कांड (1974) और इस्पात के सौदों की जांच का मामला और वनस्पति घी में गाय की चर्बी के प्रयोग का मामला। इन तथ्यों से पूर्णतया स्पष्ट हो जाता है कि प्रश्नों की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है और प्रश्नकाल कितना उपयोगी है।

Sbistudy

Recent Posts

Question Tag Definition in english with examples upsc ssc ias state pcs exames important topic

Question Tag Definition • A question tag is a small question at the end of a…

2 weeks ago

Translation in english grammer in hindi examples Step of Translation (अनुवाद के चरण)

Translation 1. Step of Translation (अनुवाद के चरण) • मूल वाक्य का पता करना और उसकी…

2 weeks ago

Report Writing examples in english grammer How to Write Reports explain Exercise

Report Writing • How to Write Reports • Just as no definite rules can be laid down…

2 weeks ago

Letter writing ,types and their examples in english grammer upsc state pcs class 12 10th

Letter writing • Introduction • Letter writing is an intricate task as it demands meticulous attention, still…

2 weeks ago

विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक विशेषताएँ continents of the world and their countries in hindi features

continents of the world and their countries in hindi features विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक…

2 weeks ago

भारत के वन्य जीव राष्ट्रीय उद्यान list in hin hindi IAS UPSC

भारत के वन्य जीव भारत में जलवायु की दृष्टि से काफी विविधता पाई जाती है,…

2 weeks ago
All Rights ReservedView Non-AMP Version
X

Headline

You can control the ways in which we improve and personalize your experience. Please choose whether you wish to allow the following:

Privacy Settings
JOIN us on
WhatsApp Group Join Now
Telegram Join Join Now