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seven segment cell in hindi , सात खण्ड सेल किसे कहते हैं सिद्धांत समझाइये रसायन विज्ञान में
पढ़िए seven segment cell in hindi , सात खण्ड सेल किसे कहते हैं सिद्धांत समझाइये रसायन विज्ञान में ?
सात खण्ड सेल (SEVEN SEGMENT CELL)
द्रव क्रिस्टलों का एक और महत्वपूर्ण उपयोग इनसे सात खण्ड सेल के निर्माण का है। डिजिटल तन्त्रों में अंकों का प्रदर्शन करने के लिए व्यापक रूप से उपयोग में लाई जाने वाली जो युक्ति होती है उसमें सात खण्ड सेल का व्यापक उपयोग होता है। इलेक्ट्रॉनिक कैलकुलेटर व कलाई में बांधने वाली घड़ियों में 0 से 9 तक के अंक प्रदर्शन करने के लिए इस सात खण्ड सेल का उपयोग किया जाता है। e & C
इस सेल में (चित्र 4.17) a से g तक सात खण्ड होते हैं। इसका उपयोग करने के लिए अंकों को बाइनरी कोड में बदलकर फिर डीकोडिंग किया जाता है। इससे स्क्रीन पर बने हुए 0-9 अंकों में से उपयुक्त अंक चमकाते हैं और हम डिजिटल घड़ी या कैलकुलेटर या पेट्रोल डीजल मीटर पर उन अंकों को पढ़ सकते हैं। इस प्रकार द्रव क्रिस्टलों से बने सात खण्ड सेल का कई डिजिटल उपकरणों में उपयोग होता है।
स्मरण रखने योग्य महत्वपूर्ण बिन्दु ।
- जब अवस्था—ठोस व गैस के मध्य की अवस्था।
2.द्रवा का वर्गीकरण (i) आयनिक गलित Nac धात्विक-मर्करी,iii) संयोजित-जल, (iv) सहसंयोजक बेन्जीन।
- अन्तराण्विक बल—दो अणुओं के मध्य का आकर्षण बलः प्रकार—तीन (i) द्विध्रुव-विध्रुव अन्तक्रिया SO2, NH3 आदि जैसे ध्रुवीय अणओं के मध्य का आकर्षण बल, अन्तक्रिया की औसत ऊजा न ɸ(r) = (u1 u2/4 π0)2 (1/r6)(1/3Kt)
जहां, u1 व u2 = दोनों अणुओं के स्थायी द्विध्रुव आघूर्ण,r = दोनों के मध्य की दूरी, h= बोल्टजमैन स्थिरांक, 4 π0 = पारगम्यता व्यंजक। (i) विध्रुव-प्रेरित विध्रुव अन्तक्रिया (7)=_Hian (n TET जहां 11 = प्रथम अणु का द्विध्रुव आघूर्ण, 02 = द्वितीय अणु की ध्रुवणता,r= दोनों अणुओं के बीच की दूरी, (iii) प्रेरित विधव-प्रेरित द्विध्रुव अन्तर्किया प्रकीर्णन या लण्डन बल जो उत्कृष्ट गैसों में भी प्रभावी होता है। जहां E) व E = दोनों अणुओं की आयनन 12(E1 + E2) (4T EO)
ऊर्जा । (iv) आयन-द्विध्रुव बल U=- जहां e = आयन पर आवेश।
- द्रवों की संरचना–(i) आयरिंग सिद्धान्त द्रव अणुओं के मध्य रिक्त स्थान घूमते रहते हैं, जबकि वाष्प अवस्था में रिक्त स्थान में अणु घूमते रहते हैं। ताप बढ़ाने पर द्रव में रिक्तिओं की संख्या तथा वाष्प में अणुओं की संख्या में वृद्धि होती जाती है। (iii) बर्नल-स्कॉट सिद्धान्त द्रव अवस्था में अणुओं की व्यवस्था अव्यवस्थित होती है जिससे उनके मध्य की दूरी बढ़ जाती है।
- द्रव जल की संरचना-H-बन्धन द्वारा कुछ अणु बन्धकर झुण्ड बना लेते हैं और इन झुण्डों के मध्य जल के अणु भी होते हैं।
- द्रव क्रिस्टल ठोस व द्रवों के मध्य की मीसोमॉर्फिक अवस्था जो धुंधले द्रव रूप में होती है और जिसमें विषमदैशिकता का गुण होता है। प्रकार (1) स्मेक्टिक सतहयुक्त संरचना, (ii) नेमैटिक ध्रुवित प्रकाश में डोरे जैसी संरचनायुक्त, (iii) कोलेस्टीरिक कुछ-कुछ टुकड़ों में स्मेक्टिक व नेमैटिक संरचनायुक्त।
- धर्मोग्राफी शरीर के विभिन्न स्थानों के ताप परिवर्तन के अध्ययन की तकनीक जिससे ट्यूमर की स्थिति ज्ञात की जा सके।
9.सात खण्ड सेल डिजिटल तन्त्रों में अंकों का प्रदर्शन करने में प्रयुक्त युक्ति।
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