हिंदी माध्यम नोट्स
धर्म और विज्ञान का क्या उद्देश्य है | में अंतर धर्म और विज्ञान के बीच संबंध का वर्णन science and religion in hindi
science and religion in hindi धर्म और विज्ञान का क्या उद्देश्य है | में अंतर धर्म और विज्ञान के बीच संबंध का वर्णन ?
धर्म और विज्ञान
दर्खाइम के अनुसार धार्मिक विचारधाराओं से ही वैज्ञानिक विचारधारा की उत्पत्ति हुई। धर्म और विज्ञान दोनों प्रकृति, मानव जाति और मानव समाज से संबंधित हैं। वस्तुओं का वर्गीकरण उनकी व्याख्या और उनके बीच पारस्परिक संबंधों को समझने का प्रयास धर्म और विज्ञान दोनों द्वारा किया जाता है।
विज्ञान वास्तव में धार्मिक विचारों का अधिक शुद्ध और विकसित रूप है। बल और शक्ति जैसी वैज्ञानिक परिकल्पनाएँ मूलतः धार्मिक परिकल्पनाएँ है। दर्खाइम का विश्वास है कि ऐसा समय आयेगा जब धार्मिक विचारों का स्थान विज्ञान ले लेगा। वह इस बात की ओर ध्यान आकृष्ट करता है कि समाज-विज्ञानों में धर्म का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है।
धार्मिक विचार और वैज्ञानिक विचार दोनों सामूहिक प्रतिनिधान हैं, अतःउनके बीच संघर्ष होना असंभव है। धर्म और विज्ञान दोनों ही सार्वभौमिक सिद्धांत की खोज करने के दो प्रकार से प्रयास हैं। उनका उद्देश्य मानव-जाति को व्यक्तिगत स्वभाव की सीमाओं से बाहर लाकर एक ऐसी जीवन पद्धति को प्रोत्साहित करना है जो एक साथ व्यक्तिवादी और सामूहिक हो। संपूर्ण मानव कहलाने के लिये व्यक्ति को समाज की आवश्यकता है। व्यक्ति और समाज को एक बनाने में धर्म और विज्ञान दोनों सहायक होते हैं।
हमने देखा कि किस प्रकार दर्खाइम धर्म का अध्ययन सामूहिक एकात्मकता के संदर्भ में करता है। सामूहिक एकात्मकता व्यक्तियों में एकता उत्पन्न कर तथा समाज की पूजा करवा कर और अधिक मजबूत और गहरी बन जाती है।
दर्खाइम के विचारों ने विशेष कर इंग्लैंड और फ्रांस के समाजशास्त्रियों और नृशास्त्रियों को प्रभावित किया। उसका भाँजा मार्सेल मॉस उन महत्वपूर्ण नृशास्त्रियों में से था जिन्होंने दर्खाइम की पद्धति को अपनाया। उस के विषय में आपको कोष्ठक 19.1 में जानकारी दी गई है।
कोष्ठक 19.1 मार्सेल मॉस
मार्सेल मॉस (1872.1950) एमिल दर्खाइम का भांजा था। लोरै (फ्रांस) के एक आत्मीय, धर्मनिष्ठ यहूदी परिवार में उसका जन्म हुआ। किन्तु मॉस ने यहूदी धर्म को नकार दिया। मॉस का अपने मामा के प्रति बहुत लगाव था और उसी के मार्गदर्शन में उसने बोर्दो में दर्शन-शास्त्र का अध्ययन प्रारंभ किया। दर्खाइम ने मार्सेल को पढ़ाई में बहुत सहायता की। इनके इस आपसी लगाव से एक ऐसा बौद्धिक संबंध पैदा हआ जिसके परिणामस्वरूपा फार्स ऑफ प्रिमिटिव क्लासिफिकेशन (दर्खाइम और मॉस, 1903) और ऐसी अन्य कृतियां लिखी गई। “ऐनी सोश्योलोजीक‘‘ नामक दर्खाइम द्वारा स्थापित पत्रिका में मॉस संपादक के रूप में काम करने लगा। इसी दौरान अन्य मेधावी नौजवान विद्वानों से उसका परिचय हुआ, जिनके साथ वह काम करने लगा। हयूबैर्ट, फॉसोने, बीशा के साथ उसने धर्म, जादू-टोना, यज्ञ, बलि, प्रार्थना, स्वयं की परिकल्पना इत्यादि विषयों पर महत्वपूर्ण लेख प्रकाशित किये।
सैक्रिफाइसः इट्स नेचर एंड फंकशन (ह्यूबर्ट और मॉस 1899) में यज्ञ का अध्ययन किया गया, जिसे पवित्र और लौकिक क्षेत्रों के बीच संपर्क के रूप से देखा गया। जिस वस्तु की यज्ञ में आहुति दी जाती है, उसका विनाश हो जाता है।
द गिफ्ट (1925), मॉस की सबसे महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है। प्राचीन समाजों में पायी जाने वाली भेंटों की लेन-देन की प्रणालियों पर मॉस ने ध्यान केन्द्रित किया। उसकी मुख्य परिकल्पनाएं इस प्रकार थींः
I) लेन-देन, जिसमें लेना, देना और भरपाई शामिल है। ये प्रत्येक समाज में पाये जाते हैं,
II) भेंटों का आदान-प्रदान सभी सामाजिक बंधनों को मजबूत करता है, चाहे वे सहकारी, प्रतिस्पर्धात्मक या संघर्षमय हों। मॉस ने सामाजिक व्यवस्था और लेन-देन के स्वरूप के बीच अंतर्संबंध दिखाने का प्रयास किया।
दोनों महा-युद्ध मॉस के जीवन में अनेक विपत्तियां लाये। पहले महा-युद्ध में उसने अनेक मित्र और सहकर्मी खो दिये। उसके प्रिय मामा दर्खाइम का पुत्र आंद्रे युद्ध में शहीद हो गया। यह सदमा दर्खाइम बर्दाश्त न कर सका और जल्द ही वह भी चल बसा। दूसरे महायुद्ध में फ्रांस में जर्मन सत्ता के दौरान मित्रों-सहकर्मियों को खोने का अनुभव उसे दोबारा झेलना पड़ा जिससे उसके मानसिक संतुलन पर बुरा असर हुआ। उसकी अनेक कृतियाँ अधूरी ही रह गईं। वह अपने बहुस्तरीय, व्यापक लेखों को इकट्ठा नहीं कर सका। 1950 में मॉस का देहान्त हो गया। आगे वाली पीढ़ी के लिये उसने एक महत्वपूर्ण बौद्धिक विरासत छोड़ दी। विशेष तौर पर ब्रिटिश और फ्रांसीसी समाजशास्त्री और नृशास्त्री उसके विचारों से अत्यंत प्रभावित हुए।
बोध प्रश्न 2
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो पंक्तियों में लिखिए।
प) टोटम पर आधारित कुल के सदस्य दूसरे कुल में ही विवाह क्यों करते हैं?
पप) दर्खाइम के अनुसार समाज को क्यों पूजा जाता है?
पपप) दर्खाइम का कहना है कि धर्म और विज्ञान के बीच संघर्ष असंभव है। क्यों?
बोध प्रश्न 2 उत्तर
प) टोटम के सदस्य अपने आप को एक समान पूर्वज के वंशज मानते है। इसलिए खून का रिश्ता न होते हुए भी वे एक दूसरे से शादी नहीं कर सकते हैं।
पप) समाज व्यक्ति से पहले था और उसके जाने के बाद भी रहेगा। समाज व्यक्ति से ज्यादा शक्तिशाली और अमर है, अतः उसे पूजा जाता है।
पपप) दर्खाइम धर्म और विज्ञान दोनों को सामूहिक प्रतिनिधान मानता है। उसके अनुसार, विज्ञान का उद्गम धर्म से ही हुआ। व्यक्ति, प्रकृति और समाज को समझने के इन दोनों प्रयासों (विज्ञान और धर्म द्वारा) के बीच संघर्ष अंसभव है।
टोटमवाद का अध्ययन
जैसा कि पहले स्पष्ट किया गया है, दर्खाइम का यह मानना था कि जटिल धर्मों को समझने के लिये पहले सरलतम धर्मों को समझना आवश्यक है। उसके अनुसार टोटमवाद धर्म का सबसे सरल रूप है। मध्य आस्ट्रेलिया के आदिवासियों में यह धर्म प्रचलित है। इन समाजों के बारे में नृशास्त्रीय जानकारियाँ भरपूर मात्रा में उपलब्ध थीं। समाजशास्त्री और नृशास्त्री इनकी सामाजिक व्यवस्था को सरलतम मानते थे।
यह धर्म उन समाजों में पाया जाता है जिनमें सामाजिक व्यवस्था के आधार कुल (बसंद) हैं। कुल के सदस्य मानते हैं कि वे एक ही पूर्वज के वंशज है। यह पूर्वज या तो कोई प्राणी या वनस्पति हो सकता है अथवा कोई वस्तु । प्रतीक के रूप में इस पूर्वज को टोटम-वस्तु कहते हैं। इसी वस्तु से कुल अपना नाम और पहचान प्राप्त करता है। टोटम नाम मात्र नहीं, बल्कि एक चिन्ह है जो कि अक्सर उस कुल की विभिन्न वस्तुओं पर यहाँ तक कि लोगों के शरीर पर अंकित रहता है। इससे लौकिक वस्तुओं को विशेष महत्व मिलता है। वे पवित्र बन जाती हैं। टोटम वस्तु के संबंध में अनेक प्रतिबंध होते हैं। उसकी हत्या करना या उसे खाना मना है। उसे सम्मान का दर्जा दिया जाता है। कुल से संबंधित हर वस्तु टोटम से संबंद्ध होती है और टोटम का अंग मानी जाती है। खून का रिश्ता न होते हुए भी कुल के सदस्यों को एक ही वंश का माना जाता है, क्योंकि उनका नाम, और चिन्ह एक है। परिणामस्वरूप कुल से बाहर विवाह करना एक महत्वपूर्ण नियम होता है। इस प्रकार इन सरल समाजों में धर्म और सामाजिक व्यवस्था पूरी तरह से अंतर्संबंधित हैं।
टोटम वस्तु और उससे संबंधित अन्य वस्तुओं को पवित्र क्यों माना जाता है? दर्खाइम के अनुसार टोटम-प्राणी या वनस्पति को वास्तव में पूजा नहीं जाता है बल्कि एक ऐसी अमूर्त अदृश्य शक्ति की पूजा होती है जो हर भौतिक वस्तु में छिपी रहती है। इस शक्ति को अनेक नाम दिये गये हैं, जैसे कि समोआ में “माना‘‘ मेलनीशिया में “वाकान” और कुछ उत्तर अमरीकी जनजातियों में “ओरेंडा”। टोटम-वस्तु उस टोटम सिद्धांत का प्रतीक मात्र है जो कि स्वयं कुल ही है। कुल को अपना अस्तित्व प्रदान किया जाता है। टोटम वस्तु द्वारा उसे मूर्त रूप दिया जाता है। दर्खाइम के अनुसार “ईश्वर‘‘ की परिकल्पना समाज के दैवीकरण से उत्पन्न होती है। दूसरे शब्दों में “ईश्वर‘‘ की परिकल्पना द्वारा समाज को नया रूप दिया जाता है। समाज को क्यों पूजा जाता है? दर्खाइम का कहना है कि समाज व्यक्ति की अपेक्षा हर क्षेत्र में अधिक शक्तिशाली है। उसका स्वतंत्र अस्तित्व है और उसकी शक्ति के प्रति भय की भावना पैदा होती है। अतःउसकी सत्ता सम्मानीय होती है। उदाहरण के लिये जब युद्ध में किसी युवा ने राष्ट्रीय ध्वज को ऊँचा रखने के लिये अपनी जान न्यौछावर की तो कहा जाएगा कि उसने ध्वज के लिये नहीं बल्कि अपने राष्ट्र के लिये अपनी जान न्यौछावर की। ध्वज राष्ट्र का चिन्ह मात्र है।
समाज व्यक्तिगत चेतना द्वारा ही अभिव्यक्त होता है। समाज हमसे त्याग और समर्पण के आग्रह द्वारा हमारे अंदर की पवित्रता की भावना को बढ़ावा देता है। धार्मिक समारोहों और त्यौहारों के दौरान यह बात स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। कुल के सारे सदस्य धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। सामूहिक उत्तेजना और उत्साह की भावना पैदा होती है जिनसे सामाजिक बंधन और अधिक मजबूत बनते है और सामाजिक एकात्मकता को बढ़ावा मिलता है।
संक्षेप में कुल के सदस्य अपने समान पूर्वज को पूजते हैं। यह टोटम वस्तु का रूप लेता है, जिससे कुल को अपना नाम और विशिष्ट पहचान मिलती है। लेकिन दर्खाइम का मानना है कि वास्तव में स्वयं कुल की ही पूजा टोटम वस्तु के माध्यम से होती है। धर्म का वास्तविक अर्थ है समाज को दिव्य रूप देकर उसकी पूजा करना, क्योंकि उसे व्यक्तियों से अधिक शक्तिशाली माना जाता है व्यक्ति पर समाज भौतिक और नैतिक प्रतिबंध लगाता है। समाज को पूजने से उसके सदस्यों में एकात्मकता और उत्साह की भावना को बढ़ावा मिलता है जिससे वे सामूहिक जीवन और उसकी सामूहिक अभिव्यक्ति में भाग ले सकते हैं।
आदिम अथवा सरलतम धर्मों पर दर्खाइम ने अनेक रोचक और महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किये हैं। उसने इन विचारों का जटिल विचार प्रणालियों को समझने में किस प्रकार उपयोग किया? जैसा कि आपको मालूम है, आधुनिक युग में विज्ञान का तीव्र गति से विकास हुआ है। क्या धर्म और विज्ञान एक दूसरे से बिल्कुल विपरीत है? अगले उप-भाग में आइए देखें कि इस संबंध में दर्खाइम का मत क्या है।
सोचिए और करिए 1
भारत में प्रचलित किन्हीं दो धर्मों के पाँच विश्वासों एवं अनुष्ठानों की सूची बनाइए। अपनी सूची की तुलना अपने अध्ययन केंद्र के अन्य विद्यार्थियों की सूची से कीजिए।
Recent Posts
Question Tag Definition in english with examples upsc ssc ias state pcs exames important topic
Question Tag Definition • A question tag is a small question at the end of a…
Translation in english grammer in hindi examples Step of Translation (अनुवाद के चरण)
Translation 1. Step of Translation (अनुवाद के चरण) • मूल वाक्य का पता करना और उसकी…
Report Writing examples in english grammer How to Write Reports explain Exercise
Report Writing • How to Write Reports • Just as no definite rules can be laid down…
Letter writing ,types and their examples in english grammer upsc state pcs class 12 10th
Letter writing • Introduction • Letter writing is an intricate task as it demands meticulous attention, still…
विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक विशेषताएँ continents of the world and their countries in hindi features
continents of the world and their countries in hindi features विश्व के महाद्वीप की भौगोलिक…
भारत के वन्य जीव राष्ट्रीय उद्यान list in hin hindi IAS UPSC
भारत के वन्य जीव भारत में जलवायु की दृष्टि से काफी विविधता पाई जाती है,…