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सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 pdf क्या है | के प्रमुख प्रावधानों का वर्णन कीजिए Right to Information Act, 2005
Right to Information Act, 2005 in hindi सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 pdf क्या है | के प्रमुख प्रावधानों का वर्णन कीजिए ?
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information Act, 2005)
शासनिक एवं प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से भारत सरकार ने जून, 2005 में सूचना का अधिकार अधिनियम पारित किया। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनसहभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।
सूचना के अधिकार को संविधान की धारा 19(1) के तहत एक मूलभूत अधिकार का दर्जा दिया गया है। धारा 19(1) के तहत प्रत्येक नागरिक को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई है और उसे यह जानने का अधिकार भी है कि सरकार कैसे कार्य करती है, इसकी क्या भूमिका है, इसके क्या कार्य हैं आदि। प्रत्येक नागरिक कर (ज्ंग) का भुगतान करता है। अतः उसे यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके द्वारा कर के रूप में दी गई राशि का उपयोग कैसे किया जा रहा है।
सूचना का अधिकार अधिनियम प्रत्येक नागरिक को सरकार से प्रश्न पूछने का अधिकार देता है और इसमें टिप्पणियाँ, सारांश अथवा दस्तावेजों या अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियों या सामग्री के प्रमाणित नमूनों की मांग की जा सकती है।
आरटीआई अधिनियम पूरे भारत (जम्मू-कश्मीर को छोड़कर) में लागू है। इसमें सरकार की अधिसूचना के तहत आने वाले सभी निकाय शामिल हैं तथा ऐसे गैर सरकारी संगठन भी शामिल हैं जिनका स्वामित्व, नियंत्रण अथवा आंशिक निधिकरण सरकार द्वारा किया गया है।
सूचना (प्दवितउंजपवद)ः सूचना के अधिकार के अंतर्गत सूचना से तात्पर्य ऐसी सामग्री से है जिसके अंतर्गत किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में धारित अभिलेख, दस्तावेज, ज्ञापन, ई-मेल, मत, सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, आदेश, लॉगबुक, संविदा, रिपोर्ट, कागजपत्र, नमूने, मॉडल और आँकड़े सम्बन्धी सामग्री सम्मिलित हों। साथ ही, किसी प्राइवेट निकाय से संबंधित ऐसी सूचना भी सम्मिलित है, जिस तक विधि के अधीन किसी लोक प्राधिकारी की पहुँच हो सकती है।
अधिकार (Right)ः सूचना के अधिकार के अंतर्गत निम्नलिखित अधिकार सम्मिलित है-
ऽ दस्तावजों एवं अभिलेखों का निरीक्षण।
ऽ दस्तावजों या अभिलेखों की प्रमाणित प्रतिलिपि लेना।
ऽ सामग्री के प्रमाणित नमूने लेना।
ऽ पलॉपी डिस्क, टेप, विडियो कैसेट के रूप में या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक रीति में प्रिंट आउट लेना।
सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत निम्नांकित सूचना को प्रकट नहीं करने की छूट दी गयी है-
ऽ सूचना जिसके प्रकटन से भारत की प्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, रणनीति, वैज्ञानिक या आर्थिक हित, विदेश से संबंध पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो या किसी अपराध को प्रोत्साहन मिलता हो।
ऽ सूचना जिसके प्रकटन से किसी न्यायालय की अवमानना हो।
ऽ सूचना जिसके प्रकटन से संसद या किसी राज्य के विधानमंडल के विशेषाधिकार भंग हो सकते हों।
ऽ सूचना जिसमें वाणिज्यिक विश्वास, व्यापार गोपनीयता या बौद्धिक सम्पदा सम्मिलित है, के प्रकटन से किसी तीसरे पक्षकार की प्रतियोगी स्थिति को नुकसान होता हो।
ऽ किसी विदेशी सरकार से विश्वास में प्राप्त सूचना।
ऽ सूचना जिसके प्रकटन से किसी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा के लिए खतरा हो।
ऽ सूचना जिसके प्रकटन से अन्वेषण या अपराधियों को गिरफ्तार करने या अभियोजन की क्रिया में अड़चन आये।
ऽ मंत्रिमंडल के कागज-पत्र जिसमें मंत्रीपरिषद् के सचिवों और अन्य अधिकारियों के विचार-विमर्श के अभिलेख सम्मिलित है।
ऽ इसके अतिरिक्त व्यक्तिगत सूचना, जिसके प्रकटन का किसी लोक क्रियाकलाप या हित से संबंध नहीं है।
सूचना प्राप्ति के लिए अनुरोध (Request for obtaining Information)
सूचना के अधिकार अधिनियम के अधीन सभी नागरिकों को सूचना का अधिकार होगी। निम्नांकित उपायों द्वारा कोई व्यक्ति सूचना प्राप्ति हेतु अनुरोध कर सकता है-
ऽ लिखित रूप में या इलेक्ट्रॉनिक युक्ति के माध्यम से अंग्रेजी या हिंदी में या क्षेत्र की राजभाषा में जिसमें आवेदन किया जा रहा होय ऐसी फीस के साथ जो केंद्रीय या राज्य लोक सूचना अधिकारी द्वारा विहित किया जाये।
अनुरोधांे का निपटारा (Disposal of Request)
किसी भी दशा में सूचना की प्राप्ति फोस सदीय के तीस दिन के भीतर उपलब्ध करायी जाएगी परन्तु जहाँ मांगी गयी सूचना का संबंध किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से है, वहाँ वह अनुरोध प्राप्त होने के अड़तालीस घंटे के भीतर उपलब्ध करायी जाएगी। गरीबी रेखा से नीचे के व्यक्तियों के लिए कोई फीस प्रभारित नहीं की जाएगी। जहाँ कोई लोक प्राधिकारी समय सीमा का अनुपालन करने में असफल रहता है, वहाँ सूचना के लिए अनुरोध करने वाले व्यक्ति को प्रभार के बिना सूचना उपलब्ध करायी जाएगी।
सूचना के अधिकार कानून का उद्देश्य (Objectives of RTI Act)
ऽ लोक प्राधिकारी के क्रियाकलापों में पारदर्शिता लाना और उत्तरदायित्व बढ़ाना।
ऽ लोक प्राधिकारियों के नियंत्रण या उसके अधीन उपलब्ध सूचना तक आम लोगों की पहुँच सुनिश्चित करना।
ऽ नागरिकों के सूचना के अधिकार की व्यावहारिक पद्धति स्थापित करना।
ऽ एक केन्द्रीय सूचना आयोग तथा राज्य सूचना आयोग का गठन करनाय और
ऽ उनसे संबंधित या उनसे जुड़े विषयों का उपबंध करना।
स्वरूपः तीन स्तरीय
ऽ केन्द्रीय या राज्य सूचना आयोग। ऽ प्रथम अपीलीय अधिकारी। ऽ लोक सूचना अधिकारी।
केन्द्रीय सूचना आयोग (ब्मदजतंस प्दवितउंजपवद ब्वउउपेेेपवद)
सूचना के अधिकार के कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय सूचना आयोग को लाया गया है। आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्त (दस से अधिक नहीं) होते हैं। यह प्रावधान है कि मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की सिफारिश पर की जाएगी। समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे-
ऽ प्रधानमंत्री, जो समिति का अध्यक्ष होगाय
ऽ लोकसभा में विपक्ष का नेताय और
ऽ प्रधानमंत्री द्वारा नामनिर्दिष्ट संघ मंत्रिमंडल का एक मंत्री।
मुख्य सूचना आयुक्त विधि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जनमाध्यम या प्रशासन तथा शासन का व्यापक ज्ञान और अनुभव रखने वाले जनजीवन में प्रख्यात व्यक्ति होंगे।
मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त, संसद का सदस्य या किसी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र के विधान मंडल का सदस्य नहीं होगा या अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा या किसी राजनैतिक दल से सम्बद्ध नहीं होगा अथवा कोई कारोबार या वृत्ति नहीं करेगा।
केंद्रीय सूचना आयोग का मुख्यालय दिल्ली में होगा और आयोग अपना कार्यालय केंद्रीय सरकार के पर्व अनमोदन से भारत के अन्य स्थानों में भी स्थापित कर सकेगा
पदावधि और सेवा शर्ते
(Terms of office and condition or service)
मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त पाँच वर्ष की अवधि या पैसेंठ वर्ष की आयु तक (जो भी पहले हो) पद धारण करेगा और पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा। सूचना आयुक्त मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र होगा लेकिन उसकी पदावधि सूचना आयुक्त और मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में कुल मिलाकर पाँच वर्ष से अधिक नहीं होगी। मुख्य सूचना आयुक्त और अन्य सूचना आयुक्त राष्ट्रपति या उनके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति को समक्ष शपथ लेते हैं। मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त किसी भी समय राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकते हैं। मुख्य सूचना आयुक्त के वेतन भत्ते एवं सेवा शर्ते वहीं होंगे जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त के हैं। सूचना आयुक्त के वेतन भत्ते एवं सेवा-शर्ते वही होंगें जो निर्वाचन आयुक्त के हैं। मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के वेतन भत्तों और सेवा की अन्य शर्तो मंे उनकी नियुक्ति के पश्चात् अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त को हटाया जाना
(Removal of Chief Information Commissioner or Information Commissioner)
राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट के आधार पर साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त को पद से हटाया जा सकता है। इसके अलावा निम्नांकित परिस्थितियों में भी इन्हें राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाया जा सकता है-
ऽ दिवालिया होने पर
ऽ अपराध के लिए दोषसिद्ध होने पर
ऽ पदावधि के दौरान कहीं और वैतनिक नियोजन में लगे होने पर
ऽ मानसिक एवं शारीरिक रूप से अक्षम होने पर
ऽ भारत सरकार द्वारा या उसकी ओर से की गयी किसी संविदा या करारं से सम्बद्ध होने पर।
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