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phase rule in hindi in chemistry प्रावस्था नियम क्या है प्रावस्था नियम के अनुप्रयोग
प्रावस्था नियम क्या है प्रावस्था नियम के अनुप्रयोग लिखिए phase rule in hindi in chemistry ?
अध्याय प्रावस्था साम्य (PHASE EQUILIBRIUM)
विषय प्रवेश (Introduction)
किसी विषमांगी तंत्र (Heterogeneous system) की साम्यावस्था पर विभिन्न चरांकों (Variables) जैसे ताप, दाब और संघटन आदि के प्रभाव के अध्ययन के लिये विभिन्न नियमों की आवश्यकता होती है। यद्यपि कुछ विषंमागी साम्यों जैसे ठोस, द्रव एवं गैस की एक दूसरे में विलेयता, संक्रमण (transition). वितरण (distribution) आदि का अध्ययन हेनरी का नियम, राउल का नियम एवं वितरण का नियम आदि द्वारा किया जाता है। परन्तु जे. डब्यू. गिब्स (J. W. Gibbs) द्वारा 1876 में व्युत्पन्न प्रावस्था नियम (Phase-Rule) इस प्रकार के प्रत्येक विषमांगी साम्य के अध्ययन के लिये उपयोगी हैं इस नियम का महत्व इसलिये और भी बढ़ जाता है कि इसे ऊष्मागतिकी द्वारा व्युत्पन्न किया गया है, तथा पदार्थ की प्रकृति के बारे में किसी परिकल्पना का आश्रय नहीं लिया गया है। इस नियम द्वारा किसी तंत्र का अध्ययन करने में पदार्थ की आण्विक जटिलताओं की ओर ध्यान देना आवश्यक नहीं है। यह नियम भौतिक एवं रासायनिक दोनों प्रकार के विषमांगी साम्यों के लिये उपयोगी है।
प्रावस्था नियम (Phase Rule)
प्रावस्था नियम का गणितीय रूप निम्नलिखित समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है-
F = C – P + 2………………..(1)
यहाँ F विषमांगी तंत्र की स्वातंत्र कोटियाँ (Degrees of Freedom), P प्रावस्थाओं की संख्या (Number of Phases) तथा C घटकों की संख्या (Number of Components) हैं। शब्दों में इस नियम को इस प्रकार लिखा जा सकता है-
किसी विषमांगी तंत्र की साम्यवस्था में स्वातंत्र कोटियों की संख्या का मान उस तंत्र के घटकों तथा प्रावस्था के अन्तर से दो अधिक होता है।
प्रावस्था नियम से संबद्ध पदों की व्याख्या (Explanation of the terms used in Phase Rule)
प्रावस्था नियम के कथन में प्रावस्था (Phase) घटक (Component) तथा स्वातंत्र कोटि (Degree of freedom) पदों का उपयोग किया गया है। प्रावस्था नियम के अध्ययन से पूर्व इन पदों का अर्थ भलीभाँति समझ लेना आवश्यक हैं।
प्रावस्था (Phase)
विषमांगी तंत्र के वे भाग जो कि भौतिक रूप से सुस्पष्ट, यांत्रिक विधियों द्वारा पृथक किया जाने योग्य तथा अपने संघटन में समान (uniform ) हों, प्रावस्था कहलाते हैं। प्रत्येक प्रावस्था के मध्य एक निश्चित सीमा (boundary) होती है। यह सीमा अन्तरापृष्ठ (interface) कहलाती है। एक बीकर में रखे कार्बन टेट्रा क्लोराइड तथा जल से बने विषमांगी तंत्र में दो प्रावस्थायें है, दोनों ही द्रव भौतिक रूप में सुस्पष्ट हैं, एवं यांत्रिक विधि (पृथककारीकीप) द्वारा अलग किये जा सक है तथा अपने आप में समान है। इस प्रकार अमिश्रणीय द्रवों से बने तंत्र में द्रवों की संख्या के ही प्रावस्था होती है। घुलनशील द्रव केवल एक ही प्रावस्था बनाते हैं। यदि दोनों ही परिस्थितियां में ध्यान रखा जाये तो एक प्रावस्था और बढ़ जाती है।
प्रत्येक ठोस अलग-अलग प्रावस्था बनाते हैं, जबकि ठोस विलयन (solid solution ) एक ही प्रावस्थ बनाता है। कैल्सियम कार्बोनेट के तापीय अपघटन के रासायनिक साम्य
CaCO3(s) ====== CaO (s) + CO2 (g)
में तीन प्रावस्थाऐं हैं, जिनमें दो ठोस (CaCO3 तथा CaO) व एक गैस (CO2) है।
जल तंत्र को निम्न प्रकार लिखा जाता है।
H2O (s) ===> H2O(I) => H2O(g)
बर्फ जल वाष्प
तंत्र में ठोस, द्रव तथा गैस (वाष्प) तीन प्रावस्था हैं।
गैसे एक दूसरे में पूर्णतया मिश्रणीय होती है, अतः गैसों का मिश्रण एक ही प्रावस्था बनाता है। उदाहरण के लिये वायु अनेक गैसों (O2. N2. CO2, जलवाष्प तथा अन्य उत्कृष्ट गैसों) का मिश्रण है अत प्रावस्था एक ही है। गैसों के मध्य कोई सीमा (interface) नहीं होती है। अतः गैसीय तंत्र समांगी तंत्र (homogeneous system) कहलाते हैं।
विषमांगी साम्य की अवस्था में प्रावस्था का ताप, दाब व संघटन स्थिर रहता है। अर्थात् ऊर्जा और द्रव्य एक प्रावस्था से दूसरी प्रावस्था में स्थानान्तरित नहीं होते है।
घटक (Component )
किसी विषमांगी तंत्र की साम्यवस्था पर घटकों की संख्या स्वतंत्र रूप से परिवर्ती अवयवों की वह न्यूनतम संख्या है, जिनकी सहायता से प्रत्येक प्रावस्था के संघटन को रासायनिक समीकरण के रूप में व्यक्त किया जा सके। घटक के अर्थ को स्पष्ट रूप से समझने के लिये निम्न लिखित उदाहरणों को ध्यान पूर्वक देखिये ।
(a) बर्फ जल वाष्प तंत्र –
H2O(s) ====== H2O(I) = > H2O(g)
इस तंत्र की साम्यवस्था में तीन प्रावस्थाएं हैं, बर्फ (ठोस), जल (द्रव), व वाष्प (गैस)। प्रत्येक प्रावस्था का संघटन, H2O द्वारा रासायनिक समीकरण के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
इस प्रकार जल तंत्र एक घटक तंत्र हैं।
(b) ठोस अमोनियम क्लोराइड को जब किसी बन्द पात्र में गर्म किया जाता है तो निम्नलिखित
विषमांगी साम्य प्राप्त होता है-
NH4Cl (s) ——— NH4C1 (g) NH3 (g) + HCl (g)
इन तंत्र में दो प्रावस्थाएं हैं, ठोस NH4 CI तथा गैसीय NH3 व HCI का मिश्रण अथवा NH4Cl(g) | यद्यपि तंत्र में तीन अवयव है, परन्तु दोनों प्रावस्थाओं का संघटन केवल एक ही अवयव NH4CI द्वारा व्यक्त किया जा सकता है क्योंकि HCI तथा NH3 समअणुक अनुपात में हैं।
उदाहरणार्थ : माना कि NH3 के मोल व HCI के (x + y) मोल लेकर क्रिया कराते है तो तन्त्र के दो घटक हो जायेगें NH3 व HCI जिससे दोनों प्रावस्थाओं
इस प्रकार यह तंत्र एक घटक तंत्र कहलाता है। यदि NH4 (8) अथवा HCl (g) की कुछ अतिरिक्त मात्रा उपरोक्त साम्य में मिला दी जाये तो केवल NH3 (g) गैसीय प्रावस्था के संघटन को व्यक्त नहीं कर पायेगा तथा एक अवयव की आवश्यकता और होगी। इस स्थिति में घटकों की संख्या दो होगी। (c) ठोस कैल्सियम कार्बोनेट- को बन्द पात्र में गर्म करने पर निम्नलिखित विषमांगी साम्य स्थापित होता है।
CaCO3 (s) = CaO (s) + CO2 (8)
इस तंत्र में तीन प्रावस्थाऐं; दो ठोस CaCO3 (s), CaO (s) तथा एक गैस CO2 (8) हैं। यद्यपि तंत्र में तीन अवयव हैं परन्तु तीनों अवयव स्वतंत्र रूप से नहीं है। इनमें से कोई दो स्वतंत्र रूप से परिवर्तित हो सकते हैं। अतः तीनों अवयवों में से किन्ही दो (CaCO3. CaO या CaO, CO2 या CaCO3.CO2) का तीनों प्रावस्थाओं के संघटन को व्यक्त करने के लिये चयन किया जा सकता है। इस प्रकार घटकों की संख्या दो होगी जो कि निम्न समीकरण से स्पष्ट है-
(i) जब CaCO3 तथा CaO को घटकों के रूप में लिया जाता है।
प्रावस्था घटक
CaCO3 (s) = CaCO3 + 0 CO
CaO(s) = CaCO 3 – CO2
CO2 (g) = CaCO 3 + CO2
इस प्रकार न्यूनतम अवयवों की संख्या दो है जिनके रूप में प्रत्येक प्रावस्था का संघटन ज्ञात किया जा सकता है। अतः तंत्र में घटकों की संख्या दो हैं ।
(d) सोडियम सल्फेट-जल तंत्र में विभिन्न प्रावस्थाएँ जैसे कि Na2SO4.7H2O . Na2SO4 10H2O Na2SO4 विलयन, बर्फ तथा वाष्प हो सकती है। इस प्रत्येक प्रावस्था के संघटन को. Na2So4 तथा H2O पदों में प्रदर्शित किया जा सकता है अतः तंत्र में घटकों की संख्या दो है।
इसी प्रकार से निम्नलिखित साम्य-
CuSO4. 5H2O (s) ====== CuSO4. 3H2O(s) + 2H2O(g)
में भी बताया जा सकता है कि घटकों की संख्या दो होगी।
निम्नलिखित सूत्र से भी घटकों की संख्या की गणना की जा सकती है-
(1) जबकि घटकों का आयनन न हो-
C = C-m
C = घटकों की संख्या
C’ = कुल अवियोजित अवयवों की संख्या
m= रासायनिक समीकरणों की वह संख्या है जो कुल अवियोजित अवयवों को परस्पर संबंधित करती है।
उदाहरण-निम्नलिखित तंत्रों में घटकों की संख्या की गणना कीजिए
(2) आयनिक पदार्थों के लिए घटकों की संख्या निम्नलिखित सूत्र द्वारा ज्ञात कर सकते हैं।
C = C”− (n+ 1)
C = घटकों की संख्या
C” = कुल अवयवों की संख्या आयनों सहित
n = कुल साम्यवस्थाओं की संख्या
यह निम्न उदाहरणों से स्पष्ट हो जाएगी।
उदाहरण- निम्नलिखित तंत्रों में घटकों की संख्या की गणना करो
(i)_KC1-NaCl-H2O (1) तंत्र
(i)_KC1-NaBr-H2O(1) तंत्र
(iii) NaCl का जलीय विलयन
(iv) एसिटिक अम्ल का जलीय विलयन
(v) सल्फ्यूरिक अम्ल का जलीय विलयन
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