अण्डजनन क्या है ? अण्डजनन की संक्षिप्त व्याख्या करें। what is oogenesis give a brief account of oogenesis

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प्रश्न 12. अण्डजनन क्या है ? अण्डजनन की संक्षिप्त व्याख्या करें। (what is oogenesis give a brief account of oogenesis in hindi)

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उत्तर : अण्डजनन (Oogenesis) – अण्डाशय में द्विगुणित अण्ड मातृ कोशिकाओं से अगुणित अण्ड का निर्माण को अण्डजनन कहते है। अण्डजनन का प्रारम्भ तभी हो जाता है जब स्त्री / मादा अपनी माँ के गर्भ के अन्दर होती है , परन्तु प्रक्रिया किशोरावस्था तक निलम्बित अवस्था में चलती रहती है।
अण्डजनन प्रक्रिया अण्डाशय की ग्राफियन पुटिका (Graafian follicle) में होने वाली प्रक्रिया है। इसके द्वारा अण्डाणु (ovum) का निर्माण होता है। अण्डजनन पीयूष ग्रन्थि से स्रावित पुटिका प्रेरक हॉर्मोन (FSH) और LH के नियन्त्रण में होता है। स्त्री या मादा में हॉर्मोन के प्रभाव से प्रतिमाह एक ग्राफियन पुटिका परिपक्व होती है।
अण्डजनन प्रक्रिया को तीन चरणों में बाँटा जा सकता है जो निम्नलिखित है –
(क) गुणन प्रावस्था (Multiplication phase) – यह प्रावस्था स्त्री में जन्म से पूर्व अर्थात् भ्रूण अवस्था में ही पूर्ण हो जाती है। अण्डाशय के निर्माण के समय ही प्राथमिक जनन कोशिकाएँ अण्डाशयी पुटिकाओं (ovarian follicles) के रूप में इकट्टा हो जाती हैं। इनमें से एक कोशिका अण्डाणु मात कोशिका (egg mother cell) के रूप में विभेदित हो जाती है। शिशु जन्म के समय ही सारी अण्डाशयी पुटिकाएँ उपस्थित होती हैं। अर्थात जब शिशु का जन्म होता है उस समय उसमें सभी अण्डाशयी पुटिकाएँ पायी जाती है |

(ख) वृद्धि प्रावस्था (Growth phase) – वृद्धि प्रावस्था बहुत लम्बी होती है। भ्रूण अवस्था में ही यह प्रारम्भ तो हो जाती है एवं लैंगिक परिपक्वन के बाद जब तक उस पुटिका विशेष के परिपक्व होने की अवस्था नहीं आती, तब तक यह वृद्धि प्रावस्था में बनी रहती है।
अण्डाणु मातृ कोशिका अण्डाणुजन कोशिका अथवा ऊगोनियम (oogonium) में विभेदित होकर वृद्धि प्रावस्था में प्रवेश कर जाती है। यह बहुत अधिक मात्रा में पोषक पदार्थ संचित करती है और सामान्य कोशिका से आकार में कई सौ गुना बढ़ जाती है। इसी अवस्था में यह ग्राफियन पुटिका के परिपक्व होने तक बनी रहती है। अब इसे पूर्व अंडाणु कोशिका अथवा प्राथमिक ऊसाइट (primary oocyte) कहा जाता है।
(ग) परिपक्वन प्रावस्था (Maturation phase) – जब ग्राफियन पुटिका परिपक्व हो जाती है, तब उसमें उपस्थित प्राथमिक ऊसाइट में प्रथम अर्द्धसूत्री विभाजन संपन्न होता है। यह विभाजन असमान होता है तथा केवल गुणसूत्रों की संख्या आधी करने के लिए ही होता है। प्रथम अर्द्धसूत्री विभाजन के पश्चात् एक अगुणित द्वितीयक ऊसाइट या द्वितीयक अण्डाणु कोशिका (secondary oocyte) और एक अगुणित लोपिका अथवा ध्रुवीय पिण्ड (polar body) बनती है। इसी अवस्था में ग्राफियन पुटिका फटकर अण्डाशय से द्वितीयक अण्डाणु कोशिका को मुक्त कर देती है।
अण्डाणु में द्वितीय अर्द्धसूत्री विभाजन शुक्राणु के अण्डाणु में प्रवेश के बाद होता है। इसके फलस्वरूप अण्डाणु (ovum) और द्वितीय अगुणित लोपिका (ध्रुवीय पिण्ड) का निर्माण हो जाता है। अण्डजनन निरन्तर अन्तराल पर होने वाली एक लम्बी व जटिल प्रक्रिया होती है।

अंडजनन की प्रक्रिया को निम्न चित्र द्वारा समझा जा सकता है –

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