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prosthetic group in hindi , प्रोस्थेटिक समूह किसे कहतें हैं सह एन्जाइम (Co Enzyme) की परिभाषा क्या है

जानिये prosthetic group in hindi , प्रोस्थेटिक समूह किसे कहतें हैं सह एन्जाइम (Co Enzyme) की परिभाषा क्या है ?

1. प्रोस्थेटिक समूह (Prosthetic Group)
ये कार्बनिक यौगिक है जो कि स्थायी रूप से एपोएन्जाइम से लगे रहते हैं। उदाहरणाथ पेरोक्सीडेज व केटेलज (Peroxidase and Catalase), हाइड्रोजन परऑक्साइड (H2O2) की जल व ऑक्सीजन में बदलता है। इन एन्जाइमों में हीम (heme) स्थायी प्रोस्थेटिक समूह है जो एपोएन्जाइम से जुड़ा रहता है।
2. सह एन्जाइम (Co Enzyme)
ये भी कार्बनिक यौगिक है परन्तु ये एपोन्जाइम से अस्थायी रूप से जुड़े रहते हैं। उत्प्रेरण के समय ये एपोएन्जाइम से हल्के बंध से या सहसंयोजक बंध से बंध जाता है। यह ही सह एन्जाइम विभिनन अभिक्रियाओं में सहकारक का कार्य कर सकते हैं। सह एन्जाइम केवल सबस्ट्रेट को जोड़ने में ही नहीं बल्कि अभिक्रिया के उत्पादों के अस्थायी ग्राही के रूप में भी कार्य करते हैं। अधिकांश सह एन्जाइमों में विटामिन उनके मुख्य रासायनिक भाग होते हैं।
उदाहरणार्थ- निकोटिन एमिड एडीनिन डाइन्यूक्लिो टाइड (NAD) व निकोटिन एमिड एडीनिन डाइन्यूक्लिओटाइड फॉस्फेट (NADP) में विटामिन निएसिन (Niacin) होता है। सह एन्जाइम में पेन्टोथेनिक (Pantothenic) अम्ल पाया जाता है। फ्लेविन एडीनिन डाइ न्यूक्लिओटाइड (FAD) में राइबोफ्लेविन विटामिन (विटामिन B ) पाया जाता है। थाइमिन पाइरोफॉस्फेट में थाइएमिन (विटामिन B2) विटामिन पाया जाता है।
3. धातु आयन (Metaol Ions)
कुछ एपोएन्जाइमों को कार्य करने के लिये धातु आयनों की आवश्यकता होती है। ये एन्जाइम को विशिष्ट सक्रिय स्थल से सहसंयोजक बंध बना लेता है और साथ ही साथ सबस्ट्रेट के साथ भी एक या अधिक बंध बना लेता है। ये सहसंयोजक बंध सबस्ट्रेट के उन बंधों के ध्रुवीकरण (Polarissation) में सहायता करते हैं जिसे एन्जाइम अपनी क्रिया कर तोड़ता है।
उदाहरणार्थ- जिंक, कार्बोक्सिपेप्टिडेज एन्जाइम का सहकारक है। यह दो हिस्टिडिनस श्रृंखला पर व एक ग्लूटेमिक अम्ल पर जहाँ सक्रिय केन्द्र होते हैं, सहसंयोजक बन्ध बनाता है।
सम- एन्जाइम (Iso Enzymes )
ऐसे कई एन्जाइम पाये जाते हैं जो एक ही रासायनिक अभिक्रिया को उत्प्रेरित करते हैं। ये एन्जाइम भौतिक रूप से भिन्न होते हैं लेकिन उनकी उत्प्रेरक सक्रियता (Catalytic Activity) समान होती है। ऐसे एन्जाइमों के सूह को सम एन्जाइम ( Isoenzyme ) कहते हैं। सम-एन्जाइमों की आण्विक संरचना भिन्न होती है पर उत्प्रेरक अभिक्रिया समान प्रकार से करते हैं। लगभग 100 से भी अधिक सम एन्ज़ाइम ज्ञात है।
सबसे अधिक सम एन्जाइम जिस पर अनुसंधान हुआ है वह है लेक्टिक डी हाइड्रोजीनेज (Lactic de hydrogenase)। यह सम-एन्जाइम पाइरूविक अम्ल (Pyruvic Acid) के लेक्टिक अम्ल में परिवर्तन में उत्प्रेरक का कार्य करता है।
लेक्टेट पाइरूवेट
चूहों व अन्य स्तनधारियों में से लेक्टिक डी हाइड्रोजीनेज के पांच प्रकार ज्ञात कीये गये हैं। इनका आ भार लगभग 134000 होता है तथा पोलीपेप्टाइड श्रृंखला में लगभग 33,500 अमीनों अम्ल प्रत्येक में होते हैं। ये सभी एक ही प्रकार की अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करने का कार्य करते हैं। ये सभी चार पोलीपेप्टाइड श्रृंखला के बने होते हैं तथा ये श्रृंखलाये दो प्रकार की होती हैं जिन्हें M व H उप इकाई कहते हैं। चूहों की कंकाल पेशियों में जो समएन्जाइम पाया जाता है उसमें 4 पोलीपेप्टाइड श्रृंखलायें M प्रकार की होती है। हृदय पेशियों में चारों श्रृंखलायें H प्रकार की होती है। दूसरे प्रकार के एन्जाइम में तीन श्रृंखला H व एक M प्रकार की पाई जाती है व एक HM पोलीपेप्टाइड श्रृंखलायें पाई जाती है। जबकि अन्य में 24 व 2M प्रकार की श्रृंखलायं पाई जाती हैं। इन्हें निम्न प्रकार से नामांकित करते हैं।
1. M4 or MMMM 2. M3H or MMMH 3. M2H2 or MMHH 4. MH3 or MHHH 5. M4 or HHHH
M4 समएन्जाइम प्रमुख रूप से भ्रूण ऊत्तकों व कंकाल पेशियों में पाया जाता है। इसमें Km कम व Vmax अधिक होता है। यह सम एन्जाइम कम ऑक्सीजन की उपस्थिति के लिये अनुकूल होता है। तथा ग्लूकोज का लैक्टिक अम्ल में परिवर्तन में भाग लेता है।
जबकि H4 सम एन्जाइम हृदय पेशियों में पाया जाता है। इस समएन्जाइम में Km अधिक व Vmax कम होता है। यह पाइरुवेट को CO2 व H2O में परिवर्तित करता है।
सम एन्जाइम आमतौर पर कशेरूकियों के ऊत्तक व सीरम में पाये जाते हैं। यह कीटों, पौधों व एककोशीय जीवों में भी पाये जाते हैं। हाइड्रोजीनेज (Hydrogenases), ऑक्सीडेज (Oxidases), ट्रान्सएमीनेजे (Transsaminases), फॉस्फटेजे (Phosphatases), ट्रान्स फॉस्फोरीलेजे (trans sphorphorylases) व प्रोटीओलाइटिक (Proteolytic) एन्जाइम के सम एन्जाइम्स ज्ञात है। विभिन्न प्रकार के ऊत्तको में विभिन्न प्रकार के सम एन्जाइम पाये जाते हैं व ये सम एन्जाइम उत्प्रेरण अभिक्रिया समान प्रकार से करते हैं।
एक डीहाइड्रोजीनेज कम एन्जाइम का विश्लेषण करने के बाद पाया गया कि यह निम्न प्रकर का बना होता है।
1. अपचयित पदार्थ (लेक्टेट)
2. सम एन्जाइम (NAD)
3. आक्सीकृत रंजक
4. आयन संवहन करने वाला पदार्थ (फीनेजिन मीथो सल्फेट) [PMS]
5. बफर (सक्रिय करने वाले आयन)
सम एन्जाइ दो प्रकार के पाये जाते हैं।
1. समजात सम एन्जाइम व
2. समवृत्ति सम एन्जाइम
1. समजात सम एन्जाइम (Homologous Iso enzymes): सभी सम एन्जाइम जिनकी आणवि संरचना व उत्प्रेरक अभिक्रियाओं में समानता होती है, उन्हें समजात सम एन्जाइम कहते हैं। समजात सम एन्जाइम का सबसे अच्छा उदाहरण साइटोक्रोम C (Cytochrome C) है।
2. समवृत्ति सम एन्जाइम (Analogous Iso Enzymes) : वे सम एन्जाइम जिनमें आण्विक संरचना भिन्न होती है लेकिन उत्प्रेरक अभिक्रियाएँ समान प्रकार से करते हैं उन्हें समवृत्त एन्जाइम कहते हैं ।
सम एन्जाइमों द्वारा हम जीवों में अणुवंशिक संबंध का पता लग सकता है। एन्जाइम में अमीनों अम्लों का श्रृंखला में पाया जाना DNA पर निर्भर करता है। अतः सम एन्जाइम में पाई जाने वाली समानता द्वारा DNA में पायी जाने वाली समानता को ज्ञात किया जा सकता है।

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