इनमें विभेद करें – (क) बीजपत्राधार और बीजपत्रोपरिक , (ख) प्रांकुर चोल और मूलांकुर चोल , (ग) अध्यावरण तथा बीजचोल

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प्रश्न . इनमें विभेद करें –

(क) बीजपत्राधार और बीजपत्रोपरिक

(ख) प्रांकुर चोल और मूलांकुर चोल

(ग) अध्यावरण तथा बीजचोल

(घ) परिश्रूणपोष एवं फलभित्ति

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उत्तर:
(क) बीजपत्राधार और बीजपत्रोपरिक में अन्तर (Differences between Hypocotyl and Epicotyl) निम्नलिखित है –
:-

बीजपत्राधार (Hypocotyl)

1.   भ्रूण के बीजाक्ष (tigellum) का वह हिस्सा जो बीजपत्र और मूलांकुर के बीच में स्थित होता है उसे बीजपत्राधार कहते है।
2.   बीज के अंकुरण के समय बीजपत्राधार में तीव्र वृद्धि होती है जिसके कारण बीजपत्र मृदा से ऊपर आ जाते हैं | बीजपत्राधार के कुछ उदाहरण – अरण्डी , सेम आदि में बीजपत्राधार पाया जाता है |

बीजपत्रोपरिक (Epicotyl)

1.   भ्रूण के बीजाक्ष का वह हिस्सा जो बीजपत्र तथा प्रांकुर के बीच में स्थित होता है उसे बीजपत्रोपरिक कहते है।
2.   बीज के अंकुरण के समय बीजपत्रोपरिक में तीव्र वृद्धि होती है जिसके कारण बीजपत्र मृदा में ही रह जाते हैं बीजपत्रोपरिक के कुछ उदाहरण – चना, मक्का आदि में पाया जाता है।

(ख) प्रांकुर चोल तथा मूलांकुर चोल में अन्तर (Differences between Coleoptile and Coleorhiza) निम्नलिखित है –

प्रांकुर चोल (Coleoptile)

1.     एकबीजपत्रीय भ्रूणीय अक्ष से बीजपत्र (स्कुटेलम) के जुड़ाव स्थल से ऊपर , भ्रूणीय अक्ष का बीजपत्रोपरिक (epicotyl) और प्ररोह शीर्ष कुछ आद्यपर्णों (primitive leaves) से आवृत होता है। यह खोखली पर्णीय संरचना होती है। इसे प्रांकुर चोल (coleoptile) कहा जाता हैं।
2.     यह प्रांकुर की सुरक्षा करता है। अर्थात इसका कार्य प्रांकुर की सुरक्षा करना भी होता है |

मूलांकुर चोल (Coleorrhiza)

1.     एकबीजपत्रीय भ्रूणीय अक्ष से बीजपत्र (स्कुटेलम) के जुड़ाव स्थल से नीचे ,  भ्रूणीय अक्ष का बीजपत्राधार तथा मूलांकुर शीर्ष अविभेदित आवरण से आवृत होता है। इसे मूलांकुर चोल (coleorrhiza) कहा जाता हैं।
2.     यह मूलांकुर की सुरक्षा करता है। अर्थात इसका कार्य मूलांकुर की रक्षा करना होता है |

(ग) अध्यावरण तथा बीजचोल में अन्तर (Difference between Integument and Testa) निम्नलिखित है –

अध्यावरण (Integument)

बीजाण्ड (ovule) बीजाण्डद्वार (micropyle) को छोड़कर चारों ओर से एक या दो रक्षात्मक आवरण से घिरा होता है। इसे अध्यावरण कहा जाता हैं। यह बीजाण्ड की सुरक्षा करता है। अर्थात इसका कार्य बीजांड की सुरक्षा करना भी होता है | अध्यावरण निषेचन के बाद बीजचोल में परिवर्तित हो जाता है।

बीजचोल (Testa)

बीज चारों ओर से बीजावरण (seed coat) से घिरा होता है। यह सामान्यतया दो पतों से बना होता है-बाह्य आवरण दृढ़ एवं रक्षात्मक होता है , इसे बीजचोल (testa) कहा जाता हैं। आन्तरिक स्तर पतला होता है , इसे अन्तःकवच (tegmen) भी कहा जाता हैं।

(घ) परिभूणपोष एवं फलभित्ति में अन्तर (Difference between Perisperm and Pericarp) निम्नलिखित है –

परिभ्रूणपोष (Perisperm)

कुछ बीजों में बीजाण्ड का बीजाण्डकाय (nucellus) एक पतले आवरण के रूप में बचा रह जाता है , इसे परिभ्रूणपोष कहा जाता हैं , इकसे कुछ उदाहरण कुमुदिनी, काली मिर्च, चुकन्दर आदि है , अर्थात यह इनमे पाया जाता है।

फलभित्ति (Pericarp)

निषेचन के बाद अण्डाशय से फलभित्ति (pericarp) का निर्माण होता है। बीज और फलभित्ति को सम्मिलित रूप से मिलाकर फल कहते हैं। शुष्क फलों में फलभित्ति सामान्यतया शुष्क और एक पर्त से बनी होती है, जबकि सरस फलों में यह मांसल तथा तीन पतों से बनी हुई होती है।

इस प्रकार हम (क) बीजपत्राधार और बीजपत्रोपरिक , (ख) प्रांकुर चोल और मूलांकुर चोल , (ग) अध्यावरण तथा बीजचोल , इनमे अंतर के बारे में पढ़ चुके है , उम्मीद होगी आपको उत्तर से मदद मिली होगी |

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